
by Arvind Chaturvedi
वडनगर प्राइमरी स्कूल से प्रेरणा स्कूल तक का सफर: दीवारों पर शिवाजी, महाराणा प्रताप, बुद्ध, गांधी, विनोबा भावे के चित्र; 9वीं-12वीं के छात्रों को आधुनिक तकनीक और भारतीय धरोहर का ज्ञान
वडनगर । 16 सितंबर, 2026 बचपन में नरेंद्र मोदी की पढ़ाई के लिए उनका दाखिला वडनगर प्राइमरी स्कूल में करवाया गया। नरेंद्र मोदी का स्कूल में दाखिला पिता दामोदर दास मोदी ने चाचा के लड़के नरसीदास मूलचन्द दास मोदी के साथ करवाया था। इसी स्कूल में इनके बड़े भाई सोम भाई मोदी और परिवार के कई दूसरे सदस्यों ने भी पढ़ाई की थी। नरेंद्र ने इस स्कूल में सन् 1957 से 1964 तक पढ़ाई की। नरेंद्र मोदी के परिवार के सभी सदस्यों ने यहीं से अपनी पढ़ाई की शुरुआत की थी। चाहे वह सोम भाई मोदी रहे हों या फिर पंकज मोदी। वडनगर के इस प्राइमरी स्कूल में मैं वर्ष 2014 में गया था। जब नरेन्द्र मोदी ने पीएम पद की शपथ ली थी। 2014 का वो दिन आज भी मुझे याद है। पाठशाला के गेट पहुँचने पर मेरे मन में था कि आज देश के प्रधान मंत्री पद की शोभा बढ़ा रहे नरेन्द्र मोदी ने अपने जीवन में शिक्षा का आरम्भ यहाँ से किया। 2014 तक यह पुराना एक सामान्य सा दिखने वाला स्कूल था। जिसमें कमरे, बेंच और छात्रों का शोर, यह कुछ ऐसा था जैसा नरेन्द्र मोदी के स्कूल में प्रवेश के समय रहा होगा।
पीएम बनने के बाद शुरू हुआ मरम्मत का काम
नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद से ही स्कूल में मरम्मत का काम चल रहा था। जैसे ही मैंने स्कूल के आंगन में प्रवेश किया, बच्चों के शोरगुल कानों से टकराया। मेरा मन भी बचपन में पहुँच गया। प्रिंसिपल महोदय सबसे पहले हमें उस क्लास में लेकर गए जहाँ नरेन्द्र मोदी ने अपनी शिक्षा की शुरुआत की थी।
उस क्लासरूम में सीढ़ीनुमा बेंच लगाकर बच्चों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। उस समय स्कूल के चपरासी ने आकर बताया कि नरेन्द्र मोदी को पढ़ाने वाले अध्यापक कन्हैया लाल भूदर दास भाऊसा आ गए हैं। हमसे मिलने के लिए तैयार हैं। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। मोदी के सीनियर रहे योगेश भाई कांति लाल शाह ने भी नरेन्द्र के बचपन का एक रोचक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि नरेन्द्र मोदी कक्षा दो-ब में थे। योगेश शाह कक्षा तीन-ब में थे। योगेश शाह ने बताया कि इस स्कूल में पढ़ाने वाले एक टीचर चंद्रशेखर व्यास थे। इन अध्यापक महोदय ने नरेन्द्र मोदी की कक्षा में पढ़ने वाले एक लड़के की पिटाई कर दी। उस समय उस क्लास में लगभग पचास बच्चे रहे होंगे। छात्र की पिटाई का असर बालक नरेन्द्र के अबोध मन पर गहरा पड़ा। उस समय नरेन्द्र की उम्र बहुत कम थी। तय हुआ कि इस बात की शिकायत प्रधानाध्यापक से की जाएगी। कन्हैया लाल ने बताया कि मैं यहाँ पर 1959 में आ गया। तब नरेन्द्र मोदी कक्षा तीन में पढ़ते थे।
नरेन्द्र पढ़ने में सामान्य, पर गलत बात नहीं मानते थे
नरेन्द्र मोदी को पढ़ाने वाले अध्यापक कन्हैया लाल भूदर दास भाउसा ने जानकारी दी कि नरेन्द्र पढ़ने में सामान्य थे। पर अपने से कमजोर छात्रों की मदद करते थे। नरेन्द्र की एक खास आदत थी कि वह गलत बात को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होते थे। चाहे यह बात विद्यार्थी ने कही हो या फिर अध्यापक ने। बचपन में भी उनकी सोच स्पष्ट थी। वह जो काम करना चाहते थे, अपने तरीके से करते थे, पर संगठन की राय जरूर लेते थे, यानी दोस्तों की। नरेन्द्र मोदी के मित्र ईश्वर भाई पी० पटेल ने बताया कि स्कूल समाप्त होने के बाद हम स्कूल के पीछे के बगीचे में इकट्ठा होते थे। अगले दिन की रणनीति हम वहीं बनाते थे।
आज वडनगर में मोदी की पाठशाला अब बदल गई है
आज वडनगर में मोदी की पाठशाला अब बदल गई है। उस स्थान पर बहुत बड़ा स्कूल के भवन का निर्माण हो चुका है जिसका नाम प्रेरणा स्कूल है। इस स्कूल में देश भर से आए छात्र-छात्राओं को संस्कृति एवं संस्कार की शिक्षा दी जाती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इस स्कूल को अपने संरक्षण में लिया। संस्कृति मंत्रालय और गुजरात पर्यटन विभाग के सहयोग से इसका पुनर्निर्माण पूरा किया गया। स्कूल की दीवारों पर शिवाजी, महाराणा प्रताप, गौतम बुद्ध, गांधीजी और विनोबा भावे जैसी महान हस्तियों के चित्र उकेरे गए हैं, जो विद्यार्थियों को प्रेरित करते हैं। यह स्कूल पूरे भारत से 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों का स्वागत कर रहा है। एक सप्ताह के सत्रों के दौरान आधुनिक तकनीक और भारतीय सांस्कृतिक धरोहर पर विशेष ज्ञान दिया जाता है। विविधता को बढ़ावा देने के लिए हर जिले से एक लड़के और एक लड़की का चयन किया जाता है। विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए विशेष रूप से चयनित शिक्षकों की नियुक्ति की जाती है। प्रेरणा स्कूल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं के मुख्य साक्षी हैं।



