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साध्वी प्रज्ञा के ब्यान पर कांग्रेस का वाकआउट

लोकसभा में बुधवार को साध्वी प्रज्ञा के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथू राम गोडसे को देशभक्त बताने वाले ब्यान पर गुरूवार को जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस सहित विपक्ष के सदस्यों ने वाकआउट किया। हालांकि, प्रज्ञा के ब्यान को अब लोकसभा की कार्यवाही से हटा दिया गया है।

प्रज्ञा के इस बयान को लेकर कांग्रेस सदस्यों ने लोकसभा में जमकर हंगामा किया। इस बीच साध्वी ब्यान वाले मामले में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि गोडसे को देशभक्त मानने वाली सोच निंदनीय है। पिछले कल एसपीजी क़ानून को लेकर बहस के दौरान साध्वी प्रज्ञा ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बता दिया था जिसपर कांग्रेस और विपक्ष ने जमकर हंगामा किया था। गुरूवार को स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा में कहा कि प्रज्ञा ठाकुर के बयान को रेकॉर्ड से हटा दिया गया है।

उधर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा – ”आंतकी प्रज्ञा ने आतंकी गोडसे को देशभक्त कहा। भारतीय संसदीय इतिहार का एक काला दिन।” कांग्रेस ने लोकसभा में भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहने के संदर्भ में लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया हुआ था।

इस बीच गुरूवार को तहसीन पूनावाला को पुलिस ने उस समय हिरासत में ले लिया जब उन्होंने संसद के बाहर ”महात्मा गांधी जिन्दाबाद”, ”नाथुराम गोडसे मुर्दाबाद” के नारे लगाए। वे उस समय महात्मा गांधी की मूर्ती के पास नंगे पाँव आये थे। उन्होंने साध्वी प्रज्ञा के ब्यान का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा – ”पीएम मोदी माफी मांगें और भाजपा साध्वी प्रज्ञा को बाहर करे।”

राहुल गांधी का ट्वीट

Rahul Gandhi

@RahulGandhi
Terrorist Pragya calls terrorist Godse, a patriot.
A sad day, in the history of
India’s Parliament.

साध्वी प्रज्ञा संसदीय रक्षा मंत्रालय समिति से बाहर

संसद में बुधवार को महात्मा गांघी के हत्यारे नाथू राम गोडसे की तारीफ़ करने वाली भोपाल से अपनी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह को आखिर भाजपा ने संसदीय रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति से बाहर कर दिया है। मालेगांव ब्लास्ट में आरोपी प्रज्ञा सिंह को इस समिति में शामिल करने पर विपक्ष ने भाजपा की कड़ी आलोचना की थी लेकिन भाजपा के कई नेताओं ने इसे सही ठहराया था। प्रज्ञा भाजपा की संसदीय बैठकों में भी नहीं जा पाएंगी।

भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने गुरूवार सुबह कहा कि जिस तरह पार्टी की सांसद प्रज्ञा सिंह ने संसद में गोडसे की तारीफ़ की, उसे पार्टी बिलकुल गलत मानती है। इसकी इजाजत नहीं दी सकती। नड्डा ने कहा – ”पार्टी ने फैसला किया है कि साध्वी प्रज्ञा सिंह संसदीय रक्षा मंत्रालय सलाहकार समिति में नहीं रहेंगी।”

इस तरह अपने बचनों से अपयश कमाने वाली साध्वी प्रज्ञा को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने बुधवार को लोकसभा में एसपीजी बिल पर बहस के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा  गांधी के हत्यारे नाथू राम गोडसे की तारीफ़ की थी जिसपर कांग्रेस सहित विपक्ष ने खूब हंगामा किया था।

वैसे जब साध्वी प्रज्ञा को इस समिति का सदस्य बनाया गया था, उसी वक्त कांग्रेस सहित विपक्ष ने भाजपा की इसके लिए कड़ी निंदा की थी क्योंकि साध्वी प्रज्ञा मालेगांव लास्ट में आरोपी हैं। वे भाजपा की संसदीय बैठकों में भी नहीं जा पाएंगी

अजित पवार की ‘घर वापसी’ में ‘महिलाओं’ की कारगर भूमिका

महाराष्ट्र में रातोंरात ‘तख्तापलट’ के बाद भाजपा के साथ मिलकर एनसीपी के वरिष्ठ नेता और पार्टी प्रमुख के भतीजे अजित पवार के सीएम देवेंद्र फडणवीस के साथ डिप्टी सीएम का पद संभालने के बाद सियासी भूचाल ला दिया था। इसमें नैतिकता और संविधान की अब तक कि उड़ी धज्जियों को कहीं पीछे छोड़ दिया गया था।

बाजी पूरी तरह सीनियर पवार यानी शरद पवार के हाथ में आ गई थी। उन्होंने खुद को न सिर्फ मराठा चाणक्य साबित किया, बल्कि सियासत के बड़े बड़े सूरमाओं को पटकनी दे दी। या कहें कि सांप भी मार लिया और लाठी भी नहीं टूटी। इसके लिए पवार ने सियासी के साथ पारिवारिक रिश्तों को भी अहमियत दी।

परिवारिक सहानुभूति के लिए ख़ून का रिश्ता याद दिलाया। और इसमें अजित की चाची से लेकर परिवार में खूनी रिश्ते में डोर रहने वाली ओर सबसे करीबी तीन बुआओं का सहारा लिया। और इसमें कामयाब भी हुए।

परिवार और पार्टी में वापसी कराने में घर की चार बड़ी महिलाओं ने बड़ी भूमिका निभाई है। इन महिलाओं में शरद की पत्नी प्रतिभा का तो योगदान था ही, लेकिन उनकी बहनें यानी अजित की तीन बुआएं – सरोज ताई पाटिल, रजनी ताई सांसणे और मीना ताई जगताप ने इमोशनली कोशिश कर उन्हें भाजपा का साथ छोड़ने पर मजबूर कर दिया। बुआओं ने अजित पवार को कहा, सरकारें आएंगी-जाएंगी, पर परिवार नहीं टूटना चाहिए। और आखिर मराठी अजित महिलाओं के आगे पिघलने को मजबूर हो गए।

