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जान बची तो लाखों पाए

अदिती चहार

जब से अवनी को गोली मारी गई है। तब से हमारे लिए यह राहत की बात है कि हम बोझा ढोने वाले तो बच गए। आज की दुनिया और सामाजिक व राजनैतिक व्यवस्था में शेर, चीतों, हाथियों और आवाज़ मुखर करने वालों की ज़रूरत किसे है। हमारी बिरादरी पर कोई गोली नहीं चलाता क्योंकि हम कभी अपने हकों के लिए नहीं लड़ते। न हमारी खाल और दांत बाज़ार में अच्छी कीमत बटोर सकते हैं। हमें इस बहस में भी नहीं पडऩा है कि अवनी आदमखोर थी या नहीं, किसी हाथी ने किसी ग्रामीण को मारा कि नहीं, हमें तो खुशी है कि हम लोग सुरक्षित हैं। हमारे लिए कोई खतरा नहीं।

एक बात और समझने की है। वैसे तो हम लोग ज़्यादा पढ़े-लिखे नहीं होते, पर कई पढ़े-लिखे हम जैसे ज़रूर होते हैं। उन्ही पढ़े-लिखों ने बताया कि हमारे देश में जानवरों के हमलों या युद्ध में उतने लोग नहीं मरते जितने सड़़क हादसों में मर जाते हैं। अब अगर कोई व्यक्ति किसी वाहन की चपेट में आ कर मर गया तो हमने कभी सरकार को यह हुक्म सुनाते नहीं देखा कि उस वाहन को ‘गोली मार दो’ या उसके ‘चालक’ को फांसी पर लटका दो। यहां तक की हत्या के मामले में भी मौत की सज़ा किसी खास ही हालात में दी जाती है। वह भी उसे अपनी सफाई का पूरा मौका देने के बाद। यह सज़ा देने का अधिकार भी सत्र न्यायाधीश से नीचे की अदालत को नहीं है। उस सज़ा मिलने के बाद भी उस हत्यारे के पास सर्वोच्च न्यायालय तक अपील करने का विकल्प खुला रहता है। पर जंगली जानवरों के पास यह अवसर भी नहीं है। किसी सरकारी वन विभाग ने आज तक ये आंकड़े जारी नहीं किए कि जंगली जानवरों ने कितने लोगों की हत्या की है। एक विमान क्रैश हो जाता है उसमें सैंकड़ों लोग मारे जाते हैं, पर किसी ने कभी उस विमान कंपनी या विमान यात्रा पर प्रतिबंध लगाने की मांग कभी नहीं उठाई। ज़हरीली शराब पीने से कितने लोग मरते हैं, पर आज तक किसी नेता, अभिनेता या पत्रकार ने यह आवाज़ नहीं उठाई कि देश में शराब बंद होनी चाहिए। नकली दवाओं से मरने वालों की तो गिनती ही उपलब्ध नहीं, पर कभी नहीं सुना कि किसी माई के लाल ने उनके खिलाफ कोई बहुत कड़ी कार्रवाई की हो। खाद्य पदार्थों में लगातार होने वाली मिलावट के कारण हर साल लाखों लोग मरते हैं पर हमें याद नहीं कि कभी किसी धन्नासेठ को फांसी की सज़ा सुनाई गई हो। ‘ऑनर किलिंग’ के आरोपी भी खुले घूमते रहते हैं कोई नहीं पूछता। गालियों में खास समुदाय के लोगों को चुन-चुन कर मारा जाता है पर मजाल है कोई आवाज़ उठे।

इन सभी को एक हादसे की संज्ञा दे कर पल्ला झाड़ लिया जाता है और जानवर के हाथों किसी व्यक्ति के मारे जाने पर प्रशासन ऐसे प्रतिक्रिया करता है कि जैसे उस जानवर ने पूरी योजना बना कर ज़मीन जायदाद, पैसे के लालच या किसी प्रेमिका के लिए किसी की हत्या कर दी हो। वे लोग उसे ‘हादसा’ मानने को तैयार नहीं होते। कारण है कि सत्ता के गलियारों तक इन जानवरों की पहुंच नहीं होती। वहां कुछ पालतू किस्म के तो होते हैं पर वे खुद को इंसान दिखाने की कोशिश में इन बेजुंबा जानवरों की तरफदारी में मुंह नहीं खोलते।

