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जन मुद्दे उठाने की कीमत चुका रहे राहुल गांधी, आवाज दबाने की कोशिश : कांग्रेस

कांग्रेस के अध्यक्ष रहे राहुल गांधी की एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद लोकसभा सदस्यता ख़त्म करने के लोकसभा स्पीकर के फैसले के बाद कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि राहुल गांधी जनता के मुद्दों पर बोलने की कीमत चुका रहे हैं। पार्टी ने कहा कि यह (मोदी) सरकार डरी हुई है क्योंकि राहुल गांधी तथ्यों और आंकड़ों के साथ बात करते हैं लिहाजा उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा – ‘हम सभी जानते हैं कि राहुल गांधी संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह निडर होकर बोलते रहे हैं। उन्होंने सामाजिक मुद्दों, आर्थिक मुद्दों, राजनीतिक मुद्दों पर बिना किसी डर के बात की है और स्पष्ट रूप से वह इसके लिए कीमत चुका रहे हैं।’

सिंघवी ने कहा कि यह सरकार परेशान है क्योंकि राहुल गांधी तथ्यों और आंकड़ों के साथ बात करते हैं। उन्होंने कहा – ‘यह सरकार उनकी (राहुल गांधी) की आवाज दबाने के नए नए तरीके ढूंढ़ रही है।’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सजा पर ‘स्टे’ मिलने का भरोसा है और इस तरह सदस्यता का निलंबन रद्द कर दिया जाएगा। सिंघवी ने शिकायतकर्ता को अपने ही मामले में हाई कोर्ट से ‘स्टे’ जारी कराने के लिए निशाना बनाया और इस साल फरवरी में इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए जागे और यहां तक कि मजिस्ट्रेट भी बदल दिया गया।

कांग्रेस ने कानूनी लड़ाई लड़ने के साथ ही इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने के लिए विपक्षी दलों को साथ लाने और जनता के बीच जाने का फैसला किया है। सिंघवी ने कहा – ‘हम सभी जानते हैं कि राहुल गांधी संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह निडर होकर बोलते रहे हैं। जाहिर है, वह इसकी कीमत चुका रहे हैं। सरकार बौखला गई है। यह सरकार उनकी आवाज दबाने के लिए नई तकनीक खोज रही है।’

प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद पार्टी प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद भाजपा डरी हुई है। राहुल को दोषी ठहराए जाने और उनकी सदस्यता खारिज किये जाने को लेकर रमेश ने आरोप लगाया कि मामला कर्नाटक में हुआ था और कानून के अनुसार, मजिस्ट्रेट को जांच करनी थी कि क्या मामला उनके अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन ऐसी किसी भी जांच के तहत ऐसा कोई निर्णय नहीं किया गया।

याद रहे गुरूवार को ही आपराधिक मानहानि मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद आज राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता निलंबित कर दी गई। कर्णाटक के कोलार में उन्होंने एक बयान में सभी मोदी ही क्यों चोर निकलते हैं’ की टिप्पणी की थी। सूरत कोर्ट ने उन्हें कल ही दोषी ठहराया था और दो साल की जेल की सजा सुनाई थी। अब उनकी संसदीय सदस्यता निलंबित कर दी गई है।

इस बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भी राहुल गांधी को अपना समर्थन दिया है।  टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा – ‘आज हमने अपने संवैधानिक लोकतंत्र के लिए एक नया निम्न स्तर देखा है। पीएम मोदी के न्यू इंडिया में, विपक्षी नेता बीजेपी के मुख्य लक्ष्य बन गए हैं जबकि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले भाजपा नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाता है। विपक्षी नेताओं को उनके भाषणों के लिए अयोग्य ठहराया जाता है।’

मोदी सरनेम मामला: दो साल की सजा के बाद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द

मोदी सरनेम मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अपनी लोकसभा सदस्यता गंवानी पड़ी है। इस मामले में गुरुवार को सूरत कोर्ट की ओर से उन्हें दो साल की सजा सुनाई जा चुकी है। हालांकि कोर्ट से उन्हें तत्काल ही जमानत भी मिल गयी  थी।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए 30 दिन की मोहलत देते हुए उनकी सजा को निलंबित किया गया था। आर्टिकल 102 (1) (e) के तहत यह फैसला किया गया था।

