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11 दिसंबर से शुरू होगा संसद का शीतकालीन सत्र

संसद का शीतकालीन सत्र 11 दिसंबर को शुरू हो कर 8 जनवरी तक चलेगा। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले ये आखिरी पूर्ण सत्र होगा।

संसद का शीतकालीन सत्र आम तौर पर नवंबर में शुरू होता है, लेकिन यह लगातार दूसरा साल है, जब शीतकालीन सत्र दिसंबर में शुरू होगा।

बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना में विधानसभा चुनावों के कारण इस साल सत्र में देरी हुई है।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ‘संसदीय मामलों पर कैबिनेट कमेटी ने फैसला किया है कि अगला शीतकालीन सत्र 11 दिसंबर, 2018 से 8 जनवरी, 201 9 तक आयोजित किया जाएगा।’

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में सीसीपीए की बैठक में इस सत्र की तारीख पर विचार-विमर्श हुआ था।

इस सत्र में काफी हंगामा होने की आशा है। विपक्ष  सरकार को कई मुद्दों पर घेर सकता है जिसमे राफेल डील सबसे ऊपर हो सकता है।

जबकि सरकार ज्यादा से ज्यादा विधेयक पास कराने की कोशिश करेगी। इस शीतकालीन सत्र में राम मंदिर पर भी विधेयक पेश होने की उम्मीद है।

अलगाववादी नेता अंद्राबी के खिलाफ चार्जशीट

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कश्मीर में अलगाववादी महिला संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की कर्ताधर्ता आसिया अंद्राबी के खिलाफ बुधवार को चार्जशीट दाखिल कर दी है। दुख्तरान-ए-मिल्लत को पकिस्तान समर्थक संगठन माना जाता है। अंद्राबी के अलावा दो और लोगों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल कर दी गयी है। उन्हें ६ जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।
”तहलका” को मिली जानकारी के मुताबिक अंद्राबी और उनके दो सहयोगियों के खिलाफ सोशल मीडिया और अन्य इंटरनेट प्लैटफॉर्म्स पर भारत के विरूद्ध ”युद्ध छेड़ने” के आरोप में आरोपपत्र दाखिल किया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
अधिकारीयों के मुताबिक अंद्राबी के अलावा जिन अलगाववादियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गयी है उनमें सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन शामिल हैं। दुख्तरान-ए-मिल्लत कश्मीर में सक्रिय अलगाववादी संगठन है जिसमें सभी महिलाएं हैं और आसिया अंद्राबी इस संगठन की अध्यक्ष हैं।
इन सभी के खिलाफ ट्वीटर, फेसबुक, यूट्यूब और पाकिस्तान समेत कुछ टीवी चैनलों जैसे विभिन्न प्लेटफार्म इस्तेमाल कर ”भारत के खिलाफ बगावत के लिए भड़काने और नफरत भरे संदेश फैलाने और भाषण देने” में संलिप्त रहे हैं। इस संगठन को एक ”आतंकवादी संगठन” के रूप में प्रतिबंधित किया जा चूका है।
गौरतलब है की अंद्राबी का महिला संगठन जम्मू कश्मीर के भारत से अलग होने और पाकिस्तान के साथ विलय की हिमायत करता रहा है। याद रहे एनआईए इस ५२ वर्षीय अलगाववादी नेता से जानकारी उगलवाने के लिए महिला अधिकारियों की टीम गठित की थी।

