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उद्योगपति राहुल बजाज का निधन

मशहूर उद्योगपति पद्म भूषण राहुल बजाज (83) का शनिवार निधन हो गया। बजाज 50 साल बजाज ग्रुप के चेयरमैन रहे थे। पिछले साल ही बजाज ने बजाज ऑटो के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। उनके निधन पर कई जानी मानी हस्तियों ने शोक जताया है।

उनका निधन पुणे में हुआ। बजाज ग्रुप के एक बयान में कहा गया – ‘बेहद दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि राहुल बजाज अब हमारे बीच नहीं रहे।’ उनकी  पत्नी रूपा बजाज का पहले ही निधन हो गया था। राहुल का दोपहर जब निशान हुआ,   नजदीकी परिजन वहां उपस्थित थे।

यह राहुल बजाज ही थे जिन्होंने कुछ महीने पहले केंद्र  सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाई थी। उन्होंने यहाँ तक कहा था कि ‘कारोबारी अपनी बात कहने से डरते हैं।’

भारतीय बाज़ार में बजाज ऑटो बड़ा नाम है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बजाज ने कई प्रोडक्ट दिए हैं। बजाज की टैगलाइन – यू जस्ट कांट बीट ए बजाज – काफी चर्चित  रही है। राहुल बजाज ने 1965 में बजाज ग्रुप की जिम्मेदारी संभाली। राहुल बजाज की अगुवाई में बजाज ऑटो का टर्नओवर 7.2 करोड़ रुपये से बढ़कर 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। बजाज देश की दोपहिया वाहन बनाने वाली शीर्ष कंपनियों में है।

पूरे दमखम के साथ लड़ेगी बसपा और कांग्रेस एमसीडी चुनाव

आगामी दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के चुनाव में गत चुनावों की तरह इस बार भी बसपा पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेगी। बसपा का मानना है कि इस साल 2022 के एमसीडी के चुनाव में भाजपा और आप पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला कराकर बसपा चुनावी माहौल को अपने पक्ष में कर सकती है।

क्योंकि पहले भी एमसीडी के चुनावों में बसपा ने 20 से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है। बसपा की राजनीति करने वालों का कहना है कि इन दिनों कांग्रेस हासिये पर है। कांग्रेस का वोट बैंक दलित और मुस्लिम है। वहीं वोट बैंक बसपा का है।

जो आप पार्टी और भाजपा को पसंद नहीं करते है। वो जरूर बसपा को वोट कर सकते है। बसपा को लेकर डॉ रमन कुमार सुमन का कहना है कि दिल्ली की सियासत में हलचल है। लेकिन ये हलचल उत्तर प्रदेश के 10 मार्च को चुनाव परिणाम आने के बाद दिल्ली में और भी तेज हो जायेगी।

जब कि कांग्रेस का मानना है कि भले ही मौजूदा दौर में कांग्रेस हासिये पर हो, लेकिन इतना तो जरूर है। भाजपा और आप के वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। और अपने खोये हुये जनाधार को प्राप्त कर सकती है।

कांग्रेस आला कमान से लेकर स्थानीय नेता तक इस बात पर जोर दें रहे है। अगर कांग्रेस एमसीडी के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करती है। तो, निश्चित तौर कांग्रेस का मैसेज पूरे देश में सकारात्मक जायेगा। जिससे कांग्रेस को लाभ मिलेगा। कांग्रेस और बसपा इस बार पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेगी और भाजपा और आप पार्टी में सेंध लगायेगी।

सूत्रों के माने तो कांग्रेस और बसपा उत्तर प्रदेश के चुनाव में अगर अच्छा प्रदर्शन करती है। तो निश्चित पर एमसीडी के चुनाव के रास्ते भाजपा और आप को सियासी दांव पेंच में फंसा सकती है। ताकि बसपा और कांग्रेस के अस्तित्व पर उठ रहे सवालिया निशान पर विराम लग सकें।