राहुल-प्रियंका गांधी जेल में बंद चिदंबरम से मिले

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने बुधवार को दिल्ली में तिहाड़ जेल में बंद वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी. चिदंबरम से मुलाकात की। इस मौके पर चिदंबरम के बेटे कार्ति भी  थे। याद रहे पिछले महीने सोनिया गांधी भी चिदंबरम से मिलने जेल गईं थीं।
जानकारी के मुताबिक कांग्रेस चिदंबरम के प्रति अपना पूरा समर्थन दिखाते रहना चाहती है। पार्टी का आरोप रहा है कि कांग्रेस और विपक्ष के नेताओं को राजनीतिक कारणों से मोदी सरकार प्रताड़ित कर रही है और सरकारी एजेंसियों का दुरूपयोग कर रही है।

गौरतलब है कि वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं। चिदंबरम से मिलने अचानक बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी पहुंचे। चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया मामले में २१ अगस्त से न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में हैं। इससे पहले सोनिया गांधी भी तिहाड़ जाकर चिदंबरम से मुलाकात कर चुकी हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कुछ रोज पहले सर्वोच्च न्यायालय में चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध या और दावा किया था एजंसी के पास उनके धन शोधन  में शामिल होने के सबूत हैं। ईडी यह भी दावा किया था कि चिदंबरम हिरासत में रहते हुए भी कथित रूप से गवाहों से संपर्क कर रहे हैं।

सैटेलाइट कार्टोसेट-३ लॉन्च

भारत ने बिधवार को अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और कामयाबी हासिल करते हुए दुश्मन  की हरकतों और आतंकी गतिविधियों पर नजर रखने वाला अतिआधुनिक सैटेलाइट सफलता पूर्वक लॉन्च किया है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी (इसरो) ने सुबह ९.२९ बजे सैटेलाइट कार्टोसेट-३ को लॉन्च किया।

कार्टोसेट-३ का कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष में ५०९ किलोमीटर की ऊंचाई से जमीन पर ९.८४ इंच की ऊंचाई तक की स्पष्ट तस्वीर ले सकेगा। यह हमारे हाथ में बंधी घड़ी पर दिख रही सुइयों तक को सटीक दिखा सकता है। संभवता दुनिया में किसी देश ने अब तक इतना ताकतवर और सटीकता वाला सैटेलाइट कैमरा लॉन्च नहीं किया है।

सफल लांचिंग के बाद इसरो चीफ के सिवन ने कहा – ”मैं बहुत खुश हूं क्योंकि पीएसएलवी-सी४७ ने कार्टोसेट-३ और १३ अमेरिकी सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। यह सबसे ताकतवर कैमरे वाला नागरिक उपग्रह है।” उन्होंने पूरी  सैटेलाइट टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह इसलिए भी बहुत अहम है क्योंकि यह देश का अब तक सबसे बेहतरीन अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट है। ”अब हम मार्च तक १३ उपग्रह और छोड़ेंगे। हमारा यह टारगेट है और इसे जरूर पूरा करेंगे।”

इसरो ने कार्टोसेट-३ सैटेलाइट को सुबह श्रीहरिकोटा द्वीप पर स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के लॉन्चपैड-२ से लॉन्च किया। कार्टोसेट-३ सैटेलाइट पीएसएलवी-सी४७ रॉकेट से छोड़ा गया। कार्टोसेट-३ पृथ्वी से ५०९ किलोमीटर ऊंचाई पर चक्कर लगाएगा।रिपोर्ट्स के मुताबिक ६ स्ट्रैपऑन्स के साथ यह पीएसएलवी की २१वीं उड़ान थी जबकि पीएसएलवी रॉकेट की यह ७४वीं उड़ान। कार्टोसेट-३ के साथ अमेरिका के १३  अन्य नैनो सैटेलाइट भी छोड़े जाएंगे। ये सैटेलाइट्स कॉमर्शियल उपयोग के लिए हैं।

सीएम की शपथ शिवाजी पार्क में ही क्यों लेंगे उद्धव ठाकरे ?

महाराष्ट्र में तकरीबन 1 महीने से चल रहा सियासी ड्रामा लगभग खत्म हो गया है। फडणवीस के इस्तीफा देने के बाद शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं ने बैठक में शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे को नेता चुना। उद्धव गुरुवार को चीफ मिनिस्टर पोस्ट की शपथ लेंगे। सीएम पोस्ट को लेकर ही शिवसेना और बीजेपी के बीच चुनाव में बहुमत हासिल करने के बावजूद खींचतान चल रही थी। शिवसेना सूत्रों के अनुसार कि ठाकरे दादर में शिवाजी पार्क में 28 नवंबर को शाम छह बजकर 40 मिनट पर सीएम पोस्ट की शपथ लेंगे। हालांकि शरद पवार भी कह चुके हैं की शपथ समारोह शिवाजी पार्क में ही होगा। शिवाजी पार्क का शिवसेना से बड़ा पुराना नाता रहा है शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे हर दशहरा के मौके पर यहां एक आम सभा जिस ‘मेलावा’ नाम दिया गया था, का आयोजन करते थे जिसमें महाराष्ट्र से शिवसैनिक पहुंचते ही पहुंचते थे लगभग चार दशकों तक। अपने चहेते नेता को मिलने का, देखने का और सुनने का शिव सैनिकों के लिए सबसे बड़ा अवसर होता था जिसका हर शिवसैनिक साल भर इंतजार करता था। ठाकरे के निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार भी शिवाजी पार्क एक हिस्से में किया किया गया। जहां पर उनका स्मारक बनाया गया जिसे शिवतीर्थ का नाम दिया गया है।

इसी शिवाजी पार्क से बाल ठाकरे ने शिवसेना का आगाज किया, यहीं पर उद्धव ठाकरे सार्वजनिक तौर पर इंट्रोड्यूस किया और अपनी तीसरी पीढ़ी के आदित्य ठाकरे को भी आम जनसभा में यह कहते हुए ,’ अब मैं इसे तुम्हें सौंपता हूं ‘,आम शिवसैनिकों का समर्थन प्राप्त किया। लगभग 20 साल के बाद शिवसेना की सत्ता में वापसी हो रही है और पहली बार ठाकरे परिवार का कोई मेंबर संवैधानिक पद पर रूढ़ हो रहा है।

इस समारोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण पत्र कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के अलावा आर एस एस के मोहन भागवत व प्राइम मिनिस्टर देने की खबरें है।

आज एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के निवास स्थान सिल्वर ओक में तीनों पार्टियों के लीडरान की मीटिंग होगी।इस मीटिंग में नई सरकार के पोर्टफोलियो को लेकर गहन चर्चा होगी और साथ में ही शपथ समारोह में आमंत्रित गेस्टो के नाम पर भी मोहर लगेगी

उद्धव ठाकरे अगले चीफ मिनिस्टर ! जयंत पाटिल’ बालासाहेब थोरात डेप्युटी सीएम!

