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आज के समय में बैंडिट क्वीन बन ही नहीं पाती : गोविंद नामदेव

डेविड धवन के निर्देशन में बनी निर्माता पहलाज निहलानी की फिल्म शोला और शबनम से बॉलीवुड में कदम रखने वाले प्रख्यात अभिनेता गोविंद नामदेव जल्द ही हॉलीवुड की फिल्म में नजर आएंगे. बैंडिट क्वीन, प्रेमग्रंथ, विरासत, कच्चे धागे, सरफरोश, सत्या जैसी फिल्मों में खलनायक का दमदार किरदार निभाने वाले गोविंद नामदेव से बातचीत.

नीतीश कुमार : आधी छोड़, पूरी को धावे

बिहार में बढ़ते अपराध के मुद्दे के बीच मुख्यमंत्री नीतीश एक बार फिर से प्रधानमंत्री बनने का सपना पाल बैठे हैं. इसके लिए वे दो मुद्दों-शराबबंदी और संघ मुक्त भारत, को भुनाने की कोशिश में हैं. हालांकि विश्लेषक इन दोनों मुद्दों से उन्हें फायदा मिलने की बात को बहुत ज्यादा उम्मीद भरी नजरों से नहीं देख रहे हैं. उनके अनुसार नीतीश की हालत आधी छोड़, पूरी को धावे वाली हो गई है.

इस क्रिकेट के साथ खेल क्यों ?

भारत की ब्लाइंड क्रिकेट टीम विश्व की एकमात्र टीम है जिसने ब्लाइंड क्रिकेट के तीनों बड़े खिताब जीते हैं. यह उपलब्धि उसने पिछले कुछ सालों में ही हासिल की है. इसके बावजूद आज देश में ब्लाइंड क्रिकेट विषम परिस्थितियों से जूझ रहा है. पैसे और संसाधनों के अभाव में खिलाड़ी प्रैक्टिस तक नहीं कर पा रहे हैं. कई खिलाड़ियों के पास तो अपना घर चलाने तक के पैसे नहीं हैं.



किसी मुसलमान को यह हक नहीं है कि वह गलत काम करे और मजहब की आड़ में इसे छिपाए : नजमा हेपतुल्ला

केंद्र में सत्तारूढ़ नरेंद्र मोदी सरकार के दो साल पूरे हो गए हैं. इस दौरान सरकार के खिलाफ सांप्रदायिकता फैलाने के आरोप लगातार लगते रहे हैं. विपक्ष का आरोप है कि भाजपा सरकार इन दो वर्षों के दौरान अल्पसंख्यकों में विश्वास का माहौल पैदा करने में असफल रही है. हालांकि वरिष्ठ भाजपा नेता और अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला इन आरोपों को खारिज करती हैं. वे कहती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार समाज के सभी वर्गों के साथ बराबरी का रवैया अपनाए जाने के अपने वादे पर बखूबी काम कर रही है. रिश्ते में मौलाना अबुल कलाम आजाद की नातिन नजमा 1980 से राज्यसभा सांसद हैं. वे राज्यसभा की पूर्व उपसभापति भी रही हैं. 2004 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुई नजमा ने 2007 में उपराष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा था. 2014 से नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री का पदभार संभाल रही नजमा हेपतुल्ला ने 'तहलका' से बातचीत में अपने मंत्रालय की दो वर्षीय उपलब्धियों, भविष्य की योजनाओं, अल्पसंख्यकों की स्थिति और भाजपा व मुसलमानों के बीच संबंधों पर खुलकर विचार व्यक्त किए.

 
‘हां, मैं चाहती हूं कि चुनाव प्रचार की कमान कैप्टन अमरिंदर सिंह ही संभाले’

पंजाब की पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल कैप्टन अमरिंदर सिंह की आलोचक रही हैं पर इस बार उन्होंने खुद आगे आकर आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह के नाम की पेशकश की है. आम आदमी पार्टी (आप) और अकाली दल के कांग्रेस में अनबन होने के दावों को खारिज करते हुए उनका कहना है कि पूरी पार्टी अमरिंदर सिंह के साथ है. उनसे बातचीत.

