बोगस ITC मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, न्यू राना हाउस से 1.10 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश बरामद

फर्जी ITC मामले में न्यू राना हाउस पर ED की छापेमारी
फर्जी ITC और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में 9 ठिकानों पर तलाशी ली।

फर्जी आईटीसी नेटवर्क पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, 9 ठिकानों पर तलाशी

एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली

फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के जरिए सरकारी खजाने को कथित तौर पर करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के लखनऊ जोनल ऑफिस ने 24 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद तथा हरियाणा के फरीदाबाद में कुल 9 ठिकानों पर तलाशी ली। कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई।

इस कार्रवाई में सबसे अहम बरामदगी मुजफ्फरनगर के न्यू राना हाउस से हुई, जहां ईडी के मुताबिक 1.10 करोड़ रुपये से ज्यादा नकदी मिली है। गाजियाबाद स्थित सुधा स्टील के परिसर से भी नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

न्यू राना हाउस का संबंध राना परिवार से है। पूर्व विधायक शाहनवाज राना इसी परिवार से जुड़े हैं। हालांकि, ईडी की ओर से फिलहाल यह नहीं कहा गया है कि न्यू राना हाउस से मिली पूरी नकदी व्यक्तिगत रूप से शाहनवाज राना की है। जांच एजेंसी अब इस रकम के स्रोत और कथित फर्जी आईटीसी नेटवर्क से इसके संबंध की पड़ताल कर रही है।

फर्जी बिलों से तैयार किया गया आईटीसी नेटवर्क

ईडी की कार्रवाई जम्बूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड से जुड़े मामले में हुई है। एजेंसी के मुताबिक यह इकाई कथित तौर पर फर्जी इनवॉयस और ई-वे बिल के जरिए बिना वास्तविक माल की आवाजाही के फर्जी आईटीसी तैयार करने और उसे आगे पास करने के नेटवर्क में शामिल थी।

यानी कागजों पर माल की खरीद-बिक्री दिखाई गई, उसके लिए बिल बनाए गए और ई-वे बिल तैयार किए गए, लेकिन वास्तविक रूप से माल की आवाजाही नहीं हुई। इन दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी व्यवस्था के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया और दूसरे कारोबारियों को भी आईटीसी पास किया गया।

जीएसटी अधिकारियों की जांच में अब तक 9.63 करोड़ रुपये के आईटीसी का फर्जी तरीके से लाभ उठाने और 10.28 करोड़ रुपये के आईटीसी को आगे पास करने की बात सामने आई है। यानी करीब 19.91 करोड़ रुपये के आईटीसी से जुड़े लेन-देन इस मामले की जांच के दायरे में हैं।

न्यू राना हाउस में मिला कैश, पैसे की पूरी चेन पर जांच

ईडी के मुताबिक जांच में केवल फर्जी बिलों का इस्तेमाल ही नहीं, बल्कि रकम को छिपाने और उसकी वास्तविक पहचान बदलने के लिए कई स्तरों पर लेन-देन किए जाने के संकेत मिले हैं।

एजेंसी ने सर्कुलर ट्रांजैक्शन, रकम की तेजी से लेयरिंग और कई फर्जी या अस्तित्वहीन कंपनियों के जरिए धन के लेन-देन की बात कही है। ऐसी व्यवस्था में रकम को अलग-अलग कंपनियों और बैंक खातों के बीच घुमाया जाता है, जिससे वास्तविक कारोबारी गतिविधि का भ्रम पैदा हो सके।

जांच के मुताबिक इस नेटवर्क से जुड़ी कई बोगस या गैर-मौजूद इकाइयों के जरिए रकम को तेजी से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद कुछ रकम की नकद निकासी भी की गई।

यही वजह है कि मामला केवल जीएसटी में फर्जी आईटीसी हासिल करने तक सीमित नहीं रहा। ईडी ने कथित अवैध कमाई को प्रोसीड्स ऑफ क्राइम मानते हुए पीएमएलए के तहत जांच शुरू की है।

न्यू राना हाउस में मिला कैश, अब स्रोत की तलाश

24 अगस्त की कार्रवाई में न्यू राना हाउस से 1.10 करोड़ रुपये से अधिक नकदी मिलना जांच का अहम बिंदु है। अब ईडी के सामने सबसे बड़ा सवाल नकदी के स्रोत का है।

क्या यह रकम कथित फर्जी आईटीसी नेटवर्क से जुड़े लेन-देन से निकली थी? क्या इसे किसी बोगस कंपनी या कारोबारी इकाई के जरिए यहां पहुंचाया गया? या फिर इसका स्रोत कोई दूसरी कारोबारी गतिविधि है?

इन सवालों के जवाब तलाशी में मिले दस्तावेजों, डिजिटल डाटा, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जांच के बाद सामने आ सकते हैं।

ईडी ने तलाशी अभियान का उद्देश्य अपराध से अर्जित रकम का पता लगाना, इसके आगे के लाभार्थियों की पहचान करना और कथित आईटीसी नेटवर्क से जुड़े दस्तावेजी एवं डिजिटल सबूत जुटाना बताया है।

राना परिवार और पुराना जीएसटी कनेक्शन

न्यू राना हाउस का नाम मुजफ्फरनगर के राना परिवार से जुड़ा है। पूर्व विधायक शाहनवाज राना भी इसी परिवार से आते हैं। राना परिवार का कारोबारी और राजनीतिक प्रभाव मुजफ्फरनगर क्षेत्र में रहा है।

इस परिवार का नाम पहले भी जीएसटी कार्रवाई से जुड़े एक मामले में सामने आ चुका है। दिसंबर 2024 में जीएसटी अधिकारियों की एक टीम ने मुजफ्फरनगर में राना परिवार से जुड़े कारोबारी परिसर में तलाशी ली थी। इस दौरान अधिकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और उनके वाहनों में तोड़फोड़ के मामले में पूर्व विधायक शाहनवाज राना समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।

हालांकि मौजूदा ईडी कार्रवाई का आधार अलग है। यह मामला जम्बूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड से जुड़े कथित फर्जी आईटीसी नेटवर्क और उससे संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच पर केंद्रित है। इसलिए पुराने जीएसटी मामले और मौजूदा ईडी जांच के बीच सीधा संबंध जांच एजेंसी के निष्कर्ष आने के बाद ही स्थापित किया जा सकेगा।

9 ठिकानों की तलाशी, डिजिटल सबूत भी जुटाए

ईडी की टीमों ने मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में कुल 9 परिसरों की तलाशी ली। कार्रवाई का उद्देश्य केवल नकदी बरामद करना नहीं था। एजेंसी इस कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लाभार्थियों और कंपनियों की पहचान भी कर रही है।

तलाशी के दौरान मिले दस्तावेज और डिजिटल सामग्री जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। खास तौर पर बैंक लेन-देन, फर्जी इनवॉयस, ई-वे बिल, कंपनियों के बीच रकम के ट्रांसफर और नकद निकासी के रिकॉर्ड से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित नेटवर्क कैसे काम करता था।

अब जांच का फोकस पैसे की पूरी चेन पर है – फर्जी बिल किसने बनाए, बिना माल की आवाजाही के आईटीसी किसने हासिल किया, इसे किन कंपनियों को पास किया गया और आखिरकार इस रकम का वास्तविक लाभ किसे मिला।

फिलहाल न्यू राना हाउस से 1.10 करोड़ रुपये से अधिक नकदी की बरामदगी ने मामले को नया मोड़ दिया है। अब ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि यह रकम कथित फर्जी आईटीसी नेटवर्क की कमाई का हिस्सा है या इसका कोई अलग स्रोत है। एजेंसी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।