नरेंद्र मोदी के मुसलमान दोस्तों को क्या जानते हैं आप -जासूद खान पठान, अब्बास मियांभाई और असगर अली बोहरा; वडनगर में साझा त्योहार, ईद पर हीराबेन बनाती थीं सेवईं

नरेंद्र मोदी के मुसलमान दोस्तों को क्या जानते हैं आप — जासूद खान पठान, अब्बास मियांभाई और असगर अली बोहरा; वडनगर में साझा त्योहार, ईद पर हीराबेन बनाती थीं सेवईं
वडनगर में पीएम मोदी के बचपन के मुस्लिम दोस्त जासूद खान पठान (अब नहीं रहे), अब्बास मियांभाई (ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं) और असगर अली बोहरा की दोस्ती साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल है। हीराबेन ईद पर अब्बास के लिए सेवईं बनाती थीं।

नरेंद्र मोदी के मुसलमान दोस्तों को क्या जानते हैं आप जासूद खान पठान, अब्बास मियांभाई और असगर अली बोहरा; वडनगर में साझा त्योहार, ईद पर हीराबेन बनाती थीं सेवईं
वडनगर के सिम्बरवाड़ा और काला वासुदेव मोहल्ले में साझा रहन-सहन; केसिनपा के अब्बास मियांभाई एक साल मोदी घर में रहे, हीराबेन ने सगे बेटे की तरह पाला; पीएम ने 100वें जन्मदिन ब्लॉग में किया था जिक्र

by Arvind Chaturvedi

वडनगर । 16 सितंबर, 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई प्रमुख मुस्लिम और खाड़ी देशों (Islamic Nations) के राष्ट्राध्यक्षों के साथ अत्यंत मजबूत, कूटनीतिक और व्यक्तिगत संबंध हैं। नरेंद्र मोदी के बचपन में कई मुसलमान दोस्त थे। इसमें प्रमुख रूप से जासूद खान पठान थे जिन्होंने नरेंद्र मोदी के साथ पढ़ाई की थी। वडनगर में जासूद खान से उनके इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने की दुकान पर भेंट हुई। वडनगर में 2014 में मेरी यात्रा के दौरान उन्होनें मुलाकात पर जोरदार स्वागत किया। उन्होंने मुझे उस समय बताया कि वो एक सेलिब्रिटी बन गए हैं। उन्होंने ये बताया कि किस तरह से कई पत्रकार आकर उनसे नरेन्द्र मोदी के बारे में कई बार इंटरव्यू ले जा चुके हैं। यह सब कुछ आज भी मेरे जेहन में ताजा है। हर पत्रकार कहता है कि हमें वो बताना चाहिए जो पहले किसी को नहीं बताया गया हो। जासूद खान पठान मुस्कुराएं अपनी छोटी सी दुकान में तीन टांग वाली कुर्सी को सम्हालते हुए बोला आप को पता नही है कि हमने कक्षा एक से कक्षा ग्यारह तक एक साथ नरेन्द्र मोदी के साथ पढ़ाई की है। नरेन्द्र मोदी के दोस्त का ये भी कहना था कि हमारा मोहल्ला जिसका नाम सिम्बरवाड़ा है, वह नरेन्द्र मोदी के मुहल्ले काला वासुदेव से लगा हुआ है। जासूद खान पठान ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के परिवार और हमारे परिवार के लोगों का एक दूसरे के यहाँ आना-जाना लगा रहता था। हाल ही में मेरा वडनगर जाना हुआ तो पता चला कि जासूद खान पठान अब इस दुनिया में नहीं है। नरेंद्र मोदी के बचपन के दोस्तों के तौर पर हमेशा उन्हें याद किया जाता रहेगा।

आठ सदस्यीय परिवार की जिम्मेदारी, फिर भी दूसरों की मदद

नरेन्द्र मोदी के परिवार में पिता दामोदर दास हीरा बॉ को मिलाकर परिवार में कुल आठ सदस्य थे। पिता और माँ इनकी ज़रूरतों को पूरा करने में लगे रहते थे। इतने बड़े परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उनको कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में कोई एक सदस्य भी बढ़ जाए, तो आप खुद समझ सकते हैं कि जिम्मेदारी कितनी बढ़ जाती होगी। वडनगरके पास का एक गाँव है केसिनपा। वडनगर से इस गाँव की दूरी आठ कि०मी० है। इस गाँव में मोमिन मुस्लिमों का परिवार रहता है। यहाँ पर मियाँ भाई का परिवार भी अपने बच्चों के साथ रहता था। अब्बास मियाँ भाई के बेटे हैं। पंकज और अब्बास ने एक साथ पढ़ाई की है। केसिनपा में केवल कक्षा 7 तक की पढ़ाई का साधन था। इसके बाद अगर आगे की पढ़ाई करनी है तो वडनगर आना पड़ेगा। इस कारण कई ऐसे लोग थे जिनकी पढ़ाई बीच में ही छूट जाती थी।

