उत्तराखंड के पूर्व CM के OSD के घर से ईडी को 32 लाख कैश, सोना और लग्जरी घड़ियां मिलीं

उत्तराखंड में ईडी ने पूर्व CM हरीश रावत के OSD चंदन सिंह जीना के घर से 32 लाख नकद, सोना और Rolex सहित 12 लग्जरी घड़ियां बरामद कीं
ED ने देहरादून में UKSSSC VPDO 2016 घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चंदन सिंह जीना के आवास पर तलाशी ली और नकदी, सोने के सिक्के, चेन और महंगी घड़ियां बरामद कीं।

2016 घोटाला का भर्ती घोटालाः चंदन सिंह जीना के घर से 13 गोल्ड कॉइन, 7 गोल्ड चेन और Rolex समेत 12 लग्जरी घड़ियां बरामद; बैंक खातों में 52.16 लाख रुपये की रकम फ्रीज, जब्त और फ्रीज संपत्तियों की कीमत करीब 1.28 करोड़ रुपये

एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली/ देहरादून

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) परीक्षा-2016 में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के देहरादून सब-जोनल कार्यालय ने 10 सितंबर 2026 को देहरादून में कई ठिकानों पर पीएमएलए, 2002 के तहत सर्च ऑपरेशन चलाया।

कार्रवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश सिंह रावत के तत्कालीन OSD और वर्तमान में उनके पर्सनल असिस्टेंट के रूप में कार्यरत चंदन सिंह जीना के आवास से 32 लाख रुपये की बेहिसाबी भारतीय मुद्रा, करीब 200.5 ग्राम सोना और Rolex समेत 12 लग्जरी कलाई घड़ियां बरामद की गईं।

ईडी के मुताबिक, जीना के आवास से बरामद और फ्रीज की गई संपत्तियों का कुल मूल्य फिलहाल करीब 1.28 करोड़ रुपये है। 12 लग्जरी घड़ियों में से शेष की कीमत का आकलन अभी किया जा रहा है, इसलिए यह राशि और बढ़ सकती है।

13 गोल्ड कॉइन, 7 गोल्ड चेन और महंगी घड़ियां

ईडी की तलाशी में चंदन सिंह जीना के घर से करीब 200.5 ग्राम वजन के 13 सोने के सिक्के और 7 सोने की चेन मिलीं। इसके अलावा 12 लग्जरी कलाई घड़ियां बरामद हुईं। इनमें Rolex, Rado, Piaget, Movado, Tissot और Casio Edifice जैसे ब्रांड की घड़ियां शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि जीना ने बड़ी मात्रा में नकद खर्च भी किया, लेकिन इन खर्चों के स्रोत का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला। ईडी के मुताबिक, बरामद संपत्ति और नकद खर्च को उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से पुष्ट नहीं किया जा सका है।

परिवार के बैंक खातों में 52.16 लाख रुपये फ्रीज

तलाशी के दौरान ईडी ने पीएमएलए की धारा 17(1A) के तहत चंदन सिंह जीना और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों को भी फ्रीज किया। इन खातों में कुल मिलाकर 52,16,312 रुपये का क्रेडिट बैलेंस था। जीना का मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा।

वर्तमान में हरीश रावत के पीए हैं चंदन सिंह

ईडी के मुताबिक, चंदन सिंह जीना वर्तमान में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश सिंह रावत के पर्सनल असिस्टेंट के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वह 2009 से 2017 तक मुख्यमंत्री रहे हरीश सिंह रावत के कार्यकाल में उनके ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) भी रह चुके हैं।

कहां-कहां हुई तलाशी?

ईडी ने देहरादून में तलाशी के दौरान यूकेएसएसएससी के तत्कालीन चेयरमैन, तत्कालीन सेक्रेटरी, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक, ओएमआर प्रोसेसिंग के लिए नियुक्त निजी कंप्यूटर एजेंसी के मालिक और कथित साजिश से जुड़े बिचौलियों के आवासों को भी कवर किया। इन तलाशी अभियानों के दौरान जांच एजेंसी ने कई लोगों के मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए कब्जे में लिए। कई पूर्व यूकेएसएसएससी अधिकारियों और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों से भी बेहिसाबी नकदी बरामद हुई। कुछ मामलों में नकदी की मात्रा छोटी थी, जबकि कुछ जगहों से लाखों रुपये मिले। कुछ परिसरों से सोने के आभूषण भी बरामद किए गए।

सुरक्षित सरकारी कस्टडी से घर तक पहुंची थीं OMR शीट!

ईडी की जांच में इस मामले का कथित तरीका भी सामने आया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं को यूकेएसएसएससी की सुरक्षित कस्टडी से निकालकर तत्कालीन सेक्रेटरी के निजी आवास पर पहुंचाया गया। वहां कम भरे हुए ओएमआर शीट के रोल नंबर नोट किए गए और ये नंबर निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों को दिए गए। ईडी के अनुसार, इसके बाद इन कर्मचारियों ने कथित तौर पर ओएमआर शीट में उत्तर के बुलबुले को धोखाधड़ी से भरने और बदलने का काम किया। इसके बाद उत्तर पुस्तिकाओं को दोबारा सील कर दिया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया बिचौलियों के माध्यम से अवैध रकम के लेन-देन के बदले अंजाम दी गई।

मामला FIR से शुरू हुआ, फिर तीन और FIR दर्ज

मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच देहरादून के पुलिस स्टेशन विजिलेंस में दर्ज FIR से शुरू हुई। इस मामले में आगे तीन और FIR भी दर्ज की गईं। ईडी अब इन मामलों से जुड़े कथित अपराध से अर्जित धन, उसके लेन-देन और लाभार्थियों की पहचान की जांच कर रही है। ईडी की कार्रवाई और बरामदगी जांच एजेंसी के आरोप हैं; इनसे किसी आरोपी की दोषसिद्धि स्वतः साबित नहीं होती। मामले में आगे की जांच जारी है।