संचार उपग्रह जीसैट २९ सफलता पूर्वक लांच

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ४ ने बुधवार को तमिलनाडु के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से संचार उपग्रह जीसैट २९ सफलता पूर्वक लांच कर दिया। अंतरिक्ष  क्षेत्र में यह भारत की एक बड़ी उपलब्धि है।
दागे जाने के करीब १६ मिनट में ही जीएसएलवी-एमके ३ उपग्रह पृथ्वी से करीब ३६ हजार किलोमीटर दूर कक्षा में स्थापित हो गया। मौसम की स्थितियों को देखते हुए प्रक्षेपण के लिए सभी मौसम के अनुकूल लॉन्चिंग पैड और प्रक्षेपण यान उपलध रहेगा। इसे जम्मू कश्मीर और नार्थ ईस्ट के ऊपर स्ट्रैटेजिक दृष्टि से भी अहम् माना जा रहा है।
इसे भारतीय वैज्ञानिकों की विज्ञान क्षेत्र में बड़ी सफलता माना जा रहा है। इसरो का इस साल का यह पांचवां सफल लांच है। मुख्य रूप से जीसैट-२९ हाईथ्रोपुट कम्युनिकेशन उपग्रह है, जो जम्मू कश्मीर और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें उपयोग किए जा रहे पेलॉड्स डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में मजबूती प्रदान करेंगे। यह उपग्रह जम्मू- कश्मीर के साथ उत्तर-पूर्वी राज्यों को बेहतर सेवा मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे इन क्षेत्रों में इंटरनेट भी हाई स्पीड में चलेगा।
मौसम विभाग ने बुधवार को बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती तूफान ‘गाजा’ को देखते हुए तेज बारिश की चेतावनी जारी की थी लिहाजा इसे देखते हुए वैज्ञानिकों ने नज़र रखी थी। हालाँकि चार टन भार ले जा सकने की क्षमता वाला जीएसएलवी-एमके ३-डी२ रॉकेट सफलता पूर्वक कक्षा में छोड़ दिया गया।
इसरो अध्यक्ष के सिवन ने कहा कि जीसैट-२९ में इसरो काफी नए प्रयोग करने जा रहा है। ऑपरेशनल पेलॉड्स के अलावा यह उपग्रह तीन प्रदर्शन प्रौद्योगिकियों, क्यू ऐंड वी बैंड्स, ऑप्टिकल कम्युनिकेशन और एक हाई रेजॉल्यूशन कैमरा भी अपने साथ ले गया है। स्पेस मिशन में इसरो ने  पहली बार इन तकनीकों का परीक्षण किया है।

चार सूबे संभल नहीं रहे, कश्मीर राग छोड़ो : आफरीदी

पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान खान के बुधवार का दिन बड़ा कड़वा रहा जब उनके क्रिकेट में सहयोगी रहे पूर्व कप्तान शाहिद आफरीदी ने कश्मीर को लेकर धमाकेदार ब्यान दे दिया। इंग्लैंड की संसद हाउस ऑफ कॉमन्स में आफरीदी ने कहा – ”पाकिस्तान पहले अपने घर को सुधारे, फिर कश्मीर की सोचे। जिससे अपने ही चार सूबे नहीं संभल रहे उसे कश्मीर की चिंता छोड़ देनी चाहिए।” आफरीदी के ब्यान को पाकिस्तानी निजाम के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
आफरीदी ने एक और बड़ी बात कही कि लोग कहीं भी मरें और वे किसी की मजहब के हों, यह अफ़सोस करने की बात है। शाम्भवता उनका इशारा काश्मीर में जारी आतंकवाद की तरफ था। उनका ब्यान खुद कुछ महीने पहले पीएम बने इमरान खान के लिए बड़ा झटका है।
गौरतलब है कि आफरीदी कश्मीर को लेकर पहले भी अपने विचार प्रकट कर चुके हैं। उनका कहना रहा है कि कश्मीर में बहुत ”अत्याचार” हो रहा है।  अब तो उन्होंने इमरान सरकार की फ़ज़ीहत करते यह कह दिया है कि उसे कश्मीर को भूल जाना चाहिए। इंग्लैंड की संसद ”हाउस ऑफ कॉमन्स” में उन्होंने कहा कि ”पाकिस्तान पहले अपने घर को सुधारे, फिर कश्मीर की सोचे। जिससे अपने ही चार सूबे नहीं संभल रहे हों, उसको कश्मीर की चिंता नहीं करनी चाहिए।”
इससे पहले २०१७ के टी-२० वर्ल्डकप के दौरान उन्होंने मैच में आए कश्मीरियों को उनको सपोर्ट करने
 के लिए धन्यवाद किया था जिसपर काफी विवाद हुआ था। शाहिद ने ट्वीट में कहा था कि ”कश्मीर जन्नत है लेकिन इस पर काफी लम्बे समय से अतयाचार हो रहे हैं। यही समय है जब हम कश्मीर को आजाद करवा सकते हैं”।

