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रिश्वत पर निर्भर परीक्षा परिणाम

– परीक्षाओं में धाँधली से ख़राब हो रहा युवाओं का भविष्य

नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (नीट) यूजी के रिजल्ट से इस परीक्षा को पास करने वाले विद्यार्थियों, ख़ासकर टॉपर्स को जो ख़ुशी मिली, वह चिन्ता में बदल गयी है। देश भर में नीट की परीक्षा में हुई धाँधली पर उठे सवालों और रिश्वत की बात सामने आने से साफ़ लगता है कि यह एक घोटाला है। इस घोटाले की सीबीआई जाँच की माँग भी उठ रही है। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, तो सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए से तीखे सवाल पूछे। अब 1,563 विद्यार्थियों के ग्रेस मार्क्स रद्द करके एनटीए उनकी फिर से 23 जून को परीक्षा लेगा।

पेपर लीक ऐसे समय में हुआ, जब देश में लोकसभा चुनाव चल रहे थे और ख़ुलासा तब हुआ, जब केंद्र में एनडीए की मोदी के नेतृत्व वाली सरकार तीसरी बार बन रही थी। अब बैसाखियों के सहारे सरकार बन चुकी है। ऐसे में सवाल यह है कि सबसे ज़्यादा परीक्षा घोटाले कराने को लेकर कथित रूप से बदनाम भाजपा और रोज़गार ख़त्म करने को लेकर बदनाम केंद्र सरकार क्या इस परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर कोई उचित क़दम उठाएगी?

हैरानी की बात है कि नीट परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक पर 67 विद्यार्थियों ने परीक्षा टॉप की। इन सभी विद्यार्थियों ने 720 में 720 अंक हासिल किये, जिनमें 53 लड़के और 14 लड़कियाँ शामिल हैं। कई विद्यार्थियों को 719, 718 और 117 अंक भी मिले, जो असंभव है। 720 अंक पाने वाले 67 विद्यार्थियों में से छ: एक ही सेंटर के विद्यार्थी हैं। टॉप करने वाले सबसे ज़्यादा 11 विद्यार्थी राजस्थान के रहे। इसके अलावा कट ऑफ 137 अंकों से बढ़कर 164 अंकों पर पहुँच गयी। नीट 2024 के लिए परीक्षा देने वाले कुल 23,33,000 विद्यार्थियों में से कुल 13,16,000 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। सवाल यह है कि नीट की परीक्षा में इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थी टॉप कैसे कर गये? जबकि यह परीक्षा न सिर्फ़ कठिन होती है, बल्कि इस परीक्षा को एक या दो विद्यार्थी ही टॉप करते हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने जिस तरह से नीट परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को 717 से 720 अंक तक दिये हैं, वह असंभव है।

किसी एक-दो विद्यार्थी के इतने अंक आना फिर भी समझ में आता; लेकिन 67 विद्यार्थियों को 720 अंकों में 720 अंक मिलना गले नहीं उतरता। अब ख़बरें आ रही हैं कि परीक्षा से एक दिन पहले नीट का पेपर लीक हुआ था, जिसके लिए 40 लाख तक रिश्वत लेने के आरोप लग रहे हैं। पटना पुलिस ने इस मामले में ज़िला परिषद के जूनियर इंजीनियर और विद्यार्थियों समेत 13 लोगों को गिरफ़्तार किया। आरोप है कि पटना में विद्यार्थियोंं को बाक़ायदा पेपर दिखाकर पेपर में दिये प्रश्नों के उत्तर रटने के कहा गया। पटना में शास्त्री नगर थाना क्षेत्र के एक लॉज में रहकर नीट की तैयारी करने वाले ललित कुमार नाम के एक विद्यार्थी ने नीट परीक्षा में कम अंक आने पर फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। विद्यार्थी भोजपुर ज़िले के झाझर गाँव का निवासी था।

परीक्षा दोबारा कराने के फ़ैसले से कुछ दिन पहले ही एनटीए के महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह, उच्च शिक्षा सचिव के. संजय मूर्ति और सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव संजय जाजू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके नीट परीक्षा में लगे आरोपों को ख़ारिज कर दिया था। एनटीए के महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह ने कहा था कि हमने सभी चीज़ों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया है। नीट का पेपर 23 लाख से ज़्यादा विद्यार्थियों ने 4,750 सेंटर्स में दिया है, जबकि पेपर लीक का मामला सिर्फ़ 1,600 विद्यार्थियों और छ: सेंटर्स का ही है। ग्रेस मार्क्स के मामले में एक चार सदस्यीय समिति गठित की गयी है, जो एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपेगी। समिति की रिपोर्ट के हिसाब से फ़ैसला लिया जाएगा। फ़िलहाल परीक्षा रद्द करने का सवाल नहीं उठता है। विद्यार्थियों को ग्रेस मार्क्स देने से नीट के नतीजों या क्वालीफाइंग क्राइटएरिया पर कोई फ़र्फ़ नहीं पड़ रहा है।

