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विपक्ष के साझा प्रत्याशी यशवंत सिन्हा ने राष्ट्रपति पद के लिए दाखिल किया नामांकन

विपक्ष के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने सोमवार को संसद भवन पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। राहुल गांधी समेत 17 दलों का समर्थन उन्हें प्राप्त हुआ है। नामांकन के मौके पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, मल्लिकार्जुन खड़गे, माकपा नेता सीताराम येचुरी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, तेलंगाना के सीएम केसीआर समेत कई अन्य विपक्षी नेता मौजूद रहे।

यशवंत सिन्हा 28 जून से अपने अभियान की शुरुआत करेंगे और उनका अभियान तमिलनाडु के चेन्नई से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है साथ ही वे पहले दक्षिण के राज्यों में समर्थन मांगेंगे फिर उसके बाद ही उत्तर के राज्यों में आएंगे।

सिन्हा पूर्व नौकरशाह व बाद में राजनेता बने। उन्होंने काफी लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी के साथ काम भी किया है। इस दौरान वे दो बार (1990-91 और 1998-2004) केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1984 में चंद्रशेखर के नेतृत्व में जनता पार्टी से की थी। फिर बाद में वे बीजेपी में शामिल हुए और कुछ नाराजगी के चलते वे 2021 में तृणमूल कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए।

वहीं दूसरी तरफ एनडीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को अपना नामांकन दाखिल किया था। और उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह समेत भाजपा के तमाम बड़े नेता मौजूद रहे थे।

आपको बता दें, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। और अगले राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए 18 जुलाई को मतदान होना तय है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया जारी है और 29 जून नामांकन की आखिरी तारीख है।

आप पार्टी उपचुनाव में मिली जीत से गदगद

दिल्ली के राजेन्द्र नगर विधानसभा उपचुनाव में आप पार्टी को मिली जीत से आप पार्टी गदगद है। आप पार्टी ने तीसरी बार इस विधानसभा सीट पर जीत दर्ज कराई है।

तहलका संवाददाता को आप पार्टी के प्रवक्ता व नव निर्वाचित विधायक दुर्गेश पाठक ने बताया कि दिल्ली में आप पार्टी की और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जीत है। लोगों को विश्वास है कि आप पार्टी ही दिल्ली में ईमानदारी से काम कर रही है। जिसमें समाज का हर तबका खुश है।

बताते चलें इस सीट पर भाजपा के प्रत्याशी राजेश भाटिया और आप पार्टी के प्रत्याशी दुर्गेश पाठक बीच ही शुरू से चुनावी मुकाबला रहा है। कांग्रेस सहित जो अन्य 12 प्रत्याशी चुनाव में खड़े थे। उनका जमानत जब्त हो गई है।

दिल्ली की सियासत के जानकार कमल किशोर का कहना है कि राजेन्द्र नगर का उपचुनाव कई मायने में बढ़ा महत्वपूर्ण था। कयास को ये लगाये जा रहे थे। कि अगर भाजपा चुनाव जीतती है। तो आप पार्टी की लोकप्रियता का गिरता ग्राफ माना जायेगा।

भाजपा का मानना था कि अगर भाजपा ये चुनाव जीतती है तो दिल्ली में एमसीडी के चुनाव में भाजपा एकतरफा चुनाव जीतने की उम्मीद करती लेकिन सियासी समीकरण अब फिर से बदल गये है। भाजपा सहित अन्य दलों को यह लगने लगा है कि आप पार्टी के मुकाबले उनकी रणनीति काफी कमजोर है। तभी तो चुनाव में तमाम मेहनत करने के बाद भी आप पार्टी के सामने असफलता ही हासिल होती है। ऐसे में आप पार्टी का गदगद होना लाजिमी है।

उपचुनाव में आप पार्टी को पराजित करने के लिये तमाम सियासी हथकंडे अपनाये गये लेकिन आप पार्टी की लोकप्रियता और फ्री की सुविधाओं के सामने अन्य दलों की सारी की सारी राजनीति धर की धरी रह गई।

