दिल्ली में 2,300 से ज्यादा मामले, कर्नाटक में 4,200 से ज्यादा इन्फ्लुएंजा संक्रमण; आईएमए ने एंटीबायोटिक के बेजा इस्तेमाल से बचने की सलाह दी
एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली
देश में मानसून के बीच स्वाइन फ्लू के मामले बढ़े
देश में मानसून के बीच स्वाइन फ्लू यानी इन्फ्लुएंजा ए (एच1एन1) के मामले बढ़ रहे हैं। दिल्ली और कर्नाटक समेत कई राज्यों में संक्रमण बढ़ने की खबरों के बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है, लेकिन साथ ही साफ किया है कि घबराने की जरूरत नहीं है।
आईएमए ने अपनी सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाह में कहा है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए हाथों की स्वच्छता, खांसते-छींकते समय मुंह-नाक ढंकना, भीड़भाड़ वाली बंद जगहों में अच्छी तरह फिट होने वाला मास्क पहनना और बीमार होने पर घर पर रहना जैसे सामान्य बचाव के उपाय अपनाए जाने चाहिए।
सबसे अहम बात: नया या असामान्य स्ट्रेन नहीं मिला
सबसे अहम बात यह है कि आईसीएमआर के मुताबिक देश में एच1एन1 का कोई नया या असामान्य स्ट्रेन नहीं मिला है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 25 अगस्त को बताया कि फिलहाल फैल रहे वायरस मौसमी इन्फ्लुएंजा के सामान्य पैटर्न के अनुरूप हैं और जिस एच1एन1 वायरस की पहचान हो रही है, वह 2025 से भारत में मौजूद है।
देश में कितने मरीज? एक जगह नहीं है कुल आंकड़ा
मौजूदा समय में पूरे देश के लिए एच1एन1 मरीजों की एकल और अद्यतन कुल संख्या केंद्र सरकार की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए देशभर के मरीजों की कोई एक संख्या बताना भ्रामक होगा। हालांकि, अलग-अलग राज्यों से सामने आए आंकड़े संक्रमण की स्थिति का अंदाजा देते हैं। दिल्ली में 25 अगस्त तक इस साल एच1एन1 के 2,308 मामले दर्ज किए जा चुके थे। कर्नाटक में 22 अगस्त तक 32 जिलों में 4,212 प्रयोगशाला-पुष्ट इन्फ्लुएंजा संक्रमण दर्ज हुए थे। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने इसे मौसमी पैटर्न का हिस्सा बताया है और किसी असामान्य प्रकोप से इनकार किया है। महाराष्ट्र में भी संक्रमण बढ़ने की सूचना है। 21 अगस्त तक राज्य में एच1एन1 के 1,109 मामले दर्ज हो चुके थे, जो पूरे 2025 में दर्ज 942 मामलों से अधिक हैं।
नया खतरनाक वायरस नहीं आया: एक्सपर्ट्स
आईएमए ने अपनी सलाह में दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी मामले सामने आने का उल्लेख किया है। यानी संक्रमण किसी एक शहर तक सीमित नहीं है। आईसीएमआर ने कहा—नया खतरनाक वायरस नहीं आया है। मामलों में बढ़ोतरी के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा था कि कहीं एच1एन1 का कोई नया और ज्यादा खतरनाक रूप तो नहीं फैल रहा।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ऐसा नहीं है। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने बताया कि भारत में फिलहाल पाया जा रहा एच1एन1 वायरस ए/ मिसौरी/ 11/ 2025 जैसे एच1एन1 पीडीएम09 वायरस से संबंधित है और यह 2025 से भारत में लगातार मौजूद है।
वायरस में समय के साथ होने वाले छोटे आनुवंशिक बदलाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आईसीएमआर के मुताबिक मौजूदा बदलाव किसी नए या ज्यादा खतरनाक वायरस के उभरने का संकेत नहीं हैं।
मौसमी इन्फ्लुएंजा और स्वाइन फ्लू साथ: आईसीएमआर
आईसीएमआर ने यह भी कहा है कि मौसमी इन्फ्लुएंजा, जिसमें एच1एन1 भी शामिल है, आम तौर पर स्वस्थ लोगों में हल्का रहता है और अपने आप ठीक हो जाता है। पर्याप्त आराम, पानी और जरूरत के मुताबिक चिकित्सकीय सलाह से अधिकांश लोग ठीक हो जाते हैं। आईएमए के मुताबिक एच1एन1 में आम तौर पर अचानक तेज बुखार और ठंड लगने के साथ लक्षण शुरू हो सकते हैं। इसके अलावा लगातार सूखी खांसी, गले में खराश, तेज बदन दर्द, सिरदर्द, नाक बहना या बंद होना, कमजोरी और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों, खासकर बच्चों में, मतली, उल्टी या दस्त भी हो सकते हैं। आईसीएमआर ने भी बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द और कमजोरी को मौसमी इन्फ्लुएंजा के सामान्य लक्षण बताया है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