 
सरकार को चाहिए कि आहत भावनाओं का एक आयोग बनाए- नाकोहस यानी नेशनल कमीशन फॉर हर्ट सेंटिमेंट्स! : पुरुषोत्तम अग्रवाल

आलोचक के तौर पर ख्यात पुरुषोत्तम अग्रवाल कवि भी हैं और कथाकार भी. कबीर पर लिखी उनकी किताब ‘अकथ कहानी प्रेम की’ आलोचना के क्षेत्र में मील का पत्थर है. वे लगातार कविताएं लिखते हैं पर कविरूप में बहुत कम ही सामने आते हैं. उनकी कई कहानियां समय-समय पर प्रकाशित हुई हैं. कुछ समय पहले उनकी लिखी एक कहानी ‘नाकोहस’ ने खासी चर्चा और प्रशंसा बटोरी. कहानी का दायरा इतना व्यापक था कि बाद में उन्होंने इसे उपन्यास का रूप दिया. पुरुषोत्तम अग्रवाल से बातचीत.

 

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  • चिराग तले अंधेरा
    चिराग तले  अंधेरा

    अमानवीय परिस्थितियों और तमाम तरह के दबावों के बीच काम कर रहे पत्रकारों से सच का झंडाबरदार बनने की उम्मीद कैसे की जा सकती है..? हाल ये है कि समाज को सच की नई रोशनी दिखाने वालों पत्रकारों की जिंदगी में ही भयावह अंधेरा पसरा हुआ है

     

  • लुगदी या लोकप्रिय : मुख्यधारा के मुहाने पर
    लुगदी या लोकप्रिय : मुख्यधारा के मुहाने पर

    लुगदी कहकर जिस साहित्य को अब तक खारिज किया जाता रहा, उसे मुख्यधारा में तवज्जो मिलने लगी है

     

  • ‘मुझे माओवादी आंदोलन के शहरी चेहरे के रूप में पेश करना एक बड़े षडयंत्र का हिस्सा है’
    ‘मुझे माओवादी आंदोलन के शहरी चेहरे के रूप में पेश करना एक बड़े षडयंत्र का हिस्सा है’

    लगभग 90 प्रतिशत विकलांग साईबाबा को नागपुर जेल के बदनाम ‘अंडा सेल’ में रखा गया. इस दौरान उचित देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं के बिना साईबाबा की तबीयत कई बार बिगड़ी. साईबाबा ने अपनी गिरफ्तारी और पुलिस प्रताड़ना के बारे में बात की

     

  • संघर्ष की पगडंडी पर 30 साल
    संघर्ष की पगडंडी पर 30 साल

    नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) की उम्र तीस साल हो गई है. इस सफर में जहां एक पीढ़ी अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव पर तो दूसरी प्रौढ़ हो चुकी है, बावजूद इसके सरदार सरोवर बांध बनने से विस्थापित हुए लोगों को अब तक न्याय का इंतजार है. अहिंसक और सत्याग्रह के रास्ते पर चलते रहना इस आंदोलन की रीढ़ है. तमाम उतार-चढ़ावों के बीच भी आंदोलन और इससे जुड़े लोगों का उत्साह कभी कम नहीं हुआ. ये आंदोलन भीमकाय सरदार सरोवर के डूब क्षेत्र में रह रहे सैकड़ों गांवों के लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है

     

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  • बिहार
    किस हाल में ‘माई’ के लाल
    किस हाल में ‘माई’ के लाल

    लालू के कोर वोट बैंक में यादव (वाई) और मुसलमान (एम) रहे हैं, जिसे बिहार में ‘माई (एमवाई)’ समीकरण कहा जाता रहा है. इन्हीं को साधकर लंबे समय तक वह बिहार में प्रभावी रहे हैं पर अब परिस्थितियां बदल रहीं हैं. यादव बहुल होने के बावजूद एक-एक कर ये इलाके उनके हाथों से निकल चुके हैं. यादवों के गढ़ में लगातार हार के बाद उनकी चिंता वाजिब ही है.

