तीन हफ्ते पहले पार्टी से बाहर किए गए आकाश को मायावती ने फिर बनाया राष्ट्रीय संयोजक; ‘बुआ-मां’ से माफी और भरोसा बहाल करने की अपील के बाद आया फैसला, अब 2027 से पहले उनके सामने संगठन और नेतृत्व की बड़ी परीक्षा
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी में एक बार फिर वही कहानी लौटी है, लेकिन इस बार दांव पहले से बड़ा है। करीब तीन सप्ताह पहले पार्टी से बाहर किए गए मायावती के भतीजे आकाश आनंद की बसपा में वापसी हो गई है। मायावती ने उन्हें फिर से राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंप दी है। यानी जिस राजनीतिक रिश्ते पर हाल में सवाल खड़े हो गए थे, उसे फिलहाल एक और मौका दिया गया है।
यह फैसला आकाश आनंद के उस सार्वजनिक माफीनामे के कुछ ही दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने मायावती को अपनी राजनीतिक गुरु और ‘बुआ-मां’ बताते हुए कहा था कि वह उनके नेतृत्व में पार्टी और बहुजन मिशन के लिए काम करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया था कि वह किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में नहीं जाएंगे और बसपा उनके लिए सिर्फ पार्टी नहीं, परिवार है।
मायावती ने क्यों बदला फैसला?
5 अक्टूबर को जारी मायावती के बयान में कहा गया कि पार्टी के भीतर काफी विचार-विमर्श के बाद आकाश को दोबारा काम करने का अवसर देने का फैसला किया गया। मायावती के मुताबिक, आकाश के व्यक्तित्व और कार्यशैली में बदलाव दिखाई दे रहा है और उनकी वापसी के पक्ष में पार्टी के कई लोगों ने राय दी। उन्होंने आकाश के पिता आनंद कुमार और छोटे भाई ईशान आनंद की ओर से भी इस फैसले के समर्थन का जिक्र किया।
लेकिन मायावती ने एक महत्वपूर्ण शर्त भी संकेतों में छोड़ दी है आगे सब कुछ आकाश के व्यवहार और काम पर निर्भर करेगा। पार्टी में बार-बार संगठनात्मक बदलाव की स्थिति नहीं आनी चाहिए, यह उम्मीद भी उन्होंने जताई है।
यह टिप्पणी इसलिए अहम है क्योंकि आकाश की वापसी कोई पहली वापसी नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में उन्हें कई बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं, फिर उनसे दूरी बनाई गई और दोबारा मौका दिया गया। सितंबर 2026 में उन्हें सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त कर पार्टी से बाहर कर दिया गया था। उस समय मायावती ने उनके राजनीतिक परिपक्वता और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ से जुड़े विवादों को लेकर सवाल उठाए थे।
अब असली परीक्षा 2027 की
आकाश की वापसी ऐसे समय हुई है जब बसपा उत्तर प्रदेश में अपने सबसे कठिन राजनीतिक दौर से गुजर रही है। विधानसभा में फिलहाल उसका कोई विधायक नहीं है और 2027 का चुनाव पार्टी के लिए बेहद अहम है।
इसलिए आकाश की वापसी को केवल पारिवारिक सुलह के रूप में देखना अधूरा होगा। उनके सामने अब संगठन को जमीन पर मजबूत करने, युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने और मायावती के नेतृत्व में पार्टी की राजनीतिक धार को फिर तेज करने की चुनौती है।
मायावती ने उन्हें एक और मौका दिया है। अब यह आकाश पर है कि वह इस बार सिर्फ पद संभालते हैं या उस पद को राजनीतिक परिणाम में बदलकर अपना भरोसा साबित करते हैं।