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यूपी सरकार सीएए आंदोलन के वसूली नोटिस निरस्त करे  

सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ आंदोलन करने वाले लोगों को वसूली नोटिस भेजने वाली उत्तर प्रदेश की सरकार को  कड़ी फटकार लगाते हुए शनिवार को उसे सख्त निर्देश दिए कि वह अपनी यह कार्रवाई निरस्त करे। सर्वोच्च अदालत ने यूपी सरकार को इसके लिए आखिरी मौका दिया है और चेताया है कि यदि उसने ऐसा नहीं किया तो अदालत कानून का उल्लंघन करने वाले इस फैसले को अपनी तरफ से रद्द कर देगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक सर्वोच्च अदालत ने साफ़ कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की यह कार्रवाई कानून के खिलाफ है और इसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि ‘उत्तर प्रदेश सरकार आरोपियों की सम्पति जब्त करने की कार्रवाई के लिए खुद ही शिकायतकर्ता, न्यायकर्ता और अभियोजक बन बैठी। पीठ ने कहा कि सरकार को कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। कृपया इसकी जांच करें, हम 18 फरवरी तक एक मौका दे रहे हैं।

सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ता परवेज आरिफ टीटू की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि यह कार्रवाई तुरंत वापस लें या यह अदालत कानून का उल्लंघन करने के लिए इसे रद्द कर देगी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह नोटिस मनमाने तरीके से भेजे गए हैं। एक ऐसे व्यक्ति को भी नोटिस भेज दिया गया जिसकी मौत 6 साल पहले 94 साल की उम्र में हो चुकी थी। ऐसे नोटिस 90 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों के अलावा कई अन्य को भेजे गए।

यूपी सरकार ने यह नोटिस यह कहकर भेजे थे कि राज्य में सीएए आंदोलन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को जो नुकसान हुआ यह उसकी भरपाई के लिए कथित प्रदर्शनकारियों को भेजे गए थे। याचिका में यह नोटिस रद्द करने की अपील की गई है। यूपी सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य में 833 दंगाइयों के खिलाफ 106 प्राथमिकी दर्ज की गईं और उनके खिलाफ 274 वसूली नोटिस जारी किए गए। उन्होंने कहा कि 274 नोटिस में से, 236 में वसूली के आदेश पारित किए गए थे, जबकि 38 मामले बंद कर दिए गए थे।

उत्तर प्रदेश के दूसरे चरण का चुनाव प्रचार थम जाएगा आज

आज शाम उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का प्रचार थम जाएगा। 14 फरवरी को नौ जिलों की 55 सीटों पर विधानसभा चुनाव होने वाले है। इनमें सहारनपुर, बिजनौर, अमरौहा, संभल, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बंदायू, शाहजहांपुर जिले की विधानसभा सीटों पर आज शाम चुनाव प्रचार थम जायेगा।

ये सभी विधानसभा सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तहत ही आती है। और उत्तराखंड राज्य की सीमा से सटी है। उत्तराखंड राज्य में भी चुनाव होने की वजह से यहां पर पूरा माहौल चुनावी रंग में रंगा हुआ है। यहां की सियासत के जानकार और एक राजनीतिक दल से ताल्लुक रखने वाले समाजसेवी राजकुमार सिंह का कहना है कि भाजपा और सपा के बीच यहां पर मुकाबला कम ही नजर आ रहा है। क्योंकि उत्तराखंड राज्य में भी चुनाव है।

सो उत्तराखंड में कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला का असर यहां पर देखा जा रहा है। इसलिये यहां पर भाजपा, सपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय संघर्ष है। बसपा भी अपने जनाधार को कायम रखने के लिये मेहनत कर रही है।

बताते चलें वैसे तो ये क्षेत्र मुस्लिम, जाट और किसान बाहुल्य है। इस लिहाज से यहां पर किसान भी निर्णायक भूमिका में है। किसानों का कहना है कि सरकार किसानों को गुमराह करती आ रही है। सो किसानों का सरकार के प्रति गुस्सा जायज है।