महाराष्ट्र के चीफ मिनिस्टर देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम अजित पवार के रिजाइन के बाद खबर है कि कल शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे बतौर महाराष्ट्र के नये चीफ मिनिस्टर शपथ ले सकते हैं। डेप्युटी सीएम के तौर पर एनसीपी के जयंत पाटिल और कांग्रेस के बालासाहेब थोरात शपथ ले सकते हैं। उद्धव ठाकरे बतौर महाविकास आघाडी के नेता चुने जाएंंगे।

आज सुबह सुप्रीम कोर्ट द्वारा कल (वेडनसडे) को फ्लोर टेस्ट के आदेश ने बीजेपी को हिलाकर रख दिया। आज ही आज ही महाराष्ट्र के चीफ मिनिस्टर और डेप्युटी चीफ मिनिस्टर अपना अपना इस्तीफा दे दिया ।

अब विधायकों के समर्थन का पत्र गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी को सौंपा जाएगा। जिसके मद्देनजर गवर्नर उद्धव ठाकरे को सीएम,और पाटिल व थोरात को डेप्युटी सीएम पद की शपथ दिला सकते है।हो सकता है कि कल ही विधानसभा का सत्र बुला महाविकास अघाड़ी को अपना बहुमत साबित करना पड़ सकता है।

इस बीच खबर है कि अजित पवार राजनीति से संन्यास ले सकते हैं।

यह रही महाविकास आघाडी के विधायकों की फेहरिस्त

कल रात एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने उन पर लग रहे हैं आरोपों का खंडन अपने ही ढंग से किया। माना जा रहा है कि बीजेपी द्वारा पवार परिवार में लगाए गए सेंध से बिफरे शरद पवार ने बीजेपी को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के सभी विधायकों को एकत्रित कर अपनी ताकत के साथ साथ महा विकास आघाडी की ताकत दिखाने का फैसला लिया। कांग्रेस और शिवसेना सभी शरद पवार के इस फैसले के साथ थे। और सभी ने कल होटल हयात में ‘WE 162’ हम 162 का जो प्रदर्शन किया उसने बीजेपी को हिला कर रख दिया। कल सभी विधायकों ने शपथ ली वे पार्टी और महा विकास अघड़ी के प्रति वफादारी निभाएंगे। माहा विकास आघाडी का दावा था कि कल उनके साथ 162 विधायक थे लेकिन बीजेपी नेता नारायण राणे ने दावा किया था कि उनके साथ सिर्फ 130 विधायक ही थे। अब महाविकास आघाडी के विधायकों की फेहरिस्त है जिसमें उन्होंने हस्ताक्षर किए हैं। यह रही लिस्ट:

शिवसेना

आदित्य ठाकरे – वरली
लताबाई सोनावणे – चोपडा
गुलाबराव पाटील – जलगांंव( ग्रामीण)
चिमणराव पाटील – एरंडोल
किशोर पाटील – पाचोरा
संजय गायकवाड – बुलढाणा
संजय रायमुलकर – मेहकर
नितीन देशमुख – बालापुर
संजय राठोड – दिग्रस
बालाजी कल्याणकर -नांदेड (नार्थ)
संतोष बांगर – कलमनुरी
डॉ. राहुल पाटील – परभणी
अब्दुल सत्तार – सिल्लोड
उदयसिंह राजपूत – कन्नड
प्रदीप जयस्वाल -औरंगाबाद ( सेंट्रल)
संजय शिरसाट – औरंगाबाद (वेस्ट)
रमेश बोरनारे – वैजापुर
संदीपान भुमरे – पैठण
सुहास कांदे – नांदगाव
दादा भुसे – मालेगाव(आउटर)
श्रीनिवास वनगा – पालघर
शांताराम मोरे – भिवंडी( ग्रामीण)
विश्वनाथ भोईर -कल्याण(वेस्ट)
डॉ. बालाजी किणीकर – अंबरनाथ
प्रताप सरनाईक -ओवला-माजिवडा
एकनाथ शिंदे -कोपरी पाचपाखाडी
प्रकाश सुर्वे – मागाठणे
सुनील राऊत – विक्रोली
रमेश कोरगावकर – भांडुप ( वेस्ट)
रवींद्र वायकर – जोगेश्वरी( ईस्ट)
सुनील प्रभू – दिंडोशी
रमेश लटके -अंधेरी(ईस्ट)
दिलीप लांडे – चांदिवली
प्रकाश फातर्पेकर – चेंबूर
मंगेश कुडाळकर – कुर्ला
संजय पोतनीस -कलिना
सदा सरवणकर – माहिम
अजय चौधरी – शिवडी़
यामिनी जाधव – भायकला
महेंद्र थोरवे – कर्जत
महेंद्र दळवी – अलिबाग
भरत गोगावले – महाड
ज्ञानराज चौगुले – उमरगा
कैलास पाटील -उस्मानाबाद
तानाजी सावंत – परांडा
शाहजी बापू पाटील – सांगोला
महेश शिंदे – कोरेगाव
शंभूराजे देसाई -पाटण
योगेश कदम – दापोली
भास्कर जाधव – गुहागर
उदय सामंत – रत्नागिरी
राजन साळवी -राजापुर
वैभव नाईक – कुडाल-मालवण
दीपक केसरकर – सावंतवाडी
प्रकाश आबिटकर – राधानगरी
अनिल बाबर – खानापुर

