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धर्मों के नक़ली वाहक

अगर किसी के स्वास्थ्य में थोड़ी भी गड़बड़ी हो और वह अपना इलाज न कराये, तो धीरे-धीरे शरीर में और भी कई रोग जाते हैं, जिसके कारण शरीर जर्जर, क्षीण होकर अंतत: उम्र से पहले ही मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। धर्मों की भी यही दशा है। धर्मों में रोग तो उसी दिन लग गया था, जब उनके वाहकों ने उनमें मनगढ़ंत कहानियाँ, कपोल कथाएँ, नयी-नयी रीतियाँ, संस्कारों के नाम पर ढोंग और स्वयं को सिद्ध पुरुष और धर्म का ठेकेदार साबित करने के लिए अपनी विवेचनाएँ जोडऩी शुरू कर दी थीं। धीरे-धीरे धर्म लोप हो गये और ये चीज़ें धर्मों पर हावी हो गयीं। अब धर्म केवल कुछ लोगों के लिए पैसा कमाने के माध्यम बनकर रह गये हैं। और विडम्बना यह है कि लोग ईश्वर की तरह ही इन लोगों को पूजते हैं। इनके एक इशारे पर सब कुछ क़ुर्बान करने को तैयार रहते हैं।

लोगों को सोचना होगा कि क्या पैसा, पद और प्रतिष्ठा की चाहत रखने वाले, अपनी चरण वन्दना के शौक़ीन लोग कभी धर्म के वाहक नहीं हो सकते? इसलिए अगर धर्मगुरु अयोग्य है और धर्म के सही अनुपालन को छोडक़र तमाम लिप्साओं में लिप्त रहता है, तो उन्हें धर्मों से निकालकर फेंक देना चाहिए। किसी भी धर्म में अधर्मी और तथाकथित लोगों को धर्मगुरुओं के पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। एक ही धर्म के मानने वालों को अलग-अलग जातियों में बाँटकर, उनके साथ अलग-अलग व्यवहार करने वालों को धर्म ध्वजा को फहराने का अधिकार नहीं है। एक ही धर्म के विभिन्न लोगों में भेदभाव फैलाने वालों को धर्म का अग्रणी होने का अधिकार नहीं है। धर्मों के नाम पर पाखण्ड, अशान्ति, वैमनस्य, झूठ, अराजकता, भ्रान्ति और कुरीतियाँ फैलाने वालों को किसी धर्म की आख़िरी पंक्ति में भी बैठने का अधिकार नहीं है। लोभी, कामी, क्रोधी लोगों को भी धर्म का परचम लेकर चलकर अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

जिस तरह ईश्वर का विधान सबके लिए एक होता है, उसी प्रकार धर्म का विधान भी सबके लिए एक ही होता है और एक ही होना चाहिए। किसी भी धर्म में उस धर्म को मानने वाला कोई व्यक्ति भेदभाव का पात्र नहीं है। अगर धर्म भेदभाव या अलग-अलग व्यवहार की अनुमति देता है, तो उस धर्म का वहिष्कार करना कोई गुनाह नहीं है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति किसी सही धर्म के विरुद्ध काम करता है, तो उसे दण्डित तो किया जा सकता है; लेकिन उसे मृत्युदण्ड देने का अधिकार किसी धर्माचार्य या धर्म के लोगों को नहीं है। अगर कोई किसी अपराध में लिप्त पाया जाता है और उस पर आरोप तय होता है, तो उसे न्यायालय क़ानूनी प्रक्रिया के तहत दण्डित कर सकता है। लेकिन यह तभी सम्भव है, जब न्यायालय निष्पक्ष होंगे।

अगर धर्म नैतिक नहीं हैं, निष्पक्ष नहीं हैं, स्पष्टट नहीं हैं, सबके भले के लिए नहीं हैं, सबका सम्मान नहीं करते, उनमें झूठ और पाखण्ड हो, तो उन्हें धर्म नहीं कहा जा सकता। धर्म धारण करने योग्य, सत्य का मार्ग दिखाने वाला और ईश्वर पर निर्विवाद होना चाहिए। अन्यथा सिवाय लोगों को बहकाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करने वालों के उसका किसी को कोई  फ़ायदा नहीं होने वाला।

