ईडी में बड़ा बदलाव: जांच अब 4-5 साल नहीं, डेढ़ साल में पूरी करने का लक्ष्य

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बेंगलुरु कॉन्फ्रेंस में जांच डेढ़ साल में पूरी करने और संगठन विस्तार का बड़ा रोडमैप तैयार किया है
ईडी की 36वीं तिमाही क्षेत्रीय अधिकारियों की कॉन्फ्रेंस बेंगलुरु में हुई — जांच, ट्रायल और रिस्टिट्यूशन के लिए समयबद्ध लक्ष्य तय किए गए।

एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली/ बेंगलुरु

2,029 से बढ़कर 3,256 होंगे ईडी के पद; 50 पीएमएलए जोन और 5 फेमा जोन बनेंगे, हर क्षेत्र में 10 हाई-प्रोफाइल मामलों में 6-8 महीने में ट्रायल पूरा कराने का टारगेट

  • जांच का पूरा चक्र 4-5 साल से घटाकर डेढ़ साल का लक्ष्य
  • स्वीकृत पद 2,029 से बढ़कर 3,256 करीब 60 फीसदी बढ़ोतरी
  • देशभर में 50 पीएमएलए जोन और 5 शहरों में समर्पित फेमा जोन
  • अब तक 76 मामलों में 73,800 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति का रिस्टिट्यूशन
  • नई व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू करने का लक्ष्य

आर्थिक अपराधों की जांच करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच व्यवस्था को तेज करने के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया है। बेंगलुरु में हुई ईडी की 36वीं तिमाही क्षेत्रीय अधिकारियों की कॉन्फ्रेंस में जांच से लेकर ट्रायल और जब्त संपत्तियों को पीड़ितों को लौटाने तक के लिए समयबद्ध लक्ष्य तय किए गए। सबसे बड़ा बदलाव जांच की अवधि को लेकर है। ईडी का लक्ष्य है कि जिन जांचों को पूरा होने में अभी आम तौर पर चार से पांच साल लग जाते हैं, उनका पूरा चक्र घटाकर करीब डेढ़ साल किया जाए। इसके लिए संगठन में नए पद, ज्यादा क्षेत्रीय इकाइयां, आधुनिक तकनीक और फोरेंसिक क्षमता बढ़ाई जाएगी।

ईडी का बड़ा विस्तार: 50 पीएमएलए जोन, 5 फेमा जोन, लागू होगा 1 जनवरी 2027 से

ईडी की स्वीकृत पद संख्या 2,029 से बढ़ाकर 3,256 कर दी गई है। यानी एजेंसी में करीब 60 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। नई व्यवस्था के तहत देश में 50 पीएमएलए जोन बनाए जाएंगे। इसके अलावा दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में पांच समर्पित फेमा जोन होंगे। ईडी की कार्यात्मक इकाइयों की संख्या भी 131 से बढ़कर 241 हो जाएगी। इस नई व्यवस्था को 1 जनवरी 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) और फेमा (फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट) के तहत होने वाली कार्रवाई के लिए यह विस्तार अहम माना जा रहा है।

प्रॉसिक्यूशन प्रगति रिपोर्ट होगी ज्यादा उपयोगी, 12 चरणों में होगी मुकदमों की निगरानी

ईडी ने अभियोजन प्रगति रिपोर्ट (पीपीआर) की व्यवस्था को भी ज्यादा उपयोगी बनाने का फैसला किया है। अब सिर्फ यह दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा कि मामला किस चरण में है, बल्कि देरी किस वजह से हो रही है और आगे क्या कदम उठाने हैं, यह भी दर्ज किया जाएगा। इसके लिए पूरे देश में मुकदमे की निगरानी के लिए 12 चरणों वाली एक समान व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की गई है। इसमें शिकायत दाखिल होने से लेकर संज्ञान, प्रक्रिया जारी होने, आरोप तय होने, गवाहों की गवाही, आरोपी के बयान, अंतिम बहस, फैसला और सजा तक के अलग-अलग चरण दर्ज किए जाएंगे।

हर मामले में स्थगन और देरी के कारणों का अलग रजिस्टर रखने तथा मुकदमों की प्रगति पर निगरानी के लिए लाइव डैशबोर्ड बनाने की भी योजना है।

