मायावती का बड़ा फैसला: भतीजे आकाश आनंद को BSP से किया पूरी तरह मुक्त, कहा- पार्टी से ज्यादा महत्वपूर्ण बने रिश्ते

मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास को सही बताया और आकाश आनंद को BSP से पूरी तरह मुक्त किया
BSP प्रमुख मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक संन्यास के बाद आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने की घोषणा की। आकाश आनंद को 3 सितंबर को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारियों से हटाया गया था।

नई दिल्ली। रिपोर्ट: स्नेहलता

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने गुरुवार को अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने की घोषणा कर दी। यह फैसला उनके ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति व सामाजिक जीवन से संन्यास की घोषणा के बाद आया है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर 10 बिंदुओं में अपनी बात रखी और कहा कि आकाश आनंद पार्टी में स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं।

सिर्फ 7 दिन में दूसरा बड़ा झटका

आकाश आनंद के लिए सितंबर के पहले हफ्ते में यह दूसरा बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम है। 3 सितंबर 2026 को उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद की जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया था। उस समय मायावती ने कहा था कि आगे की बड़ी जिम्मेदारियां संभालने से पहले उन्हें और राजनीतिक परिपक्वता की जरूरत है।

अब इसके कुछ दिन बाद पार्टी प्रमुख ने उन्हें पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने का ऐलान कर दिया है।

‘दो मन वाला आकाश आनंद पार्टी का भला नहीं कर सकता’

मायावती ने अपने पोस्ट में आकाश आनंद पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर आकाश आनंद पार्टी और बहुजन मूवमेंट के व्यापक हित तथा अपने राजनीतिक करियर से अधिक रिश्तों-नातों को प्राथमिकता देते हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि वे BSP और मूवमेंट का भला कैसे कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आकाश आनंद पहले उनके पोस्ट्स को तुरंत रीपोस्ट करते थे, लेकिन इस बार उन्होंने ऐसा नहीं किया। मायावती ने इसे निजी और पारिवारिक संबंधों को पार्टी से अधिक महत्व देने से जोड़ा।

मायावती ने कहा कि BSP ने इन दोनों लोगों को आगे बढ़ने का अवसर दिया और पार्टी तथा उसके नेतृत्व के प्रति कृतज्ञता का भाव होना चाहिए।

ससुर के संन्यास से जुड़ी थी वापसी की बात

मायावती ने पहले कहा था कि आकाश आनंद को पार्टी में दोबारा कोई जिम्मेदारी देने पर तभी विचार किया जा सकता है, जब उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास लें।

गुरुवार को अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास की घोषणा की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि मायावती का आदेश उनके लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने BSP के साथ अपने लंबे जुड़ाव और पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार का भी उल्लेख किया।

अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि उन्होंने कभी BSP और उसके हितों के खिलाफ काम नहीं किया।

संन्यास ‘सही कदम, लेकिन बहुत देर से’

अशोक सिद्धार्थ के संन्यास पर मायावती ने इसे सही कदम बताया, लेकिन कहा कि यह फैसला देर से लिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि अशोक सिद्धार्थ को आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य, BSP और अंबेडकरवादी बहुजन मूवमेंट के व्यापक हित की चिंता होती तो यह निर्णय पहले लिया जा सकता था।

मायावती ने कहा कि समय रहते फैसला लिया गया होता तो पार्टी, बहुजन मूवमेंट और आकाश आनंद को प्रतिकूल परिस्थितियों से नहीं गुजरना पड़ता। उन्होंने उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

परिवार और पार्टी के बीच बढ़ी दूरी

अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद से जुड़े विवादों के बाद BSP के भीतर पारिवारिक संबंधों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा तेज हुई है। अशोक सिद्धार्थ को पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में BSP से निष्कासित किया गया था।

आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए जाने के बाद अब पार्टी से पूरी तरह मुक्त किए जाने की घोषणा ने इस घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

कार्यकर्ताओं से 2027 के लिए अपील

मायावती ने अपने पोस्ट के अंत में BSP कार्यकर्ताओं से विरोधियों के दबाव और षड्यंत्रों का सामना करते हुए पार्टी के लक्ष्य पर कायम रहने की अपील की।

उन्होंने कहा कि पार्टी से जुड़े लोगों को निजी और पारिवारिक स्वार्थ तथा पद की लालसा से ऊपर उठकर त्याग और कुर्बानी की भावना के साथ शोषित, पीड़ित और उपेक्षित बहुजन समाज के हितों के लिए काम करना चाहिए।