अपराधियों को न धर्मों की सत्ता में शरण दी जानी चाहिए और न ही अन्य प्रकार की सत्ताओं में। लेकिन देखने में आता है कि अब धर्मों में अनेक अपराधी, पापी शरण लिये हुए हैं। इनमें से कई अपराधी और पापी तो स्वयं को धर्माचार्य घोषित कर चुके हैं। पाखण्डवाद इनका सबसे मज़बूत सुरक्षा कवच बना हुआ है। सदियों से इसी पाखण्डवाद के अँधे कुएँ में पड़ी जनता धर्म के प्रकाश से ईश्वर का दर्शन करना चाहती है। लेकिन उसे यही पाखण्डी, पापी और अपराधी धर्म के नाम पर पाखण्डवाद की ऐसी अफ़ीम खिला रहे हैं, जिसका नशा इतना चढ़ चुका है कि कोई भी दंगा करने, किसी की हत्या करने के लिए पलों में तैयार हो सकता है। दुर्भाग्य से सभी धर्मों के लोग ऐसे पाखण्डियों, पापियों और अपराधियों को सिर पर पैठाकर पूज रहे हैं। और इन पाखण्यिों का दुस्साहस देखिये कि ये किसी की भी गर्दन काटने, ज़ुबान काटने पर खुलेआम एक स्वघोषित इनआम की घोषणा करते हैं। यह इनआम एक प्रकार की सुपारी है, जो किसी की हत्या के लिए दी जाती है। और यह हर हाल में अधर्म है, $गैर-क़ानूनी है। मकड़ी के तरह जाल बुनते जा रहे ये पाखण्डी अपने बुने जाल में भोले-भाले लोगों को फँसाकर उनसे पाप कराने का उपक्रम इस तरह करते हैं कि कोई उसे धार्मिक समझकर विरोध न कर सके। हो भी यही रहा है। अब किसी धर्म का तथाकथित धर्मगुरु कुछ ग़लत भी करे, तो भी लोग उसके चरण धोकर पीने को तैयार रहते हैं। राजनीतिक लोग ऐसे पापियों को बचाने के लिए आगे आ जाते हैं। उनके साथ हर जगह सम्मानजनक तरीक़े से पेश आया जाता है। एक सामान्य आदमी की तरह नहीं। अगर कभी किसी को कोई सज़ा मिल भी जाती है, तो उसमें रियायत और सुविधाएँ शामिल होती हैं।     

दिल्ली हज कमेटी की अध्यक्ष बनीं भाजपा की कौसर जहां

दिल्ली हज कमेटी की अध्यक्ष कौसर जहां बन गई है। इसी के चलते अब आम आदमी पार्टी के हाथ से दिल्ली हज कमेटी का नियंत्रण निकल गया है। गौतम गंभीर और मोहम्मद साद ने कौसर को वोट दिया था। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आपत्ति जताई थी कि उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने बिना निर्वाचित सरकार से सलाह किए बिना दिल्ली हज कमेटी के सदस्य नियुक्त कर दिए है।

बता दें दिल्ली हज कमेटी के लिए गुरुवार को दिल्ली सचिवालय में चुनाव हुआ। जिसमें 3-2 के बहुमत से भाजपा कार्यकर्ता कौसर जहां दिल्ली हज कमेटी के अध्यक्ष चुनी गयी। चुनाव में तीन ही वोट पड़े दो सदस्यों – गौतम गंभीर, मोहम्मद साद और खुद कौसर जहां ने इनके लिए वोट किया। जबकि आप के दो विधायकों अब्दुल रहमान और हाजी यूनुस ने बायकाट किया और कांग्रेस पार्षद सदस्य नाजिया दानिश उपलब्ध नहीं रही।

