बोल उठीं दीवारें: ‘Rang De Gulabi’ अभियान से निखरा Jaipur का कोना-कोना

'रंग दे गुलाबी' अभियान से निखरा शहर का कोना-कोना : स्वच्छ सर्वेक्षण के लक्ष्य और जन-उत्साह के संगम से जयपुर के 13 जोनों में उकेरी गई 600 से अधिक कलाकृतियां;… स्कूलों और कॉलेजों के स्वयंसेवकों ने तपती धूप में भी अपनी रचनात्मकता से सार्वजनिक स्थलों को गैलरी में तब्दील कर दिया…

जयपुर का गुलाबी उत्सव : जयपुर नगर निगम की पहल से बदली शहर की सूरत…Pic Credit : Social Media
जयपुर का गुलाबी उत्सव : जयपुर नगर निगम की पहल से बदली शहर की सूरत…Pic Credit : Social Media

तहलका डेस्क।

नई दिल्ली।जयपुर की ऐतिहासिक पहचान ‘गुलाबी नगरी’ शनिवार को एक नए अवतार में नजर आई, जब नगर निगम के “रंग दे गुलाबी” अभियान के तहत शहर की 500 से अधिक दीवारों को जीवंत कलाकृतियों से सराबोर कर दिया गया। यह महज एक सौंदर्यीकरण कवायद नहीं थी, बल्कि आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण से पहले जयपुर की जन-भागीदारी का एक विराट प्रदर्शन था। शहर के सभी 13 जोनों में एक साथ संचालित इस मेगा अभियान ने साबित कर दिया कि जब प्रशासन और जनता एक साझा उद्देश्य के लिए मिलते हैं, तो बदलाव की इबारत दीवारों पर भी लिखी जा सकती है।

इस अभियान की सबसे बड़ी खूबी इसका सामाजिक सरोकार रही। दीवारों पर केवल रंग नहीं पोते गए, बल्कि उन पर स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और राष्ट्रीय एकता जैसे 600 से अधिक संदेश उकेरे गए, जो शहर की धड़कनों को वैचारिक गहराई प्रदान करते हैं। यह अभियान तब एक समावेशी जन-आंदोलन में तब्दील हो गया जब किन्नर समुदाय के सदस्यों ने न केवल खुद कूची थामी, बल्कि जिला कलेक्टर और नगर आयुक्त जैसे शीर्ष अधिकारियों को भी इस रंगोत्सव में शामिल कर समाज के अंतिम छोर तक एकता का संदेश दिया। अधिकारियों को पारंपरिक रीति-रिवाजों से आशीर्वाद देते समुदाय के सदस्यों ने इस प्रशासनिक पहल को एक भावनात्मक मानवीय स्पर्श प्रदान किया।

विद्यार्थियों और युवाओं की ऊर्जा ने इस अभियान को वह ‘धार’ दी जिसकी अपेक्षा नगर आयुक्त ओम कसेरा और जिला प्रशासन कर रहा था। स्कूलों और कॉलेजों के स्वयंसेवकों ने तपती धूप में भी अपनी रचनात्मकता से सार्वजनिक स्थलों को गैलरी में तब्दील कर दिया। यह पहल केवल पेंट और ब्रश तक सीमित नहीं है; यह एक संदेश है कि जयपुर अब अपनी विरासत को संवारने के लिए स्वयं जागरूक है। अधिकारियों के जमीनी दौरों और भागीदारी ने यह सुनिश्चित किया कि “रंग दे गुलाबी” केवल एक सरकारी योजना बनकर न रह जाए, बल्कि गुलाबी नगरी की आत्मा को फिर से जीवंत करने का एक सामूहिक संकल्प बन जाए।