नीट परीक्षा में बड़ी संख्या में टॉपर्स होने की हैरतअंगेज स्थिति और पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वालों का तर्क है कि नीट के पेपर लीक मामला संविधान के अनुच्छेद-14 में वर्णित समानता के अधिकार का उल्लंघन है। सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दोषियों को सज़ा देगा? सुप्रीम कोर्ट के अलावा अलग-अलग राज्यों में हाई कोर्ट्स में भी नीट परीक्षा में धाँधली के ख़िलाफ़ याचिकाएँ दायर की गयी हैं।

एनटीए के महानिदेशक ने भले ही नीट परीक्षा के मामले में सफ़ाई दे दी; लेकिन एनटीए पर जमकर सवाल उठ रहे हैं और धाँधली के आरोप लग रहे हैं। शुरू से ही ग्रेस मार्क्स पाने वाले विद्यार्थी दोबारा परीक्षा से डर रहे थे और फेल हुए विद्याथी, जिनमें ज़्यादातर निम्न और मध्यम वर्ग के हैं, दोबारा परीक्षा की माँग कर रहे थे। लेकिन अब परीक्षा उन्हीं की होगी, जिन्हें ग्रेस मार्क्स मिले हैं? लेकिन पूरे देश में नीट परीक्षा में हुई कथित धाँधली और कथित घोटाले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहे हैं। गुजरात के पंचमहल ज़िले के गोधरा में आयोजित नीट परीक्षा में गड़बड़ी का ख़ुलासा होने पर यहाँ लोगों में नाराज़गी है।

आरोप है कि गुजरात में नीट परीक्षा देने से पहले विद्यार्थियों को अच्छे अंकों से पास कराने के लिए रिश्वतख़ोरी हुई थी। आरोप यहाँ तक है कि गुजरात के गोधरा ज़िला कलेक्टर की निगरानी से घोटाला हुआ है, जिसमें ख़ुद ज़िला शिक्षाधिकारी ने तीन लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करायी है। एफआईआर के मुताबिक, ज़िला कलेक्टर ने दावा किया है कि उन्हें 05 मई को होने वाली नीट परीक्षा में घोटाला होने की सूचना मिली, जिसके आधार पर ज़िला कलेक्टर ने ज़िला शिक्षा अधिकारी को इसकी जानकारी दी। घोटाला करने की साज़िश का पर्दाफ़ाश करने के लिए ज़िला शिक्षा अधिकारी ने गोधरा जलाराम स्कूल पहुँचकर छापे मारे, जिसमें छ: विद्यार्थी नक़ल करते पकड़े गये। ज़िला अधिकारी ने डिप्टी सेंटर सुपरिटेंडेंट तुषार भट्ट के मोबाइल पर हुई व्हाट्सएप चैट से पूरे मामले का भंडाफोड़ किया।

जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि तुषार भट्ट के व्हाट्सएप नंबर पर परशुराम रॉय नाम के एक शख़्स ने क़रीब 16 विद्यार्थियों के नाम और रोल नंबर भेजे थे, जिनमें से कुछ के नाम बाद में कैंसिल के लिए भी मार्क किये गये थे। जब इस मामले में ज़िला शिक्षाधिकारी ने तुषार भट्ट से पूछताछ की, तो उन्होंने परशुराम रॉय के साथ परीक्षा में एक विद्यार्थी को अच्छे अंकों से पास कराने के बदले 10 लाख रुपये रिश्वत लेने की डील की बात स्वीकार की। कई विद्यार्थियों ने परीक्षा से पहले दलाल रॉय को एडवांस भी दे दिया था। आरिफ़ नाम के एक विद्यार्थी ने तुषार भट्ट को एडवांस में सात लाख रुपये दिये थे। पुलिस ने इन पैसों और मोबाइल को जाँच टीम ने ज़ब्त करके तुषार भट्ट, परशुराम रॉय और आरिफ़ वोरा के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी, विश्वासघात की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। मामले की जाँच चल रही है।

आरोप लग रहे हैं कि जिन-जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, उन-उन राज्यों में नीट परीक्षा में धाँधली हुई है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार और हरियाणा में नीट परीक्षा में बड़ा घोटाला हुआ है। कुछ लोग उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड में भी धाँधली का आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस की नेशनल स्टूडेंट्स विंग ऑफ इंडिया के प्रभारी कन्हैया कुमार ने नीट परीक्षा में कथित घोटाले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कहा कि स्टूडेंट्स आत्महत्या कर रहे हैं। आज 600 अंक लाने के बाद भी स्टूडेंट असमंजस में हैं कि उसे सीट मिलेगी या नहीं। एनटीए के इस नीट घोटाले की जाँच सर्वोच्च न्यायिक अधिकारियों से कार्रवाई जानी चाहिए और प्रभावित स्टूडेंट्स को उचित न्याय दिया जाना चाहिए।

