Ladakh में बुद्ध पूर्णिमा उत्सव; ऐतिहासिक पल का गवाह बनेंगे Amit Shah

बुद्ध अवशेषों का महापर्व: उत्तर प्रदेश के पिपरहवा से प्राप्त बुद्ध के ये दुर्लभ अवशेष वायुसेना के विशेष विमान से दिल्ली से लेह लाए गए थे। ये पवित्र अवशेष 1 से 10 मई तक सार्वजनिक दर्शन के लिए उपलब्ध रहेंगे। गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर को सौभाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि बुद्ध पूर्णिमा पर दुनिया भर के श्रद्धालु इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकेंगे…

Buddha Purnima पर लद्दाख में आस्था का सैलाब: भारत में पहली बार प्रदर्शनी के लिए पवित्र बुद्ध अवशेष लद्दाख पहुंचे, श्रद्धालु भव्य स्वागत की तैयारी में जुटे ...Photo Credit :DDNews
Buddha Purnima पर लद्दाख में आस्था का सैलाब: भारत में पहली बार प्रदर्शनी के लिए पवित्र बुद्ध अवशेष लद्दाख पहुंचे, श्रद्धालु भव्य स्वागत की तैयारी में जुटे ...Photo Credit :DDNews

तहलका डेस्क।

लद्दाख में शुक्रवार को Buddha Purnima के पावन अवसर पर भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को आम जनता के दर्शनार्थ रखा जाएगा। यह पहली बार है जब इन अवशेषों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धालुओं के लिए इतने भव्य रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बृहस्पतिवार को दो दिवसीय दौरे पर लेह पहुंच गए हैं। लेह हवाई अड्डे पर उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

UP के सिद्धार्थनगर जिले के पिपरहवा से प्राप्त बुद्ध के ये दुर्लभ अवशेष बीते बुधवार को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से दिल्ली से लेह लाए गए थे। गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर को सौभाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि बुद्ध पूर्णिमा पर दुनिया भर के श्रद्धालु इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकेंगे। शुक्रवार को अवशेषों के दर्शन करने के बाद गृह मंत्री करगिल में 10 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले एक बड़े डेयरी संयंत्र की आधारशिला भी रखेंगे और स्थानीय विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे।

तय कार्यक्रम के अनुसार, ये पवित्र अवशेष 1 से 10 मई तक जीवेत्सल में सार्वजनिक दर्शन के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसके बाद इन्हें 11 और 12 मई को जांस्कर तथा 13-14 मई को लेह के धर्म केंद्र में रखा जाएगा। 15 मई को सुरक्षा के बीच इन अवशेषों को वापस दिल्ली ले जाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पिपरहवा में मिले इन अवशेषों का वैश्विक महत्व हाल ही में और बढ़ गया है, विशेषकर तब जब 2025 में औपनिवेशिक काल के दौरान विदेश गए कुछ रत्न और भेंटें भारत को वापस मिलीं। इससे पहले ये अवशेष थाईलैंड, मंगोलिया, रूस और श्रीलंका जैसे कई देशों में भी श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए ले जाए जा चुके हैं। प्रशासन ने बुद्ध पूर्णिमा के मद्देनजर लद्दाख में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और सुविधाओं के कड़े प्रबंध किए हैं।