अगर हम भी इंसान होते तो कह सकते थे कि हम तो बच गए हमें क्या लेना है। पड़ोसी को कोई मार-काट दे हमें क्या फर्क पड़ता है। पर शुक्र है हम इंसान नहीं हैं, हम अपने साथियों की पीड़ा जानते हैं इसलिए खामोश नहीं बैठ सकते। हम तो किसी कवि की इन पंक्तियों से सभी को संदेश देना चाहते हैं कि अन्याय के खिलाफ आवाज़ न उठाना एक पाप है और वह अन्याय का भ्ंावर कभी आपको भी अपने चंगुल में ले सकता है। कवि ने लिखा है-

”उसके कत्ल पे मैं कल चुप था

आज मेरा नंबर आया है।

मेरे कत्ल पे आज तुम चुप हो

अगला नंबर तुम्हारा है’’।

गाजा तूफ़ान से तमिलनाडु में अब तक १३ की मौत

तमिलनाडु में गाजा तूफान से अब तक १३ लोगों की मौत हो चुकी है और हज़ारों लोगों को सुरक्षित जगह पहुँचाया गया है। तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि प्रत्येक मृतक के परिवार को १० लाख रुपए के राहत राशि दी जाएगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक गाजा तूफान तमिलनाडु के दूसरे जिलों में पहुंच सकता है। इसे देखते हुए  प्रशासन ने तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने बताया कि गाजा तूफान से सबसे ज्यादा नुकसान नागपत्तनम जिले में हुआ है। राज्य में ४५० से ज्यादा राहत शिविर बनाए गए हैं जिनमें ८३ हज़ार लोगों को शेल्टर दिया गया है। प्रदेश सरकार ने केंद्र से भी राहत कार्य के लिए आग्रह किया है।
अब तक इस तूफ़ान में १३ लोगों की जान जा चुकी है। तूफ़ान में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकार ने १० लाख और ज्यादा घायल होने वालों को एक लाख जबकि काम घायलों को २५ रूपये की राहत राशि देने का ऐलान किया है।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गाजा तूफान को लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी से फ़ोन पर बात की और प्रभावित इलाकों की जानकारी ली। सिंह ने मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया कि केंद्र राज्य को हालात से निपटने के लिए हर संभव मदद देगा।
गाजा तूफान शुक्रवार सबेरे तमिलनाडु तट से टकरा गया जिसके बाद से तमिलनाडु के तटवर्ती जिलों में लगातार तेज हवाएं चल रही हैं और  बारिश भी हो रही है। रिपोर्ट्स में कहा गया है की नागपत्तनम   में करीब १२० किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। नागपत्तनम और तिरूवरूर जिलों  में तूफान से आठ लोगों की मौत हुई है। कई जगह दर्जनों पेड़ तूफ़ान के चलते ज़मीन से उखड़ गए हैं।
राज्य सरकार ने तूफान प्रभावित जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है। करीब ८३,००० लोग सुरक्षित जगह पहुंचाए गए हैं। आठ जिलों में स्कूल-कॉलेज अगले आदेश तक बंद कर दिए गए हैं।

खूंखार आतंकी मूसा अमृतसर में दिखा !

जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के आतंकी जाकिर मूसा के पंजाब के अमृतसर में देखे जाने की रिपोर्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हो गयी हैं। शहर में इस खूंखार आतंकी की पोस्टर चिपकाये गए हैं   ताकि उसकी पहचान होने पर पुलिस को सूचित किया जा सके।

गौरतलब है कि जाकिर मूसा लम्बे समय से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय है। उसे सुरक्षा बालों की वांटेड लिस्ट में सबसे ऊपर रखा गया है। मूसा जम्मू-कश्मीर में अनसार गजावत-उल-हिंद नाम के आतंकी संगठन का सरगना भी है और यह मन जाता है कि उसके तार सीधे सीमा पार से जुड़े हैं।

