272 किमी, 5 घंटे: Vande Bharat ने घटाई जम्मू-श्रीनगर के बीच की दूरी

कश्मीर से कन्याकुमारी तक विकास की रफ्तार: सप्ताह में छह दिन, 20 कोच और विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ शुरू हुआ व्यावसायिक संचालन; 12 घंटे का सफर अब महज 5 घंटे में सिमटा…

बदलते भारत की नई तस्वीर: हिमालय की गोद में सेमी-हाई स्पीड रेल का ऐतिहासिक आगाज़…
बदलते भारत की नई तस्वीर: हिमालय की गोद में सेमी-हाई स्पीड रेल का ऐतिहासिक आगाज़…

तहलका डेस्क।

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के परिवहन इतिहास में शनिवार का दिन एक नए युग के सूत्रपात के रूप में दर्ज हो गया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा औपचारिक उद्घाटन के ठीक दो दिन बाद, जम्मू तवी और श्रीनगर के बीच देश की सबसे प्रतिष्ठित ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ ने अपनी पहली व्यावसायिक उड़ान भरी। फूलों से लदी यह ट्रेन जब जम्मू रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर सात से रवाना हुई, तो यह केवल यात्रियों को नहीं, बल्कि घाटी और मैदानी इलाकों के बीच बढ़ती आर्थिक और भावनात्मक नजदीकी को भी साथ लेकर चली। 20 डिब्बों वाली यह सेमी-हाई स्पीड ट्रेन न केवल इंजीनियरिंग का करिश्मा है, बल्कि कश्मीर की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को मात देने वाला एक सशक्त समाधान भी है।

इस सेवा का सबसे क्रांतिकारी पहलू समय की बचत है। जहां जम्मू से श्रीनगर की 272 किलोमीटर की दूरी तय करने में यात्रियों को सड़क मार्ग से 12 से 24 घंटे तक का अनिश्चित समय लगता था, वहीं अब वंदे भारत इसे महज 4 घंटे 50 मिनट में पूरा कर रही है। मंगलवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन चलने वाली यह ट्रेन सुबह जम्मू से निकलकर दोपहर तक श्रीनगर पहुंचती है और शाम को वापस लौट आती है। यह ‘डे-ट्रिप’ मॉडल न केवल स्थानीय व्यापारियों और कर्मचारियों के लिए वरदान है, बल्कि उन पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए भी एक सुरक्षित विकल्प है जो अब तक भूस्खलन और खराब मौसम के कारण सड़क मार्ग पर फंसने को मजबूर थे।

विश्लेषणात्मक दृष्टि से देखें तो यह रेल सेवा जम्मू-कश्मीर में ‘कनेक्टिविटी’ के साथ-साथ विश्वास बहाली का भी माध्यम है। पहली ही यात्रा में करीब 2000 यात्रियों की मौजूदगी ने इसके भविष्य की सफलता पर मुहर लगा दी है। अमृतसर से आए पर्यटकों के लिए यह “बदलते भारत” की झलक है, तो स्थानीय युवाओं के लिए यह रोजगार और सुलभ आवाजाही का नया द्वार। रियासी और बनिहाल जैसे स्टेशनों पर इसके ठहराव से उन दूरदराज के इलाकों को मुख्यधारा के विकास से जोड़ा गया है जो अब तक परिवहन की दृष्टि से उपेक्षित थे। यह ट्रेन केवल पटरियों पर नहीं दौड़ रही, बल्कि कश्मीर की नई आकांक्षाओं को नई गति दे रही है।