गुजरात में शर्मिष्ठा तालाब के किनारे स्थित वडनगर सेठ लाइब्रेरी – 1905-1911 में हुई स्थापना, 1935 में हुआ विस्तार; नरेंद्र मोदी की पसंदीदा जगह जहाँ पढ़ी थीं महापुरुषों की गाथाएँ

गुजरात में शर्मिष्ठा तालाब के किनारे स्थित वडनगर सेठ लाइब्रेरी — 1905-1911 में हुई स्थापना, 1935 में हुआ विस्तार; नरेंद्र मोदी की पसंदीदा जगह जहाँ पढ़ी थीं महापुरुषों की गाथाएँ
वडनगर की सेठ लाइब्रेरी शर्मिष्ठा तालाब के किनारे स्थित है। यह 1905-1911 के बीच स्थापित हुई और 1935 में इसका विस्तार हुआ। नरेंद्र मोदी यहाँ महापुरुषों की गाथाएँ पढ़ते थे। आज भी बुजुर्ग यहाँ अखबार पढ़ते और वाद-विवाद करते हैं।

सेठ भोगिलाल चकुलाल विद्यावर्धक पुस्तकालय: वडनगर की बौद्धिक परंपरा का केंद्र, जहाँ नरेंद्र मोदी छुपकर पढ़ते थे; आज भी बुजुर्ग यहाँ अखबार पढ़ते और बहस करते हैं

वडनगर । 16 सितंबर, 2026 — गुजरात में शर्मिष्ठा तालाब के किनारे स्थित वडनगर सेठ लाइब्रेरी (जिसे सेठ भोगिलाल चकुलाल विद्यावर्धक पुस्तकालय भी कहा जाता है) की स्थापना और उसका इतिहास शहर की बौद्धिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐतिहासिक अभिलेखों और स्थानीय स्रोतों के अनुसार, इस पुस्तकालय की स्थापना 20वीं शताब्दी के शुरुआती वर्षों (लगभग 1905 से 1911 के बीच) में हुई थी। यह वड़नगर के सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित पुस्तकालयों में शुमार है। इस पुस्तकालय की स्थापना उस समय के प्रमुख और प्रतिष्ठित व्यापारी सेठ भोगिलाल चकुलाल साहेबकरणवाला द्वारा अपने आदरणीय पिता की स्मृति में दिए गए निजी आर्थिक योगदान (दान) से की गई थी। यह ऐतिहासिक पुस्तकालय वड़नगर की प्रसिद्ध शर्मिष्ठा झील के पास एक खूबसूरत दो मंजिला इमारत में बनाया गया था। झील के किनारे स्थित होने के कारण इसका प्राकृतिक वातावरण अध्ययन के लिए बेहद अनुकूल था।

बौद्धिक चर्चाओं का केंद्र, 1935 में हुआ विस्तार

अपने शुरुआती दौर में यह केवल पुस्तकों का संग्रह स्थल नहीं था, बल्कि यहाँ शहर के प्रबुद्ध नागरिक, विद्वान और युवा एकत्र होकर पुस्तकें व पत्रिकाएँ पढ़ने के साथ-साथ विभिन्न विषयों पर वैचारिक चर्चा और वाद-विवाद भी करते थे। समय के साथ पाठकों की संख्या बढ़ने और महिलाओं तथा बच्चों के लिए पठन-पाठन की अलग से सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, वर्ष 1935 में श्री मयभाइ मणिलाल मेहता के प्रयासों और श्री पुरुषोत्तमदास नरभेराम पटेल के उदार दान से इसके पास ही एक और आधुनिक व विशाल भवन का निर्माण कराया गया था।

नरेंद्र मोदी की पसंदीदा जगह, परिवार वाले यहाँ खोजते थे

पढ़ाई समाप्त कर लेने के बाद नरेन्द्र की बैठने की पसंदीदा जगह लाइब्रेरी हुआ करती थी। जब वड़नगर में नरेन्द्र भाई कहीं नहीं मिलते थे तो पिताजी या परिवारवाले उनको खोजने के लिये लाइब्रेरी पहुँच जाते थे। वह वहीं पर पढ़ रहे होते थे। वडनगर की वह लाइब्रेरी अब भी शर्मिष्ठा तलाब के किनारे स्थित है यहां पर हर दिन आपको बडनगर के बड़े बुजुर्ग अपने मन की किताबे, समाचार पत्र और वाद विवाद करते हुए मिल जाएगें। यहां नरेन्द्र मोदी ने भी कई महापुरुषों की गाथाएँ पढ़ी थीं।

जर्जर होने के बाद फिर से हुआ जीर्णोद्धार

एक समय था जब लाइब्रेरी पूरी तरह से जर्जर हो गई थी। बाद में लाइब्रेरी का विस्तार (1935) में हुआ था समय के साथ जब पाठकों की संख्या बढ़ने और महिलाओं तथा बच्चों के लिए पठन-पाठन की अलग से सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, वर्ष 1935 में श्री मयभाइ मणिलाल मेहता के प्रयासों और श्री पुरुषोत्तमदास नरभेराम पटेल के उदार दान से इसके पास ही एक और आधुनिक व विशाल भवन का निर्माण कराया जा सका था।