किसान अमर सिंह का कहना है कि अगर यहां गन्ना और जिन्ना की राजनीति का असर हुआ तो, ये कहना मुश्किल होगा कि मत किस पार्टी को मिलेगा। क्योंकि चुनाव में जिस अंदाज में धर्म और जाति को लेकर वयानबाजी की जा रही है। उससे तो ये स्पष्ट है कि चुनाव में तुष्टीकरण को लेकर सियासत करने वाले अपने तरीके से सियासी रंग को घोल रहे है। और जनता के बीच ये संदेश देने में लगे है। कि महगांई और बेरोजगारी के अलावा और भी मुद्दे है। जिसको लेकर सरकार बनाई और गिराई जा सकती है।

आप की काट के लिये भाजपा और कांग्रेस उधेड़बुन में लगी है

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का महासमर चल रहा है। वहीं दिल्ली में दिल्ली नगर निगम(एमसीडी) के चुनाव को लेकर भी आहट दिन व दिन तेज होती जा रही है। जानकारों का कहना है कि जिस अंदाज में आम आदमी पार्टी, दिल्ली में फ्री की सुविधायें दे रही है। उसका काट भाजपा के पास नहीं है। ऐसे में भाजपा को ये चिंता सता रही है। कि गत 15 सालों से एमसीडी में काबिज कहीं उनके हाथ से निकल जाये तो, दिल्ली में भाजपा की नेतागिरी का क्या होगा।

बताते चलें हालात ये है कि भाजपा के दिल्ली प्रदेश के नेता इसी उधेड़बुन में लगे है। कि ऐसा क्या प्रलोभन जनता को दिया जाये ताकि भाजपा इस बार जनता के बीच लोकप्रिय बनी रहे। क्योंकि चुनाव में भाजपा अगर किसी कारण हारती है। तो आगामी चुनाव में भाजपा को अपनी सियासत करने में दिक्कत होगी। भाजपा जानती है कि कांग्रेस को जनता ने जिस प्रकार दिल्ली की राजनीति से बाहर किया है। उसके बाद कांग्रेस की राजनीति दिल्ली में चमक नहीं पायी है।

दो बार से दिल्ली विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पाया है।आप पार्टी का दावा है कि इस बार जनता खुद आप पार्टी को एमसीडी में जिताने के लिये काम कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि दिल्ली में आप पार्टी ने लोगों को रोजगार तो दिये नहीं है। बस दिल्ली में गली –गली शराब की दुकानें खोल दी है। कांग्रेस का मानना है कि आप पार्टी अपने फायदें के लिये शराब की दुकान को खोलकर दिल्ली वालों को शराब की लत लगाने में लगी है। जिसका कांग्रेस भरसक विरोध करेंगी।

अमेरिका ने बढ़ते तनाव के बीच अपने नागरिकों को यूक्रेन छोड़ने को कहा  

यूक्रेन मामला तेजी से गर्माता दिख रहा है। रूस की यूक्रेन को नाटो का सदस्य न बनने अन्यथा परमाणु हमले झेलने की धमकी के बाद अमेरिका ने शुक्रवार को यूक्रेन में अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की एडवाइजरी जारी की है।

वैश्विक स्तर पर विशेषज्ञ यूक्रेन पर बड़े देशों के बीच बढ़ रहे तनाव को विश्व शान्ति के लिए खतरा मान रहे हैं और उनको अंदेशा है कि यह तनाव बड़े टकराव का रास्ता खोल सकता है। यूक्रेन सीमा के पास रूस ने बेलारूस और काला सागर में एक दिन पहले ही युद्धाभ्यास शुरू किया है जिससे संकेत मिल रहे हैं कि वह अपनी धमकी को वास्तव में अमल में ला सकता है।