एनसीपी

जयंत पाटील – इस्लामपूर
दिलीप वलसे पाटील – आंबेगाव
धनंजय मुंडे – परली
मनोहर चंद्रिकापुरे – अर्जुनी मोरगाव
धर्माराव अत्राम – अहेरी (हस्ताक्षर नहीं है)
इंद्रनील मनोहर नाईक – पुसद
चंद्रकांत नवघरे – वसमत
राजेश टोपे – घनसावंगी
नितीन पवार – कलवण
छगन भुजबल – येवला
माणिकराव कोकाटे – सिन्नर
दिलीप बनकर – निफाड
नरहरी झिरवल – दिंडोरी (पत्र)
सरोज अहिरे -देवलाली
सुनील भुसारा – विक्रमगड
जितेंद्र आव्हाड -मुंब्रा-कलवा
नवाब मलिक – अणुशक्तीनगर
अदिती तटकरे – श्रीवर्धन
अतुल बेनके – जुन्नर
अनिल देशमुख – काटोल
दिलीप मोहिते – खेड-आलंदी
अशोक पवार – शिरुर
दत्तात्रय भरणे – इंदापूर
सुनील शेलके – मावल
अण्णा बनसोड – पिंपरी (हस्ताक्षर नहीं है)
सुनील टिंगरे – वडगाव शेरी
चेतन तुपे – हडपसर
डॉ. किरण लहामटे – अकोले
आशुतोष काले – कोपरगाव
प्राजक्त तनपुरे – राहुरी
निलेश लंके – पारनेर
संग्राम जगताप – अहमदनगर (सिटी)
रोहित पवार – कर्जत-जामखेड
प्रकाश सोलंके – माजलगाव
संदीप क्षीरसागर – बीड
बालासाहेब आजबे – आष्टी
संजय बनसोडे – उदगीर
बबन शिंदे – माढा
यशवंत माने – मोहोल
भारत भालके – पंढरपुर
दीपक चव्हाण – फलटण
मकरंद जाधव – वाई
बालासाहेब पाटील – कराड ( नार्थ)
शेखर निकम – चिपलूण
राजेश पाटील – चंदगड
हसन मुश्रीम – कागल
राजेंद्र शिंगणे – सिंदखेडराजा
मानसिंग नाईक – शिराला
सुमन पाटील – तासगांव-कवठे महांकाल
अनिल पाटील – अमलनेर
दौलत दरोडा – शहापुर
अजित पवार – बारामती (हस्ताक्षर नहीं है)
राजकुमार कारेमारे – तुमस
बाबासाहेब पाटील – अहमदपुर

कांग्रेस

के सी पाडवी – अक्कलबुवा
शिरीशकुमार नाईक – नवापुर
कुणाल पाटील – धुले ग्रामीण
शिरीष चौधरी – रावेर
राजेश एकाडे – मलकापुर
अमित झनक – रिसोड
सुलभा खोडके – अमरावती
यशोमती ठाकूर – तेवसा
बळवंत वानखेडे – दर्यापुर
रणजीत कांबले – देवली
केदार छत्रपाल – सावनेर
राजू पारवे – उमरेड
विकास ठाकरे – नागपुर( वेस्ट)
नितीन राऊत – नागपुर( नार्थ)
नाना पटोले – साकोली
सहश्रम कोरोटे – आमगाव
सुभाष धोटे – राजुरा
विजय वडेट्टीवार – ब्रह्मपुरी
प्रतिभा धानोरकर – वरोरा
माधवराव जवलगावकर – हदगाव
अशोक चव्हाण – भोकर
मोहनराव हंबर्डे – नांदेड (नार्थ)
रावसाहेब अंतापुरकार – देगलूर
सुरेश वरपुंडकर – पाथरी
कैलास गोरंतयाल – जालना
हिरामन खोसकर – इगतपुरी
अस्लम शेख – मालाड (वेस्ट)
जिशान सिद्दीकी – बांद्रा (ईस्ट)
वर्षा गायकवाड – धारावी
अमीन पटेल – मुंबादेवी
संजय जगताप – पुरंदर
संग्राम थोपटे – भोर
बालासाहेब थोरात – संगमनेर
लहू कानडे – श्रीरामपूर
धीरज देशमुख – लातूर( ग्रामीण)
अमित देशमुख – लातूर सिटी
प्रणिती शिंदे- सोलापूर (सिटी)
पृथ्वीराज चव्हाण -कराड (साउथ)
ऋतुराज पाटील – कोल्हापूर (साउथ)
पी. एन. पाटील – करवीर
चंद्रकांत जाधव – कोल्हापुर(नार्थ)
राजू आवले – हातकणंगले
विश्वजीत कदम – पलुस-कडेगाव
विक्रमसिंह सावंत – जत

अन्य व निर्दलिय

मंजुला गावित – साक्री
चंद्रकांत पाटील – मुक्ताईनगर
राजकुमार पटेल – मेलघाट (प्रहार जनशक्ती पक्ष)
बच्चू कडु- अचलपूर (प्रहार जनशक्ती पक्ष)
आशिष जयस्वाल – रामटेक
शंकरराव गडाख – नेवासा
राजेंद्र पाटील यड्रावकर – शिरोल
अबू आज़मी – मानखुर्द (समाज वादी)
रईस शेख – भिवंडी (ईस्ट)
देवेंद्र भुयार – मोर्शी

फोन हैक होने पर नहीं रहता स्पाइवेयर का उपयोग निजी

फेसबुक के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप के अमेरिकी अदालत में मुकदमा दायर करने के बाद यह खुलासा हुआ है कि भारत में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की जासूसी के लिए इज़राइल के एक समूह ने स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया। इस खुलासे से देश-भर में हडक़म्प मच गया है और ज़ाहिर है कि साइबर स्पेस में गोपनीयता को लेकर गम्भीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। भारतीय संविधान निजता के मौलिक अधिकार की गारंटी देता है और इसे सर्वोच्च न्यायालय के नौ न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने बरकरार रखा था। उस समय अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि निजता के अधिकार की कोर्ई संवैधानिक गारंटी नहीं है।

एक चौंकाने वाले रहस्योद्घाटन में व्हाट्सएप ने कहा कि भारतीय पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता विश्व-भर में उन 1,400 लोगों में शामिल हैं, जिनके फोन को स्पाइवेयर ‘पेगासस’ का उपयोग करके हैक किया गया था। व्हाट्सएप लोकप्रिय सोशल मीडिया इंजन फेसबुक के स्वामित्व के तहत है। अब इसने इज़राइली निगरानी कंपनी एनएसओ ग्रुप पर मुकदमा दायर किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि अप्रैल और मध्य मई के बीच उपयोगकर्ताओं की निजता को प्रभावित करने वाले साइबर हमलों के पीछे यही ग्रुप था।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्पाइवेयर पेगासस किसी उपयोगकर्ता के डिवाइस को या तो क्लिक करने योग्य लिंक भेजकर या केवल फोन पर कॉल करके संक्रमित कर सकता है। यदि कॉल अनुत्तरित है, तो भी फोन डिवाइस हैक हो जाएगा। पेगासस अब तक के सबसे परिष्कृत मोबाइल मालवेयर में से एक है, जो हैकर्स को एक टारगेट के डिवाइस की संख्या को रिंग करके फोन की तमाम गतिविधियाँ नियंत्रित कर सकता है।