राहुल गांधी को दो साल की सजा मामले पर प्रतिक्रिया करते हुए पूर्व कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने गुरुवार को कहा कि, “राहुल दो साल की जेल की सजा के साथ एक सांसद के रूप में स्वत: अयोग्य हो जाते है हालांकि यह सजा अपने आप में विचित्र है।“

राहुल गांधी को सजा मिलने के बाद कांग्रेस ने बुलाई विपक्ष की बैठक, संसद से राष्ट्रपति भवन तक करेंगे मार्च

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मानहानि के एक मामले में सूरत कोर्ट ने गुरुवार को दोषी करार दिया था। हालांकि कोर्ट ने उन्हें तुरंत जमानत दे दी थी। और उन्हें निर्णय के खिलाफ अपनी करने के लिए 30 दिनों तक उनकी सजा को निलंबित कर दिया गया है।

राहुल गांधी को सजा मिलने के बाद कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि, “मैं जानता हूं कि ये निर्णय आया है एक 2019, कोलार में बेरोजगारी, कीमतों की बढ़ोतरी के दौरान कहे हुए कुछ शब्दों की स्पीच के दौरान। अब इस निर्णय के बारे में मैं आपको तीन-चार चीजें बताना चाहता हूं।“

उन्होंने आगे कहा कि, “मूल निचोड़ ये है कि जानबूझकर गलत केस को थोपकर आवाज को रोकना, बंद करना, डराना, धमकाना ये प्रक्रिया ये सरकार भिन्न-भिन्न रूप से कर रही है। साथ-साथ इससे कहीं ज्यादा आपत्तिजनक वक्तव्य दिन-प्रतिदिन इनके द्वारा, उनके मंत्रियों द्वारा, इनके वरिष्ठ नेताओं द्वारा, इनके कार्यकर्ताओं द्वारा अनदेखा, अनसुना कर दिया जाता है। लेकिन इस भय से अगर वो सोचते हैं कि किसी रूप से जनहित के मुद्दों को उठाने में कांग्रेस हिचकेगी या राहुल गांधी हिचकेंगे, तो ये गलत धारणा है।”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि, कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर एक बैठक हुई जिसमें करीब 50 सांसद, कांग्रेस स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य और पार्टी के अन्य नेता मिले और मल्लिकार्जुन खड़गे के घर बैठक हुई और यह बैठक दो घंटे चली। यह तय हुआ कि शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष विपक्ष की पार्टियों को बुलाया गया है और उनके साथ बैठक हुई और वे सभी संसद से राष्ट्रपति भवन तक मार्च करेंगे। साथ ही सोमवार को प्रमुख विपक्षी दल इस मामले को लेकर देशभर में अलग-अलग जगहों पर आंदोलन भी किए जायेंगे।

आपको बता दें, कर्नाटक के वायनाड से कांग्रेस के लोक सभा सदस्य राहुल गांधी ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान एक बयान दिया था जिसमें ‘…मोदी सरनेम’ वाले बयान को लेकर मानहानि के केस में गुजरात के सूरत कोर्ट ने राहुल गांधी को दोषी करार दिया है। सूरत कोर्ट का यह फैसला आज (यानी गुरुवार) को आया है। सूरत कोर्ट ने शुक्रवार को दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाने के लिए 23 मार्च की तारीख तय की थी। और आज राहुल गांधी आपराधिक मानहानि के इस मामले में अदालत में फैसले के वक्त पेश हुए हैं

जैकलीन फर्नांडिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में जमा किया अपना पासपोर्ट

मनी लांड्रिंग में सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 200 मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने तीन आरोपियों की न्यायिक हिरासत को बढ़ा दिया है। साथ ही जैकलीन फर्नांडिस के वकील ने कोर्ट में बताया कि वे विदेश यात्रा से वापस आ गर्इ है और उनका पासपोर्ट कोर्ट में जमा कर रहे है।

वहीं पटियाला हाउस कोर्ट ने जैकलीन के वकील से कहा कि, आप अपने क्लाइंट से कहिए कि वो कानून के प्रावधानों को गंभीरता से लें।

इस मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर को कोर्ट में पेश किया गया। उसने 5 करोड़ 11 लाख रुपये देने के प्रस्ताव पर कोर्ट में कहा कि, मेरी तरफ से एक छोटी सी भेंट है मैं एक अच्छा इंसान बनने की कोशिश कर रहा हूं।

