
हत्या से छह दिन पहले शामली के सूर्या होटल पहुंच गये थे दो शूटर, 1200 सीसीटीवी और 200 मोबाइल नंबरों के डिजीटल फुटप्रिंट ने खोला शूटरों के नेटवर्क और प्लानिंग का राज; भोलू शाहपुरिया ने स्नैपचैट पर दी थी सुपारी
एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली
हरियाणा के सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के जिला शामली में 26 अगस्त की शाम को हुए सिंगर अंकित बालियान हत्याकांड की सनसनी को यूपी पुलिस ने दो शूटरों को मारकर किसी हद तक कम करने की कोशिश जरूर की है, लेकिन अभी भी पुलिस के सामने बाकी बचे दो शूटरों की तलाश और इस हत्याकांड की प्लानिंग का खुलासा करने की बड़ी चुनौती बाकी है।
दरअसल, इस हत्याकांड की कहानी सिर्फ जिम के बाहर हुई 18 राउंड की फायरिंग और उसके बाद भाग निकले चार शूटरों की नहीं है। पुलिस की अब तक की जांच में जो कड़ियां सामने आई हैं, वे बताती हैं कि अंकित को निशाना बनाने की तैयारी कई दिन पहले शुरू हो चुकी थी। शूटरों का शामली पहुंचना, होटल में ठहरना, इलाके की रेकी करना, अंकित की गतिविधियों पर नजर रखना और फिर हत्या के बाद अलग-अलग रास्तों से भागना- इन सभी कड़ियों को जोड़ने में पुलिस ने बड़े पैमाने पर डिजिटल निगरानी का सहारा लिया।
और इसी जांच में सबसे अहम सुराग बना अंकित की स्कॉर्पियो में लगाया गया बताया जा रहा जीपीएस उपकरण।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस उपकरण को किसने उपलब्ध कराया, इसे गाड़ी में किसने लगाया और इससे मिलने वाली लोकेशन किस व्यक्ति या नेटवर्क तक पहुंच रही थी? अगर जांच में यह कड़ी पुष्ट होती है तो यह समझना आसान हो जाएगा कि हमलावरों को अंकित की आवाजाही और उसकी मौजूदगी की इतनी सटीक जानकारी कैसे मिल रही थी? यानी जिस स्कॉर्पियो में बैठकर अंकित अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे थे, पुलिस को शक है कि वही गाड़ी अनजाने में उनकी निगरानी का जरिया भी बन गई थी।
हत्या से छह दिन पहले ही शामली पहुंच गये थे शूटर
पुलिस की जांच में सामने आया है कि हत्याकांड में शामिल बताए जा रहे सुमित और मोहित 26 अगस्त को पहली बार शामली नहीं पहुंचे थे। दोनों 20 अगस्त को ही शामली के सूर्या होटल में ठहरे थे। होटल में जमा पहचान संबंधी दस्तावेज और होटल के कैमरों में उनकी मौजूदगी दर्ज हुई। पुलिस ने होटल की सीसीटीवी फुटेज को अपनी जांच का हिस्सा बनाया है। होटल में भुगतान के लिए क्यूआर कोड के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। यह पता लगाया जा रहा है कि छह दिन पहले शामली पहुंचने के बाद सुमित और मोहित ने क्या किया? क्या वे सिर्फ छिपने के लिए होटल में ठहरे थे? या फिर उन्होंने इलाके की रेकी की? अंकित की दिनचर्या के बारे में जानकारी किसने दी? और क्या इसी दौरान हत्या की जगह और समय को अंतिम रूप दिया गया? इन सवालों के जवाब इस हत्याकांड की पूरी प्लानिंग को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
शूटरों के शामली आने का रास्ता भी कैमरों ने बता दिया
चारों हमलावरों ने वारदात के बाद यह कोशिश जरूर की कि वे पुलिस की पकड़ से दूर निकल जाएं, लेकिन शहर में लगे कैमरों की एक लंबी श्रृंखला उनके पीछे चल रही थी। पुलिस और एसटीएफ ने 1,200 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगालीं। इसके साथ ही 200 से ज्यादा संदिग्ध मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया। जांच में हमलावरों के शामली पहुंचने और वहां से निकलने के रास्ते को जोड़ने की कोशिश की गई। पुलिस के अनुसार, शूटर मेरठ-करनाल हाईवे की तरफ से शामली पहुंचे थे। शूटरों के शामली में प्रवेश का समय शाम करीब 4:54 बजे कैमरों में कैद हुआ था। हत्या के बाद उन्होंने अलग-अलग रास्ते अपनाये। एक कैमरे में कोई बाइक दिखाई देती है। दूसरे कैमरे में वही बाइक कुछ किलोमीटर आगे नजर आती है। फिर तीसरे कैमरे में वही लोग दिखाई देते हैं। इस तरह अलग-अलग जगहों की तस्वीरों को जोड़कर पुलिस ने शूटरों का आवागमन का रास्ता तैयार किया।
वारदात के करीब 20 मिनट बाद बंद हो गये मोबाइल
