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अनिल कुंबले : चुनौतियां ज्यादा, समय कम

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने अनिल कुंबले को अगले एक साल के लिए टीम का नया कोच नियुक्त किया है. वे टीम के साथ वेस्टइंडीज दौरे पर अपनी पहली चुनौती का सामना कर रहे हैं. क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में भारत को विश्व की नंबर एक टीम बनाने का सपना साकार करने में जुटे कुंबले के सामने कई चुनौतियां हैं लेकिन उनके पास उनसे पार पाने के लिए समय शायद कम है.

लखनऊ का मतलब सिर्फ नवाब नहीं बल्कि कहार और ब्रास बैंड वाले भी हैं : नदीम हसनैन

प्रोफेसर नदीम हसनैन की गिनती देश के शीर्ष मानवशास्त्रियों में होती है. हाल ही में अंग्रेजी में उनकी किताब आई है- ‘द अदर लखनऊ’. कई वर्षों के शोध पर आधारित यह किताब लखनऊ के समाज और संस्कृति पर केंद्रित है. उनसे बातचीत.

दिल्ली का कश्मीर की जनता से कोई संवाद ही नहीं हो रहा

आज कश्मीर के मसले पर मोदी जिस परिस्थिति का सामना कर रहे हैं, वह उस परिस्थिति से ज्यादा गंभीर है जिसका सामना मनमोहन ने किया था.



रज्जाक भाई! आपका बहुत-बहुत शुक्रिया, मुझे मेरी ईदी देने के लिए…

पसीने से तरबतर बनी हुई शक्ल और ऐसे सवाल की वजह से लोग मुझे पागल समझ रहे थे. फोन का बैलेंस भी खत्म हो चुका था. जल्दबाजी में बटुआ लाना भी भूल गया था. अजीब असहायों जैसी स्थिति थी. आखिरकार ...

 
जम्मू-कश्मीर : अघातक हथियार, घातक वार

कश्मीर में होने वाले विरोध-प्रदर्शनों को काबू में रखने के लिए इस्तेमाल हो रही नकली गोलियां या पैलेट कश्मीरी युवाओं की जिंदगी पर भारी पड़ रही हैं. अघातक हथियारों की श्रेणी में आने वाली इन पैलेट से 2010 से अब तक 500 के लगभग युवा अपनी आंखों की रोशनी खो चुके हैं, तो वहीं कुछ गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

 
‘बिहार में लालू-नीतीश से ही पिछड़ों-दलितों की राजनीति की शुरुआत नहीं होती. मैं पिछड़े जमात से बना पहला मुख्यमंत्री था’

बिहार मे पूर्व मुख्यमंत्रियों पर बात शुरू होती है तो लालू-राबड़ी से शुरुआत होती है, जीतन राम मांझी से होते हुए जगन्नाथ मिश्र पर आकर रुक जाती है. बिहार में भी बहुतों को नहीं पता कि एक पूर्व मुख्यमंत्री और हैं जिनका नाम सतीश प्रसाद सिंह है और जो पटना में ही रहते हैं. वे कुशवाहा (कोइरी) जाति से आते हैं और 1968 में राज्य के छठे मुख्यमंत्री बने थे. उनके नाम दो उपलब्धियां दर्ज हैं. एक तो वे सिर्फ तीन दिन तक मुख्यमंत्री रहे, दूसरा वे पिछड़ी जाति से आने वाले बिहार के पहले मुख्यमंत्री हैं.

 
ममता कुलकर्णी : कभी दर्शकों को थी, अब पुलिस को है तलाश

90 के दशक की खूबसूरत, बोल्ड और सेक्स सिंबल कही जाने वाली मशहूर अभिनेत्री ममता कुलकर्णी फिर से चर्चा में हैं. उस दौर की फिल्मों में कभी दर्शकों को उनकी तलाश रहती थी, लेकिन अब दो हजार करोड़ रुपये की ड्रग तस्करी के मामले में महाराष्ट्र पुलिस को उनकी तलाश है.

 

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  • चिराग तले अंधेरा
    चिराग तले  अंधेरा

    अमानवीय परिस्थितियों और तमाम तरह के दबावों के बीच काम कर रहे पत्रकारों से सच का झंडाबरदार बनने की उम्मीद कैसे की जा सकती है..? हाल ये है कि समाज को सच की नई रोशनी दिखाने वालों पत्रकारों की जिंदगी में ही भयावह अंधेरा पसरा हुआ है

     

  • लुगदी या लोकप्रिय : मुख्यधारा के मुहाने पर
    लुगदी या लोकप्रिय : मुख्यधारा के मुहाने पर

    लुगदी कहकर जिस साहित्य को अब तक खारिज किया जाता रहा, उसे मुख्यधारा में तवज्जो मिलने लगी है

     

  • ‘मुझे माओवादी आंदोलन के शहरी चेहरे के रूप में पेश करना एक बड़े षडयंत्र का हिस्सा है’
    ‘मुझे माओवादी आंदोलन के शहरी चेहरे के रूप में पेश करना एक बड़े षडयंत्र का हिस्सा है’

    लगभग 90 प्रतिशत विकलांग साईबाबा को नागपुर जेल के बदनाम ‘अंडा सेल’ में रखा गया. इस दौरान उचित देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं के बिना साईबाबा की तबीयत कई बार बिगड़ी. साईबाबा ने अपनी गिरफ्तारी और पुलिस प्रताड़ना के बारे में बात की

     

