
तहलका डेस्क।
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के लिए रविवार का दिन हादसों और शोक की खबर लेकर आया, जहां अलग-अलग जिलों में प्रकृति और मानवीय असावधानी ने सात लोगों की जान ले ली। सबसे हृदयविदारक घटना बलिया जिले के शिवरामपुर घाट पर हुई, जहां एक मुंडन संस्कार की खुशियां मातम में बदल गईं।
गंगा नदी में स्नान के दौरान एक नाबालिग लड़की मोबाइल से सेल्फी लेने की कोशिश कर रही थी, तभी अचानक पैर फिसलने से वह गहरे पानी में चली गई। उसे बचाने के फेर में एक-एक कर पांच अन्य लोग भी नदी की लहरों में कूद पड़े। हालांकि, ग्रामीणों की तत्परता से दो लोगों को बचा लिया गया, लेकिन हर्षिता, अरुण, नंदिता और अर्जुन नाम के चार युवाओं की डूबने से मौत हो गई। दोपहर तक स्थानीय गोताखोरों और दमकल विभाग की टीम ने चारों शवों को बरामद कर लिया, जिससे मुंडन उत्सव वाले घर में कोहराम मच गया। यह हादसा एक बार फिर नदियों के किनारे सेल्फी के प्रति बढ़ते जानलेवा क्रेज को रेखांकित करता है।
वहीं, प्रदेश के अन्य हिस्सों में मौसम का मिजाज जानलेवा साबित हुआ। सोनभद्र के बभनी इलाके में शनिवार शाम आई आंधी के दौरान पेड़ के नीचे आम बटोर रही दो मासूम बच्चियों, अर्चना और आस्था पर आकाशीय बिजली काल बनकर गिरी। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पास ही खड़ा एक बालक गंभीर रूप से झुलस गया। प्रकृति के इस प्रहार ने चौना गांव में सन्नाटा पसर दिया है।
मौसम की यह तबाही यहीं नहीं रुकी; सुलतानपुर के धनपतगंज में रविवार सुबह चली तेज आंधी ने एक विशाल पेड़ को धराशायी कर दिया। इसकी चपेट में आने से चक्की पर मौजूद अजीत सिंह की दबकर मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। प्रशासन ने सभी मामलों में शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर पीड़ितों को सरकारी सहायता दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये घटनाएं चेतावनी हैं कि जलधाराओं के पास लापरवाही और खराब मौसम में बरती गई बेरुखी जीवन पर कितनी भारी पड़ सकती है।



