सुप्रीम कोर्ट से पवन खेड़ा को झटका! जमानत बढ़ाने से इनकार, कहा- अब असम की अदालत जाएं

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर राहत नहीं मिली है। ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की उनकी मांग को कोर्ट ने खारिज कर दिया और साफ कहा कि अब उन्हें असम की अदालत का रुख करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट से पवन खेड़ा को झटका!
सुप्रीम कोर्ट से पवन खेड़ा को झटका!

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की मांग को ठुकरा दिया और उन्हें सलाह दी कि अब वे सीधे असम की सक्षम अदालत में जाकर राहत मांगें।

यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा से जुड़े पासपोर्ट विवाद का है, जिसमें पवन खेड़ा पर आरोपों के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी। इसी केस में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कुछ और समय के लिए सुरक्षा मांगी थी।

सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जोरदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि खेड़ा सिर्फ अग्रिम जमानत मांग रहे हैं और उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है जैसे कोई बड़ा अपराधी हों। यहां तक कि उन्होंने कोर्ट में सवाल उठाया कि “क्या वे कोई आतंकी हैं, जो उन्हें राहत नहीं मिल सकती?”

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की राहत के लिए अब सही मंच असम की अदालत है और वहीं पर जाकर याचिका दायर की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि असम की अदालत इस मामले में स्वतंत्र रूप से फैसला लेगी।

इतना ही नहीं, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पवन खेड़ा को कुछ दस्तावेजों को लेकर फटकार भी लगाई। इससे पहले भी उन्हें राहत नहीं मिली थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मामले में उनके पक्ष में दिए गए आदेश पर रोक लगा दी थी।

दरअसल, पूरा विवाद 4 अप्रैल को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से शुरू हुआ, जिसमें पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास एक से ज्यादा देशों के पासपोर्ट हैं। इसके बाद 5 अप्रैल को गुवाहाटी में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और 7 अप्रैल को दिल्ली स्थित उनके घर पर तलाशी भी हुई।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि अब पवन खेड़ा को कानूनी लड़ाई असम की अदालत में ही लड़नी होगी। इस घटनाक्रम के बाद सियासी हलकों में भी हलचल तेज हो गई है और इस मुद्दे पर राजनीति और तेज होने के आसार हैं।