नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार के एक नए फैसले ने राज्य की सियासत के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी हलचल मचा दी है। सरकार ने ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा जानना जरूरी करने की बात कही है। यानी अब ड्राइवरों को मराठी पढ़ना, लिखना और बोलना आना चाहिए, नहीं तो उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
सरकार का कहना है कि यह कदम मराठी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। लेकिन इस फैसले के बाद खासतौर पर प्रवासी मजदूरों के बीच चिंता बढ़ गई है। मुंबई में बड़ी संख्या में ऐसे ड्राइवर हैं जो उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से आकर यहां काम कर रहे हैं। ये लोग सालों से मेहनत करके अपना और अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं।
जानकारों के मुताबिक, मुंबई में लाखों ड्राइवर इस फैसले से प्रभावित हो सकते हैं। इनमें से कई लोग मराठी नहीं जानते, ऐसे में उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है। यही वजह है कि इस फैसले को लेकर विरोध भी तेज हो रहा है।
कुछ लोगों का मानना है कि भाषा सीखना गलत नहीं है, लेकिन इसे जबरन लागू करना और लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्ती करना सही नहीं है। उनका कहना है कि इससे गरीब और कमजोर वर्ग पर सीधा असर पड़ेगा, जबकि बड़े स्तर पर इसका फायदा कम ही दिखेगा।
राजनीतिक रूप से भी इस फैसले को अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। कुछ लोग इसे क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करने का प्रयास बता रहे हैं, तो वहीं कई लोग इसे राजनीतिक रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।
फिलहाल, इस मुद्दे पर बहस तेज होती जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस फैसले में कोई बदलाव करती है या इसे सख्ती से लागू किया जाता है। लेकिन इतना जरूर है कि इस फैसले ने भाषा और रोजी-रोटी के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।




