BCCI के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में आ सकता है बड़ा बदलाव: सिर्फ प्रदर्शन नहीं, मैचों की उपलब्धता भी होगी तय — चोटिल खिलाड़ियों के लिए टेंशन

BCCI के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में बड़ा बदलाव! अब प्रदर्शन के साथ खिलाड़ियों की उपलब्धता भी होगी अहम
BCCI सालाना सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के नियमों में बदलाव पर विचार कर रहा है। अब प्रदर्शन के साथ खिलाड़ी की उपलब्धता भी अहम मानदंड बन सकती है।

रिपोर्ट: प्रिया तिवारी

BCCI के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में बड़ा बदलाव! अब प्रदर्शन के साथ खिलाड़ियों की उपलब्धता भी होगी अहम
बोर्ड विचार कर रहा है न्यूनतम मैच संख्या या उपलब्धता प्रतिशत तय करने का; चोटिल और आराम पर रहे खिलाड़ियों के लिए अलग नियम बन सकते हैं

नई दिल्ली — 12 सितंबर, 2026 — भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI खिलाड़ियों के सालाना सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के नियमों में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। नए नियम का सीधा असर खिलाड़ियों पर पड़ सकता है। अब तक सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट देते समय खिलाड़ियों के प्रदर्शन और सीनियरिटी को ज्यादा महत्व दिया जाता था। लेकिन अब BCCI इसमें एक और अहम शर्त जोड़ने पर विचार कर रहा है—खिलाड़ी पूरे सीजन में खेलने के लिए कितने समय उपलब्ध रहा।

क्या होगी नई शर्त?

आसान भाषा में समझें तो BCCI यह देख सकता है कि कोई खिलाड़ी टीम के लिए कितने मैचों में उपलब्ध था।
बोर्ड इस आधार पर कोई न्यूनतम मैच संख्या या उपलब्धता का प्रतिशत तय कर सकता है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि खिलाड़ी को कितने मैचों में उपलब्ध रहना जरूरी होगा। यानी आगे चलकर सिर्फ अच्छा प्रदर्शन करना ही काफी नहीं हो सकता, बल्कि टीम के लिए नियमित रूप से उपलब्ध रहना भी जरूरी हो सकता है।

चोटिल खिलाड़ियों पर क्या होगा असर?

इस प्रस्ताव के बाद सबसे बड़ा सवाल उन खिलाड़ियों को लेकर है, जो चोट के कारण लंबे समय तक टीम से बाहर रहते हैं। कई बार खिलाड़ी टीम में चुने जाने के बावजूद चोट की वजह से मैच नहीं खेल पाते। ऐसे में BCCI को यह तय करना होगा कि चोट, मेडिकल ट्रीटमेंट और रिहैबिलिटेशन के दौरान खिलाड़ी की अनुपलब्धता को कैसे गिना जाएगा।
गंभीर चोट की वजह से मैदान से बाहर रहने वाले खिलाड़ियों के लिए अलग नियम बनाए जा सकते हैं।

आराम लेने वाले खिलाड़ियों का क्या होगा?

नए नियम में यह भी स्पष्ट करना होगा कि अगर किसी खिलाड़ी को टीम मैनेजमेंट या चयनकर्ताओं की योजना के तहत आराम दिया जाता है, तो उसे उपलब्ध माना जाएगा या नहीं।
इसके अलावा किसी खिलाड़ी को चयनकर्ताओं ने किसी सीरीज के लिए नहीं चुना है और कोई खिलाड़ी खुद चयन के लिए उपलब्ध नहीं है, इन दोनों स्थितियों में भी अंतर करना पड़ सकता है।

प्रदर्शन के साथ उपलब्धता भी बनेगी अहम?

अगर BCCI इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट तय करते समय प्रदर्शन के साथ खिलाड़ी की उपलब्धता भी अहम मानदंड बन सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि प्रदर्शन की अहमियत खत्म हो जाएगी। प्रदर्शन आगे भी सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक रहेगा। लेकिन बोर्ड यह भी देखना चाहता है कि लंबे क्रिकेट सीजन के दौरान कौन से खिलाड़ी टीम के लिए लगातार उपलब्ध रहते हैं।

फिलहाल BCCI ने नए नियम का अंतिम फॉर्मूला या उपलब्धता की कोई तय सीमा घोषित नहीं की है।