यह मामला कुछ रोज पहले पंजाब के ही पठानकोट से एक वहां के बन्दूक की नोक पर छीने जाने से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। याद रहे बुधवार को पठानकोट के माधोपुर में चार संदिग्ध लोगों ने गन प्वाइंट पर एक इनोवा छीन ली थी। फिलहाल पंजाब पुलिस को इन चारों संदिग्धों का सीसीटीवी फुटेज मिला है लेकिन छीनी गई कार के बारे में पुख्ता जानकारी अभी पुलिस के पास नहीं है। पुलिस पठानकोट से छीनी गई कार और आईबी के अलर्ट को साथ जोड़ते हुए सर्च ऑपरेशन चला रही है।

अब खबर मिल रही है कि मूसा को अमृतसर में स्पॉट किया गया है। उसके कुछ साथी भी उसके साथ हो सकते हैं। खुफिया एजेंसियों का कहना है कि ६-७ आतंकी पाकिस्‍तान के साथ लगने वाली सीमा से राज्‍य में दाखिल हुए हैं और उनकी योजना दिल्‍ली में घुसने की है। पूरे पंजाब में अलर्ट जारी कर दिया गया है और तमाम आर्मी बेस कैंप और एयरफोर्स स्टेशन के साथ बॉर्डर एरिया में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

शिमला में रिटायर मेजर जनरल ने खुद को गोली मारी

हिमाचल की राजधानी शिमला में सेना के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी का संदिग्ध हालात में शव मिला है। आशंका है कि उन्होंने कथित तौर पर खुद को गोली मार ली। हालांकि पुलिस मामले की जांच कर रही है।

सेवा निवृत मेजर जनरल सीएम शर्मा रिटायर होने के बाद हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (एचपीपीएससी) के चेयरमैन भी रहे हैं। मेजर जनरल (रि) ने खुद को गोली मार दी। उनका शव उनके घर के बेसमंट से मिला है।

प्रारंभिक सूचना के अनुसार पूर्व सेना अधिकारी का आवास राजधानी शिमला के जाखू इलाके में है। उन्होंने खुद को गोली क्यों मारी इस बारे में अभी कोइ जानकारी नहीं है। मौके पर गई शिमला पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

सेना में सेवाएं देने के बाद शर्मा शिमला में ही रह रहे थे। शर्मा जनवरी, २००९ से जून, २०१३ तक हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन रहे। शिमला शहर पुलिस के डीएसपी प्रमोद शुक्ला ने मामले की पुष्टि की है। उनके मुताबिक पुलिस मामले की छानबीन कर रही है और उसके बाद ही मौत के सही कारणों के बारे में कहा जा सकता है। पुलिस उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज रही है।

आलोक वर्मा से जवाब माँगा सुप्रीम कोर्ट ने

सीबीआई मामले में सीवीसी की रिपोर्ट और सरकार की तरफ से छुट्टी पर भेजे गए निदेशक आलोक वर्मा के मामले की शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय में करीब आठ मिनट तक चली सुनवाई में अदालत ने कोइ फैसला नहीं सुनाया। अदालत ने कहा कि सीवीसी की रिपोर्ट से लगता है कि कुछ जांच की ज़रुरत है लिहाजा आलोक वर्मा से अदालत ने सोमवार तक इस पर जवाब माँगा है। आलोक वर्मा को सीवीसी की रिपोर्ट की कॉपी सील बंद लिफ़ाफ़े में देने को कहा है हालाँकि छुट्टी पर भेजे विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को रिपोर्ट की कॉपी देने से सर्वोच्च अदालत ने इंकार कर दिया।

आज के कोर्ट के फैसले के बाद आलोक वर्मा को कोइ रहत मिली हो ऐसा नहीं कहा जा सकता। पहले चर्चा थी कि उन्हें ”क्लीन चिट” दी गयी है हालांकि इस पर तस्वीर मंगलवार को साफ़ हो सकती है जब कोर्ट इस पर सुनवाई करेगा। उन्होंने अपना जवाब सोमवार (१९ नवम्बर) तक फाइल करने का आग्रह किया था। फिलहाल उन्हें ”क्लीन चिट” मिली है ऐसा नहीं लगता और उन्हें कुछ बिंदुओं में  जांच से  गुजरना पद सकता है।