हर क्षेत्र में 10 बड़े मामलों का ट्रायल 6-8 माह में पूरा कराने का लक्ष्य

कॉन्फ्रेंस में सिर्फ जांच को तेज करने की बात नहीं हुई, बल्कि ट्रायल को लेकर भी बेहद स्पष्ट लक्ष्य तय किया गया। ईडी के हर क्षेत्र को कम से कम 10 हाई-प्रोफाइल मामलों की पहचान करने और उनमें छह से आठ महीने के भीतर ट्रायल पूरा कराकर दोषसिद्धिहासिल करने की दिशा में काम करने को कहा गया है। इसके लिए अदालतों में लंबित मामलों की नियमित निगरानी, गवाहों और दस्तावेजों की बेहतर तैयारी, समन की समय पर तामील और अनावश्यक स्थगन यानी तारीख पर तारीख को कम करने की व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया है। ईडी ने यह भी तय किया है कि 10 साल से ज्यादा समय से लंबित मामलों के लिए अलग निगरानी रजिस्टर बनाया जाएगा और जोन प्रमुख हर महीने उनकी समीक्षा करेंगे।

कॉन्फ्रेंस में ईडी निदेशक ने अधिकारियों से कहा कि कार्रवाई में जरूरत से ज्यादा विचार-विमर्श के बजाय तेज और निर्णायक फैसले लिए जाएं, ताकि तलाशी और प्रवर्तन कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो। साथ ही, अधिकारियों को अपने-अपने जोन में कैडर पुनर्गठन की जानकारी नीचे तक पहुंचाने के लिए औपचारिक ब्रीफिंग करने और उसकी कार्यवाही दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

बैंक फ्रॉड से बिल्डर-बायर फ्रॉड तक, उपलब्धियां प्रचारित करेगी ईडी

ईडी ने बैंक धोखाधड़ी, बिल्डर-बायर धोखाधड़ी, दिवालिया प्रक्रिया से जुड़े फ्रॉड और साइबर अपराधों में अपनी कार्रवाई को नियमित प्रेस रिलीज और मीडिया संपर्क के जरिये सामने लाने पर भी जोर दिया है। एजेंसी ने संगठन के भीतर भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई है। अधिकारियों और कर्मचारियों से आपराधिक जांच, कानूनी सिद्धांतों, अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं और प्रबंधन के नए तौर-तरीकों की जानकारी लगातार अपडेट करने को कहा गया है।

दिवालिया कंपनियों में प्रमोटरों की वापसी पर ईडी की नजर

कॉन्फ्रेंस में दिवाला और दिवालियापन संहिता (इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) और पीएमएलए के बीच संबंधों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। ईडी ने ऐसे मामलों को दोबारा देखने पर जोर दिया, जहां कथित तौर पर मिलीभगत से समाधान प्रक्रिया में कंपनी की संपत्तियों पर बहुत बड़ी कटौती यानी हेयरकट स्वीकार की गई और बाद में प्रमोटरों ने उन्हीं संपत्तियों पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया। बैठक में संबंधित पक्षों के दावों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने, लेनदारों की समिति में हेरफेर, संपत्ति को निकालने और कृत्रिम रूप से बड़े हेयरकट के जरिये प्रमोटरों के दोबारा संपत्ति हासिल करने जैसी गड़बड़ियों को प्रमुख एड फ्लैग बताया गया। ईडी के जोन को ऐसे मामलों में समाधान पेशेवरों से प्राथमिकता वाली, कम मूल्य वाली, धोखाधड़ी वाली और जबरन वसूली जैसी संदिग्ध लेन-देन से जुड़ी अर्जियों की प्रतियां हासिल करने और जरूरत पड़ने पर न्यायाधिकरण के सामने हस्तक्षेप आवेदन दाखिल करने को कहा गया है।

क्रिप्टो के जरिए सीमा पार पैसा भेजने के नए तरीकों पर भी नजर

ईडी की कॉन्फ्रेंस में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों के नए तरीकों पर भी चर्चा हुई। हवाला नेटवर्क के जरिए रुपये को घरेलू ब्रोकरों के माध्यम से डॉलर से जुड़ी स्टेबलकॉइन में बदला जा सकता है और फिर सीमा पार मूल्य हस्तांतरण किया जा सकता है। इसके अलावा चेन-हॉपिंग, क्रॉस-चेन ब्रिज, मिक्सर, टंबलर, प्राइवेसी कॉइन, नेस्टेड अकाउंट और वॉश ट्रेडिंग जैसी तकनीकों पर भी अधिकारियों को जानकारी दी गई। इनका इस्तेमाल लेन-देन के वास्तविक स्रोत या रास्ते को छिपाने के लिए किया जा सकता है।