वहीं आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, कई जगह खबर देखी कि आप को झटका, भाजपा कार्यकर्ता हज कमेटी का चुनाव जीत गई। हमने तो कभी हज कमेटी के चुनाव का भी नहीं सुना था, ये सिर्फ 6 सदस्यों के बीच चुनाव होता है। चुनी हुई सरकार सदस्यों को भेजती थी। उसमें से आपसी सहमति से अध्यक्ष चुना जाता था। लेकिन उप राज्यपाल ने बेईमानी करके खुद सदस्यों के नाम भेज दिये।

आपको बता दें, दिल्ली के इतिहास में ऐसा दूसरी बार हुआ है जब कोई महिला स्टेट हज कमेटी की अध्यक्ष बनी है। कौसर से पहले दिल्ली की महिला चेयरमैन ताजदार बाबर रही हैं।

आईटी सर्वे बीबीसी दफ्तरों पर तीसरे दिन भी जारी

ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) के दिल्ली और मुंबई स्थित दफ्तरों में तीसरे दिन भी आयकर विभाग (आईटी) का सर्वे जारी है। कुछ कर्मचारियों के फोन क्लोन करने के साथ ही बीबीसी के वित्त और संपादकीय विभाग मिलाकर लगभग 10 वरिष्ठ कर्मचारियों को दो रातों से घर नहीं जाने दिया गया है।

हालांकि जिन कर्मचारियों के कंप्यूटर जांचे जा चुके है उन्हें घर से ही काम करने को कहा गया है। और एक बार फिर बीबीसी ने अपने सभी कर्मचारियों को जांच में सहयोग करने को कहा है।

हिंदू सेना द्वारा गुरुवार को किए गए प्रदर्शन के बाद अब बीबीसी दफ्तर के बाहर भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को तैनात किया गया है।

आपको बता दें, आईटी बीबीसी के दिल्ली और मुंबई स्थित दफ्तरों पर 2012 से लेकर अब तक के खातों को खंगाल रही है। और बीबीसी ने अपने कर्मचारियों को आईटी की मदद करने को भी कहा है।

यह जांच इंटरनेशनल टैक्स में गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर आईटी ये सर्वे कर रहा है। यह सर्वे मंगलवार को शुरू किया गया था और आज गुरुवार को भी जारी है। इसके अंतर्गत बीबीसी की अकाउंट्स डिटेल्स चेक की जा रही है।

त्रिपुरा में 9 बजे तक 13 फीसदी मतदान, भाजपा, कांग्रेस-माकपा में कड़ी टक्कर

त्रिपुरा में विधानसभा की 60 सीटों के चुनाव के लिए इस समय मतदान चल रहा है। सुबह 9 बजे तक वहां 13 फीसदी के करीब वोट पड़े हैं। राज्य में भाजपा को कांग्रेस-माकपा गठबंधन से कड़ी टक्कर मिल रही है जबकि टिपरा मोथा भी मैदान में है। नतीजे 2 मार्च को निकलेंगे।

भाजपा ने इस चुनाव को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। केंद्रीय मंत्रियों   के अलावा  तमाम बड़े नेताओं को मैदान पैन भाजपा का प्रचार करने के लिए भेजा गया। गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चुनाव के कमाना संभाल रखी थी।

उधर कांग्रेस और माकपा के बीच गठबंधन होने से भाजपो के लिए राज्य में मुकाबला मुश्किल हो गया है। जानकारों के मुताबिक यह गठबंधन भाजपा के लिए कड़ी चुनौती बन जताया है और नतीजा किसी भी तरफ जा सकता है भले भाजपा ने पूर्ण बहुमत का दावा किया था।

राज्य में शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग ने पुखता बंदोबस्त कर रखे हैं। कड़ी सुरक्षा के बीच 3,337 मतदान केंद्रों पर आज सुबह सात बजे से मतदान होना शुरू हो गया है जो शाम चार बजे तक चलेगा।

चुनाव में मुख्य रूप से भाजपा, आईपीएफटी गठबंधन, माकपा, कांग्रेस गठबंधन और पूर्वोत्तर राज्य के पूर्व शाही परिवार के वंशज की गठित एक क्षेत्रीय पार्टी टिपरा मोथा हैं। वोटों की गिनती 2 मार्च को होगी। त्रिपुरा के विपक्ष नेता और पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने विधानसभा चुनाव में वोट डाला। पूर्व सीएम माणिक सरकार ने अगरतला में वोट डाला है।

चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम त्रिपुरा में सुबह 9 बजे तक 14.56 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि धलाई में 13.62 प्रतिशत, गोमती में 12.99 प्रतिशत, खोवाई में 13.08 प्रतिशत, उत्तरी त्रिपुरा में 12.79 प्रतिशत, सिपाहीजाला में 13.61 प्रतिशत मतदान हुआ। उनाकोटि 13.34 प्रतिशत और दक्षिण त्रिपुरा 14.34 प्रतिशत मतदान हुआ है।

 कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने  मतदाताओं से अपील की है कि वे बिना डरे मतदान करें। खड़गे ने कहा कि त्रिपुरा के लोग बदलाव के लिए एकजुट हैं। सभी से विशेषकर युवाओं से अपील है कि बाहर निकलें और लोकतंत्र के उत्सव में भाग लें और शांति और प्रगति के लिए मतदान करें।

राहुल गांधी निजी यात्रा पर कश्मीर पहुंचे, गुलमर्ग में स्कीइंग का आनंद लेते दिखे

करीब 3,970 किलोमीटर लम्बी भारत यात्रा के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी कश्मीर के गुलमर्ग पहुंचे हैं, जहाँ एक वीडियो में उन्हें स्कीइंग का आनंद लेते हुए देखा गया है। वीडियो में राहुल गांधी गुलमर्ग में स्कीइंग का मजा लेते हुए दिख रहे हैं वहीं पर्यटकों की भीड़ उनके साथ सेल्फी ले रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक राहुल गांधी गुलमर्ग जाते समय थोड़ी देर के लिए तंगमर्ग में रुके थे। वहां राहुल गांधी ने पत्रकारों के सवालों के जवाब नहीं दिए और सिर्फ उन्हें नमस्कार किया। राहुल गांधी निजी दौरे पर गुलमर्ग गए हैं।

गांधी ने गुलमर्ग में राहुल गोंडोला केबल कार की सवारी की और फिर स्कीइंग की।  कांग्रेस नेता ने वहां मौजूद कई पर्यटकों के साथ सेल्फी भी खिंचवाई। गांधी बुधवार को दो दिवसीय निजी दौरे पर जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग की ढलानों पर स्कीइंग करते देखे गए।

ट्विटर पर शेयर किए गए एक वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा गया है – ‘पुरस्कार के रूप में, राहुल जी सफल भारत जोड़ो यात्रा के बाद गुलमर्ग में छुट्टियां मना रहे हैं।’ गांधी के एक निजी समारोह में शामिल होने की संभावना है।

यूपी के सुल्तानपुर में दो मालगाड़ियां आमने सामने टकराईं, चार घायल

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में गुरुवार को दो मालगाड़ियों की टक्कर हो गयी जिसमें चार लोग घायल हो गए। हादसा तब हुआ जब दोनों ट्रेन एक ही ट्रैक पर चल रही थीं। घायल चारों लोग चालाक बताये गए हैं।

जानकारी के मुताबिक दो लोगों की चोटें कुछ ज्यादा हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। सुल्तानपुर के चिकित्सा अधीक्षक ऐसी कौशल के मुताबिक उनका इलाज किया जा रहा है।

हादसा तब हुआ जब सुल्तानपुर में दो मालगाड़ियों की आमने सामने टक्कर हो गयी।  इसके बाद एक मालगाड़ी पटरी से उतर गयी। हादसे का कारन एक ही लाइन पर 2 ट्रेनें चलने को बताया गया है।

टक्कर के बाद एक ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है जबकि चार लोग घायल हुए हैं।

तेलंगाना में गोदावरी एक्सप्रेस के छह डिब्बे पटरी से उतरे, जान माल का नुकसान नहीं  

तेलंगाना में बीबीनगर और घाटकेसर के बीच गोदावरी एक्सप्रेस के छह डिब्बे बुधवार को पटरी से उतर गए। इस घटना में जान माल के नुकसान की खबर नहीं है।