     

  • मध्यप्रदेश
    दान की आंखें कूड़ेदान में
    दान की  आंखें  कूड़ेदान में

    मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दान में मिली आंखों के कूड़ेदान में मिलने से प्रबंधन सवालों के घेरे में है

     

  • उत्तर प्रदेश
    कनहर में दफन होती समाजवाद की थीसिस
    कनहर में दफन होती समाजवाद की थीसिस

    सोनभद्र में बन रहा कनहर बांध विवादों के केंद्र में है. आंबेडकर जयंती पर इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों पर गोलीबारी कई तरह के सवाल उठा रही है

     

  • बिहार
    उत्तराधिकार या पुत्राधिकार
    उत्तराधिकार या पुत्राधिकार

     

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  • वाहियात चीजों से अच्छा है, कुछ ऐसा करूं जो एक कलाकार के तौर पर मुझे खुशी दे: मानव कौल
    वाहियात चीजों से अच्छा है, कुछ ऐसा करूं जो एक कलाकार के तौर पर मुझे खुशी दे: मानव कौल

    प्रयोगवादी लेखक, मंजे हुए अभिनेता और निर्देशक के तौर पर मानव कौल ने रंगमंच और फिल्म इंडस्ट्री में एक अलहदा छवि बनाई है.

     

  • ‘मैं खुद को क्रिएटिव बनाए रखने के लिए काम करता हूं, मुंबई के लिए नहीं’
    ‘मैं खुद को क्रिएटिव बनाए रखने के लिए काम करता हूं, मुंबई के लिए नहीं’

    शैवाल हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं. उनकी ‘कालसूत्र’ कहानी पर चर्चित फिल्म ‘दामुल’ का निर्माण हुआ. उन्होंने इस फिल्म के लिए कथा, पटकथा और संवाद लिखे. इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार स्वर्ण कमल मिला. प्रसिद्घ फिल्म निर्देशक प्रकाश झा ने दामुल के बाद उनसे मृत्यदंड फिल्म की पटकथा लिखवाई. उन्हाेंने नई फिल्म ‘दास कैपिटल’ के लिए कथा, पटकथा और संवाद लिखे हैं. हाल ही में आई फिल्म ‘मांझी- द माउंटेनमैन’ में वे संवाद सलाहकार हैं. उनसे निराला की बातचीत

     

  • ‘आदिवासी समाज से कोई आगे आएगा तो हिंदी लेखकों की चिंता बढ़ जाएगी’
    ‘आदिवासी समाज से कोई आगे आएगा तो हिंदी लेखकों की चिंता बढ़ जाएगी’

    आदित्य मांडी संथाली भाषा के चर्चित कवि हैं. औपचारिक शिक्षा के तौर पर उन्होंने बांकुड़ा जिले के बारूघुटू गांव के स्कूल से दसवीं तक की पढ़ाई की. वे आगे पढ़ नहीं सके क्योंकि परिवार की आर्थिक हालत उन्हें इसकी इजाजत नहीं दे रही थी. उन्हें पढ़ाई छोड़कर नौकरी करनी पड़ी. वे सीआइएसएफ में कांस्टेबल हैं और समय निकालकर कविता रचते हैं. उनका कविता संग्रह ‘बांचाव लड़हाई’ को साहित्य अकादमी ने सम्मानित किया. उनसे निराला की बातचीत

     

  • जो बज़्म की हर चीज़ को परवाना बना दे…
    जो बज़्म की हर चीज़ को परवाना बना दे…

    साल 2014 जिन शख्सियतों की जिंदगी का अहम पड़ाव है, उनमें ग़ज़ल साम्राज्ञी बेगम अख्त़र का नाम भी शामिल है. बेगम की याद में पूरे साल देशभर में जलसे और संगीत कार्यक्रम होते रहे, क्योंकि यह उनकी पैदाइश का सौंवा साल था. अगर सितारों के बीच कहीं से बेगम देख रही होंगी, तो फख्र कर रही होंगी कि जिस माटी से उन्होंने मुहब्बत की थी, उसने उन्हें भुलाया नहीं है

     

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