विरुधुनगर Firecracker factory blast : अब तक 23 श्रमिकों की मौत

तमिलनाडु: पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका, गंभीर रूप से झुलसे श्रमिकों का मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल, प्रशासन ने दिए जिले की अन्य इकाइयों के लाइसेंस की जांच और औचक निरीक्षण के आदेश…

Firecracker Mishap In Tamil Nadu Kills 23 People. | Photo Credit: (PTI Photo)
Firecracker Mishap In Tamil Nadu Kills 23 People. | Photo Credit: (PTI Photo)

तहलका डेस्क।  

तमिलनाडु के Virudhunagar जिले में स्थित कट्टनारपत्ती की पटाखा इकाई में हुआ भीषण विस्फोट अब एक बड़ी मानवीय त्रासदी का रूप ले चुका है। जिला प्रशासन के अनुसार, अब तक कुल 23 श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जिनमें 16 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं (अन्य की पहचान प्रक्रिया जारी है) और 4 की हालत नाजुक बताई जा रही है। हालांकि शुरुआती खबरों में हताहतों का अनुमान अधिक लगाया गया था, लेकिन मलबे से शवों की बरामदगी और अस्पतालों में इलाज के दौरान हुई मौतों के बाद प्रशासन लगातार हताहतों की संख्या अपडेट कर रही है। इस घटना में दर्जनों श्रमिक अभी भी गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं, जिनका इलाज मदुरै और विरुधुनगर के विशेष बर्न वार्ड्स में चल रहा है।

जांच में यह बात सामने आई है कि विस्फोट घर्षण (friction) के कारण हुआ, जब रसायनों को मिलाने का काम किया जा रहा था। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि कारखाने के सात कमरे पूरी तरह जमींदोज हो गए। पुलिस ने इस मामले में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और लापरवाही बरतने के आरोप में कारखाने के मालिक सहित अन्य जिम्मेदार लोगों पर मामला दर्ज कर लिया है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने मृतकों के परिजनों के लिए 3-3 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों के लिए 1 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है।

यह दुर्घटना विरुधुनगर के पटाखा बेल्ट में सुरक्षा ऑडिट की विफलता को फिर से उजागर करती है। हर साल त्योहारों से पहले उत्पादन का दबाव बढ़ने पर सुरक्षा मानकों को ताक पर रख दिया जाता है, जिसकी कीमत गरीब मजदूरों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। प्रशासन ने अब जिले की अन्य इकाइयों के लाइसेंस की जांच और औचक निरीक्षण के आदेश दिए हैं, ताकि भविष्य में कट्टनारपत्ती जैसी पुनरावृत्ति को रोका जा सके। फिलहाल, बचाव कार्य पूरा हो चुका है और फोकस घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर है, क्योंकि कई श्रमिकों की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है।