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‘मुख्यमंत्री खुद व्यापमं घोटाले में शामिल हैं और मेरी मौत चाहते हैं’
व्यापमं मामले में हुई हेर-फेर को सबसे पहले दुनिया के सामने लाने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष चतुर्वेदी को मध्य प्रदेश सरकार की ओर से सुरक्षा मिली हुई है. इस पूरे कांड में मुख्यमंत्री की संदिग्ध भूमिका और एक व्हिसल-ब्लोअर होने के जोखिमों के बारे...
नीतीश-लालू को झटका, पर भाजपा की बल्ले-बल्ले नहीं
बिहार विधान परिषद चुनाव में जो परिणाम आए हैं, क्या वे आगामी विधानसभा चुनाव को प्रभावित कर पाएंगे?
गुंडागर्दी का समाजवाद!
कानून एक मजाक है! समाजवादी पार्टी के नेताओं को तो शायद यही लगता है. उत्तर प्रदेश में किसी से...


अलविदा कॉमरेड

हम जब आखिरी बार मिले थे तब मैंने आपसे कहा था कि आप अपनी जीवनी क्यों नहीं लिखते हैं? आपने जवाब में कहा था, 'अगर मैं ऐसा करना चाहूं तो मुझे कुछ समय के लिए मीडिया की मुख्यधारा से दूर रहना पड़ेगा. मैं नहीं चाहता कि लोग मुझे भूल जाएं.'  

मध्ययुगीनप्रदेश

एक रिपोर्ट के अनुसार देश के 27 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में छुआछूत को मानते हैं. 53 प्रतिशत के साथ मध्य प्रदेश इस श्रेणी में देश में पहले नंबर पर है. हाल ही में हुईं कुछ घटनाएं इस बात की गवाही दे रही हैं  

तबाही का इंतजार करती दिल्ली

धरती हर पल बदलावों की ओर बढ़ रही है और इंसान खतरों की ओर. दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की एक रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी को भूकंप का एक बड़ा झटका लग सकता है और इससे होने वाला नुकसान परमाणु हमले से भी कई गुना ज्यादा होगा  

हुर्रियत: प्रासंगिकता पर प्रश्न

पिछले साल जम्मू कश्मीर के विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली अप्रत्याशित जीत के बाद से घाटी में अलगाववादियों के हौसले पस्त हैं. हर बार की तरह इस बार भी हुर्रियत ने चुनाव का बहिष्कार करने का फरमान सुनाया था. हालांकि चुनाव के बाद बदले राजनीतिक परिदृश्य में इस बात की अटकलें तेज हैं कि अलगाववादी चुनाव में हिस्सा लेने के मुद्दे पर अब सोचने को विवश हो रहे हैं, जो उनकी प्रकृति और रणनीति दोनों के खिलाफ है....  

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  • लुगदी या लोकप्रिय : मुख्यधारा के मुहाने पर
    लुगदी या लोकप्रिय : मुख्यधारा के मुहाने पर

    लुगदी कहकर जिस साहित्य को अब तक खारिज किया जाता रहा, उसे मुख्यधारा में तवज्जो मिलने लगी है  

  • मारुति के मारे, व्यवस्था से हारे
    मारुति के मारे, व्यवस्था से हारे

    तकरीबन तीन साल पहले मारुति के मानेसर प्लांट में प्रबंधन से विवाद के बाद गिरफ्तार हुए मजदूरों के साथ जो हुआ और जो हो रहा है, क्या उसे किसी भी तरह मानवीय और न्यायोचित ठहराया जा सकता है?  

  • स्वार्थ का संगम!
    स्वार्थ का संगम!

    जब तक यह रिपोर्ट प्रकाशित होगी और आप इससे गुजर रहे होंगे, पूरी संभावना है तब तक दिल्ली में मुलायम सिंह के आवास से जनता परिवार के विलय की घोषणा हो चुकी होगी या उसकी आखिरी प्रक्रिया चल रही होगी. मुलायम सिंह यानी नेताजी के नेतृत्व में लालू प्रसाद यादव,  

  • शादी या बलात्कार का अधिकार
    शादी या बलात्कार का अधिकार

    आश्रय संबंधी सामान्य नियमों के अनुसार, कहा गया है कि विवाह के साथ ही स्त्री, अपने पति को यह अधिकार दे देती है कि वो जब चाहे अपनी इच्छानुसार उससे शारीरिक संबंध बना सकता है और इस नियम में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं हो सकता. हालांकि कनाडा, दक्षिण  

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  • बिहार
    उत्तराधिकार या पुत्राधिकार
    उत्तराधिकार या पुत्राधिकार

    महाभारत में एक कहानी है. यह है या नहीं, न मालूम लेकिन कई बार प्रसंगों व संदर्भों के साथ इसे सुनाया जाता है. जब कुरूक्षेत्र में युद्ध समाप्त हो जाता है तो धृतराष्ट्र और कृष्ण आमने-सामने होते हैं. धृतराष्ट्र कृष्ण से पूछते हैं कि तुम्हारा क्या लेना-देना था? तुमने क्यों   

  • उत्तर प्रदेश
    कनहर में दफन होती समाजवाद की थीसिस
    कनहर में दफन होती समाजवाद की थीसिस