राजस्थान में गहलोत-पायलट दोनों लड़ेंगे चुनाव

राजस्थान विधानसभा के मद्देनजर बुधवार को दो बड़ी घटनाएं हुईं। एक तो भाजपा को बड़ा झटका लगा जब उसके कद्दावर नेता हरीश मीणा कांग्रेस में शामिल हो गए। दूसरा यह साफ़ हो गया कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट दोनों विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।
गहलोत ने दिल्ली में एक पत्रकार सम्मलेन में कहा – ”मैं और सचिन पायलट, दोनों ही चुनाव लड़ेंगे।” साथ बैठे सचिन ने इस बात पर हामी भरी।  इससे यह तो साफ़ हो गया यह कांग्रेस की राजस्थान के लिए एक बड़े रणनीति का हिस्सा है। जाहिर है मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसका फैसला अब चुनाव के बाद ही होगा।
दोनों नेता किस सीट से चुनाव लड़ेंगे, इसकी घोषणा अभी नहीं की गई है। गहलोत अभी जोधपुर की सरदारपुरा सीट से विधायक हैं अौर दो बार मुख्यमंत्री रहे हैं। सचिन पायलट अजमेर से सांसद थे। अभी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं। माना जा रहा है कि गहलोत जोधपुर में अपनी परंपरागत सीट सरदारपुरा से ही मैदान में उतर सकते हैं। पायलट की सीट को लेकर कहा जा रहा है कि वे दौसा और अजमेर में से किसी सीट से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।
इस बेच बुधवार को राजस्थान में भाजपा का बड़े जोर का झटका लगा। दौसा से भाजपा सांसद हरीश मीणा कांग्रेस में शामिल हो गए। नयी दिल्ली में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी के राज्य प्रभारी अविनाश पांडे की उपस्थिति में मीणा ने कांग्रेस का हाथ थामा।
हरीश मीणा राजस्थान की दौसा सीट से भाजपा के सांसद हैं। उन्होंने २०१४ के आम चुनाव में अपने बड़े भाई और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नमोनारायण मीणा को पराजित किया था। पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार में राज्य के पुलिस प्रमुख रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी हरीश मीणा मार्च २०१४ में भाजपा में शामिल हुए थे। पार्टी ने उन्हें दौसा सीट पर उनके ही बड़े भाई और तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री नमोनारायण मीणा के खिलाफ उतारा। इस सीट पर हरीश विजयी रहे जबकि किरोड़ीलाल मीणा दूसरे और नमोनारायण मीणा तीसरे स्थान पर आए।
मीणा का कांग्रेस में स्वागत करते हुए पार्टी के संगठन महासचिव गहलोत ने कहा कि पूरे देश में कांग्रेस में शामिल होने के लिए लोगों की कतार लगी गई। आज इसी क्रम में मीणा बिना किसी शर्त के कांग्रेस में शामिल हुए हैं। मीणा ने इस मौके पर कहा की कांग्रेस ही उनकी दिल की पार्टी है।
गौरतलब है कि राजस्थान में २०० विधानसभा सीटें हैं। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख १९ नवंबर है। कांग्रेस ने अभी तक उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी नहीं की है। वहीं, भाजपा १३१ उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। मतदान सात दिसंबर को है।