महाराष्ट्र: डिप्टी स्पीकर का 16 बागी विधायकों को नोटिस, 27 तक मांगा जवाब

महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक संकट के बीच डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल ने सत्तारूढ़ शिवसेना के 16 बागी विधायकों को नोटिस जारी कर दिया है। शिव सेना ने उन्हें आयोग्य घोषित करने की डिप्टी स्पीकर से मांग करते हुए उन्हें पत्र दिया था। डिप्टी स्पीकर ने इन सभी विधायकों से 27 जून को शाम 5.30 बजे तक जवाब देने को कहा है। इस बीच प्रदेश में राजनीतिक संकट लगातार बना हुआ है, हालांकि, अभी स्थिति साफ़ नहीं है।

डिप्टी स्पीकर के विधायकों को नोटिस में कहा गया है कि यदि यह विधायक जवाब नहीं देते हैं तो यह मान लिया जाएगा कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है और फिर आगे की प्रक्रिया के मुताबिक कार्यवाही की जाएगी।

बता दें शनिवार को शिव सेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल न होने पर भी बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने का नोटिस जारी किया है साथ ही इन सभी को लिखित में भी जवाब देने को कहा गया है।

उधर शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे के साथ आज छठे दिन भी गुवाहाटी में बैठे हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ इस सब के बीच शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शिवसेना मुख्यालय में शनिवार को हुई जिसमें चार प्रस्ताव पास किए गए हैं।

आपको बता दें, मुंबई में राजनीतिक उलटफेर के चलते एकनाथ शिंदे ग्रुप के बागी विधायकों के खिलाफ गुस्साए शिवसैनिक सड़कों पर उतर गए हैं। इन शिवसैनिकों ने तोड़-फोड़ की है और बागी विधायकों के पोस्टर जलाए हैं।

मुंबई में हालात को देखते हुए धारा 144 लगा दी गयी है जो कि 10 जुलाई तक लागू रहेगी। इस बीच महाराष्ट्र की राजनीतिक लड़ाई चुनाव आयोग पहुंच गयी है। उद्धव ठाकरे ने आयोग में आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि शिंदे गुट ‘बाला साहब’ और ‘शिवसेना’ का नाम इस्तेमाल नहीं कर सकते।

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सीएम उद्धव ठाकरे कल तक बागी विधायकों को बागी कह रहे थे किंतु आज उद्धव ठाकरे ने उन्हें ‘गद्दार’ करार दिया है। साथ ही उन्होंने घोषणा की है कि गद्दारों को अब कभी शिवसेना में वापस नहीं लिया जाएगा।

उद्धव ठाकरे ने शिवसेना में फूट का जिम्मेदार भाजपा को ठहराया है। उन्होंने कहा बालासाहेब ठाकरे का नाम इस्तेमाल करने का हक किसी को नहीं है और एकनाथ शिंदे को चुनौती दी है कि यदि उनमें हिम्मत है तो अपने बाप के नाम पर वोट मांग कर दिखाए।

केरल: राहुल गांधी के कार्यालय पर हमला, एडीजीपी करेंगे जांच

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के केरल के वायनाड कार्यालय पर हमला मामले की जांच एडीजीपी करेंगे। साथ ही इससे पहले मामले में केरल सरकार के कलपेट्टा के डीएसपी को जांच लंबित रहने तक के लिए सस्पेंड कर दिया गया हैं। स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के कार्यकर्ता ने शुक्रवार को राहुल गांधी के दफ्तर में तोड़फोड़ की थी।

आपको बता दे, इस मामले में सीएमओ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि एडीजीपी जांच करने और एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपगें।

कुछ समय पश्चात सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा था कि संरक्षित वनों, वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास का एक किलोमीटर वाला पूरा इलाका पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र रहने वाला है और इसमे जो भी तमाम गतिविधियां होती रहती हैं उन्हें नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।

