
तहलका डेस्क।
गोवा। अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता और इसके संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को भविष्य के खतरों से बचाने के लिए राज्य सरकार ने एक साहसिक निर्णय लिया है। पर्यटन के बढ़ते दबाव के बीच, राज्य के सबसे ऊंचे और सुंदर स्थानों में से एक, वाघेरी पहाड़ी और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले साओ-जॉर्ज द्वीप को आधिकारिक तौर पर ‘विकास निषेध क्षेत्र’ (नो डेवलपमेंट ज़ोन) घोषित कर दिया गया है।
नगर एवं ग्रामीण योजना मंत्री विश्वजीत राणे ने इस दूरगामी निर्णय की पुष्टि करते हुए बताया कि अब इन चिन्हित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की नई निर्माण गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी, ताकि प्रकृति के इन अनमोल उपहारों को संरक्षित रखा जा सके।
महाराष्ट्र और गोवा की सीमा पर स्थित वाघेरी पहाड़ी, जो समुद्र तल से लगभग 780 मीटर की ऊंचाई पर है, अपनी जैव विविधता के लिए जानी जाती है। पश्चिमी घाट की इस महत्वपूर्ण श्रृंखला को लेकर यह सख्त फैसला तब लिया गया, जब वन विभाग द्वारा गठित एक विशेष समिति ने अपनी रिपोर्ट में चिंताजनक तथ्य पेश किए। समिति की जांच में यह सामने आया कि इस खूबसूरत पहाड़ी पर विकास के नाम पर तेजी से पेड़ों की कटाई की जा रही थी और प्राकृतिक हरित आवरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा था।
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, सत्तारी तालुका की क़ेरिम ग्राम पंचायत के भीतर आने वाली यह पहाड़ी 65.31 लाख वर्ग मीटर के विशाल क्षेत्र में फैली है, जिसका प्राकृतिक स्वरूप और सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण इसकी ढलानें अब सुरक्षित कर दी गई हैं।

पर्यावरणसंरक्षणकानयाअध्याय: प्राकृतिकविरासतबचानेकीमुहिम… Pic Credit : ExploreOurIndia
पर्यावरण संरक्षण की यह लहर केवल पहाड़ियों तक सीमित नहीं है। सरकार ने दक्षिण गोवा के मोरमुगाओ में स्थित साओ-जॉर्ज द्वीप के लिए भी सुरक्षा कवच तैयार किया है। करीब 6.63 लाख वर्ग मीटर में फैले इस द्वीप को इसके असाधारण विरासत मूल्य और पर्यावरणीय संवेदनशीलता के कारण विकास निषेध क्षेत्र की श्रेणी में रखा गया है।
इसके साथ ही, तटीय पारिस्थितिकी का आधार माने जाने वाले रेत के टीलों को बचाने के लिए माजोर्डा गांव में भी करीब 2.5 लाख वर्ग मीटर की भूमि पर निर्माण कार्यों पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गई है। इसी तरह का निर्णय गोंसुआ गांव के लिए भी लिया गया है, जहां 1.95 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र को कंक्रीट के जंगल में बदलने से रोकने के लिए उसे नो डेवलपमेंट जोन घोषित किया गया है।
सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जनता की भागीदारी को भी सुनिश्चित किया है। मंत्री विश्वजीत राणे ने जानकारी दी कि 7 मई को जारी की गई इस अधिसूचना के संदर्भ में यदि किसी नागरिक को कोई आपत्ति है या वह कोई सार्थक सुझाव देना चाहता है, तो वह अगले 30 दिनों के भीतर राज्य के मुख्य नगर योजनाकार के समक्ष अपनी बात रख सकता है।
सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि वह आर्थिक विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो गोवा की पहचान और उसकी जलवायु स्थिरता के लिए अपरिहार्य हैं। आने वाले समय में ये फैसले गोवा की हरियाली और तटीय शुद्धता को बनाए रखने में मील का पत्थर साबित होंगे।