आज की सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने एजी और एसजी को भी सील बंद लिफाफे में सीवीसी की रिपोर्ट की कॉपी देने को कहा है। अभी तक की कोर्ट की कार्यवाही से संकेत मिलता है अभी इस मामले में काफी पेंच हैं और पूरी तस्वीर मंगलवार को साफ़ हो सकती है जब इस मामले पर अगली सुनवाई होनी है। कोर्ट ने आलोक वर्मा को सोमवार एक बजे तक अपना जवाब दायर करने को कहा है।

आज की सुनवाई से संकेत मिलता है कि सीवीसी ने जो रिपोर्ट दी है उसमें वर्मा को लेकर सीधे-सीधे कोइ ”क्लीन चिट” नहीं दी गयी है। हो सकता है इस रिपोर्ट में किसी बिंदु पर जांच पर जोर दिया गया है। और यदि किसी गंभीर मसले पर जांच का सीवीसी का सुझाव होगा तो यह मामला अभी लम्बा भी खिंच सकता है। कोर्ट की आज की सुनवाई से यह भी जाहिर है कोर्ट इस मामले में गोपनीयता को लेकर किसी तरह के समझौते के हक़ में नहीं हैं।

मिजोरम के मुख्य चुनाव अधिकारी तब्दील

जबरदस्त विरोध के बाद आखिर चुनाव आयोग ने मिजोरम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ)  शशांक को हटा दिया है। उनकी जगह आशीष कुन्द्रा को सूबे का नया मुख्य निर्वाचन अधिकारी (चीफ इलेक्ट्रल ऑफिसर) नियुक्त किया गया है। गौरतलब है कि २८ नवम्बर को राज्य विधानसभा चुनाव के लिए वोट पड़ने हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक शशांक के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे थे। स्थानीय लोग उनके विरोध में थे। याद रहे मिजोरम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शशांक की शिकायत पर प्रिंसिपल सेक्रेटरी (गृह) ललनिनमाविया चुआंगो को हटाए जाने के बाद प्रदर्शनकारी पांच नवंबर तक हटाने और उन्हें राज्य से बाहर भेज देने की मांग कर रहे थे।

गौरतलब है कि मंगलवार को ही एजवाल में शशांक के दफ्तर के बाहर हजारों की संख्या में जुटे लोग उन्हें हटाने की मांग कर रहे थे। इसके बाद चुनाव आयोग की टीम जिनमें झारखंड के सीईओ ललबिक्थांगा खियांगटे, ईसी डायरेक्टर निखिल कुमा और ईसी सेक्रेटरी एसबी जोशी शामिल थे, ने मिजोरम एनजीओ कॉर्डिनेटिंग कमेटी और सिविल सोसायटी ग्रुप्स के साथ बातचीत की थी।

इसके बाद समन्वय समिति ने पिछले कल अपना प्रस्ताव दिया जिसमें चुनाव आयोग के अप्रैल, २०१४  की उस सहमति का जिक्र था जिसमें कहा गया था कि भविष्य में मिजोरम में किसी भी संसदीय और विधानसभा चुनाव में पड़ोसी त्रिपुरा के शरणार्थी शिबिरों में रह रहे लोगों को राज्य में ही वोट देने का अधिकार होगा। इसमें यह भी कहा गया था कि शशांक को उनके पद और राज्य से हटा दिया जाए।

याद रहे शशांक ने चुआंगो पर मिजोरम में ब्रू शरणार्थियों की मतदाता सूची में रिविजन को लेकर दखल देने का आरोप लगाया था। ब्रू शरणार्थी १९९७ में हुई जातिय हिंसा के बाद से ही त्रिपुरा के राहत शिविरों में रह रहे हैं। राज्य सरकार समेत मिजोरम के लोगों ने चुनाव आयोग के इस प्रस्ताव का विरोध किया जिसमें ब्रू को कैम्प में ही वोट देने की इजाजत और उनकी मिजोरम में वापसी की बात कही गयी थी।