केरल में विवाद इस बात को लेकर है कि यदि यह नियम लागू हो जाएगा तो पर्यावरण-संवेदनशील इलाके में रह रहे लोग कहां जाएंगे ? और इसी के विरोध में एसएफआई के कार्यकर्ताओं ने वायनाड में प्रदर्शन किया। हालांकि इस मुद्दे पर राहुल गांधी ने अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है। किंतु सूत्रों के अनुसार उनकी तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी गयी है।

उपचुनाव के परिणाम 26 जून को घोषित होने के बाद ही नेताओं की लोकप्रियता का मालूम पड़ेगा

दिल्ली की राजेन्द्र नगर विधानसभा में हुये उपचुनाव और उत्तर प्रदेश की दो लोकसभा चुनाव रामपुर और आजमगढ़ में हुये 23 जून के चुनाव परिणाम 26 जनवरी को घोषित किये जायेगे। इन उपचुनाव में भाजपा की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर दांव पर लगी है। भाजपा की इन सीटों पर जीत से ये निश्चित तौर पर कहा जायेगा कि भाजपा की लोकप्रियता में इजाफा हो रहा। अगर भाजपा हारती है तो भाजपा के लिये सकारात्मक मैसेज नहीं होगा।

बताते चलें राजेन्द्र नगर सीट पर आप पार्टी का कब्जा रहा है। ये सीट राघव चड्डा के राज्य सभा में जाने से ये सीट खाली हुई है। आप पार्टी ने दुर्गेश पाठक को चुनाव मैदान में उतारा है। यहां के लोगों का कहना है कि आप पार्टी की लोकप्रियता पर खासा असर पड़ने वाला नहीं है। वहीं भाजपा ने राजेश भाटिया को चुनाव मैदान में उतार कर एड़ी चोटी का जोर लगाया है ताकि भाजपा को जीत हासिल हो सकें। लेकिन उत्तर प्रदेश में हालत अलग है। क्योंकि रामपुर और आजमगढ़ में सपा के दोनों सांसदों ने मोदी लहर में भी चुनाव जीता था।इस लिहाज से भाजपा ने अपने प्रत्याशियों को चुनाव जीताने के लिये कड़ी मेहनत की है।

उत्तर प्रदेश भाजपा के नेताओं का कहना है कि अगर इन दोनों सीटों पर भाजपा चुनाव जीतती है और सपा को हराती है। तो निश्चित तौर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की लोकप्रियता में इजाफा माना जायेगा।वैसे प्रदेश की जनता का मानना है कि प्रदेश विधानसभा के चुनाव अलग होते है। उस हिसाब से चुनाव में जनता वोट देती है। लेकिन लोकसभा के चुनाव अलग होते है। उसमें केन्द्र की राजनीति के मुताबिक वोट देते है। फिलहाल 26 जून के चुनाव परिणाम सामने आने से ही प्रदेश की राजनीति और सूबे के नेताओं की लोकप्रियता का मालूम पड़ेगा।

मुंबई हमले के साजिशकर्ता को पाक अदालत ने सुनाई 15 साल की क़ैद

मुंबई आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान पर आरोप लगते रहे हैं। अब पाकिस्तान की एक अदालत ने 2008 के मुंबई हमले के एक साजिशकर्ता साजिद को 15 साल से अधिक की जेल की सजा सुनाई है। लाहौर की आतंकवाद-रोधी अदालत ने यह सजा आतंकवाद के वित्तपोषण के एक मामले में सुनाई है। साजिद 26/11 के मुंबई हमलों में भूमिका के लिए भारत की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल है। इस घटना में 166 लोग की जान गयी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह सजा इस महीने की शुरुआत में लाहौर की आतंकवाद-रोधी अदालत ने प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के एक आतंकी साजिद मजीद मीर को सुनाई। दोषी घोषित मीर अप्रैल में गिरफ्तार हुआ था और उसके बाद से कोट लखपत जेल में बंद है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अदालत ने मीर पर 4,00000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान में पंजाब पुलिस का आतंकवाद रोधी विभाग (सीटीडी), जो मीडिया को ऐसे मामलों में दोषसिद्धि की जानकारी साझा करता है, ने आतंकवाद के वित्तपोषण के मामले में मीर की दोषसिद्धि की सूचना नहीं दी थी। यह जानकारी में मीडिया में इस मामले से जुड़े एक वकील के जरिये बाहर आई।