एआई से जांच आसान होगी, लेकिन ईडी को डेटा लीक का डर भी

ईडी अब जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा एनालिटिक्स का ज्यादा इस्तेमाल करना चाहता है। बेंगलुरु स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के साथ हुई कार्यशाला में आर्थिक अपराधों की जांच में एआई, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा एनालिटिक्स के इस्तेमाल पर चर्चा हुई। लेकिन ईडी ने अधिकारियों को यह चेतावनी भी दी कि ऑफलाइन इस्तेमाल की जाने वाली एआई व्यवस्था में भी डेटा लीक का जोखिम हो सकता है। इसलिए गोपनीय केस सामग्री को बेहद सावधानी से संभालने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की संस्कृति को सिर्फ जरूरत पड़ने पर जानकारी साझा करने से आगे बढ़ाकर ‘ड्यूटी टू शेयर’, यानी जरूरी जानकारी साझा करने की जिम्मेदारी, की दिशा में ले जाने पर जोर दिया गया।

बैंक, पुलिस और दूसरी जांच एजेंसियों के डेटा को जोड़ने की तैयारी

ईडी ने राज्य पुलिस, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), सीमा शुल्क, राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ सूचना के आदान-प्रदान को और बेहतर बनाने की योजना पर भी चर्चा की। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी रिपोर्टिंग को मैनुअल व्यवस्था से निकालकर ऑनलाइन पोर्टल पर ले जाने और उसे क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) तथा नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (नैटग्रिड) से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें तय सीमा से ऊपर के मामलों में अलर्ट की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

पांच साल से पुराने विदेश भेजे गए अनुरोधों की भी होगी समीक्षा

भगोड़ों और विदेश से जुड़े मामलों में ईडी ने लेटर रोगेटरी और आपसी कानूनी सहायता अनुरोधों की गुणवत्ता तथा संधियों के पालन पर जोर दिया है। पांच साल से ज्यादा समय से लंबित ऐसे अनुरोधों की समीक्षा कर पुराने या गैर-जरूरी अनुरोधों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है। भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई के लिए यात्रा जांच, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन और इंटरपोल नोटिस से लेकर पासपोर्ट रद्द करने, अदालत की घोषणा, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत कार्रवाई और पीएमएलए के तहत गैर-दोषसिद्धि आधारित संपत्ति जब्ती तक की प्रक्रिया को फिर से स्पष्ट किया गया।

ईडी अब तक 76 मामलों में 73,800 करोड़ रुपये की संपत्ति लौटा चुका

कॉन्फ्रेंस का एक अहम हिस्सा जब्त संपत्तियों को पीड़ितों को वापस करने यानी रिस्टिट्यूशन पर रहा।

ईडी के मुताबिक अब तक 76 मामलों में 73,800 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति का रिस्टिट्यूशन किया जा चुका है। एजेंसी अब इसे न्याय प्रक्रिया का अंतिम हिस्सा मानते हुए पीड़ितों को अवैध तरीके से छीनी गई संपत्ति वापस दिलाने पर और जोर देगी। ईडी ने जोन को निर्देश दिया है कि संपत्ति लौटाने के लिए आरोप तय होने का इंतजार जरूरी नहीं है। जहां बड़ी संख्या में निवेशक हों या राज्य सरकार की जब्त संपत्तियां जुड़ी हों, वहां विशेष अदालतों के सामने आवेदन करने और संबंधित राज्य प्राधिकरणों व न्यायिक समितियों के साथ समन्वय करने पर जोर दिया गया है। साथ ही, किसी भी संपत्ति को लौटाने से पहले अधिकृत मूल्यांकनकर्ता से उसका मूल्यांकन कराने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है, ताकि संपत्ति को बाजार मूल्य से कम पर निपटाने की आशंका न रहे।

31 मार्च 2029 तक 39 शहरों में अपने दफ्तर का लक्ष्य

कैडर विस्तार के साथ ईडी ने अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की भी योजना बनाई है। ‘प्रवर्तन भवन’ परियोजना के तहत 31 मार्च 2029 तक उन सभी 39 शहरों में अपने कार्यालय परिसर बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जहां ईडी की मौजूदगी है। बैठक में अलग-अलग स्थानों पर जमीन खरीद और निर्माण की स्थिति की समीक्षा भी की गई।