अंतिम सक्रिय माओवादी और ₹1 करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से शीर्ष नेतृत्व को बड़ा झटका

एम. रियाज हाशमी


नई दिल्ली। झारखंड में सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के पॉलित ब्यूरो सदस्य और ₹1 करोड़ के इनामी नेता मिसिर बेसरा को चार अन्य माओवादियों के साथ गिरफ्तार किया गया है। लगभग दो दशक तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने रहे बेसरा की गिरफ्तारी को वाम उग्रवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की सबसे महत्वपूर्ण सफलताओं में से एक माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस कार्रवाई से माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व और उसके संचालन तंत्र पर बड़ा असर पड़ सकता है। झारखंड पुलिस के अनुसार, धनबाद जिले में केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से चलाए गए संयुक्त अभियान के दौरान यह कार्रवाई की गई। फिलहाल गिरफ्तार किए गए अन्य चार माओवादियों की पहचान और ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

गिरिडीह जिले का रहने वाला मिसिर बेसरा लंबे समय से सीपीआई (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा रहा है। पॉलित ब्यूरो सदस्य के रूप में वह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी भारत के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों के समन्वय से जुड़ा रहा। सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ झारखंड, ओडिशा और अन्य राज्यों में 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें सुरक्षा बलों पर हमले, हथियारों की आवाजाही, लेवी वसूली और नक्सली हिंसा से जुड़े कई गंभीर आरोप शामिल हैं।

मिसिर बेसरा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की सबसे वांछित सूची में शामिल था। वर्ष 2007 में उसकी गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन 2009 में वह पुलिस हिरासत से फरार हो गया। इसके बाद वह लगातार भूमिगत रहकर संगठन की गतिविधियों का संचालन करता रहा। इस दौरान माओवादी संगठन के कई शीर्ष नेता या तो मुठभेड़ों में मारे गए, गिरफ्तार हुए या फिर उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया। ऐसे में बेसरा को संगठन के सक्रिय शीर्ष नेतृत्व के सबसे महत्वपूर्ण चेहरों में गिना जाता रहा।

पूछताछ से खुल सकते हैं संगठन के कई राज: सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मिसिर बेसरा से पूछताछ के दौरान संगठन के सक्रिय कैडर, हथियारों की आपूर्ति व्यवस्था, वित्तीय स्रोत, लॉजिस्टिक नेटवर्क, विभिन्न राज्यों में सक्रिय मॉड्यूल और भविष्य की रणनीति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के आधार पर झारखंड सहित अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के खिलाफ आगे की कार्रवाई को और गति मिलेगी।

उसी दिन 16 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण: मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के साथ ही झारखंड में मंगलवार को 16 माओवादियों ने आत्मसमर्पण भी किया। इनमें छह ऐसे उग्रवादी शामिल हैं, जिन पर कुल ₹39 लाख का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में क्षेत्रीय समिति, जोनल समिति, सब-जोनल समिति और एरिया कमेटी स्तर के सदस्य शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने छह INSAS राइफल, दो AK-47 राइफल, 38 मैगजीन और 1,562 कारतूस सुरक्षा बलों को सौंपे हैं।

अभियान के लिए क्यों अहम है यह कार्रवाई? उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक झारखंड में 93 माओवादी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, 45 ने आत्मसमर्पण किया है और 22 उग्रवादी विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए हैं। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी और एक ही दिन में 16 माओवादियों के आत्मसमर्पण को राज्य में चल रहे व्यापक नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां अभी यह दावा नहीं कर रही हैं कि इससे नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा, लेकिन शीर्ष नेतृत्व पर लगातार हो रही कार्रवाई से संगठन की केंद्रीय कमान पर दबाव और बढ़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में मिसिर बेसरा से पूछताछ के आधार पर होने वाली कार्रवाई यह तय करेगी कि इस गिरफ्तारी का असर माओवादी संगठन के शेष नेटवर्क पर कितना व्यापक पड़ता है।

नक्सलमुक्त भारत अभियान: केंद्र सरकार ने तेज की है निर्णायक लड़ाई – केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ विकास और पुनर्वास की रणनीति को समानांतर रूप से आगे बढ़ाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश को 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य घोषित किया था। इसी रणनीति के तहत नक्सल प्रभावित राज्यों में केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस के संयुक्त अभियान तेज किए गए, नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए, सड़क और संचार नेटवर्क का विस्तार किया गया तथा आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति को भी गति दी गई। हाल के वर्षों में कई शीर्ष माओवादी नेता मारे गए, गिरफ्तार हुए या उन्होंने आत्मसमर्पण किया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व के कमजोर होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर सक्रिय छोटे माओवादी दस्तों के खिलाफ अभियान अभी जारी रहेगा।