वैसे मीर को लेकर पहले यह रिपोर्ट्स मीडिया में आती रही थीं कि उसकी मौत हो चुकी है। पाकिस्तान ने साजिद मीर को एफएटीएफ की ‘ग्रे लिस्ट’ से हटाने की मांग करने के लिए गिरफ्तार किया था और उस पर मुकदमा चलाया गया था। साजिद मीर, पर पांच मिलियन अमरीकी डालर का इनाम भी घोषित है। मीर कथित तौर पर 2005 में फर्जी नाम से फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर भारत आया था।

द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन किया दाखिल, पीएम मोदी समेत अन्य बड़े नेता रहे उपस्थित

झारखंड की पूर्व राज्यपाल और एनडीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने आज संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।

नामांकन के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बड़े नेता व कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। साथ ही ओडिशा की सत्ताधारी बीजू जनता दल (बीजद) के प्रतिनिधि के रूप में राज्य सरकार के दो अन्य वरिष्ठ मंत्री भी मौजूद रहे।

द्रौपदी मुर्मू के नामांकन पत्र में पहले प्रस्तावक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रहे। साथ ही भाजपा के अध्यक्ष नड्डा समेत पार्टी के अन्य दिग्गज नेता भी प्रस्तावकों में शामिल हुए।

आपको बता दे, वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल ने राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है। साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाये जाने की खुशी जताई है।

वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के साझा उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा 27 जून को राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे।

महाराष्ट्र के घटनाक्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

महाराष्ट्र का राजनीतिक संकट सर्वोच्च न्यायालय में पहुँच गया है। वहां के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गयी है जिसमें दलबदल में शामिल सभी विधायकों पर कार्रवाई की मांग की गयी है।

यह याचिका मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस की नेता जया ठाकुर ने दायर की है जिसमें उन्होंने सर्वोच्च अदालत से याचिका पर जल्द सुनवाई का आग्रह किया है। उनके वकील ने कहा कि यह मामला काफी गंभीर है और कोर्ट इस पर शीघ्र सुनवाई करे। सर्वोच्च अदालत ने इस पर सहमति जताई और कहा कि आने वाले बुधवार (29 जून) को सुनवाई होगी।

याचिका दायर करने वाली मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष जया ठाकुर ने अर्जी में दलबदल करने वाले विधायकों को पांच साल के लिए चुनाव लड़ने से रोकने के निर्देश देने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि अयोग्य/इस्तीफा देने वाले विधायकों को उनके इस्तीफे/विधानसभा से अयोग्य ठहराए जाने की तारीख से पांच साल तक चुनाव लड़ने की रोक लगे।

याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक दल देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को नष्ट करने की कोशिश में हैं। विधायकों का दलबदल असंवैधानिक है। ये अर्जी 2021 में उनके द्वारा पहले से ही लंबित याचिका में दायर की गई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2021 में केंद्र से जवाब मांगा था। अर्जी में कर्नाटक में 2019 में दोषपूर्ण विधायकों के फिर से चुनाव का हवाला भी दिया गया है।

कोरोना के साथ डेंगू को लेकर बरते सावधानी

दिल्ली में कोरोना के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे है। वहीं डेंगू का डंक भी लोगों के बीच भय का कारण बना हुआ है। दिल्ली के डॉक्टरों ने तहलका संवाददाता को बताया कि अगर कोरोना के साथ डेंगू का कहर बढ़ता है। तो निश्चित तौर पर लोगों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। 23 जून को दिल्ली में करीब एक हजार नौ से अधिक मामले आये है। वहीं दूसरी तरफ 22 जून को डेंगू के 7 से ज्यादा मामले सामने आने से दिल्ली के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