मामले की सुनवाई के दौरान कई आरोपियों की तरफ से कहा गया कि अभी तक उनके एफएसएल रिपोर्ट नहीं मिली है। कोर्ट ने ईडी से कहा कि अगली सुनवाई तक एफएसएल रिपोर्ट जमा करें।

कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि अगर अगली सुनवाई पर एफएसएल रिपोर्ट नहीं आई तो उनके डायरेक्टर से पूछेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई पटियाला हाउस कोर्ट में 5 अप्रैल को होगी।

दिल्ली में पोस्टर वार: आप के बाद भाजपा ने लगाए अरविंद केजरीवाल के खिलाफ पोस्टर

दिल्ली में चर रही पोस्टर वार पर पुलिस की कार्रवाई के दो दिन बाद गुरुवार की सुबह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हटाने के लिए इसी तरह के पोस्टर देखने को मिले।

‘मोदी हटाओ, देश बचाओ’ के नारे वाले पोस्टर को दिल्ली में लगाया गया था जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई कर प्रिंटिंग प्रेस के दो मालिकों सहित कर्इ लोगों को इस मामले में गिरफ्तार भी किया था।

दिल्ली में आज लगाए गए पोस्टरों में ‘केजरीवाल हटाओ, दिल्ली बचाओ’ का नारा दिया गया है और पोस्टर में दावा किया गया है कि पोस्टर भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने लगाए है।

दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई के बारे में बताता हुए कहा कि, गिरफ्तारियां सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए की गर्इ है। कानून के तहत पोस्टरों पर प्रिंटिंग प्रेस का नाम होना जरूरी था। और दर्ज किए गए 138 मामलों में से 36 पीएम मोदी विरोधी पोस्टर के लिए थे।

वहीं दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल ने पुलिस के स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए कहा कि, “पीएम डर गए है। पोस्टरों पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है। मोदी जी इतने डरे हुए क्यों हैं? कोई भी इस पोस्टर को लगा सकता है। इतना डरा हुआ प्रधानमंत्री, इतना असुरक्षित प्रधानमंत्री।”

आम आदमी पार्टी ने ट्वीट कर कहा कि, “मोदी सरकार की तानाशाही चरम पर है!! इस पोस्टर में ऐसा क्या आपत्तिजनक है जो इसे लगाने पर मोदी जी ने 100 एफआईआर कर दी? पीएम मोदी, आपको शायद पता नहीं पर भारत एक लोकतांत्रिक देश है। एक पोस्टर से इतना डर क्यों? ”

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कहना है कि आप ने पोस्टर लगाकर कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता हरीश खुराना ने कहा कि, “आप में यह कहने की हिम्मत नहीं है कि उन्होंने विरोध किया। उन्होंने पोस्टर लगाकर कानून तोड़ा।”

सूरत की कोर्ट ने मोदी सरनेम मानहानि केस में राहुल गांधी को किया दोषी करार

कर्नाटक के वायनाड से कांग्रेस के लोक सभा सदस्य राहुल गांधी ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान एक बयान दिया था जिसमें ‘…मोदी सरनेम’ वाले बयान को लेकर मानहानि के केस में गुजरात के सूरत कोर्ट ने राहुल गांधी को दोषी करार दिया है।

सूरत कोर्ट का यह फैसला आज (यानी गुरुवार) को आया है। सूरत कोर्ट ने शुक्रवार को दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाने के लिए 23 मार्च की तारीख तय की थी। और आज राहुल गांधी आपराधिक मानहानि के इस मामले में अदालत में फैसले के वक्त पेश हुए हैं।

आपको बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘चोर’ कहने वाले मामले में सूरत कोर्ट ने राहुल गांधी को दोषी करार दिया है। राहुल गांधी ने आम चुनाव से पहले कर्नाटक के कोलार में आयोजित जनसभा में पीएम मोदी के सरनेम को लेकर टिप्पणी की थी जिसके बाद उन पर मानहानि का मामला दर्ज हुआ था।

राहुल गांधी ने कहा था कि, “क्यों सभी चोरों का समान उपनाम मोदी ही होता है?”। राहुल की इस टिप्पणी पर भाजपा के विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पुरनेश मोदी ने याचिका दायर की थी।

मेरिटल रेप को अपराध के दायरे में लाने की याचिका पर 9 मई को सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट  

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह मैरिटल रेप को अपराध के दायरे में लाने की याचिकाओं पर 9 मई को सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ता के लिए उनकी वकील इंदिरा जयसिंह ने सर्वोच्च अदालत से इस मामले की सुनवाई का आग्रह किया था। उधर केंद्र सरकार के लिए महान्यायधिवक्ता तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में केंद्र का जवाब तैयार है।