एक बार स्थापित होने के बाद यह लक्षित उपयोगकर्ता के निजी डाटा- जिसमें पासवर्ड, सम्पर्क सूची, कैलेंडर ईवेंट, टैक्स्ट मैसेज और लोकप्रिय  एप से की गयी लाइव वॉयस कॉल शामिल हैं; को उस पार्टी को भेज देता है, जिसने डिवाइस इस्तेमाल किया है। मालवेयर हैक किये गये फोन को एक तरह के जासूस में बदल देता है। इसका कैमरा अपने आप सक्रिय हो जाता है और पूरी गतिविधि को ऑडियो और विजुअल के रूप में लाइव कैप्चर किया जा सकता है। स्पाइवेयर उपकरणों का पूर्ण नियंत्रण ले सकता है और स्नूपिंग के साथ-साथ डाटा का इंजेक्शन सम्भव कर देता है।

फोन किसने हैक किया?

भारत में फोन हैक करने के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग किसने किया? यह एक बड़ा सवाल है और इसका जवाब एनएसओ के पास है, जिसने कहा है कि ‘यह अपने स्पाइवेयर को विशेष रूप से सरकारी ग्राहकों को बेचता है।’ विपक्षी दल कांग्रेस ने कहा है कि इस गम्भीर मुद्देे को पचा जाने और व्हाट्सएप को इस पर जवाब देने से आगे जाकर जनता को यह बताना चाहिए कि निगरानी सॉफ्टवेयर की खरीद के लिए कौन अधिकृत है और किस सरकारी एजेंसी ने इसे अनुमति दी है? कांग्रेस ने एक बयान में कहा है- ‘भारत के नागरिकों की अवैध, असंवैधानिक और अनधिकृत निगरानी के मुद्दे को पचाने के बजाय सम्बन्धित मंत्री को यह बताना चाहिए कि निगरानी सॉफ्टवेयर की खरीद के लिए कौन अधिकृत है और किस सरकारी एजेंसी ने इसे अनुमति दी?’ स्नूपिंग की खबरों ने विपक्ष को नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधने के लिए नया हथियार दे दिया है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ने एक ट्वीट में कहा- ‘मोदी सरकार जासूसी करते पकड़ी गई। भयावह, लेकिन आश्चर्य की बात नहीं! आिखरकार, भाजपा सरकार हमारी निजता के अधिकार के िखलाफ लड़ी है और सर्वोच्च न्यायालय के बन्द करने वाले एक आदेश से पहले ही उसने एक मल्टी करोड़ की निगरानी वाली संरचना स्थापित कर दी। सर्वोच्च न्यायालय को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए और भाजपा सरकार को एक नोटिस जारी करना चाहिए।’

व्हाट्सएप की प्रतिक्रिया

सारा विवाद व्हाट्सएप के यह कहने के बाद कि ‘भारत में पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता निगरानी के निशाने पर हैं;’ के बाद शुरू हुआ। व्हाट्सएप ने इज़राइल की साइबर खुिफया कम्पनी एनएसओ ग्रुप के िखलाफ कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है, जिसने आरोपों से इनकार किया है। हालाँकि, एनएसओ समूह ने अतीत में स्वीकार किया है कि वह अपना सॉफ्टवेयर केवल सरकारी एजेंसियों को बेचता है। हालाँकि हमेशा उनसे अनुरोध करता है कि इसका दुरुपयोग न करें।

कैसे संचालित होता है पेगासस?

रिपोर्टों से पता चलता है कि भारत में लगभग दो दर्जन पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और वकीलों को निशाना बनाया गया था। विश्व स्तर पर 1,400 ऐसे उपयोगकर्ताओं की संख्या थी, जिनमें राजनयिक, राजनीतिक विरोधियों के साथ-साथ वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी शामिल थे। पेगासस स्काइप, टेलीग्राम, वाइबर, एसएमएस, फोटो, ईमेल, कॉन्टैक्ट्स, लोकेशन, फाइल्स से लेकर ब्राउजिंग हिस्ट्री के अलावा माइक्रोफोन और कैमरा रिकॉर्डिंग सहित पूरे सेल तक का डाटा हैक कर सकने में माहिर है। लक्ष्य के फोन नम्बरों का उपयोग करके पेगासस स्थापित किया जा सकता है। यह डाटा एकत्र करने के लिए लक्ष्य के कैमरा और माइक को सक्रिय कर सकता है। इसे स्थापित करने के लिए किसी व्यक्ति का फोन नम्बर मात्र ही काफी है। सबसे आम तरीका एसएमएस या फ्लैश एसएमएस है।

केंद्र ने एक अजीब-सी प्रतिक्रिया में व्हाट्सएप को जवाब देने के लिए कहा और एक तरह से पिछली कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाकर वर्तमान मामले को दबाने की कोशिश की। मंत्री ने आरोप लगाया कि अतीत में स्नूपगेट ‘कांग्रेस की उत्पत्ति’ थी। केंद्र ने विवाद को निपटाने की कोशिश की; लेकिन मुख्य मुद्दे को पृष्ठभूमि में डाल दिया। इज़राइली फर्म का दावा है कि वह अपनी पेगासस स्पाइवेयर केवल सरकारी एजेंसियों को बेचता है। सरकार के प्रति संदेह के इस बिन्दु के रूप में यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि भारत में किस एजेंसी ने इसे खरीदा है? सरकार की अभी तक एकमात्र कार्यवाही व्हाट्सएप से जवाब माँगने तक सीमित रही है, जिसके करीब 40 करोड़ सक्रिय यूजर्स हैं। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने व्हाट्सएप से उल्लंघन पर स्पष्टीकरण माँगा। एक ट्वीट में मंत्री ने कहा- ‘हमने व्हाट्सएप से कहा है कि किस तरह का उल्लंघन हुआ है और वह लाखों भारतीय नागरिकों की निजता की रक्षा के लिए क्या कर रहा है?’