रूस लगातार यूक्रेन पर लगातार यह दबाव बना रहा है कि वह नाटो का सदस्य बनने की जुर्रत न करे। रूस को आशंका है कि इससे सीमा पर उसकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा क्योंकि इससे अमेरिका और समर्थक देशों की पहुँच वहां तक हो जाएगी।

अब रूस ने जिस तरह बेलारूस और काला सागर में अपने युद्ध टैंकों का प्रदर्शन किया है उससे विश्व स्तर पर यह आशंका जताई जा रही है कि रूस यूक्रेन पर हमला करने की तरफ बढ़ रहा है। इसके बाद अब शुक्रवार को अमेरिका ने यूक्रेन में रह रहे अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करके उन्हें तुरंत यूक्रेन छोड़ने की सलाह दी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यह सलाह जारी करते हुए शुक्रवार को कहा कि यदि   रूस यूक्रेन पर हमला करता है तो वह अमेरिकियों को बचाने के लिए सेना नहीं भेजेंगे। बाइडेन ने चेताया कि क्षेत्र में हालात तेजी से बदल सकते हैं। बाइडेन ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिकी नागरिकों को अब यूक्रेन छोड़ देना चाहिए।

रिपोर्ट्स से जाहिर होता है कि बेलारूस में रूस का युद्धाभ्यास 20 फरवरी तक चलेगा। उसके युद्धाभ्यास को नाटो और पश्चिमी देशों के लिए उसकी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। दिलचस्प यह है कि यूक्रेन, जिसे अमेरिका सहित पश्चिम देश सपोर्ट कर रहे हैं, भी सैन्य अभ्यास का ऐलान कर चुका है। बेलारूस, रूस का दशकों से सहयोगी है और उसकी यूक्रेन के साथ लंबी सीमा है।

नाटो पहले ही कह चूका है कि रूस की मिसाइलें, भारी तोपखाना और मशीन गनों के साथ जवानों की तैनाती यूरोप के लिए खतरनाक क्षण है। यूक्रेन 2014 तक रूस का सहयोगी था, लेकिन सत्ता परिवर्तन में रूस विरोधी विद्रोहियों के आने से रूस-यूक्रेन में गंभीर खाई बन चुकी है।

बता दें कि सोवियत संघ के पतन के 30 साल बाद यह हालात बने हैं। पश्चिमी नेता इस प्रयास में जुटे हैं कि रूस के साथ बातचीत के रास्ते बंद न हों। वे चाहते हैं कि नाटो के विस्तार को लेकर रूस की चिंताओं और शिकायतों को सुना जाए। यूक्रेन के साथ बढ़ते तनाव के बीच चीन ने हाल ही में रूस  सहमति जताते हुए नाटो के विस्तार का विरोध किया था।

पहले चरण के चुनाव को लेकर प्रत्याशियों में खलबली

उत्तर प्रदेश के पहले चरण के चुनाव 10 फरवरी को हुये। चुनाव को लेकर ये बात तो सामने आयी है। कि चुनाव में सपा-रालोद गंठबंधन और भाजपा के बीच मुकाबला तो दिखा है। लेकिन जिस अंदाज में छुटपुट घटनायें हुई है। और आरोप–प्रत्यरोप के साथ निर्वाचन आयोग मे शिकायत की गई है। इससे ये जाहिर होता है कि प्रत्याशियों के अंदर बैचेनी है। शिकायत से ये तो बात स्पष्ट है कि चुनाव इकतरफा नहीं दिखा।

बताते चलें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 11 जिलों 58 सीटों पर जो चुनाव हुये है। वहां पर मुस्लिम और जाट फैक्टर को लेकर इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा था। कि जाट वोटर निर्णायक भूमिका में होगा। लेकिन जाट वोटरों का झुकाव मतदान के दौरान कुछ और ही दिखा है।