बताते चलें कोरोना और डेंगू दोनों ही संक्रमित बीमारी है। इसमें रोगी को तुरन्त जानकारी नहीं मिलती है। दो दिन बाद रोगी को इसके हल्के लक्षण मिलते है। ऐसे में सावधानी के तौर पर भीड़-भाड़ वाले इलाके में जाने से बचना आवश्यक है।

एम्स के डॉ आलोक कुमार का कहना है कि आने वाले दिनों में बरसात का मौसम आयेगा जिससे मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ेगा। जिसमें डेंगू और मलेरिया शामिल है। उनका कहना है कि डेंगू को लेकर दिल्ली में कहर अक्सल रहा है। जिसमें रोगी के प्लेटलेट्स गिरने लगते है। और साथ ही रोगी का वजन भी।

डॉ आलोक कुमार ने बताया कि समय रहते अगर कोरोना के साथ अगर डेंगू को काबू नहीं पाया गया तो ये घातक हो सकता है। जिसके चपेट में बच्चे , युवा और बुजुर्ग भी आ सकते है।डाँ संजय चौधरी का कहना है कि तमाम अध्ययनों से इस बात की पुष्टि हुई है कि जून के आखिरी में और जुलाई के शुरू में कोरोना का कहर बढ़ सकता है। ऐसे में बचाव के तौर पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मुंह मास्क लगाकर ही निकलें ताकि कोरोना के साथ डेंगू को काबू पाया जा सकें।

गुजरात दंगे: नरेंद्र मोदी को मिली ‘क्लीन चिट’ को बरकरार रखा सुप्रीम कोर्ट ने

गुजरात दंगों के मामले में उस समय राज्य के मुख्यमंत्री और अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘क्लीन चिट’ देने वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) की रिपोर्ट के खिलाफ जाकिया जाफरी की याचिका सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को खारिज कर दी। लम्बी चली सुनवाई के बाद 9 दिसंबर, 2021 को सर्वोच्च अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था। सर्वोच्च अदालत ने

जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रवि कुमार की पीठ यह फैसला सुनाया। सर्वोच्च अदालत ने आज राज्य के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को मिली क्लीन चिट को बरकरार रखा है। अदालत ने 2002 दंगों के पीछे ‘बड़ी साजिश’ की जांच से इनकार करते हुए दिवंगत कांग्रेस नेता जाकिया जाफरी की याचिका खारिज कर दी। फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जाकिया की अपील में कोई मेरिट नहीं है।

याद रहे यह याचिका जाकिया जाफरी ने दायर की थी जिनके पति कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की 2002 के गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी हत्याकांड में मौत हो गयी थी। जाफरी ने एसआईटी की रिपोर्ट को सर्वोच्च अदालत में चुनौती वाली याचिका दायर की थी।

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में गोधरा हत्याकांड के बाद सांप्रदायिक दंगे भड़काने में राज्य के उच्चाधिकारियों की किसी भी ‘साजिश’ को खारिज किया गया था। साल 2017 में गुजरात हाई कोर्ट ने एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ जकिया की विरोध शिकायत को मजिस्ट्रेट द्वारा खारिज करने के खिलाफ उसकी चुनौती को खारिज कर दिया था।

इन दंगों में उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘क्लीन चिट’ देने के खिलाफ याचिका का एसआईटी और गुजरात सरकार ने विरोध किया है। दंगों की जांच के लिए गठित एसआईटी ने जाकिया जाफरी के बड़ी साजिश के आरोपों को नकारा है। एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इस मामले में एफआईआर या चार्जशीट दर्ज करने के लिए कोई आधार नहीं मिला।

उधर जाकिया जाफरी ने एसआईटी पर आरोपियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है। पिछली सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने इस पर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने कहा सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी के लिए मिलीभगत एक कठोर शब्द है।

जाकिया जाफरी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि जब एसआईटी की बात आती है तो आरोपी के साथ मिलीभगत के स्पष्ट सबूत मिलते हैं। राजनीतिक वर्ग भी सहयोगी बन गया है। एसआईटी ने मुख्य दस्तावेजों की जांच नहीं की।