
तहलका डेस्क।
नई दिल्ली/ वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को वाराणसी की पावन धरा से भारत की अटूट आध्यात्मिक शक्ति का उद्घोष किया। ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अंतर्गत आयोजित ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सदियों तक विदेशी हमलावरों ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों पर प्रहार किया, लेकिन वे पूरी तरह विफल रहे। मुख्यमंत्री के अनुसार, सनातन धर्म केवल मंदिरों की संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की अंतरात्मा और चेतना में गहराई से रचा-बसा है, जिसे कोई भी ताकत कभी मिटा नहीं सकती।
इतिहास के काले अध्यायों का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मोहम्मद गौरी से लेकर मुगलों तक, आक्रमणकारियों की एक लंबी श्रृंखला ने हमारी पहचान को खंडित करने का कुत्सित प्रयास किया। उन्होंने सीधे तौर पर औरंगजेब का उल्लेख करते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ के मंदिर को ढहाकर गुलामी का ढांचा खड़ा किया गया, परंतु वे भारतीयों के आत्मबल को नहीं तोड़ सके। आज समय का चक्र ऐसा घूमा है कि वे हमलावर इतिहास के कूड़ेदान में दफन हो गए हैं, जबकि काशी विश्वनाथ धाम और सोमनाथ मंदिर पूरे वैभव के साथ भारत के स्वाभिमान की गौरवगाथा सुना रहे हैं।
राजनीतिक विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ विचारधाराएं आज भी देश के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के मार्ग में रोड़े अटकाती हैं। उन्होंने बिना नाम लिए इशारा किया कि जिन शक्तियों ने अतीत में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था, उन्हीं के उत्तराधिकारियों ने अयोध्या में प्रभु श्री राम के मंदिर निर्माण में भी बाधाएं खड़ी कीं। मुख्यमंत्री ने इस सांस्कृतिक नवजागरण का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। \उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प के कारण ही आज सोमनाथ से लेकर अयोध्या और काशी से लेकर उज्जैन तक, हमारे पवित्र केंद्र अपने खोए हुए वैभव को पुनः प्राप्त कर रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी अपने विचार साझा किए।