इससे राजनीतिक दलों में खलबली देखने को मिली है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासत के जानकार अमन सिंह मान का कहना है। कि एक दौर ये था जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत का रूख चौ. चरण सिंह के इशारे पर तय होता था। और लोग उनके इशारे पर ही वोट डालते थे। लेकिन अब मौजूदा राजनीति की फिजांओं का रूख कुछ और ही।

क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश ने 2007 में बसपा पर भरोसा कर मायावती को मुख्यमंत्री बनाया था। फिर 2012 में सपा पर भर भरोसा कर अखिलेश यादव की सरकार बनाई। उसके बाद 2017 में भाजपा पर भरोसा कर योगी आदित्य नाथ की सरकार बनायी। अब जनता का मानना है कि अगर सरकार में बदलाव कर कुछ हो सकता है। तो क्यों न करें। इसी के तहत इस बार चुनाव में मतदान किया गया। सियासत में कुछ नहीं कहा जा सकता है। इसलिये परिणाम जरूर चौकाने वाले साबित होगें।

लखीमपुर कांड के मुख्य आरोपी आशीष को जमानत दुर्भाग्यपूर्ण : किसान मोर्चा

संयुक्त किसान मोर्चा ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखीमपुर खीरी हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त आशीष मिश्र उर्फ मोनू को जमानत देने को ‘दुर्भाग्यपूर्ण और आश्चर्यजनक’ बताया है। मोर्चा ने कहा कि चार किसानों और एक पत्रकार को केंद्रीय मंत्री के बेटे के  दिनदहाड़े कार के नीचे रोंदने की घटना को पूरे देश ने देखा, लिहाजा मुख्य आरोपी को जमानत मिलना जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।

एक साझे बयान में संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं दर्शन पाल, हन्नान मोल्ला, जगजीत सिंह डल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, शिवकुमार शर्मा (कक्का जी), युद्धवीर सिंह और योगेंद्र यादव ने कहा – ‘ऐसे मामले में स्पष्ट प्रमाण के बावजूद हत्या के आरोपी को इतनी जल्दी जमानत मिलना, और वह भी उत्तर प्रदेश में चुनाव के पहले दिन होना, आश्चर्य का विषय है। राजनैतिक रूप से ताकतवर अभियुक्त के गवाहों पर असर डालने की पक्की संभावना पर विचार किए बिना आशीष मिश्रा को जमानत दे देना बेहद निराशाजनक है।’

इन नेताओं ने आरोप लगाया कि ‘इस हत्याकांड के बाद से लगातार पुलिस और प्रशासन अजय मिश्र टेनी और उनके बेटे को बचाने में जुटा रहा है। इस मामले की जांच करने और अभियुक्त तो को पकड़ने में शुरू से ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने कोताही बरती है और इस केस को कमजोर करने की कोशिश की है। पुलिस और सरकार की मिलीभगत इस बात से जाहिर होती है कि अभियुक्त आशीष मिश्र मोनू पर दफा 302 को लगाया ही नहीं गया है, जबकि दूसरे मामले में आरोपी किसानों पर दफा 302 लगाई गई है।’

किसान नेताओं ने कहा – ‘हाईकोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट है की अभियोजन पक्ष की रुचि इस मामले में मंत्री के बेटे को जमानत दिलवाने में थी। यह आदेश इस जघन्य हत्याकांड में निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद को धुंधला करता है।’

उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा इस मामले को देशभर के किसानों की इज्जत का सवाल मानते हुए इसमें इंसाफ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा – ‘मोर्चा यह मांग करता है कि सरकार द्वारा हाई कोर्ट के इस निर्णय के विरुद्ध तत्काल अपील दायर की जाए। संयुक्त किसान मोर्चा इस बारे में देश के अग्रणी वकीलों की राय लेकर अपील दायर करने में पीड़ित परिवारों के साथ पूरा सहयोग करेगा। संयुक्त किसान मोर्चा उत्तर प्रदेश की जनता की अदालत से अपील करता है कि वह इस हत्याकांड के असली अपराधियों को सजा दिलाने के लिए उन्हें बचाने पर आमादा भारतीय जनता पार्टी पर वोट की चोट करें।’