दामोदर दास ने कहा-अब्बास को मेरे घर भेज दो

वडनगर के पास का गांव केसिनपा से मियाँ भाई जो मोदी के मित्र थे, वडनगर में मुलाकात की। उन्होंने दामोदर दास मोदी को कहा कि मेरा छोटा बेटा अब्बास पढ़ने में तेज है। हमारे गाँव में माध्यमिक स्कूल नहीं है। मुझे इस बात की चिन्ता है कि कहीं मेरे बेटे की पढ़ाई आधे में ही न छूट जाये। इतना कहकर मियाँ भाई दोस्त के सामने उदास हो गए। दामोदर दास मोदी ने कहा कि चिंता मत करो। अब्बास को मेरे घर पर ही भेज दो। अब्बास मेरे घर पर ही रहकर पढ़ाई करेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मां हीरा बेन के 100 वे जन्मदिन पर लिखे ब्लाग में अपने बचपन के दोस्त अब्बास का जिक्र किया था। अब अब्बास अपने परिवार के साथ आस्ट्रेलिया में रहते है। तहलका के साथ बातचीत में अब्बास ने बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून 2022 में अपनी मां हीराबेन के 100वें जन्मदिन पर लिखे एक ब्लॉग में अपने बचपन के मुस्लिम मित्र अब्बास (अब्बास मियांभाई मोमिन) का जिक्र किया था, तब मीडिया ने उनसे संपर्क किया। अब्बास ने पीएम मोदी द्वारा बचपन के दिनों को याद किए जाने पर बेहद खुशी और भावुकता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि यह जानकर उन्हें बहुत अच्छा लगा कि देश के शीर्ष पद पर होने के बाद भी प्रधानमंत्री को उनके पुराने दिन और परिवार का साथ याद है। अब्बास ने पुष्टि की थी कि पीएम मोदी के परिवार ने उनके साथ हमेशा अपनेपन का व्यवहार किया। उन्होंने बताया था कि जब पिता का निधन हो गया इसके बाद वे कुछ समय (लगभग एक साल) मोदी जी के घर पर रहे थे। प्रधानमंत्री की मां हीराबेन उन्हें अपने सगे बेटे की तरह मानती थीं। ईद के त्योहार पर मां हीराबेन उनके लिए विशेष तौर पर सेवई और उनकी पसंद के पकवान बनाती थीं। अब्बास ने उस दौर के सामाजिक माहौल को याद करते हुए कहा था कि तब का माहौल आज के दौर से काफी अलग और ज्यादा सौहार्दपूर्ण था। उस समय सभी लोग मिलकर बिना किसी भेदभाव के ईद, होली और दिवाली जैसे त्योहार एक साथ मनाते थे।

कभी नहीं मांगा निजी या राजनीतिक लाभ

अब्बास ने यह भी स्पष्ट किया था कि उन्होंने कभी भी नरेंद्र मोदी से अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर कोई निजी या राजनीतिक लाभ नहीं मांगा। वे गुजरात सरकार के खाद्य और आपूर्ति विभाग में क्लास-2 अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएँ देने के बाद सेवानिवृत्त हुए थे। जब पीएम मोदी का यह ब्लॉग आया था, तब वे रिटायरमेंट के बाद कुछ समय के लिए ऑस्ट्रेलिया में अपने बेटे के पास गए हुए थे। अब्बास के अलावा असगर अली बोहरा जो नरेन्द्र मोदी के साथ बीएन हाई स्कूल में सहपाठी थे उनको भी पीएम मोदी का एक घनिष्ठ मित्र बताया जाता है। वडनगर में कई मंदिर, मस्जिद और दरगाह हैं। पीएम मोदी के पुराने घर के पास ही “खजूरी मस्जिद “स्थित है। नरेन्द्र मोदी बचपन में मोर्हरम के दौरान जलूस निकालने वालों के लिए पानी और जलपान का इंतजाम अपने मुसलमान भाईयों के लिए किया करते थे।