बता दें कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा पेपर लीक के लिए बदनाम राज्य हैं। पिछले 10 वर्षों में इन राज्यों में न सिर्फ़ पेपर लीक के कई मामले उजागर हुए हैं, बल्कि ये मामले कोर्ट तक भी पहुँचे हैं। जब 05 मई, 2024 को नीट की परीक्षा हो रही थी, उसी समय राजस्थान के एक परीक्षा केंद्र पर पेपर लीक की ख़बरें सामने आयी थीं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, जिसकी सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई का समय दिया। लेकिन बीच में ही नीट का रिजल्‍ट आने पर कथित घोटाले की एक बड़ी फ़ेहरिस्त खुल गयी। साल 2015 में एमबीबीएस, बीडीएस एडमिशन के लिए नेशनल लेवल मेडिकल प्रवेश परीक्षा ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट (एआईपीएमटी) में पेपर लीक के आरोप लगे थे। फरवरी, 2024 में उत्तर प्रदेश में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में पेपर लीक हुआ। इसके बाद मई, 2023 में गुजरात में विद्युत सहायक भर्ती परीक्षा घोटाला सामने आया। जुलाई, 2023 में मध्य प्रदेश में पटवारी भर्ती घोटाला हुआ। सितंबर, 2022 में सीबीआई ने एसएससी भर्ती घोटाले के किया। सितंबर, 2022 में ही उत्तराखण्ड में यूकेएसएसएससी का पेपर लीक हुआ। मई 2016 में बिहार स्कूल परीक्षा घोटाला सामने आया।

इस तरह हर साल हर छोटी-बड़ी परीक्षा के पेपर लीक या उनमें नक़ल कराने के ख़ुलासे लगातार हुए हैं; लेकिन आज तक किसी भी परीक्षा घोटाले में कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गयी। धाँधली करने के नाम पर किसी-किसी परीक्षा में कुछ लोगों गिरफ़्तार किया गया, लेकिन आगे के परीक्षा में धाँधली नहीं रोकी गयी। इससे पहले से ही कड़ी मेहनत करके तमाम परेशानियों और अभावों में परीक्षा देने वाले ईमानदार विद्यार्थियों के करियर पर ख़राब असर पड़ा है। आज करोड़ों की संख्या में बेरोज़गार घूम रहे विद्यार्थी महँगी पढ़ाई और कई-कई साल की कड़ी मेहनत के बावजूद रोज़गार से वंचित हैं, जिसके चलते हर साल सैकड़ों विद्यार्थी आत्महत्या कर रहे हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़ों के मुताबिक, साल 2021 में देश में 13,089 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की थी। आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों की साल 2020 में संख्या 12,526 थी। साल 2021 में आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों में लड़कों की संख्या 56.54 फ़ीसदी, जबकि लड़कियों की संख्या 43.49 फ़ीसदी थी। ये आँकड़े बताते हैं कि भारत में शिक्षा और परीक्षा का स्तर बहुत ख़राब है और विद्यार्थियों पर करियर बनाने का तनाव और माँ-बाप से लेकर समाज का प्रेशर होता है, जिनके चलते फेल होने या परीक्षा क्लियर न कर पाने की सोच से कई छात्र आत्महत्या जैसा घातक क़दम उठा बैठते हैं।

आखिर क्यों चर्चा में हैं रामपुर के सांसद मौलाना नदवी ?

