
by – Arvind Chaturvedi
- मंदिर, मस्जिद और दरगाह सभी के लिए जगह है वडनगर में
- नव निर्माण के लिए सरकार दे रही 80 फीसदी रकम
- न कागज का झंझट न इंटरेस्ट देने की जरूरत
प्रधानमंत्री के गांव वडनगर से अरविंद चतुर्वेदी की ग्राउंड रिपोर्ट
इस वक्त मैं जहां खड़ा हूं उसके चारो तरफ अभिभूत करने वाला नजारा है। यह कोई महानगर नहीं है। न ही रूपहले पर्दे वाली माया नगरी का दृश्य। यह हकीकत है। कहें तो 2047 में विकसित भारत एक एक गांव या कस्बा कैसा हो वडनगर को उसका प्रोटोटाइप समझिए।
लगभग 41 हजार जनसंख्या वाले इस टाउन में बहुतायत तो हिंदुओं की है लेकिन मुस्लिम, जैन, सिक्ख और अन्य समुदाय के लोग भी यहां रहते हैं। पंथनिरपेक्ष भारत के मूल स्वरूप जैसा। यह गुजरात के मेहसाणा जिले में है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृहनगर है।
जन्मदिन की तैयारी जोरों पर: 16 की रात अमित शाह-भूपेंद्र पटेल के साथ भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम
यहां चहल-पहल काफी है और किसी भव्य कार्यक्रम की तैयारी चल रही है। पूरा वडनगर सज रहा है और तैयार हो रहा है अपने धरतीपुत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन सेलिब्रेट करने के लिए। मेरे सामने शर्मिष्ठा तालाब है। पास ही हाटकेश्वर महादेव का मंदिर है। इन दोनों का जिक्र यहां इसलिए जरूरी है क्योंकि दोनों ही पीएम मोदी के बचपन से जुड़ा हुआ है। तालाब के बीच में एक मंदिर है जहां स्कूल के दिनों में पीएम रोजाना तैर कर इस मंदिर के पास जाते थे। यहां बातचीत में पता चला कि 16 तारीख को दोपहर राज्य के चार स्थानों से पवित्र जल लेकर भाजपा कार्यकर्ता, नेता और आम लोग हाटकेश्वर महादेव के मंदिर तक पहुंचेंगे। ऐसा भी नहीं है कि जल लेकर आ रहे लोगों को एक दायित्व निभाने तक सिमित रखा गया है। पीएम के स्वभाव के अनुकूल वह अपने हर सुखदुख में लोगों के साथ भागीदारी करते हैं। लिहाजा जल लेकर आ रहे लोगों का भव्य स्वागत भी होगा। 16 तारीख की रात को भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में आम लोग गृह मंत्री अमित शाह, राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ शामिल होंगे। पूरे वडनगर और इसके आसपास के इलाकों को दीए से सजाने की तैयारी चल रही है। दीप श्रृंखला, आरती, मंत्रोच्चारण, मंगलगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम का साक्षी पूरा वडनगर बनेगा। साधु-संतो का आना भी शुरू हो गया है।
एक विजन, प्लानिंग और जमीनी अमल: वडनगर केस स्टडी
फिलहाल यहां से निकलकर मैं पहुंच गया हूं वडनगर की गलियों और मोहल्लों में। नगर के एक सिरे से दूसरे सिरे तक पहुंचते-पहुंचते यह भरोसा मजबूत हो गया कि एक विजन, फिर उसकी प्लानिंग और फिर उसे जमीन पर उतारने का माद्दा और वह भी आम लोगों तक को साथ लेकर होता है। वडनगर इसका उदाहरण और केस स्टडी दोनों के रूप में मजबूती से मौजूद है।
नव निर्माण का मॉडल: 80 फीसदी सरकार, 20 फीसदी बिना ब्याज कर्ज – मयंक भाई की मिसाल में समझिए
पूरे वडनगर में जो वर्षों पुराने घर हैं उनके मूल डिजाइन को छेड़े बिना मरम्मत और नया बनाया जा रहा है। इसमें खर्च होने वाली राशि का 80 फीसदी सरकार दे रही है और 20 फीसदी भवन के मालिक। 20 फीसदी रकम भी बिना इंटरेस्ट के बैंकों से मिल रही है और किश्तों में उसे भरने की सुविधा है। स्थानीय निवासी मयंक भाई कहते हैं कि उन्होंने अपने पुराने घर को नया बनाया है। इसमें 20 लाख का खर्च आया। 16 लाख सरकार ने दिए। 4 लाख उन्होंने बिना किसी कागजी झंझट के लोन मिला। उन्हे हर महीने सिर्फ 2 हजार का किश्त भरना है। घर को नया बनाने के लिए क्या करना पड़ा? मयंक भाई कहते हैं कि, कोई दिक्कत नहीं हुई। सिर्फ नगरपालिका में जाकर फॉर्म भरा और फिर सब हो गया। अभी तक 177 से ज्यादा मकान नए बन गए हैं। मकान के अलावा दो मंदिर और दो मस्जिद भी इसी योजना के तहत नए सिरे से बनाए या संवारे गए हैं।
3300 घर सोलर से चल रहे: पीएम आवास योजना 1.0 और 2.0 के पूरे आंकड़े
वडनगर घूमते वक्त मुझे जितने भी मकान दिखे, उनमें ज्यादातर की छतों पर बिजली के लिए सोलर पैनल लगे दिखे। बातचीत में पता चला कि 3300 घर सोलर से चल रहे हैं। सुनकर अच्छा लगा तो सोचा जरा यह भी पता करता चलूं कि सरकार की फ्लैगशिप पीएम आवास योजना की प्रधानमंत्री के गृह नगर में स्थिति क्या है? पता चला कि पीएम आवास योजना 1.0 (2018-23) में 1299 घर स्वीकृत हुए थे। 1256 बन कर तैयार हो गए और 40 घरों का निर्माण कार्य चल रहा है। इस योजन के तहत सिर्फ 3 घर शुरू नहीं हुए शायद इसके लिए स्वीकृत राशि में कुछ फेरबदल की जरूरत है। पीएम आवास योजना 2.0 (2024-26) में 512 घर स्वीकृत हुए थे। 208 का निर्माण शुरू हो चुका है और 304 का काम अभी शुरू नहीं हो सका है। आवास योजना के अलावा वडनगर में अभी तक 6750 शौचालय भी बनाए जा चुके हैं।
प्रेरणा स्थल से आर्ट गैलरी तक: वडनगर की नई पहचान
दोपहर का भोजन करने के बाद मैं चल पड़ा उस स्कूल की तरफ जहां कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पढ़ते थे। अब यह स्कूल प्रेरणा स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां देश भर के बच्चों को संस्कृति और संस्कार की शिक्षा दी जाती है। अभी तक 2076 बच्चे यहां से संस्कृति और संस्कार सीख चुके हैं। यहां से आगे बढ़ने पर आर्ट गैलरी दिखाई दी। यह मेन बाजार में है। यहां पीएम मोदी से जुड़े सामान रखे गए हैं। शाम ढ़लते-ढ़लते जीईएमईआरएस जेनरल हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज, तोरान होटल, ताना रिरि गार्डन आदि नजर से गुजरता गया और 2047 के विकसित भारत की धुंधली तस्वीर साफ होने लगी। अचानक से ढ़ोल, नगाड़ो, संख की ध्वनि और आरती के मंत्रोच्चारण से ध्यान खुला तो सामने दिखा हाटकेश्वर महादेव। भगवान शिव के आगे सिर झुकाया और मैं बढ़ गया अपने होटल की तरफ।