विवाह बंधन में बंधे दीपिका-रणवीर

बॉलीवुड के दो चमकते सितारे दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह बुधवार को इटली के लेक कोमो में विवाह बंधन में बंध गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दो-तीन घंटे पहले उनके विवाह की रस्में शुरू हो गयी थीं और कुछ समय पहले ही दोनों विवाह बंधन में भी बंध गए।
एक न्यूज वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ समय पहले तक विवाह स्थल के बाहर मंत्रोच्चार की आवाजें सुनी जा रही थीं। माना जा रहा है कि शादी समारोह की डिटेल्स बाहर न आ सकें, इसके विशेष इंतजाम किये गए हैं हालाँकि मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कुछ समय पहले दोनों की शादी हो गयी है।
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि विवाह स्थल से बाहर भारतीय संगीत की ध्वनि सुनाई देती रही। पूरे वेन्यू को वाटर लिली से सजाया गया है और जिस विला में विवाह हो रहा है वह करीब ७००  साल पुराना है।  यह झील से घिरा है और वहां सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्त किये गए हैं।
यह भी ख़बरें मीडिया में आईं थीं कि रणवीर सी-प्लेन से एंट्री करेंगे हालाँकि इसकी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हो पाई। मेहमानों के लिए लग्जरी यॉट की व्यवस्था की बात भी सामने आई थी। सोशल मीडिया पर कई दिन से #deepveerkishaadi ट्रेंड कर रहा है। दीपिका की छोटी बहन अनीषा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल का नाम बदलकर ”लड़कीवाले” कर दिया है। रणवीर-दीपिका पादुकोण की चार साल पहले हुई ‘व्हाइट वेडिंग’ का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

राफेल पर फैसला सुरक्षित रखा सुप्रीम कोर्ट ने

सर्वोच्च न्यायालय ने राफेल लड़ाकू विमान सौद्दे की जांच को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद बुधवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायालय ने केंद्र को थोड़ी राहत देते हुए यह भी कहा है कि जब तक हम तय नहीं करते, तब तक सरकार को याचिकाकर्ताओं को राफेल की कीमतों के बारे में जानकारी देने की जरूरत नहीं।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सुनावी के दौरान सरकार से २०१५ में ऑफसेट दिशानिर्देश बदलने पर सवाल किया। सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि ऑफसेट कॉन्ट्रेक्ट मुख्य सौदे के साथ-साथ चलता है। एयर वाइस मार्शल चेलापति ने कहा कि वायुसेना को पांचवीं पीढ़ी के विमानों की जरूरत बताते हुए सरकार के राफेल खरीदने के फैसले को सही कहा। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि राफेल की कीमत पर कोई बहस तभी होगी जब यह अदालत तय करेगी कि ये चीजें सार्वजनिक करने की जरूरत है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने अपनी दलील में कहा कि राफेल सौद्दे में परिवर्तन किया गया, क्योंकि पीएम नरेंद्र मोदी चाहते थे कि इसे अंबानी की कंपनी को दिया जाए। याचिकाकर्ता के वकील एमएल शर्मा ने कोर्ट से कहा कि सरकार की ओर से अदालत में पेश की गई रिपोर्ट से खुलासा होता है कि यह एक गंभीर घोटाला है। उन्होंने इस मामले को पांच जजों की पीठ  के पास ट्रांसफर करने की अपील की।
आज की सुनवाई में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि गोपनीयता एयरक्राफ्ट की कीमतों को लेकर नहीं है बल्कि हथियारों और विमान की तकनीक को लेकर है। सरकार ने विमान और हथियारों की कीमतें सुप्रीम कोर्ट से साझा की हैं। यह एक रक्षा खरीद है, राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। ऐसे में अदालत इसकी समीक्षा नहीं कर सकती। इसके खुलासे में सरकारों के बीच हुए समझौते जैसी बाधाएं हैं।
उधर प्रशांत भूषण ने दलील दी कि सरकार की दलील है कि राफेल की कीमत सार्वजनिक होने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है। सरकार संसद में दो मौकों पर खुद इसकी कीमत बता चुकी है। ऐसे में यह कहना कि कीमत बताने से गोपनीयता की शर्तों का उल्लंघन होगा, गलत दलील है। नई डील में राफेल की कीमत पहले से ४० फीसद ज्यादा है लिहाजा इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
अरुण शौरी ने कहा कि नई डील में राफेल की औसत कीमत १,६६० करोड़ है और पहले के सौदे की औसत कीमत करीब ६७० करोड़ थी। आप इसे कैसे जस्टिफाई कर सकते हैं? अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अगर मूल्य निर्धारण समेत राफेल सौदे की जानकारी सार्वजनिक की जाती है तो इससे हमारे प्रतिद्वंद्वियों को फायदा होगा।

