इस्तीफा नहीं, विरोध है! ममता के फैसले पर संजय राउत का बड़ा बयान

पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद सियासत और गरमा गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने के फैसले पर अब शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत खुलकर उनके समर्थन में आ गए हैं।

शिवसेना (उबाठा) के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut... | Image Source: (फोटो- महाराष्ट्र टाइम्स)
शिवसेना (उबाठा) के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut... | Image Source: (फोटो- महाराष्ट्र टाइम्स)

नई दिल्ली: शिवसेना (उबाठा) के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह सिर्फ सत्ता से चिपके रहने का मामला नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ एक तरह  का विरोध है।

राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का रवैया निष्पक्ष नहीं रहा और वह केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रहा है। उनके मुताबिक, ममता बनर्जी का इस्तीफा न देना इसी व्यवस्था के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।

दरअसल, हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 सीटों में से 207 सीट जीतकर बड़ी जीत हासिल की, जबकि तृणमूल कांग्रेस को केवल 80 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। चुनाव परिणामों को ममता बनर्जी ने “साजिश” बताते हुए इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था।

राउत ने कहा कि ममता का यह कदम एक राजनीतिक आंदोलन का हिस्सा है, जो आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को अब यह तय करना होगा कि वह ऐसे हालात में चुनाव लड़ना चाहता है या कोई अलग रणनीति अपनाएगा।

उन्होंने अपने बयान में 2022 के महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट का भी जिक्र किया और कहा कि अगर उस समय उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा नहीं दिया होता, तो हालात अलग हो सकते थे। इस उदाहरण के जरिए राउत ने ममता के फैसले को सही ठहराने की कोशिश की।

राउत ने बताया कि शिवसेना (उबाठा) प्रमुख Uddhav Thackeray ने ममता बनर्जी से फोन पर बात कर उनका समर्थन किया है। इसके अलावा, ‘इंडिया’ गठबंधन के कई नेताओं ने भी ममता के साथ खड़े होने का भरोसा दिया है।

राउत का कहना है कि अगर लोकतंत्र को बचाना है, तो विपक्षी दलों को एक साथ आकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ आवाज उठानी होगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार के अंदर भी कुछ लोग मौजूदा हालात से संतुष्ट नहीं हैं।

कुल मिलाकर, ममता बनर्जी का इस्तीफा न देने का फैसला अब सिर्फ एक राज्य का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा बहस का विषय बन गया है।