खालिद सलीम

2024 के लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद उत्तर प्रदेश की चर्चा हर खास-ओ-आम कर रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा रामपुर सीट पर पहली बार में ही लोकसभा सीट पर जीते मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी की हो रही है। हालांकि इसमें कोई दोराय नहीं कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की शानदार जीत के पीछे भले ही कई कारण हों, लेकिन मुसलमानों का भरपूर साथ मिलना इस उपलब्धि के लिए एक बड़ी बात रही। आज समाजवादी पार्टी सीटों की संख्या के हिसाब से देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। उत्तर प्रदेश की 80 संसदीय सीटों में से समाजवादी पार्टी के 37 सांसद चुनकर संसद पहुंचे हैं।
इन्हीं 37 सांसदों में से एक हैं- सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी। सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी दिल्ली के पार्लियामेंट मस्जिद के इमाम भी हैं। इससे भी बड़ी बात है कि आजाद हिंदुस्तान की तारीख में मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ऐसे पहले सांसद हैं, जो किसी मस्जिद के इमाम भी हैं। अलग बात यह है कि मौलाना मोहिबुल्लाह का राजनीतिक सफर उसी रामपुर से शुरू हुआ है, जो रामपुर आजम खान और उनके खानदान की सियासत का गढ़ रहा है। जानकार कह रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की योगी सरकार से नाखुश रामपुर के ज्यादातर लोगों, खासतौर पर समाजवादी पार्टी के समर्थकों और मुसलमानों की एकतरफा वोटिंग का फायदा मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को मिला।
आजकल सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी का एक इंटरव्यू बहुत ज्यादा चर्चा में है, जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी नेता और पूर्व सांसद आजम खान को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर हमला बोला है। एक पत्रकार ने उनसे जब यह पूछा कि आजम खान के बारे में उनके क्या खयाल है? तो मौलाना मोहिबुल्लाह ने इस सवाल के जवाब में कहा कि वह सुधार गृह में हैं। हम सब जानते हैं कि आजम खान के खिलाफ पिछले 10 सालों में क्या कुछ नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश की हुकूमत ने उनके खिलाफ बकरी चोरी, भैंस चोरी, किताबों की चोरी और ऐसे ही बहुत से मुकदमे बनाकर उन्हें जेल में डाला है। और अब आखिर में उनके साथ-साथ उनकी पत्नी और उनके बेटे को एक जाली बर्थ सर्टिफिकेट के केस में जेल में डाल दिया गया है। अब उनकी पत्नी को तो जमानत मिल गई है, लेकिन वह और उनके बेटे जेल के अंदर ही हैं। हालाँकि लोग मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी की बातों का मतलब यह भी निकाल रहे हैं कि उन्होंने पूर्व सांसद आजम खान के खिलाफ बयान दिया है, क्योंकि उन्होंने कहा कि वह (आजम खान) सुधार गृह में हैं। इससे ऐसा लगता है जैसे कि उनके पूर्ववर्ती सांसद किसी वास्तविक जुर्म में अंदर हैं और वह एक माफिया हैं, जिनका सुधार जेल के अंदर हो रहा है। सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी के इस बयान से हिंदुस्तान के इंसाफ पसंद लोग नाखुश हैं, खास तौर से रामपुर और उत्तर प्रदेश के मुसलमानों में इसकी चर्चा है कि एक मौलवी, जो मस्जिद के इमाम भी हैं; उन्होंने एक ऐसे नेता के खिलाफ यह बयान दिया है, जिसने तालीम के मैदान में पिछड़े हुए मुसलमान के लिए अपनी जिंदगी में एक पूरी यूनिवर्सिटी बनाकर खड़ी कर दी। उनका यह बहुत बड़ा योगदान है। इसके अलावा आजम खान उत्तर प्रदेश में मंत्री रहे हैं, संसद के सदस्य के अलावा हिंदुस्तान के कद्दावर नेता हैं।
कुल मिलाकर नव निर्वाचित सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी के बयान का क्या मतलब था और लोगों की उनके प्रति नाराजगी क्यों हैं, यह तो नहीं कहा जा सकता है। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि आजम खान के खिलाफ जो भी मुकदमे बनाए गए हैं, वो सच्चाई से ज्यादा सियासी दुश्मनी की बू आती है। क्योंकि उन्होंने भाजपा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी को लेकर जो बयान दिए थे, उसे भाजपा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सह नहीं सके और उनके कुछ बयानों के बाद ही उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई थी। ठीक उसी तरह, जिस तरह दूसरे बहुत से हवालों से पिछले 10 साल में प्रदेश के मुसलमानों को टारगेट करके उनके नेताओं के उनके खिलाफ मुकदमे बनाकर उन्हें जेल में डाला गया है। ऐसे में आजम खान को लेकर अगर सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी यह कहते हैं कि वह सुधार गृह में हैं, तो उनकी सियासी सूझबूझ पर सवालिया निशान लगेंगे ही। कहा जा रहा है कि मौलाना नदवी के बयान से सिर्फ मुसलमान ही नहीं, बल्कि हर इंसाफ पसंद हिंदुस्तानी उनसे सख्त नाराज है। अब लोग सवाल भी पूछ रहे हैं कि मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी कभी मीडिया को ये भी बताएंगे कि उन्होंने कितनी शादियां की है? वह कितनी बीवियों को तलाक दे चुके हैं? और उनकी एक बीवी ने उनके खिलाफ मुकदमा क्यों दायर कर रखा है? चुनाव के दौरान एक पत्रकार ने जब उनसे यही सवाल पूछा कि उनकी एक बीवी ने उनके खिलाफ कोर्ट में मुकदमा कर रखा है, उसके बारे में उन्हें क्या कहना है? तो मौलाना ने कहा था कि यह मामला कोर्ट का है। तो फिर पूर्व सांसद आजम खान के ताल्लुक से भी उन्हें यही बयान देना चाहिए था कि कोर्ट ने उनको सजा दी है। अब वह अपनी सजा काट रहे हैं। मैं इसके बारे में क्या कह सकता हूं? हम आजम खान को इन परेशानियों से निकालने की कोशिश करेंगे और सांसद होने के नाते हम देखेंगे के उनके लिए हम क्या कर सकते हैं। इसके बजाय उन्होंने सीधा आजम खान को ऐसे मुजरिमों के साथ में खड़ा कर दिया, जो कि जुर्म के बाद जेल में हैं।
लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह रामपुर और रामपुर से बाहर के लोगों के लिए, जरूरतमंदों के लिए कुछ ऐसे काम करें, जो हिंदुस्तान के मुसलमानों का सिर फख्र से ऊंचा करे और उनकी उम्मीदों पर आप खरे उतरें। आप एक मसजिद के इमाम हैं। मौलवी हैं और अब एक सांसद भी हैं। मौलवी बिरादरी समेत आम मुसलमान मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को यह ओहदा मिलने से खुश हैं कि एक आलिम उनके बीच से चुनकर संसद पहुंचे हैं। लेकिन उन्होंने अपने पहले ही इंटरव्यू में सबको निराश कर दिया है। नव निर्वाचित सांसद और मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को चाहिए कि वह अपने इस बयान से पल्ला झाड़ें और आइंदा इस तरह के बयानात से परहेज करें। लोगों की उम्मीद पर खरा उतरने की कोशिश करें।