सीसीटीवी के साथ मोबाइल फोन भी जांच का बड़ा आधार बने। पुलिस ने 200 से ज्यादा संदिग्ध मोबाइल नंबरों की गतिविधियों को खंगाला। मोबाइल टावर की लोकेशन, एक-दूसरे से संपर्क और वारदात के पहले तथा बाद की गतिविधियों को मिलाया गया। जांच में यह बात भी सामने आई कि हत्या के करीब 20 मिनट बाद शूटरों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिये थे। फोन आखिरी बार कहां सक्रिय था, उससे पहले किन नंबरों के संपर्क में था और उसके बाद आसपास कौन-से दूसरे नंबर सक्रिय रहे? इन सभी बातों को जोड़कर पुलिस संदिग्धों के नेटवर्क तक पहुंची। यही वजह है कि इस केस में मोबाइल सर्विलांस केवल शूटरों की तलाश का माध्यम नहीं रहा, बल्कि पूरे नेटवर्क की गतिविधियों को समझने का जरिया बन गया।
शूटरों ने कपड़े बदले, बाइक पर नंबर प्लेट नहीं थी
जांच में यह भी सामने आया है कि हमलावरों ने उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने से पहले हरियाणा सीमा के पास अपने कपड़े बदले थे। वारदात के दौरान इस्तेमाल की गयी बाइक पर नंबर प्लेट नहीं थी और शूटरों ने हेलमेट या चेहरा ढकने का इस्तेमाल नहीं किया था। पहली नजर में यह लापरवाही लग सकती है, लेकिन जांचकर्ताओं के लिए इसका उलटा असर हुआ। चेहरे खुले होने के कारण कैमरों में उनकी गतिविधियों को जोड़ना संभव हुआ और बाइक के लगातार दिखाई देने से उनके रास्ते का पता लगाने में मदद मिली। शहर की सड़कों पर लगे कैमरों ने उनके रास्ते को एक डिजिटल नक्शे में बदल दिया।
सामने आया भोलू शाहपुरिया के स्नैपचैट का कनेक्शन
जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक सोनीपत निवासी राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया का नाम है। शामली पुलिस के मुताबिक, भोलू ने स्नैपचैट के जरिए शूटरों से संपर्क किया था। पुलिस का दावा है कि उसने ही उन्हें शामली भेजने की व्यवस्था की और शूटरों को पैसे तथा पिस्टल उपलब्ध कराये गये। शुरुआती पूछताछ में यह भी सामने आया कि शूटरों को शामली पहुंचने के लिए कहा गया था, जहां दो अन्य लोगों से उनकी मुलाकात होनी थी। यही वह बिंदु है जहां हत्याकांड की जांच शूटरों से आगे बढ़कर साजिश के नेटवर्क तक पहुंचती है। जिसमें अंकित को निशाना बनाने का फैसला हुआ, शूटरों से डिजिटल माध्यम से संपर्क किया गया, उन्हें हथियार और पैसा उपलब्ध कराया गया, शामली पहुंचने के लिए कहा गया और फिर स्थानीय स्तर पर हत्या की योजना को अंजाम दिया गया।
गोगी गैंग और पंपू गैंग तक पहुंची हत्याकांड की जांच
भोलू शाहपुरिया का नाम सामने आने के साथ ही पुलिस की जांच गोगी गैंग और उसके संपर्क में बताये जा रहे दूसरे गिरोहों तक पहुंच गयी है। जांच एजेंसियां गोगी गैंग के साथ राजेश उर्फ पंपू और इक्का गैंग से जुड़े लोगों की भूमिका भी देख रही हैं। पुलिस को ऐसे सोशल मीडिया वीडियो और पोस्ट मिले हैं, जिनमें इन गिरोहों से जुड़े होने का दावा करने वाले लोग हथियारों और आपराधिक गतिविधियों का प्रदर्शन करते दिखाई देते हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह नेटवर्क केवल सोशल मीडिया तक सीमित था या अंकित की हत्या में भी इसकी कोई भूमिका थी। इससे भी ज्यादा अहम बात यह है कि पुलिस की जांच में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या चार शूटर अकेले काम कर रहे थे?
अंकित की हत्या के पीछे गाने से जुड़ी रंजिश?
पुलिस की जांच में अंकित के एक गाने को भी संभावित वजह के रूप में देखा जा रहा है। अंकित ने गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या के बाद ‘भरी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान’ गाना बनाया था। पुलिस के अनुसार, गोगी गैंग से जुड़े लोगों को इस गाने से नाराजगी थी और उन्हें लगता था कि अंकित उनके विरोधियों के पक्ष में खड़े हैं। अंकित ने हालांकि अपने एक पुराने इंटरव्यू में इस मामले से किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया था। इसलिए फिलहाल इसे पुलिस की जांच में सामने आया संभावित रंजिश का कारण ही माना जाना चाहिए, अंतिम निष्कर्ष नहीं। लेकिन गैंगवार की दुनिया में कई बार वास्तविक संबंध से ज्यादा महत्वपूर्ण यह होता है कि सामने वाला गिरोह किसी व्यक्ति को किस नजर से देखता है। अंकित के मामले में भी पुलिस इसी धारणा की जांच कर रही है।