प्रसाद ने कहा कि सरकार चिंतित है और हमने व्हाट्सएप से उल्लंघन को रोकने और लाखों भारतीयों की निजता की रक्षा के लिए कहा है। प्रसाद ने कहा- ‘सरकार सभी भारतीयों की निजता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सरकारी एजेंसियों के पास इंटरसेप्शन के लिए बेहतर तरीके से स्थापित प्रोटोकॉल है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के उच्च रैंक वाले अधिकारियों से मंजूरी और निगरानी शामिल है।’

सरकार ने फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप से भारतीय पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों पर एक इज़राइली स्पाइवेयर वाले स्नूपिंग ऑपरेशन की प्रकृति की व्याख्या करने के लिए कहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सरकार पर जासूसी को लेकर उठते सवालों को ‘भ्रामक’ बताया और कहा यह सरकार की छवि खराब करने की कोशिश है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक बयान में कहा- ‘भारत सरकार मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर भारत के नागरिकों की गोपनीयता भंग करने से चिन्तित है। हमने व्हाट्सएप से पूछा है कि किस तरह का निजता उल्लंघन हुआ है और वह लाखों भारतीय नागरिकों की निजता की रक्षा के लिए क्या कर रहा है?’

आरोप-प्रत्यारोप

मंत्री ने विपक्ष, जिसने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप का आग्रह किया है; को याद दिलाने की कोशिश की कि कांग्रेस (यूपीए) के तत्कालीन शासन में क्या हुआ? मंत्री ने कहा- ‘इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करने वालों को यूपीए के शासनकाल में तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के कार्यालय में हुई घटना को याद रखना चाहिए। साथ ही तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह की जासूसी के आरोप भी याद रखने चाहिए।’ प्रसाद ने कहा कि असल में ये प्रतिष्ठित व्यक्तियों की निजता के उल्लंघन के उदाहरण हैं।

व्हाट्सएप स्नूपिंग विवाद के मद्देनज़र, गृह मंत्रालय ने सफाई दी है कि उसे इज़राइल के स्पाइवेयर पेगासस को खरीदने के लिए दिये किसी ऑर्डर की कोर्ई जानकारी नहीं है। साथ ही कहा कि सरकार नागरिकों की गोपनीयता भंग करने के लिए जि़म्मेदार किसी भी व्यक्ति के िखलाफ सख्त कार्यवाही करेगी।

निशाने पर कौन?

अभी तक की रिपोट्र्स के मुताबिक, 10 भारतीय कार्यकर्ताओं ने फेसबुक के स्वामित्व वाले चैटिंग  एप से उनकी जासूसी किये जाने वाला संदेश मिलने की पुष्टि की है। भीमा कोरेगाँव मामले से जुड़े मानवाधिकार कार्यकर्ता बेला भाटिया और निहाल सिंह राठौड़-एक वकील ने व्हाट्सएप से इस मामले में अलर्ट मिलने की पुष्टि की है। उनके मुताबिक, उन्हें बताया गया कि उनके फोन दो सप्ताह की अवधि के लिए मई 2019 तक अत्याधुनिक निगरानी में थे।

रिपोट्र्स के मुताबिक, अन्य आठ हैं- जगदलपुर लीगल एड ग्रुप की शालिनी गेरा, दलित अधिकार कार्यकर्ता डिग्री प्रसाद चौहान, अकादमिक आनंद तेलतुम्बड़े, छत्तीसगढ़ के शुभ्रांशु चौधरी, दिल्ली से पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स के आशीष गुप्ता, दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर सरोज गिरि, पत्रकार सिद्धांत सिब्बल और स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा।

एक्टिविस्ट, वकील और शिक्षाविद् व्हाट्सएप हैकिंग के शिकार हैं। उनमें से कुछ हाशिये के समुदायों आदिवासी और दलितों के साथ काम कर रहे थे। दलित समुदाय के एक वकील जगदीश मेश्राम, जो गडलिंग के साथ काम कर चुके हैं; भी उनमें शामिल हैं, जिन्हें व्हाट्सएप ने सम्पर्क किया था। मेश्राम ने मार्च और अप्रैल, 2019 के बीच गुमनाम नम्बरों से वीडियो कॉल करने की सूचना दी। वह उस समय मुंबई में थे, जब उनका फोन हैक हुआ था। छत्तीसगढ़ की मानवाधिकार कार्यकर्ता बेला भाटिया को भी फोन और डाटा हैकिंग की जानकारी वाले वीडियो कॉल प्राप्त हुए।

रिपोर्टों से पता चलता है कि भारत में लगभग दो दर्जन पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और वकीलों को निशाना बनाया गया था। विश्व स्तर पर ऐसे लोगों की संख्या 1,400 है, जिनमें राजनयिक, राजनीतिक विरोधियों के साथ-साथ वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी शामिल थे।

पेगासस स्काइप, टेलीग्राम, वाइबर, एसएमएस, फोटो, ईमेल, कॉन्टैक्ट्स, लोकेशन, फाइल्स से लेकर ब्राउजिंग हिस्ट्री के अलावा माइक्रोफोन और कैमरा रिकॉॄडग सहित पूरे सेल के डाटा को चोरी कर सकता है।

पेगासस का संदेहास्पद अतीत

यह पहली बार नहीं है कि पेगासस राजनीतिक विरोधियों और कार्यकर्ताओं पर निशाना साधने के लिए सरकारों की तरफ से एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किये जाने के लिए चर्चा में आया है। पिछले साल एक रिपोर्ट ने संकेत दिया था कि पेगासस का इस्तेमाल एक सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की निगरानी के लिए भी किया गया था, जिसकी सऊदी सरकार के गुर्गों ने तुर्की में हत्या कर दी थी। कनाडा स्थित संगठन सिटीजन लैब, जो साइबर सुरक्षा पर शोध करता है; के अनुसार पेगासस और व्हाट्सएप हैक का उपयोग भारत में एक समूह ने किया, जो खुद को पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को लक्षित करने वाला गैंग कहता था।

