80 साल बाद बदलने वाला है UN का इतिहास? पहली महिला महासचिव की रेस में 8 दावेदार, बिर्केट सबसे आगे

संयुक्त राष्ट्र महासचिव चुनाव 2026, पहली महिला महासचिव की रेस में 8 उम्मीदवार
संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव के चुनाव में 8 उम्मीदवारों में से 5 महिलाएं हैं। यह पहली बार हो सकता है कि UN की पहली महिला महासचिव चुनी जाएं।

2026 के अंत में खत्म होगा गुटेरेस का कार्यकाल, अब शुरू हुई अगली महासचिव की तलाश

मोहिनी सेंगर। नई दिल्ली

संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव को लेकर रेस तेज हो गई है। मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा कार्यकाल दिसंबर 2026 में खत्म होने वाला है। खास बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र के करीब 80 साल के इतिहास में अब तक कोई महिला महासचिव नहीं बनी है। इस बार 8 उम्मीदवारों में से 5 महिलाएं हैं, इसलिए पहली महिला महासचिव चुने जाने की संभावना ने पूरी प्रक्रिया को खास बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक सूची में फिलहाल रेबेका ग्रिन्सपैन, मिशेल बाचेलेट, मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा, कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट, वर्जीनिया गाम्बा समेत आठ नाम शामिल हैं।

आखिर UN चीफ चुना कैसे जाता है?

UN महासचिव को दुनिया के लोग सीधे वोट देकर नहीं चुनते। पहले सुरक्षा परिषद उम्मीदवारों पर विचार करती है। 15 सदस्यीय परिषद में अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं और इनके पास वीटो पावर है।

अनौपचारिक वोटिंग का मकसद यह देखना होता है कि किस उम्मीदवार को कितना समर्थन मिल रहा है। अंतिम तौर पर सुरक्षा परिषद किसी एक नाम की सिफारिश महासभा से करती है। इसके बाद 193 सदस्यीय महासभा उस उम्मीदवार की नियुक्ति करती है।

सिर्फ सबसे ज्यादा वोट मिलना काफी नहीं

इस प्रक्रिया में किसी उम्मीदवार के लिए केवल ज्यादा वोट हासिल करना पर्याप्त नहीं है। सुरक्षा परिषद की सिफारिश के लिए कम से कम 9 सदस्यों का समर्थन चाहिए और पांच स्थायी सदस्यों में से किसी का वीटो नहीं होना चाहिए।

यही वजह है कि शुरुआती अनौपचारिक वोटिंग में बढ़त हासिल करना अंतिम जीत की गारंटी नहीं होती। उम्मीदवारों को अलग-अलग देशों का समर्थन हासिल करने के साथ स्थायी सदस्यों की आपत्ति से भी बचना होता है।

महिला महासचिव का रास्ता क्यों अहम है?

संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के लिए महिला उम्मीदवारों की इतनी मजबूत मौजूदगी इस बार चर्चा का बड़ा कारण है। 1997 में महासभा के एक कार्यसमूह ने महासचिव चुनते समय क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और लैंगिक समानता पर उचित ध्यान देने की बात कही थी। हालांकि यह कोई बाध्यकारी नियम नहीं है कि अगला महासचिव महिला या किसी खास क्षेत्र से ही होना चाहिए।

शशि थरूर भी रह चुके हैं उम्मीदवार

भारत से शशि थरूर भी 2006 में महासचिव पद की रेस में शामिल हुए थे। संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, उस चुनाव में थरूर समेत सात उम्मीदवार मैदान में थे। आखिरकार दक्षिण कोरिया के बान की-मून चुने गए और उन्होंने जनवरी 2007 में पद संभाला।

अब नजर अगले दौर पर

फिलहाल बिर्केट और ग्रिन्सपैन शुरुआती वोटिंग में सबसे मजबूत दावेदारों में दिखाई दे रही हैं। लेकिन रेस अभी खत्म नहीं हुई है। आगे होने वाली बातचीत और वोटिंग यह तय करेगी कि किस उम्मीदवार के नाम पर सुरक्षा परिषद के स्थायी और अस्थायी सदस्यों के बीच पर्याप्त सहमति बनती है। अंतिम फैसला सुरक्षा परिषद की सिफारिश और उसके बाद महासभा की नियुक्ति से