चीनी की बढ़ती कीमतों को कांग्रेस ने बताया 36 हजार करोड़ का घोटाला, सरकार पर लगाए कालाबाजारी के आरोप

चीनी की बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस का विरोध, रणदीप सुरजेवाला का बयान
कांग्रेस ने त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को 36 हजार करोड़ रुपये का घोटाला बताया है।

रिपोर्टर प्रिया तिवारी

त्योहारी सीजन से पहले कीमतों पर केंद्र सरकार को घेरा

त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। कांग्रेस ने चीनी के दामों में बढ़ोतरी को 36 हजार करोड़ रुपये का घोटाला बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार की नाकामी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

सुरजेवाला का दावा: ₹45 से बढ़कर ₹70-75 किलो पहुंची चीनी

कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि चीनी की कीमत 45 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 70 से 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय बढ़ी कीमतों से आम लोगों की जेब पर भारी बोझ पड़ेगा।

स्टॉक और उत्पादन के आंकड़ों का हवाला

कांग्रेस महासचिव ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 का ओपनिंग शुगर स्टॉक 50 लाख टन है, जो 2024-25 के 80 लाख टन के मुकाबले काफी कम है। इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन के अनुसार 2025-26 में चीनी उत्पादन 275 लाख टन हुआ, जबकि सरकार 343 लाख टन उत्पादन का झूठा दावा करती रही। उन्होंने कहा कि अप्रैल के अंत में ही सरकार को देश में चीनी की कमी का अंदेशा हो गया था, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। यानी जिसके पास भी चीनी का स्टॉक है, उसका स्टॉक बगैर कुछ किए 45 रुपये से 75 रुपये प्रति किलो का हो जाएगा।

ड्यूटी-फ्री आयात के फैसले पर सवाल

कांग्रेस नेता के मुताबिक, कीमतें बढ़ने के बाद सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि विदेश से आने वाली चीनी को रिफाइन होकर बाजार तक पहुंचने में समय लगेगा, जिससे मौजूदा त्योहारी सीजन में इसका फायदा नहीं मिल पाएगा।

उपभोक्ताओं पर ₹36 हजार करोड़ के अतिरिक्त बोझ का दावा

सुरजेवाला ने दावा किया कि अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारों के दौरान चीनी की कीमतों में करीब 30 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं पर लगभग 36 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। कांग्रेस ने इसे कालाबाजारी और मुनाफाखोरी से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

E20 नीति और एथेनॉल उत्पादन पर उठे सवाल

कांग्रेस ने ई-20 नीति को लेकर भी सवाल उठाए। सुरजेवाला का आरोप है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल से बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई और इसका असर कीमतों पर पड़ा।

कांग्रेस सरकार की रियायती चीनी योजना का जिक्र

कांग्रेस महासचिव ने आगे कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान राशन की दुकानों के माध्यम से 40 करोड़ लोगों को 13.50 रुपये प्रति किलो के रियायती दाम पर प्रति व्यक्ति 500 ग्राम चीनी हर माह दी जाती थी और सरकार इस पर 18.50 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी वहन करती थी। वर्तमान मोदी सरकार ने 2017 में इस योजना को ही बंद कर दिया।

गन्ना किसानों की समस्याओं को भी उठाया

कांग्रेस ने गन्ना किसानों की समस्याओं को भी उठाते हुए आरोप भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि चीनी मिलों द्वारा निश्चित समय पर पर्ची न देना, पेराई के लिए लंबी कतारें और भुगतान में महीनों की देरी के चलते किसान गन्ने की खेती छोड़ रहे हैं। चीनी मिलों की आर्थिक हालत खस्ता है। उन्होंने सवाल किया कि खून-पसीने की मेहनत के बाद भी किसान को सिर्फ घटती पैदावार और भुगतान के लिए मिलों के धक्के ही मिलने हैं, तो वह गन्ना क्यों उगाएगा?

महंगाई पर ठोस कदम उठाने की मांग

सुरजेवाला ने एनडीए नेताओं के महंगाई को लेकर दिए बयानों पर भी निशाना साधा और कहा कि सरकार को जनता की परेशानियों का मजाक बनाने के बजाय बढ़ती कीमतों पर ठोस कदम उठाने चाहिए।