इस हादसे को लेकर रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों को पटरी से उतरे डिब्बों को अलग करके उसी ट्रेन से निकाला जा रहा है। उनके अनुसार, कोई यात्री घायल नहीं हुआ और न किसी के हताहत होने की सूचना है।

रेलवे ने प्रारंभिक सूचना में कहा कि हादसे के बाद लोगों के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया गया है। अभी तक की जानकारी के मुताबिक यह घटना तेलंगाना की है जहाँ बीबीनगर और घाटकेसर के बीच गोदावरी एक्सप्रेस के छह डिब्बे बुधवार को पटरी से उतर गए। घटना से जुड़े और विवरण का इंतजार है।

बीबीसी के दिल्ली और मुंबई स्थित दफ्तरों में रात भर जारी रहा आईटी का सर्वे, खंगाले जा रहे है कंप्यूटर

ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (बीबीसी) के दिल्ली और मुंबई स्थित दफ्तरों पर आयकर विभाग (आईटी) का सर्वे आज भी जारी है। साथ ही आर्इ की टीमें 2012 से लेकर अब तक के सभी खातों को खंगाल रही है। और कर्मचारियों के कंप्यूटर की जांच भी की जा रही है।

मंगलवार को जिन ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट के कंप्यूटर नहीं जांचे गए थे उन्हें दफ्तर आने को कहा गया है। और कंप्यूटर जांच के बाद पत्रकारों को अपने काम के लिए जाने के लिए दिया जाएगा। हालांकि आईटी आज बीबीसी के ब्रॉडकास्ट ऑपरेशन में दखल नहीं देगा। और सर्वे खत्म होने के बाद बीबीसी रिलीज़ जारी करेगा।

भारत में बीबीसी कार्यालयों में आयकर विभाग सर्वेक्षण पर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा है कि, “हमें भारतीय आयकर अधिकारियों द्वारा दिल्ली में बीबीसी कार्यालयों की तलाशी के बारे में जानकारी है। मैं और अधिक व्यापक रूप से कहूंगा कि हम दुनिया भर में स्वतंत्र प्रेस के महत्व का समर्थन करते है।”

बीबीसी ने ट्वीट कर कहा है कि, “आयकर विभाग की टीम दिल्ली और मुंबई ऑफिस में मौजूद है। हम उन्हें पूरा सहयोग कर रहे हैं। सर्वे का काम अभी भी जारी है। ऑफिस में काम भी शुरू हो गया है। ”

आपको बता दें, इंटरनेशनल टैक्स में गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर आयकर विभाग ये सर्वे कर रहा है। और बीबीसी की 2012 से अब तक की अकाउंट्स डिटेल्स चेक कर रहा है। सूत्रों के अनुसार बीबीसी के अकाउंट्स और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को एग्जामिन और एनालिसिस करने में लंबा वक्त लग सकता है।

वहीं दूसरी तरफ विपक्ष ने केंद्र पर हमला बोला है और कहा कि यह मीडिया की आज़ादी पर हमला है। भाजपा ने पलटवार कर कहा कि भाजपा ने बीबीसी को सबसे भ्रष्ट संस्थान बताया और कहा कि विपक्ष जांच के नतीजे जाने बिना आरोप कैसे लगा सकता है।

बता दें, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने बीबीसी के दफ्तरों में आईटी के सर्वे पर अपनी चिंता व्यक्त की है और अपने बयान जारी में कहा है कि, “नर्इ दिल्ली और मुंबई में बीबीसी के कार्यालयों में आईटी विभाग की टीम के द्वारा सर्वे चलाया जा रहा है ये तब  हुआ है जब हाल की बीबीसी ने 2002 के गुजरात दंगों और वर्तमान में भारत में अल्पसंख्यकों के हालात पर 2 डॉक्यूमेंट्री रिलीज की हैं। ”

आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा – राजा
का मतलब सेवक होता है, शासक नहीं  