(उपरोक्त विचार लेखक के अपने हैं और इसके लिए वह खुद जिम्मेदार होंगे।)

अप्रैल-जून तिमाही में विकास दर 7.2 प्रतिशत से ज्यादा रहने का अनुमान : आरबीआई

मुंबई : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास ने उम्मीद जताई है कि पिछले वित्त वर्ष की मजबूत विकास दर चालू वित्त वर्ष में भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025 की अप्रैल-जून तिमाही में भी मजबूत विकास दर जारी रहेगी। इसे अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद से बल मिलेगा। दास ने मंगलवार को एक मीडिया कार्यक्रम में कहा, “हमें इस बात को लेकर काफी उम्मीद है कि हमने इस साल की पहली तिमाही के लिए जो अनुमान लगाया है -7.2 % का, हम उससे आगे 7.3 प्रतिशत पर चले जाएंगे।”

गवर्नर शक्तिकांत  दास ने यह भी कहा कि निजी खपत में सुधार हो रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कृषि क्षेत्र में मजबूत वृद्धि के कारण ग्रामीण मांग में सुधार हो रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस बार सामान्य से अधिक मानसून का अनुमान लगाया है, जिसके चलते खरीफ उत्पादन में वृद्धि होने की उम्मीद है। आरबीआई ने 7 जून को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए वास्तविक जीडीपी का अनुमान पहले के अनुमान 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया था।

गवर्नर ने कहा कि वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही में जीडीपी विकास दर 7.3 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 7.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 7.3 प्रतिशत और अंतिम तिमाही में 7.2 प्रतिशत रहने की संभावना है।

भारत का सबसे महंगा शहर बना मुंबई

मुंबई : भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई सबसे महंगे शहर के तौर पर शीर्ष स्थान पर बनी हुई है। मुंबई ने दिल्ली जैसे शहर को पीछे छोड़ दिया है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। एशिया में, पहले नंबर पर मुंबई और दूसरे नंबर पर दिल्ली है। यहां खर्चे और रहने की लागत, दोनों ही मामले में यह सबसे महंगा शहर है। रैंकिंग में मुंबई छह पायदान ऊपर चढ़ गया है, जबकि दिल्ली दो पायदान ऊपर आई है।

कॉस्ट ऑफ लिविंग की मर्सर सर्वे 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई अब प्रवासियों के लिए एशिया में 21वें स्थान पर है, जबकि दिल्ली सर्वे किए गए स्थानों में 30वें पोजीशन पर है। मर्सर में इंडिया मोबिलिटी लीडर राहुल शर्मा ने कहा, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत काफी हद तक मजबूत स्थिति में है। भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण विकास हुआ है। सर्वे के अनुसार, रोजगार वृद्धि, मध्यम वर्ग का बढ़ता दायरा और समग्र आर्थिक विकास जैसे कारकों ने देश में रहने की लागत को प्रभावित किया है।

राहुल शर्मा ने कहा, “मुंबई की रैंकिंग में वृद्धि के बावजूद, भारतीय शहरों में रहने की कम लागत ने मल्टीनेशनल कंपनियों या भारतीय कंपनियों को वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने में काफी हद तक फायदा हुआ है।” वैश्विक स्तर पर, हांगकांग ने एक बार फिर रहने के लिए सबसे महंगे शहर की लिस्ट में टॉप पर जगह बनाई है। इस साल के सर्वे में, मुंबई 11 पायदान चढ़कर वैश्विक स्तर पर 136वें स्थान पर पहुंच गया है।

रैंकिंग में शामिल अन्य भारतीय शहरों में 4 पायदान की उछाल पर नई दिल्ली (164), 5 पायदान की गिरावट के साथ चेन्नई (189), 6 पायदान की गिरावट के साथ बेंगलुरु (195), स्थिरता पर हैदराबाद (202), 8 पायदान की उछाल के साथ पुणे (205) और 4 पायदान की उछाल के साथ कोलकाता (207) है। सर्वे में कहा गया है कि ऊर्जा और लागत के मामले में मुंबई और पुणे सबसे महंगे शहर बने हुए हैं। शर्मा ने कहा, घरेलू मांग और मजबूत सेवा क्षेत्र द्वारा संचालित हमारी संपन्न अर्थव्यवस्था वैश्विक प्रतिभा के लिए एक स्थिर वातावरण प्रदान करती है।