प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इस मामले में वे 9 मई को सुनवाई करेंगे। याद रहे 16 जनवरी को सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि वो तय करेगी कि मेरिटल रेप को अपराध के दायरे में लाया जाए या नहीं। अदालत ने केंद्र को 15 फरवरी तक जवाब दाखिल करने को कहा था।

सर्वोच्च अदालत ने सभी पक्षों से 3 मार्च तक लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा।  
प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ के सामने सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि ‘इस मामले का बड़ा असर होगा। हमने कुछ महीने पहले सभी हितधारकों से विचार मांगे थे। हम इस मामले में जवाब दाखिल करना चाहते हैं।’

मेरिटल रेप अपराध है या नहीं, इस पर दिल्ली उच्च  न्यायालय की दो जजों की पीठ  का 11  मई को बंटा हुआ फैसला सामने आया था। इसके बाद दोनों जजों ने इस मामले को सर्वोच्च अदालत में सुनवाई के लिए प्रस्तावित किया था। याद रहे याचिकाकर्ता ने भादंसं की धारा 375( रेप) के तहत मैरिटल रेप को अपवाद माने जाने को लेकर संवैधानिक तौर पर चुनौती दी थी। धारा के अनुसार विवाहित महिला से उसके पति द्वारा की गई यौन क्रिया को दुष्कर्म नहीं माना जाएगा जब तक कि पत्नी नाबालिग न हो।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भूकंप से 16 लोगों की मौत, 200 से ज्यादा हैं घायल

कई देशों को प्रभावित करने वाले मंगलवार के भूकंप में पाकिस्तान में 13 लोगों की मौत हो गयी है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक भूकंप से अफगानिस्तान में तीन लोगों की मौत हुई है जबकि सरकारी और निजी संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 200 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक भूकंप का असर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के अलावा चीन और भारत में रहा। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पाकिस्तान में इस्लामाबाद सहित पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के विभिन्न शहरों में भूकंप के कारण 13 लोगों की मौत हुई है जबकि 150 लोग घायल हुए हैं।  

आफ्गानिस्तान, जो भूकंप का केंद्र था, में जान गंवाने वालों की संख्या तीन हो गई है। वहां 40 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि वहां मरने वालों  बढ़ सकती है।

खैबर पख्तूनख्वा के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की तरफ से बताया गया है कि वहां कई मकानों की छतें, दीवारें और गिरने से कम से कम दो लोगों की जान चली गयी। वहां 6 लोग घायल हुए हैं। भूकंप से कम से कम आठ घरों को ज्यादा नुक्सान पहुंचा है।

उधर स्वात जिले में 11 लोगों की जान भूकंप के कारण गयी है। वहां 150 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं। पुलिस के मुताबिक घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस बीच खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के स्वाबी में एक घर की छत ढह गई जिससे एक परिवार के पांच सदस्य घायल हो गए। कई जगह सड़कें टूटने से यातायात बाधित हुआ है।

पाकिस्तान के पेशावर, कोहाट और स्वाबी में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। इसके अलावा लाहौर, क्वेटा और रावलपिंडी , गुजरांवाला, गुजरात, सियालकोट, कोट मोमिन, मध रांझा, चकवाल, कोहाट और गिलगित-बाल्टिस्तान इलाकों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।

भारत में राजधानी दिल्ली-एनसीआर में भी भूकंप के झटके महसूस करने के बाद डर कर लोग घरों से बाहर निकल आये और काफी समय तक भीतर नहीं गए। भूकंप के झटके दिल्ली समेत उत्तराखंड, पंजाब में भी महसूस किए। देश में, हालांकि, भूकंप से जान-माल के किसी नुक्सान की जानकारी नहीं है।

बिलकिस बानो मामला: समय से पहले रिहाई के खिलाफ वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या करने वाले 11 दोषियों की समय से पहले रिहाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए राजी हो गया है और एक बेंच गठित करने पर सहमत हो गया है।

गोधरा दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप व उसके परिवार के सदस्यों की हत्या करने वाले दोषियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि इस मामले में सभी दोषियों को पिछले वर्ष 15 अगस्त से मौके पर जेल से समय से पहले रिहा कर दिया गया था।

बता दें, पीड़िता बिलकिस बानो ने सभी दोषियों के रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर सभी दोषियों को दोबारा जेल भेजने की मांग की गई थी। वहीं इसके अलावा एक अन्य याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने उसके पुराने फैसले पर पुनर्विचार करने की भी मांग की जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की रिहाई पर गुजरात सरकार को फैसला लेने को कहा था।

वहीं बिलकिस बानो ने इस पर आपत्ति जताई थी और कहा कि जब पूरे मामले का ट्रायल महाराष्ट्र में चल रहा था जो गुजरात गुजरात सरकार इसक पर फैसला कैसे ले सकती है?