फ़र्ज़ी डिग्री विवाद : डुसु अध्यक्ष एबीवीपी से बाहर

आखिर फ़र्ज़ी डिग्री मामले में फंसे अंकिव बसोया को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) ने गुरूवार को संगठन से बाहर कर दिया। विरोधी संगठन एनएसयूआई इसे लेकर काफी दिन से मुद्दा बनाये हुए है।

अब संगठन ने कहा है की जब तक अंकिव के खिलाफ जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक उनपर की गयी कार्रवाई अमल में रहेगी। इसके आलावा संगठन की सभी जिम्मेदारियों से भी उन्हें मुक्त कर दिया गया है। गौरतलब है कि अंकिव बसोया पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी डिग्री के सहारे डीयू में एडमिशन लिया है।

एनएसयूआई ने पहले दिन से ही अंकिव बसोया की स्नातक डिग्री को फर्जी बताया था और डीयू के वाइस चांसलर को चिट्ठी लिखकर बसोया के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। हालाँकि एनएसयूआई का आरोप है कि उसकी शिकायत पर वाइस चांसलर ने कोइ कार्रवाई नहीं की। वैसे अंकिव बसोया ने इस पूरे विवाद को विपक्ष की ”चाल” बताया था। हालांकि आरोप के बाद एक बार जब उनसे उनके बैचलर्स के विषयों के बारे में पूछा गया, तो बसोया इसके बारे में कुछ नहीं बता सके थे।

हालाँकि विवाद बढ़ने पर अब डूसू प्रेजिडेंट अंकिव की फर्जी डिग्री के मामले में विद्यार्थी परिषद ने कहा है कि ”जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती है तब तक बसोया को पद से इस्तीफा देने के लिए कहा गया है”।

गौरतलब है की बसोया के सर्टिफिकेट के मुताबिक उन्होंने तिरुवल्लुर यूनिवर्सिटी से बैचलर्स किया है। कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई ने उनकी डिग्री को फर्जी बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल अंकिव की डिग्री की जांच चल रही है, लेकिन इससे पहले ही विद्यार्थी परिषद ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

मध्य प्रदेश में भाजपा ने ५३ बागी बाहर किये

पार्टी से बाहर किये जाने के कुछ ही घंटे के भीतर मध्य प्रदेश भाजपा के कद्दावर नेता सरताज सिंह मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमल नाथ के साथ एक चुनाव सभा में मंच साझा करते दिखे। इससे पहले भितरघात से जूझ रही मढ़ता प्रदेश भाजपा ने ५३ बागियों को गुरूवार सुबह पार्टी से बाहर करने का फरमान जारी किया।

जो बड़े नेता पार्टी से बाहर किये गए हैं उनमें सरताज सिंह, नरेंद्र कुशवाह, रामकृष्ण कुष्मारिया, राजकुमार यादव, समीक्षा गुप्ता, धीरज पटेरिया और लता मस्की भी शामिल हैं।  इनमें कुछ तो कांग्रेस में चले गए हैं और अन्य निर्दलीय मैदान में उतर चुके हैं।  जाहिर है इससे भाजपा की चिंता मध्य प्रदेश में बढ़ गयी है।

सरताज सिंह पहले ही कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं और कांग्रेस ने उन्‍हें होशंगाबाद हलके से प्रत्याशी भी बना दिया। सरताज सिंह ने कहा की वे कांग्रेस के आभारी हैं कि उसने उन्हें होशंगाबाद हलके से टिकट दिया। उनके मुताबिक वे ५८ साल तक भाजपा में रहे लेकिन इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया। ”मैं जनता के बीच रहकर उसकी और सेवा करना चाहता हूं, इसलिए चुनाव लड़ रहा हूं।”

उधर दमोह से भाजपा के बागी और पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया को मनाने की जद्दोजहद दिनभर चलती रही लेकिन कामयाबी नहीं मिली। प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, संगठन महामंत्री सुहास भगत की मानाने की कोशिशें सफल नहीं हुईं लेकिन वे नहीं माने। ग्वालियर की पूर्व मेयर समीक्षा गुप्ता भी  नहीं मानीं और ग्वालियर दक्षिण से निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है। भिंड के विधायक नरेंद्र कुशवाह ने भी भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और नहीं माने हैं। इसी तरह लहार में भाजपा  छोड़ अंबरीश शर्मा कुमार बसपा में चले गए हैं। जाहिर है इन सभी सीटों पर भाजपा की मुश्किलें बढ़ेंगी।

