
सीडीएससीओ की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने कैपिवासर्टिब और फ्रूक्विन्टिनिब को मंजूरी की सिफारिश की, चरण-4 क्लीनिकल ट्रायल की शर्तें तय
एम. रियाज़ हाशमी | नई दिल्ली
मुश्किल दौर में कैंसर के नए इलाज की दो दवाएं, भारत के बाजार में राह खुली
भारतीय मरीजों के आंकड़ों की समीक्षा के बाद कैपिवासर्टिब को मंजूरी की सिफारिश, फ्रूक्विन्टिनिब के मामले में एक्सपर्ट कमेटी ने देश में इलाज की जरूरत को माना अहम
भारत में हर साल करीब 15.7 लाख नए कैंसर मामलों के बढ़ते बोझ के बीच नए और प्रभावी इलाज के विकल्पों की उपलब्धता एक राहत भरी खबर लेकर आई है। कैंसर के इलाज के क्षेत्र में भारत में दो दवाओं के इस्तेमाल का रास्ता आगे बढ़ा है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) के तहत सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी- एसईसी (ऑन्कोलॉजी) ने कैपिवासर्टिब को प्रस्तावित उपयोग के लिए बाजार में अनुमति दिए जाने की सिफारिश की है। वहीं फ्रूक्विन्टिनिब के आयात और बिक्री की अनुमति देने की भी सिफारिश की गई है। समिति ने फ्रूक्विन्टिनिब के मामले में देश में इस तरह के इलाज की जरूरत पूरी न होने यानी ‘अनमेट मेडिकल नीड’ को महत्वपूर्ण आधार माना है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि कमेटी ने इन दवाओं को अंतिम रूप से मंजूरी नहीं दी, बल्कि संबंधित नियामकीय प्रक्रिया के तहत आगे की अनुमति के लिए अपनी सिफारिश दी है। दोनों दवाओं के मामलों में कुछ शर्तें भी तय की गई हैं।
एस्ट्राजेनेका फार्मा इंडिया लिमिटेड ने कैपिवासर्टिब 160 और 200 मिलीग्राम की गोलियों को भारत में आयात और बेचने की अनुमति के लिए अपना प्रस्ताव दोबारा रखा था। कंपनी ने इसके साथ स्थानीय तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल की जरूरत से छूट देने का भी पक्ष रखा था। सिफारिशों के संदर्भ में कंपनी की ओर से पेश किए गए अतिरिक्त आंकड़ों की समीक्षा की गई। इनमें भारत से शामिल किए गए मरीजों से संबंधित अध्ययनों के आंकड़े भी थे। इनमें दवा के इस्तेमाल के बाद होने वाले प्रतिकूल प्रभाव (एडवर्स इफेक्ट- एई), गंभीर प्रतिकूल प्रभाव, खास तौर पर निगरानी योग्य प्रतिकूल प्रभाव और इन घटनाओं का दवा से संबंध कितना है, जैसी जानकारी शामिल थी।
इन आंकड़ों की समीक्षा के बाद समिति ने प्रस्तावित उपयोग के लिए कैपिवासर्टिब को बाजार अनुमति दिए जाने की सिफारिश की। लेकिन इसके साथ एक महत्वपूर्ण शर्त रखी गई है।
कंपनी को बाजार अनुमति मिलने के बाद एक मजबूत चरण-4 क्लीनिकल ट्रायल का प्रोटोकॉल सीडीएससीओ को देना होगा। इस अध्ययन में पर्याप्त संख्या में मरीज शामिल किए जाने होंगे, ताकि दवा से होने वाले प्रतिकूल प्रभावों की बेहतर तरीके से निगरानी की जा सके। कमेटी के अनुसार, बाजार अनुमति मिलने के तीन महीने के भीतर यह प्रोटोकॉल सीडीएससीओ को जमा करना होगा।
फ्रूक्विन्टिनिब के लिए ‘इलाज की जरूरत’ को माना आधार
बैठक में टेकेडा बायोफार्मास्यूटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने फ्रूक्विन्टिनिब 1 और 5 मिलीग्राम कैप्सूल के आयात और बिक्री के प्रस्ताव के साथ चरण-4 अध्ययन का प्रोटोकॉल तथा मरीजों की नस्लीय पृष्ठभूमि और सुरक्षा से जुड़े आंकड़े पेश किए।
विस्तृत चर्चा के बाद कमेटी ने माना कि देश में इस दवा के प्रस्तावित उपयोग के लिए इलाज की ऐसी जरूरत मौजूद है, जिसे अभी पर्याप्त रूप से पूरा नहीं किया जा रहा है। इसी आधार पर उसने फ्रूक्विन्टिनिब के आयात और बिक्री की अनुमति देने की सिफारिश की।
लेकिन इसके लिए दो अहम शर्तें रखी गई हैं।
पहली, दवा की खुदरा बिक्री केवल मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट यानी कैंसर के दवा आधारित इलाज के विशेषज्ञ डॉक्टर के पर्चे पर ही की जा सकेगी। दूसरी, कंपनी को बाजार अनुमति दिए जाने से पहले कम से कम 100 मरीजों को शामिल करने वाला संशोधित चरण-4 अध्ययन प्रोटोकॉलसीडीएससीओ के सामने पेश करना होगा।
