खड़गे के कार्यक्रम स्थल के ‘शुद्धिकरण’ पर राहुल गांधी का हमला, बोले- यह छुआछूत; FIR की मांग

नई दिल्ली: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद रामलीला मैदान में कथित ‘शुद्धिकरण’ किए जाने को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। अब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर BJP और RSS पर निशाना साधते हुए FIR दर्ज करने की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े लोगों ने वहां हवन कर कार्यक्रम स्थल का ‘शुद्धिकरण’ किए जाने की जानकारी सामने आई।

संगठन से जुड़े लोगों ने दावा किया कि रामलीला मैदान धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाला स्थान है और वहां राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने पर उन्हें आपत्ति थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खड़गे की सभा के दौरान कुछ ऐसे नारे और टिप्पणियां की गईं, जिनसे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।

कांग्रेस ने लगाया जातिगत भेदभाव का आरोप

कांग्रेस ने ‘शुद्धिकरण’ की इस कार्रवाई को दलित समुदाय के प्रति अपमान और भेदभाव से जोड़ा। पार्टी नेताओं का आरोप है कि खड़गे दलित समुदाय से आते हैं और उनकी सभा के बाद आयोजन स्थल का शुद्धिकरण इसी पृष्ठभूमि में किया गया।

खड़गे ने भी राज्यसभा में यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि वह खुद को इस कार्रवाई से अपमानित महसूस करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया जैसे उन्हें ‘अछूत’ माना जाता हो।

राहुल गांधी ने मांगी FIR

राहुल गांधी ने शनिवार को इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कथित शुद्धिकरण छुआछूत और जातिगत भेदभाव का उदाहरण है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में तत्काल FIR दर्ज कराने की मांग की।

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस इस तरह के कथित भेदभाव के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी स्तर पर आवाज उठाएगी।

BJP ने आरोपों से किया इनकार

दूसरी ओर, BJP ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। BJP नेताओं का कहना है कि शुद्धिकरण कार्यक्रम पार्टी की ओर से आयोजित नहीं किया गया था।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी BJP से इस घटना को जोड़ने से इनकार किया और कहा कि कांग्रेस इसे बेवजह जातिगत मुद्दा बना रही है। उनके अनुसार, कथित शुद्धिकरण स्थानीय संगठनों की ओर से धार्मिक भावनाओं और स्थल की मर्यादा से जुड़े विरोध के तौर पर किया गया था।

BJP प्रदेश अध्यक्ष ने फिर उठाया मुद्दा

विवाद उस समय फिर चर्चा में आया जब उत्तराखंड BJP अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि यदि कार्यक्रम के बाद धार्मिक स्थल की ‘शुद्धता’ बहाल करने के लिए कोई प्रक्रिया की गई तो इसमें गलत क्या है।

उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह घटना को दलित मुद्दे से जोड़कर सामाजिक तनाव पैदा करने की कोशिश कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से लगाए गए नारों और टिप्पणियों पर भी चर्चा होनी चाहिए।

BJP-RSS से संबंध को लेकर अलग-अलग दावे

इस मामले का एक अहम विवाद यह भी है कि ‘शुद्धिकरण’ कराने वाले संगठन का BJP या RSS से प्रत्यक्ष संबंध है या नहीं

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम BJP के इशारे पर हुआ, जबकि BJP ने इस आरोप को नकारते हुए संगठन से किसी आधिकारिक संबंध से इनकार किया है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी इस संबंध को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।

इसलिए यह तथ्य अभी स्थापित नहीं है कि कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम BJP या RSS द्वारा आधिकारिक रूप से आयोजित किया गया था।

राजनीतिक विवाद बढ़ा

घटना के बाद कांग्रेस ने कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन किए और BJP से माफी की मांग की। दूसरी ओर BJP नेताओं ने कांग्रेस पर ‘धार्मिक स्थल की पवित्रता’ के मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।

मामले ने अब एक व्यापक राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है, जिसमें जातिगत भेदभाव, धार्मिक स्थलों के इस्तेमाल और राजनीतिक सभाओं की अनुमति जैसे मुद्दे शामिल हो गए हैं।

फिलहाल राहुल गांधी की FIR की मांग के बीच यह स्पष्ट नहीं है कि कथित शुद्धिकरण को लेकर कोई नई FIR दर्ज की गई है या नहीं। घटना से संबंधित आरोपों और दोनों पक्षों के दावों पर राजनीतिक बयानबाजी जारी है।