  • संघर्ष की पगडंडी पर 30 साल
    संघर्ष की पगडंडी पर 30 साल

    नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) की उम्र तीस साल हो गई है. इस सफर में जहां एक पीढ़ी अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव पर तो दूसरी प्रौढ़ हो चुकी है, बावजूद इसके सरदार सरोवर बांध बनने से विस्थापित हुए लोगों को अब तक न्याय का इंतजार है. अहिंसक और सत्याग्रह के रास्ते पर चलते रहना इस आंदोलन की रीढ़ है. तमाम उतार-चढ़ावों के बीच भी आंदोलन और इससे जुड़े लोगों का उत्साह कभी कम नहीं हुआ. ये आंदोलन भीमकाय सरदार सरोवर के डूब क्षेत्र में रह रहे सैकड़ों गांवों के लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है

     

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  • बिहार
    किस हाल में ‘माई’ के लाल
    किस हाल में ‘माई’ के लाल

    लालू के कोर वोट बैंक में यादव (वाई) और मुसलमान (एम) रहे हैं, जिसे बिहार में ‘माई (एमवाई)’ समीकरण कहा जाता रहा है. इन्हीं को साधकर लंबे समय तक वह बिहार में प्रभावी रहे हैं पर अब परिस्थितियां बदल रहीं हैं. यादव बहुल होने के बावजूद एक-एक कर ये इलाके उनके हाथों से निकल चुके हैं. यादवों के गढ़ में लगातार हार के बाद उनकी चिंता वाजिब ही है.

     

  • मध्यप्रदेश
    दान की आंखें कूड़ेदान में
    दान की  आंखें  कूड़ेदान में

    मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दान में मिली आंखों के कूड़ेदान में मिलने से प्रबंधन सवालों के घेरे में है

     

  • उत्तर प्रदेश
    कनहर में दफन होती समाजवाद की थीसिस
    कनहर में दफन होती समाजवाद की थीसिस

    सोनभद्र में बन रहा कनहर बांध विवादों के केंद्र में है. आंबेडकर जयंती पर इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों पर गोलीबारी कई तरह के सवाल उठा रही है

     

  • बिहार
    उत्तराधिकार या पुत्राधिकार
    उत्तराधिकार या पुत्राधिकार

     

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  • वाहियात चीजों से अच्छा है, कुछ ऐसा करूं जो एक कलाकार के तौर पर मुझे खुशी दे: मानव कौल
    वाहियात चीजों से अच्छा है, कुछ ऐसा करूं जो एक कलाकार के तौर पर मुझे खुशी दे: मानव कौल

    प्रयोगवादी लेखक, मंजे हुए अभिनेता और निर्देशक के तौर पर मानव कौल ने रंगमंच और फिल्म इंडस्ट्री में एक अलहदा छवि बनाई है.

     

  • ‘मैं खुद को क्रिएटिव बनाए रखने के लिए काम करता हूं, मुंबई के लिए नहीं’
    ‘मैं खुद को क्रिएटिव बनाए रखने के लिए काम करता हूं, मुंबई के लिए नहीं’

    शैवाल हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं. उनकी ‘कालसूत्र’ कहानी पर चर्चित फिल्म ‘दामुल’ का निर्माण हुआ. उन्होंने इस फिल्म के लिए कथा, पटकथा और संवाद लिखे. इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार स्वर्ण कमल मिला. प्रसिद्घ फिल्म निर्देशक प्रकाश झा ने दामुल के बाद उनसे मृत्यदंड फिल्म की पटकथा लिखवाई. उन्हाेंने नई फिल्म ‘दास कैपिटल’ के लिए कथा, पटकथा और संवाद लिखे हैं. हाल ही में आई फिल्म ‘मांझी- द माउंटेनमैन’ में वे संवाद सलाहकार हैं. उनसे निराला की बातचीत

     

  • ‘आदिवासी समाज से कोई आगे आएगा तो हिंदी लेखकों की चिंता बढ़ जाएगी’
    ‘आदिवासी समाज से कोई आगे आएगा तो हिंदी लेखकों की चिंता बढ़ जाएगी’

    आदित्य मांडी संथाली भाषा के चर्चित कवि हैं. औपचारिक शिक्षा के तौर पर उन्होंने बांकुड़ा जिले के बारूघुटू गांव के स्कूल से दसवीं तक की पढ़ाई की. वे आगे पढ़ नहीं सके क्योंकि परिवार की आर्थिक हालत उन्हें इसकी इजाजत नहीं दे रही थी. उन्हें पढ़ाई छोड़कर नौकरी करनी पड़ी. वे सीआइएसएफ में कांस्टेबल हैं और समय निकालकर कविता रचते हैं. उनका कविता संग्रह ‘बांचाव लड़हाई’ को साहित्य अकादमी ने सम्मानित किया. उनसे निराला की बातचीत

     

  • जो बज़्म की हर चीज़ को परवाना बना दे…
    जो बज़्म की हर चीज़ को परवाना बना दे…

    साल 2014 जिन शख्सियतों की जिंदगी का अहम पड़ाव है, उनमें ग़ज़ल साम्राज्ञी बेगम अख्त़र का नाम भी शामिल है. बेगम की याद में पूरे साल देशभर में जलसे और संगीत कार्यक्रम होते रहे, क्योंकि यह उनकी पैदाइश का सौंवा साल था. अगर सितारों के बीच कहीं से बेगम देख रही होंगी, तो फख्र कर रही होंगी कि जिस माटी से उन्होंने मुहब्बत की थी, उसने उन्हें भुलाया नहीं है

     

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