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में 11 लोगों को वर्ष 2008 में दोषी करार दिया था। दोषियों को पहले मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा गया जिसके बाद उन्हें गोधरा की एक जेल में भेज दिया गया था। किंतु पिछले वर्ष सभी दोषियों को उनकी सजा पूरी होने से पहले ही जेल से रिहा कर दिया गया था। और रिहाई के बाद दोषियों को माला पहनाकर स्वागत भी किया गया था।

आपको बता दें, वर्ष 2002 में गुजरात में गोधरा कांड के बाद दंगे भड़के थे। और इस दौरान भीड़ दाहोद जिले के लिमखेड़ा के रंधिकपुर में बिलकिस बानो के घर में घुस गई थी। किंतु दंगाइयों से अपना बचाव करने के लिए बिलकिस बानो खेत में छुपी हुई थी।

बिलकिस बानो और उनकी मां समेत तीन लोगों के साथ दंगाइयों ने रेप किया। उस समय बिलकिस बानो की आयु 21 वर्ष थी साथ ही वे 5 महीने की गर्भवती भी थी। रेप के साथ ही दंगाइयों ने उनके परिवार के 7 लोगों की हत्या भी कर दी थी। और इस मामले में 6 लोग लापता हुए जिनका अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है

दिल्ली बजट:  साफ, सुंदर और मॉडर्न दिल्ली का है लक्ष्य– कैलाश गहलोत

राजधानी दिल्ली में केजरीवाल सरकार आज अपना नौवां बजट पेश कर रही है। वित्त मंत्री कैलाश गहलोत ने बजट पेश करते हुए कहा कि, यह बजट साफ, सुंदर और आधुनिक दिल्ली को समर्पित कर रहा हूं।

इससे पहले आठ बजट मनीष सिसोदिया ने पेश किए थे लेकिन दिल्ली की शराब नीति मामले में कथित घोटाले के आरोप में सीबीआई और ईडी ने गिरफ्तार किया था। जिसके बाद कैलाश गहलोत को वित्त मंत्री बनाया गया है।

कैलाश गहलोत ने कहा कि, “सरकार में भ्रष्टाचार के लिए जीरो टॉलरेंस नीति है, अब सरकार घर घर जाकर सुविधा देती है। दिल्ली का इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत मायने रखता है और इंफ्रास्ट्रक्चर ने दिल्ली का चेहरा भी बदल दिया है। बरापुल्ला फ्लार्इओवर का तीसरा चरण जल्द पूरा होगा। आठ साल में पीडब्ल्यूडी ने 28 नए फ्लाईओवर, एलिवेटेड सड़क, और पुल बनाए है। बीते आठ सालों में दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क भी दोगुना हो गया है। ”

वित्त मंत्री ने आगे कहा कि, यदि मनीष सिसोदिया ये बजट पेश करते तो खुशी होती। मनीष सिसोदिया मेरे बड़े भाई है। जब श्री राम वनवास गए थे और भरत ने राज सिंह सिंहासन खड़ाऊ रखकर काम किया वैसे ही काम करूंगा। अगला बजट मनीष सिसोदिया पेश करेंगे।

वहीं सीएम अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि, “आज दिल्ली का बजट पेश किया जाएगा। दिल्ली के सब लोग आज मनीष जी को बहुत मिस कर रहे हैं। पर उनके काम रुकने नहीं देंगे। उनके द्वारा शुरू किए गए सभी काम दोगुनी स्पीड से किए जाएँगे। ”

आपको बता दें, दिल्ली सरकार का बजट पहले मंगलवार को पेश किया जाना था किंतु केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विज्ञापन पर खर्च समेत कई मुद्दों पर केजरीवाल सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए इस पर रोक लगा दी थी। सरकार के स्पष्टीकरण के बाद गृह मंत्रालय ने इस पर मंजूरी दे दी थी।