
दृष्टि गुप्ता, नई दिल्ली।
राजधानी दिल्ली की राजनीति में उस वक्त एक बड़ा भूचाल आ गया जब भारतीय भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल पहली बार मीडिया के सामने आईं। करीब 15 साल तक आम आदमी पार्टी का अभिन्न हिस्सा रहीं मालीवाल ने अपनी पुरानी पार्टी और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें सीधे तौर पर ‘गद्दार’ और ‘महिला विरोधी’ करार दिया। स्वाति का भाजपा में जाना आम आदमी पार्टी के लिए इसलिए भी बड़ा झटका है क्योंकि उनके साथ 7 अन्य सांसदों ने भी कमल थाम लिया है।
मीडिया से मुखातिब होते हुए मालीवाल का दर्द और गुस्सा साफ झलक रहा था। उन्होंने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह ‘आप’ की अकेली महिला राज्यसभा सांसद थीं, लेकिन पिछले दो वर्षों से उन्हें जानबूझकर संसद में बोलने के मौकों से वंचित रखा गया। उन्होंने सनसनीखेज दावा किया कि जब उन्होंने इस भेदभाव की शिकायत अरविंद केजरीवाल से करनी चाही, तो समाधान मिलने के बजाय उन्हें मुख्यमंत्री आवास पर बुलाकर उनके साथ मारपीट और बदसलूकी की गई।
स्वाति मालीवाल ने केजरीवाल की नैतिकता पर प्रहार करते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपनी माँ की झूठी कसम खा सकता है और अपने मूल सिद्धांतों को ताक पर रख सकता है, उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने न केवल उन्हें बल्कि अन्ना हजारे और उस पूरे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को धोखा दिया है जिससे इस पार्टी का जन्म हुआ था। जब उनसे भाजपा चुनने का कारण पूछा गया, तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की कार्यशैली को इसका आधार बताया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए पाकिस्तान को जवाब देना और जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाना जैसे साहसिक फैसले उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहे। उन्होंने गर्व से कहा कि मोदी जी की देशभक्ति और ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति ने उन्हें प्रभावित किया है। मालीवाल ने कड़े लहजे में कहा कि गद्दार वह नहीं हैं जिन्होंने पार्टी छोड़ी, बल्कि असली गद्दार अरविंद केजरीवाल हैं जो भ्रष्टाचार मिटाने का वादा करके खुद भ्रष्टाचार के दलदल में धंस गए। स्वाति मालीवाल का यह नया राजनीतिक अवतार आने वाले चुनावों में दिल्ली की सियासत के समीकरण बदल सकता है।



