‘मेरे पास कोई बटन नहीं है जिसे दबाकर चीजें तुरंत बदल दूं’
बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव हैं, लेकिन लगता नहीं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस चुनौती की ज्यादा फिक्र है. विजय सिम्हा से बातचीत ...‘क्या मैं कोई दीमक हूं जिसने बिहार को खा लिया?’
यह उतरती ठंड का मौसम है, लेकिन पटना में चल रही सर्द हवा से इसका एहसास नहीं हो रहा. हम बिहार विधानसभा में विपक्ष की ...भाभी हुई किताबी
घर में रोक लगी तो क्या हुआ? देश की बहुचर्चित भाभी बरास्ते फ्रांस देश-दुनिया के दरवाजे पर फिर से दस्तक दे रही है. एडलिन बर्टिन की रिपोर्ट...बड़े सपनों की पाठशाला का नन्हा हेडमास्टर
16 साल के बाबर अली का स्कूल बताता है कि बड़े काम बड़ी उम्र के मोहताज नहीं होते. सम्राट चक्रबर्ती की रिपोर्ट...‘बाजार जाति को बरकरार रखेगा और उसे बेचेगा’
‘उचक्का’ नाम से आई अपनी आत्मकथा के जरिए मराठी लेखक लक्ष्मण गायकवाड़ ने हिंदी पाठकों के बीच अपनी पहचान बनाई. फिलहाल वे खानाबदोशों के अधिकारों ...'बहुत सारी बातें समझना चाहता हूं'
आरा में जन्मे और पटना में पले-बढ़े अमिताभ कुमार 1986 से न्यूयॉर्क में रह रहे हैं. हसबैंड ऑफ ए फैनेटिक, होम प्रोडक्ट्स, पासपोर्ट फोटोज और ...-
'जब तक किस्सागोई है, किताबें लिखीं और पढ़ी जाएंगी'
आपकी मनपसंद लेखन शैली क्या है?ऐसी कोई भी शैली जिसमें भाषा के प्रयोग का आनंद हो, किस्सागोई हो, कुछ टेढ़ी, महीन बुनावट की कसरत हो, -
'महाभारत मुझे अलग-अलग कोणों से बार-बार आकर्षित करता है'
आपकी मनपसंद लेखन शैली क्या है?मित्रों को पत्र लिखना पसंद करता हूं. दुर्भाग्य से यह विधा संसार से उठती जा रही है. बाकी कथा, उपन्यास,
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कर्मन की गति न्यारी
कर्ज की हमको दवा बताई कर्ज ही थी बीमारी, साधो!कर्मन की गति न्यारी.गेहूं उगे शेयर नगरी में खेतों में बस भूख उग रही मूल्य सूचकांक -
खुशी प्रायोजित की जाएगी
खुशी प्रायोजित की जाएगी ठंडे चूल्हे के पास बैठी हुई एक बीमार औरत मुस्कराएगी लंबी गाड़ी से उतरेगी एक गदराई हुई औरत और बनावटी फूल
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केएम नानावटी मुकदमा
साठ के दशक का ऐसा मामला जिसमें आरोपित के पक्ष में सहानुभूति जुटाने में मीडिया ने अहम भूमिका निभाई थी -
रविंद्र म्हात्रे हत्याकांड
आतंकवाद की पहली घटना जिसमें भारत के किसी राजनयिक को निशाना बनाया गया था
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‘इस बार मुझे अपना गांव बेगाना सा लगा’
मेरा गांव बिहार के वैशाली जिले में आता है, गांव का नाम है बान्थु. इसका सामाजिक ताना-बाना कुछ ऐसा है कि यहां भूमिहारों का बोलबाला -
‘उस कच्चे पलस्तर में गौतम सर ने कुछ अच्छी लकीरें खींच दी थीं’
उम्र का पलस्तर जब कच्चा होता है तो उसमें पड़ने वाली लकीरें हमेशा के लिए आपमें रह जाती हैं. 1993 की बात है. शिक्षक दिवस
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झूठ पर सच का कब्जा
पिछले 60 साल से गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है. गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम कभी भी कुछ ऐसा कहता-सुनता-समझता नजर नहीं आता जो पहले न -
नौटंकियां सरकारी, पात्र हम
दादाजी को जब रिटायरमेंट के बाद नगर पालिका से अपना हिसाब-किताब निपटाने के लिए अपनी दो-तीन चप्पलें-सैंडिल कम पड़ रही थीं तो वे अक्सर कहा
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मातृभाषा
जैसे चींटियां लौटती हैं बिलों में कठफोड़वा लौटता है काठ के पास वायुयान लौटते हैं एक के बाद एक लाल आसमान में डैने पसारे हुए हवाई अड्डे की ओर ओ मेरी भाषा मैं -
मैं बहुत खुश थी अम्मा ! - अंशु मालवीय
ये कविता, तहलका के एक पाठक कुमार मुकेश ने गुजरात पर तहलका के विशेष अंक में लिखे तरुण जी के संपादकीय पर टिप्पणी करते हुए
-  यहां सेक्स टैबू है, स्त्री के लिए
-  ख़ूबसूरत लड़कियां
-  कब जागेंगे हम?
-  आतंक के मोहरे या बलि के बकरे ?
-  यहां सेक्स टैबू है, स्त्री के लिए
-  आतंक के मोहरे या बलि के बकरे ?
-  कब जागेंगे हम?
-  'मुझे कोई शर्मिंदगी नहीं है'
-  आतंक के मोहरे या बलि के बकरे ?
-  यहां सेक्स टैबू है, स्त्री के लिए
-  कब जागेंगे हम?
-   ‘जीवन एक तीर्थयात्रा है.’
सच सबको कड़वा लगता है. सच तो यहि है कि हाँ भुमिहारों ने प्रदूषण फैला रखी है. मेरा घर बेगुसराय है.. खांटी भुमिहार का गढ़. ...
mujhe ye article kafi aacha laga. is k jariye ham un mahan hastiyon k bare me jane. kafi aacha laga.
Kamane wale BAAp ko potical adhar per agar larke alag kerdenge to nikamma BETA GARIBI ki ore jhukega.JHARKHAND KE CESS se hi Bihar sarkar chalti ...
bahut kathin hai dagar panght ki chhat patt bar lao yamuna se matki.par muskil ye hai ki ab to yamuna ka pani bhi maila achal ...






