
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने नई श्रम संहिताओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद “कायरतापूर्ण तरीके” से चार नई श्रम संहिताओं के नियम लागू किए।
खरगे ने कहा कि ये नए लेबर कोड मजदूरों के हित में नहीं बल्कि बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाए गए हैं। उनका कहना है कि इन नियमों के लागू होने से कंपनियों को कर्मचारियों को नौकरी पर रखने और निकालने में ज्यादा छूट मिल जाएगी, जबकि श्रमिक यूनियनों की ताकत कमजोर होगी।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने दावा किया कि सरकार ने इन कानूनों को लागू करने से पहले मजदूर संगठनों या श्रमिक प्रतिनिधियों से कोई बड़ा संवाद नहीं किया। उन्होंने कहा कि 2015 के बाद से भारतीय श्रम सम्मेलन तक नहीं बुलाया गया, जिससे साफ है कि सरकार ने श्रमिकों की राय को नजरअंदाज किया।
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और अगर केंद्र में उनकी सरकार बनती है तो इन श्रम संहिताओं की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कांग्रेस के “श्रमिक न्याय एजेंडे” का भी जिक्र किया।
खरगे ने कहा कि मनरेगा को मजबूत किया जाना चाहिए और इसे शहरी क्षेत्रों तक बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने देशभर में न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन तय करने की मांग की। उनका कहना है कि असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी कामों में ठेके पर भर्ती की व्यवस्था कम होनी चाहिए और स्थायी रोजगार को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता खरगे के मुताबिक, नई श्रम संहिताएं मजदूरों की सुरक्षा कमजोर कर सकती हैं और इससे कर्मचारियों की नौकरी पर असुरक्षा बढ़ेगी।
फिलहाल, नई लेबर कोड को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इन्हें श्रम व्यवस्था को आधुनिक बनाने वाला कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे मजदूर विरोधी फैसला करार दे रहा है।



