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चंपारण सत्याग्रह के 100 साल

बिहार के उत्तर-पश्चिम में स्थित चंपारण वह इलाका है जहां सत्याग्रह की नींव पड़ी. नील की खेती के नाम पर अंग्रेजी शासन द्वारा किसानों के शोषण के खिलाफ यहां गांधी के नेतृत्व में 1917 में सत्याग्रह आंदोलन चला था. आंदोलन के शताब्दी वर्ष में चंपारण एक बार फिर वैसे ही आंदोलन की बाट जोह रहा है.

‘किसानों की तीन लाख आत्महत्याओं पर कभी कोई बात ही नहीं होती’

लगा था कि भाजपा किसानों पर ध्यान देगी लेकिन कृषि की जो हालत है वह बेहद दयनीय है. शुक्रिया सुप्रीम कोर्ट का कि उसने फटकार लगाई तो सरकार को एहसास हुआ कि सूखा पड़ा हुआ है.

कहानी राजकुमार शुक्ल की, जिन्होंने चंपारण में तैयार की गांधी के सत्याग्रह की जमीन

जो चंपारण में गांधी के सत्याग्रह को जानते हैं, वे राजकुमार शुक्ल का नाम भी जानते हैं. गांधी के चंपारण सत्याग्रह में दर्जनों नाम ऐसे रहे जिन्होंने दिन-रात एक कर गांधी का साथ दिया. गांधी के आने के पहले चंपारण में कई नायकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही.’ इनमें कौन महत्वपूर्ण नायक था, तय करना मुश्किल है. सबकी अपनी भूमिका थी, सबका अपना महत्व था. लेकिन 1907-08 के इस आंदोलन के बाद गांधी को चंपारण लाने में और उन्हें सत्याग्रही बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका राजकुमार शुक्ल की रही.



‘अगर लिंग परीक्षण पर सजा का प्रावधान है तो ऐसे मां-बाप को क्यों नहीं दंडित किया जाना चाहिए जो अपने किन्नर बच्चों को कहीं छोड़ आते हैं?’

चित्रा मुद्गल हिंदी साहित्य की वरिष्ठ लेखिका हैं. हाल ही में उनका किन्नरों पर लिखा गया उपन्यास ‘नालासोपारा पो. बॉक्स नं. 203’ प्रकाशित हुआ है. लेखन के अलावा वे सामाजिक कार्यों में भी काफी सक्रिय रहती हैं. किन्नरों की स्थिति, देश के राजनीतिक हालात, साहित्य और स्त्री विमर्श समेत तमाम मुद्दों पर उनसे बातचीत.

 
कुनन-पोशपोरा सामूहिक बलात्कार कांड : किताब में दर्ज हुआ दर्द

1991 में कश्मीर के कुनन और पोशपोरा गांवों में बलात्कार की शिकार हुई महिलाओं को अब भी न्याय की आस है. इनकी पीड़ा और व्यवस्था की असंवेदनशीलता को पांच महिलाओं ने किताब की शक्ल में दर्ज किया है.

 
आग का ‘झरिया’

कोयले की खदानों में लगी आग ने झरिया को विनाश के मुहाने पर खड़ा कर दिया है. 2016 आग लगने की इस घटना का शताब्दी वर्ष है. 1916 में लगी आग आज तक बुझाई नहीं जा सकी है. इससे तमाम लोग जहां अपनी जमीन छोड़ने पर मजबूर हुए वहीं जो अब भी रह रहे हैं वे घुटन भरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं.

 
कश्मीर में एनएचपीसी के मुनाफे पर रार

नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) के कश्मीर में पिछले 15 साल में कमाए गए 194 अरब रुपये के मुनाफे की बात सामने आने से जम्मू कश्मीर में बिजली को लेकर होती आ रही बहस फिर शुरू हो गई है.

 

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  • चिराग तले अंधेरा
    चिराग तले  अंधेरा

    अमानवीय परिस्थितियों और तमाम तरह के दबावों के बीच काम कर रहे पत्रकारों से सच का झंडाबरदार बनने की उम्मीद कैसे की जा सकती है..? हाल ये है कि समाज को सच की नई रोशनी दिखाने वालों पत्रकारों की जिंदगी में ही भयावह अंधेरा पसरा हुआ है

     

  • लुगदी या लोकप्रिय : मुख्यधारा के मुहाने पर
    लुगदी या लोकप्रिय : मुख्यधारा के मुहाने पर

    लुगदी कहकर जिस साहित्य को अब तक खारिज किया जाता रहा, उसे मुख्यधारा में तवज्जो मिलने लगी है

     

  • ‘मुझे माओवादी आंदोलन के शहरी चेहरे के रूप में पेश करना एक बड़े षडयंत्र का हिस्सा है’
    ‘मुझे माओवादी आंदोलन के शहरी चेहरे के रूप में पेश करना एक बड़े षडयंत्र का हिस्सा है’

