विश्लेषण: सीईसी को हटाने की मांग को लेकर पंजाब कांग्रेस एकजुट?

हालांकि प्रदर्शन का घोषित उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध जताना था, लेकिन पंजाब कांग्रेस के विभिन्न गुटों से जुड़े वरिष्ठ नेताओं की बड़ी संख्या में भागीदारी ने राज्य इकाई में अपेक्षाकृत एकजुट तस्वीर पेश की। पंजाब कांग्रेस पिछले कुछ वर्षों से अपने वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेदों को लेकर चर्चा में रही है।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुक्रवार को कांग्रेस के प्रदर्शन ने पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चले आ रहे गुटीय मतभेदों के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एकजुट तस्वीर पेश की। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को छोड़कर पंजाब कांग्रेस के अधिकांश वरिष्ठ नेता चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुए।

चन्नी ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम का हवाला देते हुए प्रदर्शन से दूरी बनाई, जबकि पंजाब कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट राजस्थान में होने के कारण प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके।

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राणा केपी सिंह, गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा तथा विधायक तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, राणा गुरजीत सिंह, परगट सिंह और कुलदीप सिंह काला ढिल्लों सहित एआईसीसी के सह-कोषाध्यक्ष विजय इंदर सिंगला प्रदर्शन में शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने सेक्टर-17 से पंजाब चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया और एहतियातन हिरासत में ले लिया।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने “स्टॉप वोट चोरी” के नारे लगाए। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की। वड़िंग ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत के जरिए चुनावों में हेरफेर किए जाने के संबंध में लगातार नए सबूत सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “देश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ। जिसे चुनावी जीत के तौर पर पेश किया जा रहा है, वह वास्तव में वोट चोरी है।”

वड़िंग ने हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इन राज्यों में भाजपा की जीत के पीछे चुनावी प्रक्रिया में कथित हेरफेर था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में भी गड़बड़ी की गई थी। उन्होंने पंजाब में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) का भी विरोध किया। वड़िंग ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया उन वास्तविक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का माध्यम बन सकती है, जिनके बारे में भाजपा को आशंका है कि वे उसे वोट नहीं देंगे। उन्होंने मांग की कि पंजाब में SIR प्रक्रिया को रद्द किया जाए और आगामी विधानसभा चुनाव 2024 के लोकसभा चुनावों में इस्तेमाल की गई मतदाता सूचियों के आधार पर कराए जाएं।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और भाजपा के साथ उसकी कथित मिलीभगत को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। रंधावा ने आरोप लगाया कि भाजपा और भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर देश के सामने कई सवाल खड़े हो चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंचा है और इसे बहाल करने में काफी समय लगेगा। उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था में लोगों का विश्वास बहाल करने की दिशा में पहला कदम मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना होना चाहिए। रंधावा ने कहा कि वायरल बुखार से पीड़ित होने के बावजूद वह मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए प्रदर्शन में शामिल हुए हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को “वास्तविक वोट चोर” बताते हुए कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।

प्रदर्शन में वरिष्ठ कांग्रेस नेता धर्मवीर गांधी, राज कुमार वेरका और बलबीर सिंह सिद्धू सहित अन्य नेता भी शामिल हुए। विजय इंदर सिंगला ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल हटाने और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की। यह प्रदर्शन चुनावी प्रक्रिया के कांग्रेस द्वारा बताए जा रहे “विध्वंस और तोड़फोड़” के खिलाफ पार्टी के राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा था।