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन  भागवत ने एक बड़े बयान में कहा है कि राजा का मतलब सेवक होता है, शासक नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि एक विचारधारा या एक व्यक्ति किसी देश को बना या बिगाड़ नहीं सकती है।

राजनीतिक रूप से उनके बयान को 2024 के आम चुनाव से जोड़कर काफी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। नागपुर में राजरत्न पुरस्कार समिति के समारोह में आरएसएस प्रमुख ने कहा – ‘अब जमाना प्रजातंत्र का इसलिए अब राजा नहीं रहे हैं। राजा का मतलब सेवक होता है, शासक नहीं। एक विचारधारा या एक व्यक्ति किसी देश को बना या बिगाड़ नहीं सकती है।’

इस मौके पर उन्होंने कहा कि दुनिया के अच्छे देशों में विचारों की भीड़ होती है और एक व्यक्ति, एक विचार, एक समूह, एक विचारधारा किसी देश को बना या बिगाड़ नहीं सकती है। उन्होंने कहा – ‘दुनिया के अच्छे देशों में तरह-तरह के विचार होते हैं। उनके पास भी सभी प्रकार के सिस्टम हैं, और वे सिस्टम की इस भीड़ के साथ बढ़ रहे हैं।’

भागवत ने कहा कि लोगों को अपने अहंकार को नहीं बढ़ने देना चाहिए और भौतिकवाद से दूर रहना चाहिए। हमेशा सच्चाई पर टिके रहना चाहिए। दुनिया एक भ्रम है, केवल ब्रह्म ही सत्य है। राजा का मतलब सेवक होता है, शासक नहीं।

कानपुर में अतिक्रमण हटाते हुए झोंपड़ी में लगा दी आग; मां-बेटी जिंदा जल गईं

प्रशासन की बड़ी लापरवाही के कारण एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर में अतिक्रमण हटाने गए लोगों के एक झौंपड़ी को आग के हवाले करने से उसके भीतर मां-बेटी की जलकर मौत हो गयी। दोनों को बचाने की कोशिश करते हुए परिवार का मुखिया गंभीर घायल हो गया।

लोगों के गुस्से को देखते हुए अब पुलिस ने इस घटना को लेकर एसडीएम सहित 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है, हालांकि परिवारजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर दोनों मृतकों का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक यह दुखद घटना तब हुई जब कानपुर देहात में प्रशासन के लोग एक मंदिर गिराने पहुंचे। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनकी झोपड़ी को आग के हवाले कर दिया गया, जिसमें मां और बेटी की जलकर मौत हो गई।

दोनों को बचाने निकला परिवार का मुखिया गंभीर घायल हो गया। पुलिस ने इस घटना में एसडीएम, लेखपाल, स्टेशन ऑफिसर, जेसीबी के ड्राइवर सहित 13 लोगों को आरोपी बनाते हुए एफआरआई दर्ज कर ली है।

इस एफआईआर में अधकारियों समेत अन्य लोगों पर हत्या, हत्या की कोशिश जैसी धाराएं लगाई गई हैं। पीडि़त परिवार ने आरोप लगाए हैं कि लेखपाल और एसडीएम के अलावा कुछ और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से रंज़िशन आग लगाकार दो लोगों की हत्या की गई है। कानपुर ज़ोन के कमिश्नर ने जांच के आदेश दिए हैं। कहा है कि दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।

परिवार का कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ़्तारी नहीं होती, तब तक वो अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। पीड़ित परिवार के मुताबिक़, तहसील प्रशासन के लोग एक मंदिर गिराने पहुंचे थे, जब उन्होंने झोपड़ी को आग के हवाले कर दिया।  

भीतर मौजूद कुछ लोग जान बचाकर भागे, लेकिन मां-बेटी आग में घिर गईं और दोनों की मौत हो गई। याद रहे जनवरी में पीड़ित परिवार का मकान गिरा दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने डीएम से मिलकर इंसाफ़ की गुहार लगाई थी। लेकिन प्रशासन से कोई राहत नहीं मिली।