सकारात्मक राजनीति का परिणाम हमेशा ही सकारात्मक मिलेगा : तेजस्वी यादव

पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को जहां रिक्त सरकारी पदों को भरने में मिशन मोड में काम करने का निर्देश वरिष्ठ अधिकारियों को दिया है, वहीं विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को नौकरियों को लेकर पुरानी महागठबंधन की सरकार को ‘क्रेडिट’ देने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि हमारी सकारात्मक राजनीति का परिणाम हमेशा ही सकारात्मक मिलेगा।

राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि हमने 𝟏𝟕 महीनों के अल्प कार्यकाल में 𝟓 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी। इसी दौरान तीन लाख सरकारी नौकरियां प्रक्रियाधीन करवाई जो चुनाव आचार संहिता के कारण कुछ महीनों से रुकी थी। महागठबंधन की सरकार जाने से पहले पूर्व निर्धारित तीसरे चरण में एक लाख शिक्षकों की भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने की वजह से वह रद्द हो गयी थी।

उन्होंने आगे सरकार से कहा, “अब लोकसभा चुनाव पूर्ण हो चुके हैं। पहले से प्रक्रियाधीन तीन लाख नौकरियों के अलावा सरकार हमारी सरकार के निर्णय अनुसार सभी विभागों की बाकी रिक्तियों पर यथाशीघ्र बहाली प्रक्रिया शुरू कर नियुक्तियां कराए।”

उन्होंने दावा करते हुए एक बयान में कहा कि यही एनडीए और मुख्यमंत्री हैं जो कहते थे कि 10 लाख सरकारी नौकरियां देना असंभव है। इतनी नौकरियों का पैसा तेजस्वी कहां से लाएगा? जब हमारे साथ सरकार में आकर बैठे तो हमने साइंटिफिक तरीके से मुख्यमंत्री जी सहित वरीय अधिकारियों (जो इनके कार्यकाल में हमेशा संविदा और आउटसोर्सिंग के पक्षधर रहे) को बताया और समझाया कि कैसे 𝟏𝟎 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी जा सकती हैं। इससे पहले तक वो यह मानने को ही तैयार नहीं होते थे कि बिहार में लाखों पद रिक्त भी हैं।

तेजस्वी ने आगे कहा कि हमारी सकारात्मक राजनीति का परिणाम हमेशा ही सकारात्मक मिलेगा। जिन लाखों युवक-युवतियों को नौकरियां मिली और मिलेंगी, उन पर हमारी इस पॉजिटिव और प्रोग्रेसिव और मुद्दे आधारित राजनीति का जीवन भर प्रभाव रहेगा।

एक्स ने भारत में दो लाख से अधिक खातों पर लगाया प्रतिबंध

नई दिल्ली : एलन मस्क की कंपनी एक्स ने 26 अप्रैल से 25 मई के बीच भारत में 2,29,925 खातों पर प्रतिबंध लगा दिया। इनमें से अधिकतर बाल यौन शोषण और नग्नता को बढ़ावा देने वाले थे। उथल-पुथल से गुजर रहे माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ने देश में आतंकवाद को बढ़ावा देने पर 967 खातों को भी हटा दिया। कुल मिलाकर, एक्स ने 230,892 खातों पर प्रतिबंध लगाया।

माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ने अपनी मासिक रिपोर्ट में कहा कि उसे भारत में यूजर्स से 17,580 शिकायतें मिलीं। खाता निलंबन की अपील करने वाली 76 शिकायतों पर कंपनी ने कार्रवाई की। कंपनी ने कहा, “हमें इस रिपोर्टिंग अवधि के दौरान खातों के बारे में सामान्य प्रश्नों से संबंधित 31 अनुरोध प्राप्त हुए।” भारत से सबसे अधिक शिकायतें प्रतिबंध से बचने (6,881) के बारे में थीं, इसके बाद घृणित आचरण (3,763), संवेदनशील वयस्क सामग्री (3,205) और दुर्व्यवहार/उत्पीड़न (2,815) के बारे में थीं। 26 मार्च से 25 अप्रैल के बीच, एक्स ने देश में 1,84,241 खाते प्रतिबंधित किए। माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ने अपने प्लेटफॉर्म पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए 1,303 खाते भी बंद किए।

बंगाल रेल हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 हुई

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में सोमवार सुबह हुए रेल हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी में हुए ट्रेन हादसे में मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। इसकी घोषणा रेल मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए दी है। उन्होंने सोमवार को एक्स पर लिखा, पीड़ितों को बढ़ी हुई अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी; मृत्यु की स्थिति में 10 लाख रुपये और गंभीर रूप से चोटिल को 2.5 लाख रुपये और मामूली रूप से घायलों को 50,000 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

