पिछले 7 साल में 36 देशों से 274 भगोड़ों को भारत वापस लाने में कामयाब रही केंद्र सरकार

राघवेंद्र द्विवेदी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गृह मंत्री अमित शाह ने भगोड़ों के खिलाफ एकीकृत, खुफिया-आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित मॉडल ने असर दिखाया है। इसी का नतीजा है कि पिछले 7 साल में 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाने में सरकार सफल रही है। साल 2019 से 2026 के दौरान विदेश से पकड़कर या प्रत्यर्पित करके भारत लाए गए तमाम अपराधियों में कुछ चर्चित नाम हैं।

  • संजीव चावला (Sanjeev Chawla)

अपराध: वर्ष 2000 के बहुचर्चित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच-फिक्सिंग कांड (दक्षिण अफ्रीकी कप्तान हांसी क्रोनिए से जुड़ा मामला) का मुख्य आरोपी।

कहाँ से लाया गया: ब्रिटेन (UK) से लंबी कानूनी लड़ाई के बाद फरवरी 2020 में भारत प्रत्यर्पित किया गया।

  • विक्रमजीत सिंह (Bikramjit Singh)

अपराध: पंजाब के तरनतारन में हुए बम ब्लास्ट मामलों और आतंकी गतिविधियों का मुख्य षड्यंत्रकारी।

कहाँ से लाया गया: राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के नेतृत्व में ऑस्ट्रिया से दिसंबर 2022 में प्रत्यर्पित किया गया। पश्चिमी देश से किसी आतंकी के प्रत्यर्पित होने की यह एक बड़ी सफलता थी।

  • मोनिका कपूर (Monika Kapoor)

अपराध: गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी और आर्थिक अपराध (वर्ष 1999 से फरार थीं)।

कहाँ से लाया गया: अमेरिका (US) से प्रत्यर्पित कर जुलाई 2005 / जुलाई 2025 (कानूनी प्रक्रिया के बाद हाल ही में) स्वदेश लाया गया।

गृह मंत्रालय और केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI, NIA, ED) की रिपोर्ट के मुताबिक 2019 के बाद से भारत लाए गए 274 अपराधियों में विभिन्न गंभीर अपराधों से जुड़े लोग शामिल हैं:

गैंगस्टर और संगठित अपराध: जबरन वसूली, रंगदारी और आपराधिक सिंडिकेट से जुड़े दर्जनों अपराधियों को खाड़ी देशों और अन्य राष्ट्रों से डिपोर्ट या प्रत्यर्पित कराया गया है।

आतंकवाद और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियां: विदेशों में बैठकर भारत के खिलाफ आतंकी फंडिंग, स्लीपर सेल चलाने या हथियारों की तस्करी करने वाले कई आतंकी हैंडलर्स को पकड़ा गया है।

आर्थिक अपराध और धोखाधड़ी: बैंक फ्रॉड, मनी लॉन्ड्रिंग और कमर्शियल धोखाधड़ी कर विदेश भागे अपराधियों के खिलाफ प्रत्यर्पण संधियों और रेड कॉर्नर नोटिस के जरिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। दरअसल मोदी सरकार ने वैश्विक संचालन, मजबूत समन्वय और स्मार्ट कूटनीति, भगोड़ों के खिलाफ इन तीन स्तंभों पर काम विशेष काम किया। गृह मंत्री अमित शाह ने भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया को ‘मिशन मोड’ में आगे बढ़ाया और एक के बाद एक कानूनी प्रावधान बनाए।

मोदी सरकार 2019 में एनआईए संशोधन अधिनियम और यूएपीए संशोधन अधिनियम लाई। इसके अलावा तीन नए आपराधिक कानून आए जिनमें भगोड़े अपराधियों से संबंधित विशेष प्रावधान शामिल थे। पहली बार BNSS की धारा 355 और 356 में ‘ट्रायल इन ऐब्सेन्शिया’ का प्रावधान किया गया। PMLA के सख्ती से लागू होने से वर्ष 2019 से 2026 तक भगोड़ों की कुल ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई। इस समय अवधि में 18,762 करोड़ रुपए की सफल वापसी (Restitution) की गई। इसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों का पैसा शामिल है।

मिशन को कारगर बनाने के लिए ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ के ज़रिए से विदेशों में नाम और पहचान बदल कर छिपे भगोड़ों की जियो-लोकेशन ट्रैक करने के लिए सैटेलाइट और डिजिटल फुटप्रिंट का उपयोग किया। ‘भारतपोल’ की लॉन्चिंग ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1,400 से अधिक एजेंसियों को इंटरपोल से जोड़ कर सूचना के साझा में लगने वाला समय घट कर 10 से 3 दिन हो गया। मौजूदा सरकार से जुड़े लोगों का कहना कि भगोड़े अपराधियों का मुद्दा देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। भगोड़ों को वापस लाने को लेकर पहले की सरकारों में राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी थी लेकिन मोदी सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जिससे पहले असंभव सा लगने वाला काम आसान हुआ।