
रिपोर्टर प्रिया तिवारी
राजनीति के मंच पर अब सिर्फ भाषण, नारे और भीड़ ही कहानी नहीं लिखते। डिजिटल दौर में राजनीतिक कार्यक्रमों का अंदाज भी बदल रहा है। गुजरात के वडोदरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘NaMo for Viksit Bharat’ कार्यक्रम इसी बदलती राजनीतिक संस्कृति की एक झलक पेश करता नजर आया, जहां डिजिटल टिकटिंग, युवा-केंद्रित फॉर्मेट और हाई-टेक इवेंट मैनेजमेंट ने पारंपरिक राजनीतिक कार्यक्रम से अलग माहौल तैयार किया।
फिल्म या कॉन्सर्ट नहीं, PM मोदी का कार्यक्रम
इस कार्यक्रम की सबसे ज्यादा चर्चा इसकी ऑनलाइन बुकिंग को लेकर हुई। कार्यक्रम के लिए BookMyShow के जरिए मुफ्त ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया गया।
आमतौर पर BookMyShow पर लोग फिल्म, कॉन्सर्ट या स्पोर्ट्स इवेंट के टिकट बुक करते हैं। ऐसे में किसी प्रधानमंत्री के राजनीतिक कार्यक्रम के लिए इसी प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन होना अपने आप में चर्चा का विषय बना।
उपलब्ध सीटें करीब एक घंटे में भर गईं और इसके बाद 42 हजार से ज्यादा लोग वेटिंग लिस्ट में पहुंच गए।
हालांकि, इस आंकड़े को प्रधानमंत्री की लोकप्रियता का वैज्ञानिक या व्यापक सर्वेक्षण नहीं माना जा सकता। यह मुख्य रूप से कार्यक्रम की सीमित क्षमता और उसमें शामिल होने की मांग को दर्शाता है। लेकिन राजनीतिक आयोजनों के डिजिटलाइजेशन के लिहाज से यह जरूर एक दिलचस्प संकेत है।
PM मोदी का Gen-Z कनेक्ट
कार्यक्रम का दूसरा बड़ा आकर्षण इसका युवा-केंद्रित फॉर्मेट रहा।
युवाओं, स्टार्टअप फाउंडर्स, इनोवेटर्स और टेक्नोलॉजी से जुड़े नए भारत के विचारों को कार्यक्रम के केंद्र में रखा गया। मंच की डिजाइन भी पारंपरिक राजनीतिक रैली से अलग नजर आई।
प्रधानमंत्री के लिए Y-शेप का रैंप तैयार किया गया, जिसके जरिए वे मंच से आगे बढ़कर युवाओं के बीच पहुंच सके।
यानी मंच, लाइटिंग, रैंप और पूरा सेटअप ऐसा रखा गया कि कार्यक्रम में एक बड़े यूथ इवेंट या लाइव शो जैसा विजुअल अनुभव दिखाई दे।
यहीं से इसे प्रधानमंत्री मोदी के Gen-Z कनेक्ट की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया से BookMyShow तक पहुंची राजनीति
प्रधानमंत्री मोदी की राजनीति में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका पहले से ही महत्वपूर्ण रही है। सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक सीधे पहुंचने की रणनीति अब राजनीतिक संचार का अहम हिस्सा बन चुकी है।
Instagram, YouTube, X और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने राजनीतिक संवाद का तरीका बदल दिया है।
वडोदरा का कार्यक्रम इस बदलाव का एक और उदाहरण नजर आया, जहां ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से लेकर कार्यक्रम के अनुभव तक, डिजिटल ऑडियंस को ध्यान में रखकर पूरा फॉर्मेट तैयार किया गया।
इसका मतलब साफ है—राजनीति की ऑडियंस अब सिर्फ रैली मैदान में मौजूद लोगों तक सीमित नहीं है। मोबाइल स्क्रीन पर मौजूद युवा भी राजनीतिक संवाद का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
अब सिर्फ भीड़ नहीं, ‘डिजिटल क्राउड’ भी मायने रखता है
लंबे समय तक किसी राजनीतिक कार्यक्रम की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना होता था कितनी भीड़ आई?
लेकिन डिजिटल दौर में तस्वीर बदल रही है।
क्या यही है राजनीति का नया इवेंट फॉर्मूला?
वडोदरा का कार्यक्रम एक बड़ा सवाल छोड़ता है—क्या भविष्य की राजनीति के कार्यक्रम भी कॉन्सर्ट और बड़े यूथ इवेंट की तर्ज पर डिजाइन होंगे?
यह ऐसी पीढ़ी है जो कंटेंट देखती है, उसे शेयर करती है, उस पर प्रतिक्रिया देती है और सोशल मीडिया पर अपनी राय बनाती है।
ऐसे में राजनीतिक दलों और नेताओं के सामने चुनौती सिर्फ यह नहीं है कि वे कितने लोगों को मैदान तक ला सकते हैं।