इससे पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हादसे पर दुख जताते हुए एक्स पर लिखा कि रेलवे के एनएफआर जोन में दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हुआ है। बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। रेलवे, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ पूरे तालमेल के साथ काम कर रहे हैं। घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।

वहीं कंचनजंगा एक्सप्रेस हादसे पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने मृतकों के परिवार वालों को 2 लाख रुपये और घायलों की 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक्स पर लिखा, ”प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की है कि पश्चिम बंगाल में रेल दुर्घटना में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।”

बता दें कि पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में सोमवार को बड़ा रेल हादसा हो गया। न्यू जलपाईगुड़ी के रंगापानी स्टेशन के पास कंचनजंगा एक्सप्रेस पर पीछे से आ रही मालगाड़ी ने टक्कर मार दी। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई है। जबकि कई यात्रियों के घायल होने की भी खबर है।

चुनाव 2024 : जनादेश में संदेश

जनादेश का संदेश बिलकुल स्पष्ट है कि ज्वलंत मुद्दों को अपने जोखिम पर नज़रअंदाज़ करें और उससे भी अधिक लोकतंत्र को विपक्ष-मुक्त बनाने का कभी सपना न देखें। अबकी बार 400 पार के नारे ने शायद यही बताने की कोशिश की थी; लेकिन यह सिर्फ़ एक बयानबाज़ी बनकर रह गया है। हालाँकि पार्टी थिंक टैंक का मानना है कि इस नारे के बिना शालीनता जनादेश को और भी मुश्किल बना देती। संदेश यह है कि जब बेरोज़गारी, मुद्रास्फीति, अग्निवीर, कृषि क्षेत्र में अशान्ति और राज्य की ताक़त का प्रदर्शन जैसे अनसुलझे मुद्दे हों, तो आप मतदाताओं को गारंटी के लिए नहीं ले सकते। एग्जिट पोल के पक्षपातपूर्ण पूर्वानुमानों ने अधिकांश मुख्यधारा की मीडिया और पक्षपाती चुनाव विशेषज्ञों को बेनक़ाब कर दिया।

इधर शेयर बाज़ारों में ख़ून-ख़राबे की स्थिति आ गयी, जब 15 महीनों में रुपये में सबसे बड़ी गिरावट देखी गयी। वास्तव में एनडीए ने इंडिया गठबंधन द्वारा दिये गये झटके से ख़ुद को उबार लिया है और एन. चंद्रबाबू नायडू जैसे क्षेत्रीय क्षत्रपों के समर्थन से केंद्र में सरकार बनायी है, जिन्हें राजनीतिक गुमनामी से हटाकर सरकार बरक़रार रखने के लिए नीतीश कुमार के साथ निर्णायक भूमिका में लाया गया है।

भाजपा ने ओडिशा में अच्छा प्रदर्शन किया है और दक्षिण में बड़ी बढ़त बनायी है। दिल्ली, हिमाचल, उत्तराखण्ड और मध्य प्रदेश में भी उसने सभी सीटों पर जीत हासिल की है। हालाँकि उत्तर प्रदेश में लगे झटके ने उसे झकझोर कर रख दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अयोध्या में राम मंदिर के गढ़ फ़ैज़ाबाद में उसे हार मिली, जहाँ समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन ने उल्लेखनीय प्रदर्शन के साथ भाजपा प्रत्याशी को हरा दिया। 2019 में चार लाख से अधिक के मुक़ाबले वाराणसी में प्रधानमंत्री की ख़ुद की जीत का अंतर पार्टी को चिन्तित करने वाला है। महाराष्ट्र में भी आश्चर्य था। पश्चिम बंगाल में प्रतिष्ठित नेता ममता बनर्जी ने अपनी चतुर राजनीतिक बुद्धिमत्ता से अपनी स्थिति को और मज़बूत किया है। भाजपा को राजस्थान और हरियाणा में भी नुक़सान हुआ, जबकि छत्तीसगढ़ और गुजरात में उसे एक-एक सीट गँवानी पड़ी।

भले ही बिहार, ओडिशा और आंध्र प्रदेश ने एनडीए को समर्थन दिया है; लेकिन ज़ाहिर है कि अब देश को विपक्ष मुक्त होने का कोई ख़तरा नहीं है। साथ ही जनादेश ने ईवीएम और भारत के चुनाव आयोग जैसी संस्था की विश्वसनीयता पर संदेह को दूर कर दिया है। जनादेश न केवल अपने सहयोगियों के कारण, बल्कि एक मज़बूत विपक्ष के कारण भी सरकार को नियंत्रण में रखेगा। 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहली बार होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्ण बहुमत के बिना केंद्र में सरकार चलाएँगे और उनके हाथ बँधे रहेंगे; क्योंकि वह अपने एनडीए सहयोगियों पर निर्भर होंगे। चुनाव के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयानों में भी एक संदेश है, जहाँ उन्होंने विनम्रता और सर्वसम्मति की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। इससे पता चलता है कि जहाँ तक वैचारिक रास्ते का सवाल है, संघ भाजपा के साथ एकमत नहीं है। फिर भी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि ‘इंडिया’ खिल रहा है और ‘कमल’ मुरझा रहा है।