यूपी : पहले चरण में 58 सीटों पर 60.17 फीसदी वोट, पिछली बार से कम मतदान

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले चरण में गुरुवार 60.17 फीसदी मतदान हुआ है। आज 11 जिलों की 58 सीटों पर सुबह 7 बजे से शुरू हुआ मतदान शाम 6 बजे तक चला। यह मतदान पांच साल पहले इन सीटों पर हुए मतदान के मुकाबले कुछ कम है। तब 63.1 फीसदी मत पड़े थे।

पहले चरण में शाम 6 बजे तक यूपी की 58 विधानसभा सीटों पर 60.17 फीसदी मतदान हुआ। सबसे ज्यादा मतदान कैराना में 75.12 फीसदी और सबसे कम साहिबाबाद में 45 फीसदी हुआ। साल  2017 में इन सीटों पर कुल 63.1 फीसदी  वोटिंग हुई थी। उस वक्त सबसे ज्यादा मेरठ जिले की सरधना सीट पर 71.5 फीसदी  वोट पड़े थे।

आज कुछ जगह ईवीएम मशीनों के खराब होने की शिकायतें मिलीं थीं। उधर मुज़फ्फरनगर में एक भाजपा नेता पर एक व्यक्ति की पिटाई करने का आरोप लगा है। इस बीच आरएलडी के मुखिया जयंत चौधरी मथुरा में अपना वोट नहीं डाल पाए।

किसान बहुल सभी 58 सीटों पर सत्तारूढ़ भाजपा के लिए कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। जिन 58 सीटों पर आज मतदान हुआ, 2017 के चुनाव में इनमें से 53 सीटें भाजपा ने जीते थीं। इस चुनाव में इन सीटों पर 9 मंत्री भी मैदान में हैं।

नितिन गडकरी : ‘सड़क दुर्घटनाओं के लिए जीरो टॉलरेंस होना चाहिए’

देश में सड़क हादसों की स्थिति बेहद गंभीर है। आने वाले समय में राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाओं को रोकने और सड़क सुरक्षा के मुद्दे के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुआयामी रणनीति तैयार की है जिससे राजमार्गों पर होने वाली गंभीर दुर्घटनाओं को कम किया जा सकेगा।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है और सड़क दुर्घटनाओं के लिए जीरो टॉलरेंस होना चाहिए। प्रत्येक वर्ष विभिन्न कारणों से करीब 1.5 लाख लोगों की मृत्यु केवल सड़क हादसों से होती है जिसका देश की अर्थव्यवस्था पर 3.14 प्रतिशत असर पड़ता है।

मंत्री ने भारत में ऑटोमोबाइल सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती पर जोर दिए जाने साथ ही वर्ष 2025 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत कमी की उम्मीद भी जताई है। गडकरी ने सुरक्षा प्रावधानों में सुधार के लिए 4 अतिरिक्त एयरबैग और 3 पॉइंट सीट बेल्ट की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि, “वाहन की सुरक्षा में सुधार के लिए मानकों और प्रोटोकॉल के आधार पर वाहन की स्टार रेटिंग के लिए एक प्रणाली प्रस्तावित की जा रही है। इससे वाहन के खरीदार को सूचित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।”

उन्होंने आगे कहा की, “अन्य सुरक्षा प्रणालियों के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक स्थिरता नियंत्रण, उन्नत आपातकालीन ब्रेकिंग सिस्टम (एर्इबीएस), खतरनाक सामानों के परिवहन, दिव्यांगों के लिए गतिशीलता में आसानी, चालक उनींदापन ध्यान चेतावनी प्रणाली (डीडीए डब्ल्यू), ब्लाइंड स्पॉट सूचना प्रणाली, साथ ही ध्वनि प्रदूषण को कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के महत्व पर भी जोर दिया गया है।”