    लगभग 90 प्रतिशत विकलांग साईबाबा को नागपुर जेल के बदनाम ‘अंडा सेल’ में रखा गया. इस दौरान उचित देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं के बिना साईबाबा की तबीयत कई बार बिगड़ी. साईबाबा ने अपनी गिरफ्तारी और पुलिस प्रताड़ना के बारे में बात की

     

  • संघर्ष की पगडंडी पर 30 साल
    संघर्ष की पगडंडी पर 30 साल

    नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) की उम्र तीस साल हो गई है. इस सफर में जहां एक पीढ़ी अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव पर तो दूसरी प्रौढ़ हो चुकी है, बावजूद इसके सरदार सरोवर बांध बनने से विस्थापित हुए लोगों को अब तक न्याय का इंतजार है. अहिंसक और सत्याग्रह के रास्ते पर चलते रहना इस आंदोलन की रीढ़ है. तमाम उतार-चढ़ावों के बीच भी आंदोलन और इससे जुड़े लोगों का उत्साह कभी कम नहीं हुआ. ये आंदोलन भीमकाय सरदार सरोवर के डूब क्षेत्र में रह रहे सैकड़ों गांवों के लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है

     

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    लालू के कोर वोट बैंक में यादव (वाई) और मुसलमान (एम) रहे हैं, जिसे बिहार में ‘माई (एमवाई)’ समीकरण कहा जाता रहा है. इन्हीं को साधकर लंबे समय तक वह बिहार में प्रभावी रहे हैं पर अब परिस्थितियां बदल रहीं हैं. यादव बहुल होने के बावजूद एक-एक कर ये इलाके उनके हाथों से निकल चुके हैं. यादवों के गढ़ में लगातार हार के बाद उनकी चिंता वाजिब ही है.

     

  • मध्यप्रदेश
    दान की आंखें कूड़ेदान में
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    मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दान में मिली आंखों के कूड़ेदान में मिलने से प्रबंधन सवालों के घेरे में है

     

  • उत्तर प्रदेश
    कनहर में दफन होती समाजवाद की थीसिस
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    सोनभद्र में बन रहा कनहर बांध विवादों के केंद्र में है. आंबेडकर जयंती पर इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों पर गोलीबारी कई तरह के सवाल उठा रही है

     

  • बिहार
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  • वाहियात चीजों से अच्छा है, कुछ ऐसा करूं जो एक कलाकार के तौर पर मुझे खुशी दे: मानव कौल
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    प्रयोगवादी लेखक, मंजे हुए अभिनेता और निर्देशक के तौर पर मानव कौल ने रंगमंच और फिल्म इंडस्ट्री में एक अलहदा छवि बनाई है.

     

  • ‘मैं खुद को क्रिएटिव बनाए रखने के लिए काम करता हूं, मुंबई के लिए नहीं’
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    शैवाल हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं. उनकी ‘कालसूत्र’ कहानी पर चर्चित फिल्म ‘दामुल’ का निर्माण हुआ. उन्होंने इस फिल्म के लिए कथा, पटकथा और संवाद लिखे. इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार स्वर्ण कमल मिला. प्रसिद्घ फिल्म निर्देशक प्रकाश झा ने दामुल के बाद उनसे मृत्यदंड फिल्म की पटकथा लिखवाई. उन्हाेंने नई फिल्म ‘दास कैपिटल’ के लिए कथा, पटकथा और संवाद लिखे हैं. हाल ही में आई फिल्म ‘मांझी- द माउंटेनमैन’ में वे संवाद सलाहकार हैं. उनसे निराला की बातचीत

     

  • ‘आदिवासी समाज से कोई आगे आएगा तो हिंदी लेखकों की चिंता बढ़ जाएगी’
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    आदित्य मांडी संथाली भाषा के चर्चित कवि हैं. औपचारिक शिक्षा के तौर पर उन्होंने बांकुड़ा जिले के बारूघुटू गांव के स्कूल से दसवीं तक की पढ़ाई की. वे आगे पढ़ नहीं सके क्योंकि परिवार की आर्थिक हालत उन्हें इसकी इजाजत नहीं दे रही थी. उन्हें पढ़ाई छोड़कर नौकरी करनी पड़ी. वे सीआइएसएफ में कांस्टेबल हैं और समय निकालकर कविता रचते हैं. उनका कविता संग्रह ‘बांचाव लड़हाई’ को साहित्य अकादमी ने सम्मानित किया. उनसे निराला की बातचीत

     

  • जो बज़्म की हर चीज़ को परवाना बना दे…
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    साल 2014 जिन शख्सियतों की जिंदगी का अहम पड़ाव है, उनमें ग़ज़ल साम्राज्ञी बेगम अख्त़र का नाम भी शामिल है. बेगम की याद में पूरे साल देशभर में जलसे और संगीत कार्यक्रम होते रहे, क्योंकि यह उनकी पैदाइश का सौंवा साल था. अगर सितारों के बीच कहीं से बेगम देख रही होंगी, तो फख्र कर रही होंगी कि जिस माटी से उन्होंने मुहब्बत की थी, उसने उन्हें भुलाया नहीं है

     

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