
तहलका ब्यूरो।
नई दिल्ली/कोलकाता। कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड आज केवल एक मैदान नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की बदलती सियासी तकदीर का गवाह बना। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह समेत भाजपा के कई नेताओं की मौजूदगी में बांग्ला भाषा में शपथ ली।
शनिवार, 9 मई 2026 को जब राज्यपाल आर.एन. रवि ने शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई, तो यह महज एक सरकार का गठन नहीं, बल्कि बंगाल के राजनीतिक व्याकरण का पूर्ण रूपांतरण था। उनके साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निशिथ प्रमाणिक ने भी मंत्री पद की शपथ ली।
गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के पावन अवसर पर ‘सोनार बांग्ला’ के उद्घोष के साथ राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सत्ता का औपचारिक सूत्रपात हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभेंदु को ‘विकास का नया सारथी’ घोषित कर स्पष्ट कर दिया कि दिल्ली और कोलकाता के बीच ‘डबल इंजन’ की शक्ति अब राज्य को एक नई दिशा देगी। प्रधानमंत्री का यह संबोधन कि ‘राज्य में अन्याय के युग का अंत हुआ है’, सीधे तौर पर पिछले दशकों की राजनीति पर कड़ा प्रहार है।
इस नई सरकार का स्वरूप केवल सत्ता हस्तांतरण नहीं, बल्कि एक सूक्ष्म सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का दस्तावेज है। मुख्यमंत्री के साथ शपथ लेने वाले पांच मंत्रियों का चयन भाजपा की उस रणनीति को दर्शाता है, जहां उत्तर बंगाल से निशिथ प्रामाणिक, जंगलमहल के आदिवासी अंचल से क्षुदिराम टुडू और मतुआ समुदाय के प्रभाव वाले क्षेत्रों से अशोक कीर्तनिया को शामिल किया गया है।
यह मंत्रिमंडल समावेशी होने के साथ-साथ राज्य के हर कोने को सत्ता में भागीदारी का अहसास कराता है। विशेषकर दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल को उप-मुख्यमंत्री की भूमिका में लाने की सुगबुगाहट बंगाल के इतिहास में एक नया प्रशासनिक प्रयोग है, जो सामूहिक नेतृत्व के सिद्धांत को पुख्ता करता है।
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा शुभेंदु को ‘मिट्टी का बेटा’ कहना उनके जमीनी संघर्ष को मान्यता देता है, जिसने सत्ता विरोधी लहर को सुनामी में बदल दिया। शुभेंदु का यह ‘अधिकारी’ मॉडल अब अनुभवी चेहरों और युवा ऊर्जा के साथ बंगाल के पुनरुद्धार की परीक्षा की दहलीज पर खड़ा है।