साल 2016 में सिटीजन लैब ने संयुक्त अरब अमीरात सरकार के पेगासस के माध्यम से मानवाधिकार कार्यकर्ता अहमद मंसूर के फोन को संक्रमित करने के प्रयास का खुलासा किया था। साल 2018 में सऊदी पत्रकार और वाशिंगटन पोस्ट स्तम्भकार जमाल खशोगी के दो सक्रिय मित्रों के डिवाइस पेगासस स्पाइवेयर की तरफ से संक्रमित पाये गये थे।

फोब्र्स की एक जाँच के मुताबिक, सऊदी अधिकारी इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास में खशोगी की हत्या की अगुवाई करने वाले कार्यकर्ताओं की महत्त्वपूर्ण जानकारी का पता लगाने में सक्षम थे। पिछले साल, एक रिपोर्ट ने संकेत दिया कि पेगासस का इस्तेमाल जमाल खशोगी की निगरानी के लिए किया गया था।

22 नवंबर से ट्विटर पर राजनीतिक विज्ञापन नहीं

सोशल साइट के सीईओ ने कहा, करोड़ों ज़िंदगियों पर पड़ता है असर

सोशल साइट ट्विटर ने अपने प्लेटफॉर्म पर 22 नवंबर से राजनीतिक विज्ञापनों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। दुनिया-भर के यूजर अब इस प्लेटफॉर्म पर पॉलिटिकल एड नहीं देख सकेंगे।  ट्विटर की इस नई पॉलिसी का ऐलान कम्पनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैक डॉर्सी ने स्वयं किया। अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगाने के कई कारण भी गिनाये। ट्विटर पर विज्ञापन पर रोक लगाने को लेकर भरपूर सर्मथन मिला है।

जैक पैेट्रीक ने गिनाये कारण

जब राजनीतिक विज्ञापन या मैसेज लोगों तक पहुँचता है, तब उस अकाउंट को फॉलो किया जाता है। साथ ही री-ट्वीट से भी लोगों तक पहुँच बनती है।

इंटरनेट विज्ञापन देने वालों के लिए एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है। राजनीतिक विज्ञापनों से वोटरों को प्रभावित किया जा सकता है। इससे करोड़ों लोगों की ज़िंदगियाँ प्रभावित होती हैं।

यह अभिव्यक्ति की बात नहीं है। यहाँ पैसा देकर राजनीतिक भाषण को आगे बढ़ाने से लोगों पर बहुत असर होता है।

अब तक इसके लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था भी तैयार नहीं हुई है।

लोग वोटर के रजिस्ट्रेशन के लिए विज्ञापन दे सकेंगे। साथ ही नयी पॉलिसी में विज्ञापन देने वालों को नया नोटिस पीरियड मिलेगा।

भारत में लागू होंगे नए नियम

पॉलिटिकल विज्ञापनों से निपटने के मुद्दे पर भारत भी जूझ रहा है। इससे पहले भी केंद्र सरकार ने इन विज्ञापनों को लेकर नियम बनाने को कहा था।

फेसबुक का रोक लगाने से इन्कार

ट्विटर की प्रतिद्वंद्वी कम्पनी फेसबुक ने ऐसे किसी भी राजनीतिक विज्ञापन पर रोक लगाने से इन्कार किया है। उसका मानना है कि इससे लोकतंत्र और मज़बूत होता है। बता दें कि अमेरिका समेत दुनिया-भर के कई देशों के आम चुनाव में ट्विटर और फेसबुक से वोटरों को खासा प्रभावित करते हैं और लोगों तक पहुँच बनाते हैं।

अमेरिका में 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में माइक्रोब्लॉगिंग साइट का खास असर है।  प्रतिबंध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के चुनाव प्रचार अभियान के मैनेजर बै्रड पारुकेल ने इस प्रतिबन्ध को ट्रम्प और रूढि़वादियों को शान्त कराने के लिए वामपंथियों का एक प्रयास करार दिया।

आई.टी. पर संसदीय स्थायी समिति ने जतायी ‘गम्भीर चिन्ता’

सूचना प्रौद्योगिकी पर स्थायी समिति ने 5 नवंबर, 2019 को अपने सदस्यों को एक परिपत्र जारी किया और समिति के अध्यक्ष शशि थरूर के जारी किये एक बयान पर उनकी टिप्पणी माँगी। थरूर ने बयान में कहा था कि ‘सरकार व्हाट्सएप से स्पष्टीकरण माँग रही है, जो खुद को हैकिंग का शिकार मानता है; न कि एनएसओ से, जो आरोपी प्रतीत होती है। इससे असली उद्देश्य पूर्ण नहीं होगा।’ समिति ने सदस्यों से उनके विचार बताने की बात कहते हुए कहा कि इस मसले पर अगली बैठक में ‘सिटीजन डेटा सिक्योरिटी एंड प्राइवेसी’ विषय पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

थरूर के बयान में कहा गया है कि सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में, मुझे एक इज़राइली फर्म, एनएसओ द्वारा स्थापित सॉफ्टवेयर के माध्यम से व्हाट्सएप का उपयोग करने वाले भारतीय नागरिकों पर जासूसी के हालिया खुलासे पर टिप्पणियों के लिए कई अनुरोध प्राप्त हुए हैं। मीडिया ने भारतीय नागरिकों के कई नाम जारी किये हैं, जो इसके शिकार हुए हैं। यह भी लगता है कि मीडिया के माध्यम से जारी की गयी सूची पूरी नहीं है और स्नूपिंग का दायरा कहीं बड़ा हो सकता है।

हालिया रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ है कि पेगासस नामक स्पाइवेयर के ज़रिये दो दजऱ्न से अधिक भारतीयों समेत करीब 1400 लोगों की जासूसी की गयी। व्हाट्सएप ने कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और वकीलों से सम्पर्क किया है। इस बारे में व्हाट्सएप का मानना है कि ऐसे लोग भी जासूसी के शिकार हुए जो किसी भी आपराधिक या राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे की सूची में शामिल नहीं थे। पेगासस ने व्हाट्सएप के वीडियो कॉलिंग तन्त्र के ज़रिये इन उपभोक्ताओं तक पहुँच बनायी। भारत सरकार ने व्हाट्सएप से इस बारे में स्पष्टीकरण माँगा है।

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एनएसओ समूह ने केवल सरकारी निकायों को यह तकनीक प्रदान की है, निजी नागरिकों को नहीं। अब सवाल यह उठता है कि व्हाट्सएप से स्पष्टीकरण की माँग करना, जो खुद को हैक का शिकार मानता है। एनएसओ जो स्वयं शिकारी हो, वह कैसे कम्पनी से किसी तरह की सफाई माँग सकता है, संदेह पैदा करता है।