चार दिसंबर को अंतिम दलीलें सुनेगा सुप्रीम कोर्ट

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को नेशनल हेराल्ड के आयकर मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी माता  सोनिया गांधी की याचिकाओं पर अंतिम दलीलें सुनने के लिए ४ दिसंबर की तारीख तय की है। अपनी अपील में राहुल और सोनिया ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें २०११-१२ के लिये उनके कर आकलन को दोबारा खोलने के मामले में उन्हें राहत देने से इंकार कर दिया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक संक्षिप्त सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति एसए अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा कि चूंकि प्रतिवादी (आयकर विभाग) उपस्थित है, इसलिए हम औपचारिक नोटिस नहीं जारी कर रहे हैं। हम मामले में अंतिम दलील के लिए चार दिसंबर की तारीख तय करते हैं।

गौरतलब है कि आयकर विभाग ने शीर्ष अदालत में केवियट दायर किया था कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अगर कोई अपील दायर की जाती है, तो उसका भी पक्ष सुना जाए।

हाईकोर्ट के इस मामले से जुड़े आदेश को चुनौती वाली अपील कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी और वरिष्ठ नेता ऑस्कर फर्नांडिस ने दायर की है। उन्होंने हाईकोर्ट के १० सितंबर के आदेश को चुनौती दी है। कांग्रेस नेताओं के खिलाफ आयकर मामला नेशनल हेराल्ड मामले से जुड़ा हुआ है, जिसमें वे फौजदारी मामले का सामना कर रहे हैं।

सबरीमाला पर पुनर्विचार याचिका सुनेगा सुप्रीम कोर्ट

केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के सुप्रीम कोर्ट के २८ सितंबर के फैसले पर पांच जजों की संविधान पीठ पुनर्विचार करने को तैयार हो गई है। पीठ पुनर्विचार याचिकाओं पर २२ जनवरी को खुली अदालत में सुनवाई करेगी।

सुप्रीम कोर्ट में फैसले पर पुनर्विचार के लिए दायर की गई सभी ४९ याचिकाओं पर २२ जनवरी से पांच जजों की बेंच सुनवाई करेगी। ”एनडीटीवी” की रिपोर्ट के मुताबिक हो सकता है कि इसके बाद इस मामले को सात जजों की बेंच को भेज दिया जाए, क्योंकि पांच जजों की बेंच पहले ही फैसला दे चुकी है, जिस पर पुनर्विचार किया जाएगा।

खबर के मुताबिक इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि २८ सितंबर के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस इंदू मल्होत्रा शामिल हैं। इससे पहले संविधान पीठ में शामिल चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा रिटायर हो चुके हैं।

गौरतलब है कि २८ सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी थी। ४-१ के बहुमत से हुए फैसले में पांच जजों की संविधान पीठ  ने साफ कहा कि हर उम्र वर्ग की महिलाएं अब मंदिर में प्रवेश कर सकेंगी। कोर्ट ने १०  से ५० साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक की सैकड़ों साल पुरानी परंपरा को असंवैधानिक करार दिया था। यह अलग बात है कि इसके बाद भी सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दिया गया। प्रदर्शनकारियों के विरोध की वजह से महिलाएं मंदिर के अंदर नहीं जा सकीं।  महिला श्रद्धालुओं को प्रदर्शनकारियों ने डराया, धमकाया और यहां तक कि कुछ जगहों पर महिलाओं को बस से घसीट कर निकाला।

