मप्र राज्यसभा चुनाव: खरीद-फरोख्त के आरोप के बाद कांग्रेस ने विधायकों को कर्नाटक भेजा, ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ शुरू

दरअसल, कांग्रेस इस बार बेहद सतर्कता बरत रही है। पार्टी अभी भी 2020 के उस सियासी संकट को भूली नहीं है, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया और 22 अन्य विधायकों की बगावत के कारण कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिर गई थी।

मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर “क्रॉस-वोटिंग” और विधायकों की “खरीद-फरोख्त” (पोचिंग) की कोशिश का आरोप लगाते हुए अपने विधायकों को कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक भेजने का फैसला किया है।

यह कदम सोमवार देर रात नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल (CLP) की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद उठाया गया।

बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सत्तारूढ़ दल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा विपक्ष के विधायकों को तोड़ने की पुरजोर कोशिश कर रही है।

सिंघार ने दावा किया, “हमारे कुछ विधायकों ने मुझे बताया कि भाजपा के लोगों ने ‘नोटों से भरे बैग’ के साथ उनसे संपर्क किया था, लेकिन हमारे विधायकों ने उन्हें दुत्कार दिया।” उन्होंने भरोसा जताया कि भाजपा की यह “साजिश” मतदान के दिन पूरी तरह नाकाम हो जाएगी।

कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह और बाबू जंडेल ने भी विधायकों को बाहर भेजे जाने की पुष्टि की। वहीं, सौंसर से विधायक विजय रेवनाथ चौरे ने बताया कि सभी विधायकों को विशेष रूप से बेंगलुरु (कर्नाटक) ले जाया जा रहा है। यादवेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि कुछ विधायक शुरू में राज्य से बाहर जाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व (हाईकमान) का फैसला होने के कारण सभी इसके लिए तैयार हो गए।

मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन खाली सीटों के लिए यह पूरी रस्साकशी चल रही है। 230 सदस्यीय राज्य विधानसभा के नियमों के मुताबिक, किसी भी उम्मीदवार को राज्यसभा पहुंचने के लिए 58 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है।

वर्तमान में विधानसभा की प्रभावी ताकत 229 है, जिसके हिसाब से शुरुआती गणित बेहद सीधा था:

  • भाजपा (164 विधायक): अपने 116 वोटों के दम पर दो सीटें आसानी से जीत रही है। पार्टी ने अपने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है।
  • कांग्रेस (64 विधायक): संख्या बल के हिसाब से तीसरी सीट जीतने के लिए मजबूत स्थिति में है। पार्टी ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया है।

हालांकि, भाजपा द्वारा मध्य प्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारने के बाद इस मुकाबले में नया ट्विस्ट आ गया है।

भले ही कागजों पर कांग्रेस के पास मीनाक्षी नटराजन की जीत के लिए पर्याप्त संख्या बल दिख रहा हो, लेकिन कानूनी मामलों और आंतरिक टूट के कारण उसकी राह उतनी आसान नहीं है: दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता पहले ही रद्द हो चुकी है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने श्योपुर के विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान करने पर रोक लगा दी है। सागर जिले के बीना से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने की याचिका भी हाईकोर्ट में लंबित है। सप्रे ने सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की थी, जिससे साफ है कि वह भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग कर सकती हैं।

इन झटकों के बाद कांग्रेस का प्रभावी संख्या बल 64 से घटकर 62 रह सकता है। हालांकि, यह अभी भी जीत के लिए जरूरी 58 वोटों से 4 अधिक है, लेकिन पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। दूसरी ओर, अपने दो मुख्य उम्मीदवारों को जिताने के बाद भाजपा के पास 48 अतिरिक्त वोट बचेंगे, यानी महेश केवट को जिताने के लिए उसे विपक्ष से 10 और वोटों की जुगाड़ करनी होगी।

बता दें कि सोमवार रात हुई इस आपात बैठक में करीब 60 कांग्रेस विधायक व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए थे। एक विधायक दिल्ली में होने के कारण शामिल नहीं हो सके, जबकि वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वर्चुअली हिस्सा लिया।