नेशनल हेराल्ड मामले में यथास्थिति के आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरूवार को नेशनल हेराल्ड मामले में यथास्थिति बनाये रखने के आदेश दिए। इस मामले पर सुनवाई एसोसिएटिड जर्नल की याचिका पर हुई और कोर्ट ने २२ नवंबर तक के लिए नेशनल हेराल्ड हाउस खाली करवाने के केंद्र सरकार के आदेश पर ”स्टे” लगा दिया।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सरकार ने ३० अक्तूबर को नेशनल हेराल्ड हाउस को १५ नवंबर के दिन खाली करने का आदेश दिया था। इस भवन से कांग्रेस के मुखपत्र कहे जाने वाले तीन अखबार अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू में प्रकाशित होते हैं। ”नेशनल हेराल्ड” का यह भवन/दफ्तर राजधानी के आईटीओ में है। केंद्र सरकार के इस भवन को खाली कराने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी जिसपर गुरूवार में सुनवाई हुई।

सरकार के मुताबिक लीज की शर्तों के उल्लंघन पर इसे खाली करने के आदेश दिए गए हैं। नेशनल हेराल्ड के लिए कोर्ट में अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार का आदेश दुर्भावनापूर्ण और खंडन करने योग्य है जिसे कि बदनीयत और राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए दिया गया है। अब हाई कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार के की तरफ से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली उच्च न्यायालय को मौखिक आश्वासन दिया है कि वह २२ नवंबर तक नेशनल हेराल्ड के प्रकाशक, एजेएल के लीज मामले में यथास्थिति बरकार रखी जाएगी। जस्टिस सुनील गौड़ ने जब कहा कि वह मामले की सुनवाई किसी और दिन करेंगे और केन्द्र को यथास्थिति बरकरार रखनी चाहिए तो भूमि और विकास विभाग की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने उन्हें ऐसा करने का मौखिक आश्वासन दिया। अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 22 नवंबर तय की है।

दिल्ली में फैशन डिजाइनर , नौकर की हत्या

राजधानी दिल्ली के पॉश माने जाने वाले एरिया वसंतकुंज एन्कलेव में एक फैशन डिजाइनर और उसके नौकर की हत्या कर दी गयी। दोनों के शव मकान से बरामद हुए हैं। हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों की बुधवार रात हत्या कर दी गई। पुलिस ने हत्या के आरोप में एक दर्जी  और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने गुरुवार सुबह करीब तीन बजे खुद ही थाने में सरेंडर कर दिया। इसके बाद ही पुलिस को घटना का पता चला।

पुलिस के अनुसार दर्जी और उसके साथियों ने लूटपाट के इरादे से वारदात को अंजाम दिया। वसंतकुंज एन्कलेव में रहने वाली फैशन डिजाइनर (५३) माला लखानी अपने घर पर भी दरजी से कपड़े सिलवाया करती थीं। उनका ग्रीन पार्क में एक बुटीक था। आरोपियों से बातचीत में सामने आया है कि लूटपाट के इरादे से ही क़त्ल किया गया हालांकि यह भी सामने आ रहा है कि दर्जी को माला से कुछ पैसा लेना था जो उसे कुछ समय से मिल नहीं रहा था। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि बुधवार शाम दर्जी राहुल अपने दो साथियों के साथ माला के घर कपड़ों के डिजाइन दिखाने के लिए आया। तीनों ने मिलकर माला और उनके ५० वर्षीय नौकर बहादुर का कत्ल कर दिया। फिर वे घर से नकदी और ज्वेलरी लूटकर फरार हो गए। जब आरोपियों को लगा कि वे अब पुलिस से बच नहीं सकेंगे तो उन्होंने थाने में सरेंडर कर दिया।