अंडमान में नया World Record: ‘स्वराज’ Island पर लहराया महा-तिरंगा!

राधानगर तट पर पानी के भीतर दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज फहराकर भारत ने अपना नाम ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में स्वर्ण अक्षरों से दर्ज करा लिया है। यह उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि कठिन समुद्री परिस्थितियों में भारतीय एजेंसियों के सटीक तालमेल और साहसिक पर्यटन की दिशा में द्वीपों की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण है…

नीले समंदर में नया इतिहास: 2400 वर्ग मीटर के तिरंगे के साथ नौसेना, पुलिस और किशोरों की तिकड़ी ने रचा जल-कीर्तिमान… Photo Credit : AI Image
नीले समंदर में नया इतिहास: 2400 वर्ग मीटर के तिरंगे के साथ नौसेना, पुलिस और किशोरों की तिकड़ी ने रचा जल-कीर्तिमान… Photo Credit : AI Image

तहलका डेस्क।

नई दिल्ली। अंडमान और निकोबार प्रशासन ने शनिवार को शौर्य और तकनीक के अद्भुत समन्वय से समुद्र की गहराइयों में राष्ट्रवाद का नया अध्याय लिख दिया। श्री विजय पुरम के स्वराज द्वीप (हैवलॉक) स्थित राधानगर तट पर पानी के भीतर दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज फहराकर भारत ने अपना नाम ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में स्वर्ण अक्षरों से दर्ज करा लिया है। यह उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि कठिन समुद्री परिस्थितियों में भारतीय एजेंसियों के सटीक तालमेल और साहसिक पर्यटन की दिशा में द्वीपों की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण है।

60 मीटर लंबे और 40 मीटर चौड़े इस भीमकाय तिरंगे को समुद्र के नीचे स्थापित करना एक जटिल इंजीनियरिंग चुनौती थी। इस मिशन की सफलता का श्रेय अंडमान पुलिस, भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल और वन विभाग के उस साझा अभियान को जाता है, जिसमें 200 से अधिक पेशेवर गोताखोरों ने हिस्सा लिया। सुबह 10:35 बजे जैसे ही गिनीज रिकॉर्ड्स के निर्णायक ऋषिनाथ ने इस उपलब्धि की आधिकारिक पुष्टि की, उपराज्यपाल डी के जोशी को सौंपा गया प्रमाण-पत्र द्वीपों की विशिष्टता का प्रतीक बन गया।

इस पूरे अभियान का सबसे प्रेरक पहलू किशोरों की भागीदारी रही। फतेह जहां सिंह (16), लावन्या एरा (15) और रणविजय सिंह (14) ने इतनी कम उम्र में इस चुनौतीपूर्ण डाइव का हिस्सा बनकर यह साबित किया कि अगली पीढ़ी में राष्ट्र के प्रति जुनून और साहसिक कार्यों के प्रति कोई भय नहीं है। इन बच्चों ने न केवल 2400 वर्ग मीटर के ध्वज को गहरे पानी में संभाला, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की युवा शक्ति का प्रतिनिधित्व भी किया।

प्रशासन का यह कदम केवल प्रतीकात्मक नहीं है; यह अंडमान को विश्व स्तर पर ‘एडवेंचर टूरिज्म’ के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की रणनीतिक पहल है। एक तरफ जहां यह तिरंगा समंदर की सुंदरता के बीच भारत की संप्रभुता का उद्घोष कर रहा है, वहीं दूसरी ओर रविवार को ‘सबसे ऊंचे मानव पिरामिड’ के अगले विश्व रिकॉर्ड का लक्ष्य प्रशासन की अदम्य आकांक्षाओं को दर्शाता है। यह आयोजन पर्यटन, पर्यावरण और देशभक्ति का एक ऐसा अनूठा संगम है जो भविष्य में अंडमान की पहचान को नई ऊंचाइयां देगा।