स्तन कैंसर की एक दवा के चरण-4 अध्ययन को भी मंजूरी की सिफारिश
समिति ने पेर्टुजुमैब के बायोसिमिलर (मूल जैविक दवा के समान प्रभाव और गुणवत्ता वाली दवा) के चरण-4 क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति देने की भी सिफारिश की है।
यह अध्ययन भारत में एचईआर2-पॉजिटिव शुरुआती और मेटास्टेटिक (शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुके) स्तन कैंसर वाले मरीजों में किया जाएगा।
इस अध्ययन के लिए समिति ने शर्त रखी है कि सभी प्रमुख जांचकर्ता मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट हों और अध्ययन के केंद्र देश के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में हों। साथ ही, अध्ययन में शामिल मरीज को बीमारी बढ़ने तक परीक्षण वाली दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी होगी।
एक कैंसर दवा के पहले से चल रहे अध्ययन में बदलाव को मंजूरी
एस्ट्राजेनेका की ट्रास्टुजुमैब डेरक्सटेकन दवा के पहले से मंजूर चरण-4 क्लीनिकल ट्रायल में प्रस्तावित बदलाव को भी समिति ने मंजूरी देने की सिफारिश की। बदलाव का संबंध दवा के नए स्वीकृत उपयोग को अध्ययन में शामिल करने और मरीजों से जुड़े अन्य बदलावों से है। इस प्रस्ताव पर चर्चा में कमेटी के एक एक्सपर्ट डॉ. कौशल कालरा ने हिस्सा नहीं लिया।
पेगफिलग्रास्टिम पर चरण-1 अध्ययन को अनुमति
पेगफिलग्रास्टिम वाली दवा के एक चरण-1 क्लीनिकल ट्रायल को भी अनुमति देने की सिफारिश की गई। यह अध्ययन स्वस्थ वयस्कों में दो पेगफिलग्रास्टिम उत्पादों की तुलना करेगा। इसका उद्देश्य यह देखना है कि दोनों दवाएं शरीर में किस तरह व्यवहार करती हैं, शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया कैसी रहती है और उनकी सुरक्षा कैसी है। यह अध्ययन अमेरिका में निर्यात के उद्देश्य से किया जाएगा।
ओवेरियन कैंसर की दवा के अध्ययन के नतीजे दर्ज
बेवासिजुमैब के चरण-4 अध्ययन के नतीजे भी समिति के सामने रखे गए। यह अध्ययन उन्नत या मेटास्टेटिक एपिथीलियल ओवेरियन कैंसर, फैलोपियन ट्यूब कैंसर और प्राथमिक पेरिटोनियल कैंसर के इलाज से संबंधित था। समिति ने अध्ययन के प्रस्तुत नतीजों को रिकॉर्ड में लिया।
एलेक्टिनिब की दवा संबंधी जानकारी अपडेट करने की सिफारिश
बैठक में एलेक्टिनिब 150 मिलीग्राम कैप्सूल की डॉक्टरों के लिए निर्धारित दवा संबंधी जानकारी को अपडेट करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी की सिफारिश की गई। एसईसी (ऑन्कोलॉजी) की बैठक में कुल आठ दवा संबंधी मामलों पर विचार किया गया। इनमें नई दवाओं को बाजार में लाने, क्लीनिकल ट्रायल शुरू करने, पहले से चल रहे अध्ययनों में बदलाव और अध्ययन के नतीजों की समीक्षा जैसे मामले शामिल थे।
चरण-4 ट्रायल का मतलब क्या है?
सरल भाषा में कहें तो किसी दवा के शुरुआती परीक्षणों के बाद भी उसकी सुरक्षा और असर पर नजर रखी जाती है। चरण-4 का अध्ययन दवा के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के दौरान उसके प्रभाव और संभावित दुष्प्रभावों को समझने में मदद करता है। यहां कमेटी विशेष रूप से भारतीय मरीजों में दवा की सुरक्षा संबंधी जानकारी को मजबूत करना चाहती है।
भारत में हर साल 15.7 लाख नये कैंसर रोगी
आईसीएमआर के अनुमान के मुताबिक, भारत में 2025 में कैंसर के करीब 15.7 लाख नए मामले सामने आने का अनुमान था। इनमें करीब 7.64 लाख पुरुष और 8.06 लाख महिलाएं शामिल थीं। उसी अनुमान में स्तन कैंसर सबसे आम था- करीब 2.33 लाख मामले, इसके बाद फेफड़े और मुंह के कैंसर थे। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक आधिकारिक दस्तावेज में पुराने राष्ट्रीय अनुमान के आधार पर कहा गया है कि देश में किसी भी समय करीब 25 लाख कैंसर मरीज हो सकते हैं और हर साल लगभग 4 लाख मौतें कैंसर से होती हैं।



