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उत्तर प्रदेश में एक दलित और महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद इस समुदाय की महिलाओं से बलात्कार और उत्पीड़न की घटनाएं आज भी पहले की तरह जारी हैं. शोभिता नैथानी की रिपोर्ट; फोटो:विजय पांडे
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' नए निर्देशकों में आग है लेकिन वे कितने जिम्मेदार हैं, कहना मुश्किल है '

उम्र की 66वीं दहलीज पर खड़े हिंदुस्तान के मशहूर फिल्मकार राजा सईद मुजफ्फर अली आज भी उत्साह, ऊर्जा और नए विचारों से लबरेज 'जूनी' जैसे ...
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बिना आंच की जांच

उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के मामले सामने आने पर जांच तो होती है पर दोषियों के खिलाफ अक्सर कोई कार्रवाई नहीं होती. ऐसे में भ्रष्टाचार क्यों न बढ़े? देहरादून से मनोज रावत की रिपोर्ट...
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सहज मौत का नया साधन

बुंदेलखंड में आत्महत्याएं रोकने के तमाम उपायों पर आत्महत्या करने का एक नया तरीका भारी पड़ रहा है. हृदयेश तिवारी की रिपोर्ट...
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जिन पाया तिन मारयां

सोनभद्र में एक पुलिस 'मुठभेड़' में चार लोग मारे जाते हैं. इनमें से एक जीवित है, दूसरा पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज राजकुमार नहीं बल्कि बद्रीनाथ है और बाकी दो के बारे में कुछ पक्का नहीं है. अतुल चौरसिया की पड़ताल...
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नटराज के नए भक्त

निशिता झा बता रही हैं कि शास्त्रीय नृत्य जगत में महिलाओं के वर्चस्व के बावजूद पुरुष नर्तक भी इस क्षेत्र में पहचान बनाने की कोशिश में हैं...
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' दोनों तरफ के कश्मीर का एकीकरण किया सकता है '

कश्मीर समस्या का समाधान क्या हो इसपर मेहबूबा मुफ्ती के विचार...
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    कर्मन की गति न्यारी

    कर्ज की हमको दवा बताई  कर्ज ही थी बीमारी,  साधो!कर्मन की गति न्यारी.गेहूं उगे शेयर नगरी में खेतों में बस भूख उग रही मूल्य सूचकांक
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    खुशी प्रायोजित की जाएगी

    खुशी प्रायोजित की जाएगी ठंडे चूल्हे के पास बैठी हुई एक बीमार औरत मुस्कराएगी लंबी गाड़ी से उतरेगी एक गदराई हुई औरत और बनावटी फूल
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    बरसात की उलझन

    ज़मीन पर आवाज़ गूंजी ' यार, ये बारिश क्यों होती है? उफ़्फ, बरसात इस शहर के लायक है ही नहीं....' ये चुभती हुई आवाजें बरसात
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    झूठ पर सच का कब्जा

    पिछले 60 साल से गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है. गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम कभी भी कुछ ऐसा कहता-सुनता-समझता नजर नहीं आता जो पहले न
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    मातृभाषा

    जैसे चींटियां लौटती हैं बिलों में कठफोड़वा लौटता है काठ के पास वायुयान लौटते हैं एक के बाद एक लाल आसमान में डैने पसारे हुए हवाई अड्डे की ओर ओ मेरी भाषा मैं
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    मैं बहुत खुश थी अम्मा ! - अंशु मालवीय

    ये कविता, तहलका के एक पाठक कुमार मुकेश ने गुजरात पर तहलका के विशेष अंक में लिखे तरुण जी के संपादकीय पर टिप्पणी करते हुए
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