राफेल पर दसॉ सीईओ ट्रैपियर, कांग्रेस आमने-सामने

मंगलवार का दिन राफेल डील के आरोपों-प्रत्यारोपों में उलझा रहा। पहले टीवी चैनलों पर दसॉ  एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर का इंटरव्यू आया जिसमें उन्होंने राहुल के आरोपों को नकार दिया साथ ही कहा कि नेहरू के ज़माने से उनकी कम्पनी भारत से व्यापार करती रही है और कांग्रेस से उसके काम के लम्बे अनुभव रहे हैं। इसके बाद लगातार राफेल मामले में मोदी सरकार को घेरने वाली कांग्रेस का ब्यान आया जिसमें उसने दसॉ सीईओ को उनके मार्च, २०१५ के उस बयान की याद दिलाई जिसमें उन्होंने कहा था कि ”दसॉ और एचएएल के बीच करार लगभग तय हो चुका है”।

पहले बात दसॉ एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर के इंटरव्यू की। दसॉ सीईओ ने न्यूज एजेंसी एएनआई से हुई बातचीत में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया और इस डील को लेकर उठ रहे तमाम सवालों के जवाब भी दिए।

ट्रैपियर ने इंटरव्यू में कहा कि ”अंबानी को चुनना उनका फैसला था और रिलायंस के अलावा ३० ऐसी और कंपनियां इसमें साझीदार हैं। भारतीय एयरफोर्स को इन विमानों की जरूरत है इसलिए वह इस सौदे का समर्थन कर रही है”। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस सौदे को लेकर आरोपों पर उन्होंने  कहा – ”मैं कभी झूठ नहीं बोलता हूं। जो मैंने पहले कहा था और जो बयान मैंने दिए, वे सच हैं. मेरी छवि झूठ बोलने वाले की नहीं है। सीईओ के तौर पर मेरी स्थिति में रहकर आप झूठ नहीं बोलते हैं।”   उन्होंने कहा कि उनके लिए जो अहम है, वह सच है। और सच यह है कि यह बिल्कुल साफ-सुथरा सौदा है और भारतीय वायुसेना इस सौदे से खुश है।

इसके बाद कांग्रेस की बारी थी। कांग्रेस ने कहा कि राफेल डील मामले पर देश सफाई नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच चाहता है। कांग्रेस ने इसे मोदी सरकार का ”पीआर वर्क” करार दिया और कहा कि इससे काम नहीं चलेगा। कांग्रेस ने दसॉ सीईओ को उनके मार्च २०१५ के एक बयान की याद दिलाई जिसमें उन्होंने कहा था कि ”दसॉ और एचएएल के बीच करार लगभग तय हो चुका है”।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने दसॉ सीईओ एरिक ट्रैपियर से कुछ सवाल किए। कहा कि एरिक को बताना चाहिए कि उनका कौन सा बयान सही है। आनंद ने कहा – ”मैं ट्रैपियर से पूछना चाहता हूं कि उन्होंने २६ मार्च, २०१५ को तकालीन एयरफोर्स चीफ अरूप राहा और हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (एचएएल) चीफ की मौजूदगी में यह बयान क्यों दिया था कि दसॉ और एचएएल के बीच करार लगभग तय हो गया है। एरिक ट्रैपियर का दसॉ और एचएएल के बीच करार लगभग तय होने वाला बयान आन रेकार्ड है। उनको बताना चाहिए कि कौन सा बयान सही है”?

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला भी मैदान में उतरे। राफेल डील को स्कैम करार देते हुए रणदीप ने  कहा कि देश इस मामले पर सफाई नहीं बल्कि निष्पक्ष जांच चाहता है।