कुवैत के मजदूर कैंप की भीषण आग में 40 भारतीयों ने गंवाई जान, 30 घायल

कुवैत: मंगाफ में बुधवार सुबह एक इमारत में लगी भीषण आग में 41 लोगों की मौत हो गई और 30 घायल हो गए। मरने वालों में 40 भारतीय शामिल हैं। कुवैत में भारतीय दूतावास ने कहा कि आग की घटना में 30 से अधिक भारतीय श्रमिक घायल हो गए।

घटना स्थानीय समयानुसार सुबह 6 बजे मंगाफ शहर में हुई। न्यूज एजेंसी रायटर के हवाले से एक वरिष्ठ पुलिस कमांडर ने स्टेट टीवी को बताया, ‘जिस इमारत में आग लगी, उसका इस्तेमाल श्रमिकों के आवास के लिए किया जाता था और वहां बड़ी संख्या में श्रमिक थे।’

अधिकारियों ने बताया कि आग बुधवार तड़के कुवैत के दक्षिणी अहमदी प्रांत के मंगाफ इलाके में छह मंजिला इमारत की रसोई में लगी। अधिकारियों ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। बताया जाता है कि इमारत में करीब 160 लोग रहते थे, जो एक ही कंपनी के कर्मचारी हैं।

कुवैत में भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, ‘भारतीय श्रमिकों से जुड़ी आग की दुखद घटना के संबंध में दूतावास ने एक इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर +965-65505246 शुरू किया है। सभी संबंधित लोगों से अनुरोध है कि वे अपडेट के लिए इस हेल्पलाइन से जुड़ें। दूतावास हर संभव सहायता करेगा।’

विदेश मंत्री एस. जयशंकर का ट्वीट

कुवैत शहर में आग लगने की घटना पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने X पर कहा, ‘आग लगने की घटना सुनकर बहुत दुख हुआ। खबर है कि 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और 50 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हैं। हमारे राजदूत शिविर में गए हैं। हम आगे की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। दुखद रूप से अपनी जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। घायलों के शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करता हूं। हमारा दूतावास इस संबंध में सभी संबंधित लोगों को पूरी सहायता देगा।’

बिल्डिंग के मालिक को गिरफ्तार करने का आदेश

कुवैत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत के आंतरिक मंत्री शेख फहाद अल-यूसुफ अल-सबाह ने पुलिस को मंगाफ बिल्डिंग के मालिक को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है। साथ ही बिल्डिंग के चौकीदार और घटनास्थल पर आपराधिक साक्ष्य कर्मियों की जांच पूरी होने तक श्रमिकों के लिए जिम्मेदार कंपनी के मालिक को भी गिरफ्तार करने का आदेश दिया है।

मंत्री ने आग लगने की जगह का दौरा करने के बाद एक बयान में कहा, ‘आज जो कुछ हुआ, वह कंपनी और बिल्डिंग मालिकों के लालच का नतीजा है।’ उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी तरह के सुरक्षा आवश्यकताएं पूरी करने का आदेश दिया है।

झारखंड : चकाई-देवघर मार्ग पर भीषण सड़क हादसा, 3 की मौत

झारखंड:देवघर जिला स्थित चंद्रमंडीह थाना क्षेत्र के चकाई-देवघर मुख्य मार्ग पर अहले सुबह एक भीषण सड़क हादसा हुआ। एक अनियंत्रित कार सड़क किनारे पलट गई, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हादसे के समय कार 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। बाउंड्री वॉल से टकराने के बाद कार तीन बार पलटी। जेसीबी और गैस कटर की मदद से कार में फंसे शवों को बाहर निकाला गया। हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए। सभी मृतक पटना के गर्दनीबाग मोहल्ले के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

घटना की सूचना मिलने के बाद चंद्रमंडीह पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों को कार से निकालकर चकाई रेफरल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों को मोबाइल से घटना की सूचना दे दी है।

तीनों युवकों की पहचान पटना के गोरिया टोला निवासी गोरेलाल यादव, नवादा निवासी अमन कुमार, और संतोष कुमार यादव के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि तीनों पटना से देवघर जा रहे थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसे के बाद इतनी तेज आवाज हुई कि उन्हें लगा कि कोई बम फटा है। जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे और चंद्रमंडीह थाने की पुलिस को हादसे की सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर गाड़ी में फंसे तीनों युवकों को बाहर निकाला, तब तक तीनों की मौत हो चुकी थी। जिसके बाद चंद्रमंडीह थाने की पुलिस ने मृतकों के परिजनों को पूरे मामले की जानकारी दी।