
तहलका डेस्क।
नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय का आगाज करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को अपने मंत्रिमंडल की पहली औपचारिक बैठक का नेतृत्व किया। सत्ता संभालने के बाद इस पहली बैठक में ही सरकार ने कई दूरगामी और रणनीतिक फैसले लिए हैं, जो राज्य की सुरक्षा और जनहितकारी नीतियों से सीधे जुड़े हैं। इस बैठक में उन पांच मंत्रियों ने शिरकत की, जिन्होंने हाल ही में पद की शपथ ली है।
सरकार के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को भूमि हस्तांतरित करने की मंजूरी देना शामिल है। मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती जिलों में तेजी से बदलते जनसांख्यिकीय स्वरूप पर चिंता व्यक्त करते हुए इस कदम को सुरक्षा के लिहाज से अनिवार्य बताया। उन्होंने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि भूमि हस्तांतरण की यह पूरी प्रक्रिया आगामी 45 दिनों के भीतर संपन्न की जाए। इसके लिए मुख्य सचिव और भूमि राजस्व विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाते हुए कैबिनेट ने केंद्र की ‘आयुष्मान भारत’ योजना को बंगाल में लागू करने का निर्णय लिया है। इसके माध्यम से राज्य के गरीब परिवारों को ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य कवर मिल सकेगा। साथ ही, पूर्ववर्ती सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने जनगणना संबंधी केंद्रीय परिपत्रों की अनदेखी कर संवैधानिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ किया था, जिसके कारण महिला आरक्षण जैसी प्रक्रियाएं बाधित हुईं।
अब राज्य सरकार ने जनगणना और ‘भारतीय न्याय संहिता’ को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मंजूरी दे दी है।
शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर भी राहत दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्री के चुनावी वादे को अमलीजामा पहनाते हुए स्कूलों में नौकरी के लिए आयु सीमा में 5 वर्ष की वृद्धि की गई है। प्रशासनिक कुशलता बढ़ाने के लिए राज्य के अधिकारियों के प्रशिक्षण को अब केंद्रीय कैडर की तर्ज पर व्यवस्थित किया जाएगा।