    इस साल अक्षय तृतीया पर जब देशभर में लगन चढ़ा हुआ था, बारातें निकल रही थीं और हिंदी अखबारों के स्थानीय संस्करण हीरे-जवाहरात के विज्ञापनों से पटे पड़े थे, तब बनारस से सटे सोनभद्र के दो गांवों में पहले से तय दो शादियां टल गईं. फौजदार (पुत्र केशवराम, निवासी भीसुर)  

  • झारखंड
    ‘मेरी लड़ाई किसी मजहब या मर्द जाति से नहीं, एक व्यक्ति से है’
    ‘मेरी लड़ाई किसी मजहब या मर्द जाति से नहीं, एक व्यक्ति से है’

    दो माह पहले तक आप इतने किस्म के लोगों से दिन-रात घिरी रहती थीं, अब अकेली हैं. पता नहीं कहां से इतने लोग इकट्ठा हो गए थे. संगठन वाले, मीडियावाले, राजनीतिवाले. लेकिन मैं जानती थी कि यह कुछ दिनों की ही बात है. फिर कोई नहीं आएगा. यानी आपको पहले  

  • उत्तराखंड
    गुरबत में गूजर
    गुरबत में गूजर

    सरकार की उपेक्षा के चलते उत्तराखंड में हजारों गूजर आदिम हालात में जिंदगी बसर करने को मजबूर हैं.  

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  • बे‘पटरी’ जिंदगी
    बे‘पटरी’ जिंदगी

    कोई इन्हें कुत्ता कहे या कुछ और… फुटपाथ इनका बसेरा था, है और जो हालात नजर आ रहे हैं, ये आगे भी रहेगा. फुटपाथ पर कोई शौक से नहीं साेता, ये इनकी मजबूरी है. अकेले राजधानी में ही हजारों लोग फुटपाथ पर गुजर-बसर करने को मजबूर हैं. 2011 की जनगणना  

  • सड़क किनारे साहित्य
    सड़क किनारे साहित्य

    राजधानी दिल्ली का सांस्कृतिक केंद्र है मंडी हाउस और उसके आसपास का इलाका. शाम के वक्त यह इलाका एक साथ कई अलग-अलग तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गुलजार रहता है. ऐसी ही एक शाम को मंडी हाउस के श्रीराम सेंटर के बाहर काफी चहलपहल है. स्ट्रीट लाइट की पीली रौशनी  

  • किराए का कंधा
    किराए का कंधा

    शहरों में शादी-ब्याह और जन्मदिन के आयोजनों के लिए इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों की मदद लेना नई बात नहीं है. इससे पहले शादी-ब्याह और दूसरे आयोजन सामाजिक सहयोग से आसानी से हो जाते थे. लोगों के पास एक-दूसरे के लिए दिनोंदिन कम होते समय के कारण इन आयोजनों को सफलतापूर्वक पूरा कराने के लिए अब पेशवरों की मदद ली जा रही है. शहरों में अब एक नया चलन तेजी से विकसित हो रहा है. अब यहां ऐसी भी कई कंपनियां...  

  • सितारा देवी: ओझल सितारा…
    सितारा देवी: ओझल सितारा…

    94 की उम्र में अपने निधन से पहले वह लंबे समय से बीमारियों से जूझ रही थीं. सितारा देवी ने हिंदी सिने जगत में कथक का न केवल प्रवेश कराया बल्कि उसे एक अलग पहचान भी दिलाई. उनको याद करने के कई बहाने हैं. दिलों पर राज करना एक ऐसा  

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  • खेल का निकला तेल
    खेल का निकला तेल

    खेल का शास्त्रीय प्रारूप कहे जाने वाले टेस्ट क्रिकेट में भारत की दुर्गति कुछ तो खिलाड़ियों और खेल प्रशासकों के रवैय्ये का नतीजा है और कुछ इस संस्करण के वक्त से तालमेल न बिठा पाने का. इसका नुकसान आखिरकार खेल को ही होना है.  

  • भंवर में भाजपा
    भंवर में भाजपा

    बिहार विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल करने को बेताब भाजपा की राह में मुश्किलें हजार हैं. राज्य में नेतृत्व के सवाल से लेकर सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने में पार्टी के पसीने छूट रहे हैं  

  • बर्बर कानून को बेकरार सरकार
    बर्बर कानून को बेकरार सरकार

    गुजरात कंट्रोल ऑफ टेररिज्म एंड ऑर्गनाइज्ड क्राइम बिल को मानवाधिकार के खिलाफ माना जा रहा है  

  • शक्ति के पीछे की शख्सियत
    शक्ति के पीछे की शख्सियत

    नातजुर्बेकार लौंडे! एक दौर में इस विशेषण का प्रयोग कांग्रेस पार्टी के बुजुर्ग नेता अपने मन की भड़ास निकालने के लिए करते थे. चिढ़न से उपजे इन शब्दों का इस्तेमाल बुजुर्ग कांग्रेसी नेता उन युवाओं को कमतर ठहराने के लिए किया करते थे जिनको लेकर राजीव गांधी भविष्य की कांग्रेस