
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कमजोर येन और AI बूम के बीच एशियाई बाजारों के लिए नया जोखिम उभरने की आशंका
मोहिनी सेंगर। नई दिल्ली
ग्लोबल शेयर बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। HSBC के चीफ इकोनॉमिस्ट फ्रेडरिक न्यूमैन ने एक रिपोर्ट में मौजूदा आर्थिक हालात की तुलना 1997 के एशियाई वित्तीय संकट से की है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी, जापानी येन की कमजोरी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में तेजी जैसे कई संकेत दोनों दौर में समान दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इस बार संकट का स्वरूप अलग हो सकता है।
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बड़ा उछाल
1997 के संकट से पहले अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड अक्टूबर 1993 के करीब 5% से बढ़कर नवंबर 1994 तक लगभग 8% पहुंच गई थी। अप्रैल 1997 तक यह करीब 7% के आसपास बनी रही। मौजूदा दौर में भी फरवरी के बाद से यील्ड में लगभग 80 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हुई है और यह करीब 4.79% तक पहुंच गई है। अगस्त 2020 के 0.5% के निचले स्तर से तुलना करें तो बदलाव काफी बड़ा है।
येन की गिरावट ने बढ़ाई चिंता
करेंसी मार्केट में भी इतिहास की झलक दिखाई दे रही है। अप्रैल 1995 से अप्रैल 1997 के बीच जापानी येन डॉलर के मुकाबले करीब 55% कमजोर हुआ था। मौजूदा चक्र में जनवरी 2021 के करीब 103 येन प्रति डॉलर से गिरकर जुलाई में 163 के स्तर तक पहुंच गया, यानी लगभग 57% की गिरावट। येन को संभालने के लिए जापान और अमेरिका को बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा।
AI बूम बना नया कनेक्शन
दोनों दौर में टेक्नोलॉजी को लेकर जबरदस्त उत्साह भी देखने को मिला। 1990 के दशक में इंटरनेट क्रांति का शुरुआती दौर था, जबकि आज AI बाजार की तेजी का बड़ा आधार बना हुआ है। इसी AI बूम ने एशिया के कई बड़े निर्यातक देशों को अमेरिकी टेक कंपनियों की बढ़ती मांग से जोड़ दिया है।
इस बार बैंक नहीं, डिमांड बन सकती है खतरा
फ्रेडरिक न्यूमैन के मुताबिक मौजूदा स्थिति 1997 से महत्वपूर्ण रूप से अलग है। उस समय एशियाई अर्थव्यवस्थाएं विदेशी पूंजी पर निर्भर थीं और भारी करंट अकाउंट डेफिसिट से जूझ रही थीं। आज कई एशियाई देश नेट कैपिटल एक्सपोर्टर हैं और उनके पास बड़े विदेशी मुद्रा भंडार हैं। इसलिए इस बार बैंकिंग सिस्टम के फेल होने का खतरा अपेक्षाकृत कम है।
सेमीकंडक्टर सेक्टर पर टिकी एशिया की उम्मीद
दक्षिण कोरिया, जापान, ताइवान और सिंगापुर जैसे देशों की अर्थव्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्यात से काफी जुड़ी है। इनका बड़ा बाजार अमेरिकी टेक कंपनियां हैं, जो AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही हैं। अगर ऊंची बॉन्ड यील्ड और बढ़ती उधारी लागत के चलते अमेरिकी कंपनियां डेटा सेंटर खर्च घटाती हैं, तो एशिया के एक्सपोर्ट इंजन पर सीधा असर पड़ सकता है। यानी इस बार संकट की शुरुआत बैंक से नहीं, ऑर्डर बुक के सूखने से हो सकती है।



