[TEHELKA SIT]

दिल्ली सरकार द्वारा तेज़ाब के कब्जे और बिक्री को नियंत्रित करने के लिए Delhi, Poisons Possession and Sales Rules, 2015 लागू किए जाने के 11 साल बाद भी, ये अत्यंत संक्षारक पदार्थ दिल्ली-NCR में चौंकाने वाली आसानी से उपलब्ध हैं। TEHELKA की दिल्ली-NCR में की गई पड़ताल से सामने आया कि तेज़ाब आज भी दुकानों पर खुले तौर पर बेचा जा रहा है—न पहचान पत्र की जांच, न खरीदने का उद्देश्य पूछा जा रहा है और न ही बोतल पर कोई लेबल मौजूद है। यह राज्य के कानून और 2013 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश, दोनों का स्पष्ट उल्लंघन है।
2013 में देशभर में हुई कई भयावह तेज़ाब हमलों की घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नाइट्रिक, फॉस्फोरिक, सल्फ्यूरिक और हाइड्रोक्लोरिक एसिड जैसे तेज़ाबों की बिक्री पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंधात्मक नियम लागू किए थे। इस फैसले के तहत विक्रेताओं के लिए लाइसेंस लेना, खरीदारों का रजिस्टर बनाए रखना, पहचान पत्र मांगना और तेज़ाब खरीदने का उद्देश्य दर्ज करना अनिवार्य किया गया था। इसके बाद दिल्ली सरकार ने 2015 में एक विशेष कानून के तहत 40 संक्षारक पदार्थों को सूचीबद्ध किया और राजधानी में तेज़ाब की बिक्री पर नियंत्रण और कड़ा कर दिया।
2013 में Laxmi vs Union of India मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तेज़ाब हमलों की घटनाओं के बाद तेज़ाब की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके तहत दुकानदारों को खरीदार का नाम, पता, पहचान पत्र और तेज़ाब खरीदने का उद्देश्य दर्ज किए बिना खुले तौर पर तेज़ाब बेचने की अनुमति नहीं है। 18 वर्ष से कम उम्र के किसी व्यक्ति को तेज़ाब नहीं बेचा जा सकता। इसके अलावा, तेज़ाब के सभी स्टॉक की जानकारी 15 दिनों के भीतर स्थानीय सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट को देना अनिवार्य है। बिना घोषित स्टॉक रखने या नियमों का उल्लंघन करने पर स्टॉक जब्त किया जा सकता है और 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
लेकिन TEHELKA की दिल्ली-NCR में की गई पड़ताल ने दिखा दिया कि ये तमाम सुरक्षा नियम ज़मीनी स्तर पर लगभग बेअसर हैं। कई दिनों तक TEHELKA SIT ने दिल्ली और नोएडा के विभिन्न बाजारों का दौरा किया और किराना दुकानों से आसानी से तेज़ाब खरीद लिया। किसी भी स्थान पर पहचान पत्र नहीं मांगा गया और किसी दुकानदार ने यह तक नहीं पूछा कि तेज़ाब का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाएगा।
नोएडा के सेक्टर 134 स्थित नंगली इलाके की स्थानीय दुकान शानी स्टोर पर 40 रुपये में तेज़ाब की एक बोतल बिना किसी हिचक के बेच दी गई। न कोई सवाल पूछा गया और न ही कोई चेतावनी दी गई। जब रिपोर्टर ने दुकान के सेल्समैन राहुल से पूछा कि क्या उसे पहचान पत्र आदि चाहिए, तो राहुल को तेज़ाब की बिक्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी तक नहीं थी। जब TEHELKA ने राहुल से पूछा कि क्या उसकी दुकान से तेज़ाब खरीदने वाले सभी ग्राहकों का रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए, तो राहुल ने जवाब दिया कि उसकी दुकान पर मिलने वाला तेज़ाब खतरनाक नहीं है। उसने इसे “दिव्य जल” बताया।
नंगली से TEHELKA का रिपोर्टर सेक्टर 134 के ही दूसरे इलाके वाजिदपुर पहुंचा। वहां भी एक अन्य किराना दुकान पर तेज़ाब आसानी से उपलब्ध था। जब एक बोतल तेज़ाब मांगा गया, तो दुकान पर मौजूद एक युवा सेल्समैन ने 30 रुपये में एक बोतल तुरंत दे दी।
“आपका मतलब तेज़ाब है?” दुकानदार ने खुले तौर पर पूछा। इस दुकान पर पीले रंग के, बिना किसी ब्रांड और लेबल वाले तरल पदार्थ की बोतलें खुले तौर पर बिक्री के लिए रखी हुई थीं।
इसी तरह का एक मामला पूर्वी दिल्ली के सुभाष चौक बाजार में भी सामने आया। यहां एक अन्य दुकानदार नूर ने मुस्कुराते हुए तेज़ाब की बोतल सौंप दी। उसने बिना किसी डर के तेज़ाब की बोतल को दूसरे फ्लोर क्लीनर के साथ काउंटर पर रखा और हमें दोनों में से किसी एक को चुनने के लिए कहा। तेज़ाब की बोतल को छूते हुए उसने कहा, “यह बहुत तेज़ नहीं है।”
बोतल पर न तो कोई लेबल था और न ही उसके अंदर मौजूद पदार्थ के बारे में कोई जानकारी। एक बार फिर न खरीदने का कारण पूछा गया और न ही पहचान पत्र मांगा गया। जब हमने नूर से पूछा कि क्या तेज़ाब खरीदने के लिए उसे हमारी ID चाहिए, तो उसने कहा, “मुझे आपकी ID की जरूरत नहीं है, यह तेज़ाब बहुत तेज़ नहीं है।”
पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 में DDA फ्लैटों से घिरे एक बाजार में एक छोटी केमिकल की दुकान पर कम से कम 10 बिना लेबल वाली बोतलें रखी मिलीं। दक्षिण दिल्ली का ग्रेटर कैलाश भी इससे अछूता नहीं है। ज़मरूदपुर गांव के बीचों-बीच एक जनरल स्टोर ने 50 रुपये में एक बोतल तेज़ाब पॉलिथीन की थैली में लपेटकर दे दी। दुकानदार ने कहा, “GK में हर कोई हमसे खरीदता है।”
TEHELKA को कई ऐसे थोक विक्रेता भी मिले जो तेज़ाब की होम डिलीवरी तक की पेशकश कर रहे थे। 2020 से 2025 के बीच दिल्ली पुलिस और National Crime Records Bureau (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में तेज़ाब हमले के कम से कम 35 मामले दर्ज किए गए। हालांकि, पीड़ितों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। जुलाई 2023 के अपने फैसले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि तेज़ाब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से “वास्तविक उपयोगकर्ताओं और कारोबार” को नुकसान पहुंच सकता है।
लेकिन TEHELKA की जमीनी पड़ताल बताती है कि जिन नियमों के तहत तेज़ाब की बिक्री नियंत्रित की जानी है, उनका पालन बेहद असंगत और कमजोर है। TEHELKA द्वारा देखे गए किसी भी स्थान पर नियमों के पालन को लेकर कोई स्पष्ट कार्रवाई दिखाई नहीं दी। कहीं खरीदारों का रजिस्टर नहीं मिला और न ही अवैध तेज़ाब बिक्री के खिलाफ कोई चेतावनी बोर्ड दिखाई दिया। कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि तेज़ाब की बिक्री को नियंत्रित करने वाले नियम फिलहाल कागज़ों तक ही सीमित नजर आते हैं।



