
2002 गुजरात दंगों के बाद गोवा में हुई 2004 राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मोदी के CM इस्तीफे को ठुकराया गया; 2013 में फिर गोवा में ही बनाया गया 2014 लोकसभा अभियान समिति का चेयरमैन राजनाथ सिंह दोनों बार संकटमोचक बने
पणजी । 16 सितंबर, 2026 — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के रहने वाले हैं। वाराणसी से सांसद हैं। लेकिन उनका लक फैक्टर गोवा से जुड़ा हुआ है। गोवा वही राज्य है जिसमें उनकी सीएम की कुर्सी बची थी। 11 साल बाद फिर इसी राज्य में उन्हे लोकसभा चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाया गया, जिससे उनके पीएम बनने का रास्ता साफ हो गया। इन दोनों ही मौकों पर भाजपा के कद्दावर नेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मोदी के लिए संकटमोचक बन खड़े हुए।
2004: गोवा में इस्तीफा नामंजूर, राजनाथ ने बचाई CM कुर्सी
गुजरात दंगे (2002) के बाद गोवा में 12-14 अप्रैल को भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी। बैठक में गुजरात को लेकर कार्यकारिणी में प्रस्ताव आना था। इससे पहले नरेंद्र मोदी ने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश कार्यकारणी में कर दी थी। राजनाथ सिंह ने गोधरा को लेकर प्रस्ताव तैयार कर उसे कार्यकारिणी में पेश किया। इसमें नरेंद्र मोदी की तरफ से मुख्यमंत्री के रूप में इस्तीफे की पेशकश को सर्वसम्मति से ठुकरा दिया गया। साथ ही कार्याकारिणी ने उन्हे सलाह दी कि मुख्यमंत्री की जगह इस्तीफा देने की जगह वह एसेंबली को भंग चुनाव में जाएं। गोवा मोदी के लिए लक्की फैक्टर साबित हुआ।
2013: गोवा में कैंपेन कमेटी चेयरमैन बने, आडवाणी-सुषमा नाराज
इसके 11 साल बाद 8-9 जून के बीच गोवा में फिर से भाजपा कार्यकारिणी की बैठक हुई। भाजपा के इतिहास में यह सबसे चर्चित और घटनाप्रधान कार्यकारिणी में एक है। नरेंद्र मोदी को पीएम प्रत्याशी या कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया जाए या नहीं इसको लेकर जद्दोजहद थी। उस समय के पार्टी के सबसे ताकतवर और वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी इसका विरोध कर रहे थे। आडवाणी इतने नाराज थे कि उन्होंने कार्यकारिणी में आने तक से मना कर दिया। भाजपा की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज भी आने में आनाकानी कर रही थी लेकिन आखिरकार वह आने के लिए मान गई। इसी कार्यकारिणी की बैठक में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने नरेंद्र मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त करने की घोषणा कर दी। सूत्रों का कहना था कि राजनाथ सिंह ने बिना संसदीय बोर्ड में इसकी चर्चा कराए, पार्टी अध्यक्ष के अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मोदी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन घोषित किया और बाद में पार्लियामेंट्री बोर्ड से इस पर मुहर लगाई थी। राजनाथ सिंह के इस फैसले से सुषमा स्वराज इस हद तक नाराज हुई थी कि उन्होंने मीडिया के सामने इस बात की घोषणा करने से मना कर दी। इसके बाद खुद राजनाथ सिंह और पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने मीडिया को इस बात की जानकारी दी। दोनों मौके पर गोवा और राजनाथ सिंह मोदी के लिए खास रहे। गोवा लक फैक्टर के रूप में तो राजनाथ सिंह प्रॉबलम सूटर के रूप में।