हर एच1एन1 मरीज गंभीर रूप से बीमार हो, ऐसा जरूरी नहीं है। लेकिन कुछ लोगों में संक्रमण के गंभीर होने का जोखिम ज्यादा होता है।
इनमें बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोग और कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्ति शामिल हैं। ऐसे लोगों में फ्लू के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से समय पर सलाह लेना जरूरी है।
सांस लेने में दिक्कत हो तो इंतजार न करें
आईएमए ने कुछ लक्षणों को खतरे की घंटी बताया है। सांस लेने में परेशानी या सांस बहुत तेज चलना, सीने में दर्द, सीने में दबाव, होंठ या उंगलियों का नीला पड़ना, खांसी के साथ खून आना, अत्यधिक उनींदापन, भ्रम या दौरे पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दें तो मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। बच्चों में खाना-पीना बंद कर देना, लगातार उल्टी होना या सांस लेने में ज्यादा मेहनत करना भी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है।
एंटीबायोटिक हर बुखार की दवा नहीं
आईएमए की सलाह का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल से बचना है। एच1एन1 एक वायरस से होने वाला संक्रमण है और एंटीबायोटिक वायरस को खत्म नहीं करती। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के एजीथ्रोमाइसिन, एमोक्सिसिलिन-क्लैवुलानेट या दूसरी एंटीबायोटिक दवाएं लेना उचित नहीं है। आईएमए ने चेतावनी दी है कि वायरल संक्रमण के दौरान एंटीबायोटिक का अनावश्यक इस्तेमाल शरीर में मौजूद उपयोगी बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकता है और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) यानी दवाओं के खिलाफ बैक्टीरिया के प्रतिरोध को बढ़ावा दे सकता है।
एंटीवायरल भी खुद से न लें
आईएमए ने ओसेल्टामिविर जैसी एंटीवायरल दवाओं को डॉक्टर की सलाह से ही लेने की बात कही है। इन्हें खुद से शुरू नहीं करना चाहिए। एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय जरूरत के आधार पर किया जाना चाहिए।
बचाव के लिए क्या करें? आईएमए और स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह
बचाव के लिए क्या करें? आईएमए और स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह को सरल भाषा में समझें तो कुछ सावधानियां संक्रमण का खतरा कम करने में मदद कर सकती हैं:
- साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर इस्तेमाल करें।
- खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या मुड़ी हुई कोहनी से ढंकें।
- भीड़भाड़ वाली और बंद जगहों पर अच्छी तरह फिट होने वाला मास्क पहनें।
- बीमार होने पर घर पर रहें और दूसरों के संपर्क से बचें।
- बुखार ठीक होने के बाद कम से कम 24 घंटे तक, बुखार कम करने वाली दवा के बिना, घर पर आराम करें।
- पर्याप्त पानी पिएं और आराम करें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवा न लें।
मौसमी फ्लू है, लेकिन लापरवाही भी ठीक नहीं
मौसमी फ्लू है, लेकिन लापरवाही भी ठीक नहीं है। मौजूदा तस्वीर को न तो नजरअंदाज करने की जरूरत है और न ही इसे लेकर घबराने की। इसलिए विशेषज्ञों का संदेश सीधा है- सतर्क रहें, लक्षणों को नजरअंदाज न करें, गंभीर संकेत दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें और सबसे महत्वपूर्ण, डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवाएं न लें।