सरकार की ओर से कहा गया कि किसी भी निर्णय को पारित करने से पहले, हमें मीडिया में बतायी गयी जानकारी की सत्यता का पता लगाना चाहिए। ये रिपोर्ट और तकनीक का कथित इस्तेमाल एक गम्भीर चिन्ता का विषय है।

स्थायी समिति की अगली बैठक में इस पर विचार होगा। अगर ये आरोप सही हैं, तो यह पुष्टि करना बेहद ज़रूरी है कि क्या इस तरह की डाटा इंटरसेप्शन तकनीक का इस्तेमाल भारत सरकार के इशारे पर किया गया और इसका कानून में किया औचित्य है। आईटी मामले की स्थायी समिति के अध्यक्ष की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है कि जासूसी विदेशी संस्था के ज़रिये की गयी हो या देशी संस्था के ज़रिये; ऐसे में तो कोई भी सरकार के ज़रिये तकनीक का दुरुपयोग कर सकता है। चुने हुए प्रतिनिधियों के नाते यह सुनिश्चित करना हमारी ज़िम्मेदारी है कि कार्यपालिका के कार्यों में इन सिद्धांतों को बरकरार रखा जाए। लोकतंत्र में हमें कार्यपालिका की शक्तियों के किसी भी दुरुपयोग को अनधिकृत तरीके से या बाहरी उद्देश्यों को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने निजता के मौलिक अधिकार को स्पष्ट रूप से मान्यता दी है, और इस अधिकार का उल्लंघन करने वाली किसी भी कार्यवाही की वैधता का विश्लेषण करने की ज़रूरत है।

दिल्ली में रोज़ाना 80 लोग हो रहे लापता

देश की राजधानी नई दिल्ली में जहाँ की आबादी तकरीबन दो करोड़ है। साथ ही यहाँ पर रोज़ाना आवाजाही करने वालों की तादाद भी लाखों में है। घूमने के लिहाज़से या फिर इलाज के लिए भी बड़ी तादाद में लोग यहाँ परिवार के साथ आते हैं। आँकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में रोज़ाना औसतन 80 लोग लापता होते हैं। इस साल सितंबर तक करीब 18,000 से अधिक लोगों के गुमशुदा होने की शिकायतें दर्ज करायी गयी हैं। इनमें ज़्यादातर बच्चे, बजुर्ग, महिलाएँ और बच्चियाँ हैं। गुमशुदा लोगों को अपनों से मिलाने के लिए दिल्ली पुलिस एक अनूठा अभियान इसी साल दिसंबर से शुरू करने जा रही है। इस अभियान के ज़रिये रेलवे स्टेशनों, मेट्रो स्टेशनों, बाज़ारों, बस अड्डों, मॉल आदि जगहों पर लापता लोगों का विवरण तस्वीरों के साथ स्क्रीन पर बार-बार दिखाया जाएगा। सम्बन्धित एजेंसियों से सम्पर्क साधने के लिए टेलीफोन नम्बर भी दिये जाएँगे। इसके अलावा गुमशुदा लोगों का विवरण  एप के ज़रिये भी निरन्तर अपडेट किया जाएगा। दिल्ली में साल 2018 में 23,862 लापता लोगों की शिकायत विभिन्न थानों में दर्ज करायी गयी थी; जिनमें 15,344 अब भी लापता हैं।

पुलिस के मिसिंग पर्सन  एप के ज़रिये आम लोगों को भी सतर्क रहने की ज़रूरत है। क्योंकि इससे बच्चों के साथ मानव तस्करी की गतिविधियों को रोकने में कामयाबी मिल सकती है। िफलहाल पायलट प्रोजेक्ट तौर पर रेलवे और मेट्रो स्टेशनों तथा मॉल्स में इसकी स्क्रीन दिखायी जाएगी और अगर अनुकूल प्रतिक्रियाएँ मिलीं, तो आगे इसका विस्तार किया जा सकता है। इससे आपकी सतर्कता भी बच्चा-चोर गिरोहों को पकड़वाने में मददगार साबित हो सकती है। चूँकि मानव तस्कर अमूमन ट्रेनों या बसों के ज़रिये ही आवाजाही करते हैं; ऐसे में इन जगहों पर नज़र रखने से बच्चा चोर और मानव तस्करी करने वाले गिरोहों पर शिकंजा कसा जा सकता है।

एप के ज़रिये कैसे करें शिकायत

गुमशुदा लोगों की शिकायत दर्ज कराने लिए थाने जाना ज़रूरी नहीं है। अपने स्मार्ट फोन में आपको मिसिंग पर्सन  एप डानलोड करना होगा। इसके बाद आपको शिकायत दर्ज कराने के स्टेप फॉलो करने होंगे और मामला दिल्ली पुलिस के हवाले हो जाएगा। दिल्ली पुलिस मामले को संज्ञान में लेकर गुमशुदा व्यक्ति का फोटो और परिचय स्क्रीन पर अपडेट कर की जाँच शुरू कर देगी।

‘बजरंगी भाईजान’ देख कर्नाटक ने अपनाया था मिस्ड पर्सन एप

कर्नाटक की पुलिस ने पहले से ही ‘मिस्ड पर्सन’  एप के ज़रिये गुमशुदा लोगों की तलाश में मदद ली जा रही है। यहाँ पर इस  एप के ज़रिये अपनों को ढूँढने में मदद मिली है, साथ ही शिकायत दर्ज कराने में सहूलियत हुई है।

गौर करने वाली बात यह है कि कर्नाटक पुलिस को यह आइडिया फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ देखने के बाद आया। यहाँ के पुलिस अधिकारी कुछ ऐसा करना चाहते थे, जिससे कि पुलिस लापता लोगों को उनके परिवार वालों से मिला सके। जैसा कि फिल्म में दिखाया गया कि किस तरह से पाकिस्तान की गूँगी, बहरी बच्ची अपने परिजनों से बिछड़ जाने के बाद कैसी-कैसी दुश्वारियों से जूझी और उसे किस तरह वीडियो वायरल करके उसके परिजनों से मिलाया गया। पुलिस चाहती है कि किसी भी परिजन को इस तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।