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बढ़ रहा योग का बाज़ार

वर्ष 2027 तक योग का वैश्विक बाज़ार 60 अरब डॉलर से अधिक का होगा

पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के जिम्नेजियम हॉल में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के खेल विभाग द्वारा पहली जून से लेकर 21 जून तक योग कैंप का आयोजन किया गया था। इसमें आकर्षक यह था कि एक छोटी-सी बच्ची अपने योग प्रशिक्षक को अलग-अलग आसन करके दिखा रही थी। आसन करने से ज़्यादा उस बालिका में योग के प्रति एक जज़्बा था। कैंप में आये अन्य लोगों में भी तंदुरुस्ती और शारीरिक गठन को लेकर योग के प्रति एक आकर्षण दिखायी दे रहा था।

बहरहाल, धीरे-धीरे देश-विदेश में योग की एक जबरदस्त अलख जगी है। योग से लोगों के जुड़ाव को लेकर माना जा रहा है कि योग का जो वैश्विक बाज़ार वर्ष 2020 में 41.5 अरब डॉलर का था, वह वर्ष 2027 तक 60 अरब डॉलर से अधिक का हो जाएगा। कोरोना महामारी के चलते योग की लोकप्रियता और माँग पहले से ज़्यादा बढ़ गयी है; ख़ासकर ऑनलाइन योग सीखने और सिखाने की। लोग बड़ी तेज़ी से मानसिक बीमारियों का शिकार हुए हैं, जिनमें तनाव विकराल समस्या बनकर उभरा है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार विश्लेषण अनुसंधान और परामर्श समूह (आईएमएआरसी) की नयी रिपोर्ट के अनुसार, जीवन शैली से होने वाली भयानक बीमारियों, जैसे- मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अस्थमा, गठिया, कैंसर और तनाव से जुड़ी हुई बीमारियों के कारण भारत का हेल्थ ऐंड वेलनेस मार्केट (स्वास्थ्य और कल्याण बाज़ार) 2022 से 2027 तक 5.45 फ़ीसदी की दर से और आगे बढ़ेगा। शरीर और मन को स्वस्थ रखने वाली भारत की प्राचीन विद्या योग विश्व में 10 सबसे अधिक लोकप्रिय स्वास्थ्य गतिविधियों में शामिल हो चुका है। स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता योग के वैश्विक बाज़ार को गति दे रही है। इसके माध्यम से लोग समग्र स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। योग के उद्योग में नॉर्थ अमेरिका, लेटिन अमेरिका, मिडिल ईस्ट, यूरोप और एशिया पैसिफिक जैसे देश मुख्य भूमिका में है।

बिजनेस रिसर्च कम्पनी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएस योग पॉपुलेशन स्टैटिसटिक्स के अनुसार, वर्ष 2021 में 55 लाख अमेरिकन लोगों ने योग का अभ्यास किया, जिसमें 75 फ़ीसदी महिलाएँ थीं। यहाँ तक कि ये लोग योग अभ्यास, के उपकरणों, योग कक्षाओं, वस्त्रों और अन्य साज़ा-ओ-सामान पर अनुमानित 16 अरब डॉलर ख़र्च करते हैं। क्रिस्टीन हेब्रोन अपने एक लेख में लिखती हैं कि विश्व में अकेला अमेरिका ऐसा देश है, जहाँ योग की ख़ूब लोकप्रियता है। यूएस में 36 लाख लोग योग का अभ्यास करते हैं। यूएस में भी तीन सबसे बड़े शहर सैन फ्रांसिस्को, न्यूयॉर्क और लॉस एंजेलिस हैं, जहाँ सबसे अधिक योग स्टूडियो चलते हैं।

वैश्वीकरण और बाज़ारवाद की जीवन-शैली ने मनुष्य को टेंशन और तनाव जैसी बीमारियों का शिकार बनाया है। विकास की दौड़ में जितना अधिक और तेज़ी से औद्योगीकरण हुआ है, तनाव से जुड़ी बीमारियाँ भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ी हैं। हालाँकि तनाव से उबरने के लिए बाज़ार में बहुत सारी दवाएँ उपलब्ध हैं; लेकिन उनका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। तनाव से बचने के लिए योग का अभ्यास काफ़ी कारगर सिद्ध हुआ है। यौगिक क्रियाओं का मन मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। योग आसनों के अभ्यास से शरीर की बीमारी मिटती हैं और शरीर का एनर्जी लेवल बढ़ता है। योग केवल आसन, प्राणायाम करने का ही नाम नहीं है, बल्कि योग का नियमित और धीरे-धीरे अभ्यास करने पर मनुष्य का सम्पूर्ण विकास सम्भव है। समग्र विकास की बात की जाए, तो इसमें मनोदशा, शारीरिक, भावनात्मक स्तर भी शामिल है; यानी तन, मन का कायाकल्प और भावों की शुद्धि। व्यक्ति की जीवन शैली में आश्चर्यजनक परिवर्तन होता है, जब अष्टांग योग का अभ्यास किया जाता है। अष्टांग योग में यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि है। यानी व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक स्तर पर उन्नत बनाना योग का उद्देश्य है। आधुनिक आविष्कारों ने आदमी को सुविधाएँ तो ख़ूब प्रदान की हैं। लेकिन दूसरी तरफ़ कई सुविधाओं ने उसके शरीर और मन को ग्रहण लगा दिया। ग्लैमर वल्र्ड की चकाचौंध में वह प्राकृतिक जीवन शैली से बहुत दूर निकलता चला गया, जिसका परिणाम है- शारीरिक और मानसिक बीमारियाँ।

ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं, जिनमें कई बड़ी हस्तियों ने योग का अभ्यास करके आत्मिक शान्ति और सफलता को प्राप्त किया। एक बार भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से किसी ने प्रश्न किया कि राजनीति जैसे क्षेत्र में आप किस प्रकार से शान्त रह पाते हैं? उनका उत्तर था कि जब भी कोई मुश्किल समय होता है, वे योग का अभ्यास करते हैं; ध्यान लगाते हैं। ऐसे ही प्रसिद्ध वायलिन वादक यहूदी मैनूहीन का प्रसंग आता है कि वह वायलिन बजाने से पहले निद्रा और योग अभ्यास को तरजीह देते थे। योग शास्त्र में महर्षि पतंजलि ने योग के समस्त पहलुओं को समझाते हुए एक सशक्त सूत्र दिया- ‘योगश्चित्तवृत्तिनिरोध:’। अर्थात् चित्तवृत्ति का निरोध योग है। सरल भाषा में कहें, तो मन में उठने वाले विचारों की लहरों पर नियंत्रण करना योग है। श्रीकृष्ण ने योग की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है, जबकि महात्मा बुद्ध ने योग का अभ्यास करते हुए ही निर्वाण प्राप्त किया था। योग जीवन जीने का ऐसा ढंग है, जिसमें व्यक्ति अपनी समस्त इंद्रियों और मन पर नियंत्रण करता हुआ समतापूर्वक जीवन जीता है। श्रीमद्भगवद्गीता में बताया गया है कि योग व्यक्ति का दु:ख से सम्पर्क तोड़ता है। श्रीकृष्ण ने समता पर अत्यधिक ज़ार दिया है; जैसे कि महात्मा बुद्ध ने। श्रीकृष्ण कहते हैं कि योग न उस व्यक्ति के लिए है, जो अधिक खाता है और न ही उसके लिए जो अधिक निराहार रहता है। योग ऐसे व्यक्ति के लिए भी नहीं है, जो अधिक सोता है और न ही उसके लिए, जो अधिक जागता रहता है। यह उस व्यक्ति के लिए है, जो समतापूर्वक जीवन जीता है। सबके साथ सन्तुलन बनाकर जो योग का अभ्यास करता है, वही सच्चा योगी है।

योग से व्यक्तित्व का विकास
व्यक्तित्व की चार प्रक्रियाएँ मानी गयी हैं। पहला, हम जो भी महसूस करते हैं, उसी प्रकार सोचना शुरू कर देते हैं। दूसरा, हम जो सोचते हैं, उसी प्रकार योजना बनाते हैं और वही बोलते हैं। तीसरा, हम जो भी योजना बनाते हैं और बोलते हैं, उसी प्रकार के कार्य को अंजाम देते हैं। चौथा, हम जो भी कार्य करते हैं, उसी तरह से ढलना शुरू हो जाते हैं। आधुनिक युग में आदमी के लिए योग समय की बड़ी माँग है। योगाभ्यास के द्वारा व्यक्तित्व का चौतरफ़ा विकास होता है, शारीरिक स्तर पर मांसपेशियों को आराम मिलता है। प्राणिक स्तर पर साँस की गति सन्तुलित होती है। मानसिक स्तर पर आत्मिक शान्ति मिलती है और रचनात्मकता में वृद्धि होती है। इच्छा शक्ति बढ़ती है। बौद्धिक स्तर पर बुद्धि तेज़ा होती है, जबकि भावनात्मक स्तर पर ज़िन्दगी में ख़ुशी आती है और दिव्यता का अहसास होता है।

जहाँ लोकप्रिय है योग
गूगल ट्रेंड्स के अनुसार, ऐसे 20 देश हैं, जहाँ योग का ख़ूब अभ्यास किया जाता है। इनमें कनाडा, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, हॉन्ग कोंग, ऑस्ट्रिया, यूके, नॉर्वे, नीदरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, स्वीडन, डेनमार्क, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, कोस्टा रिका और चिल्ली आदि देश हैं।
मानवता के लिए योग कोरोना के प्रभाव को देखते हुए वर्ष 2022 के लिए ‘मानवता के लिए योग’ थीम रखा गया था। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। इस महासभा में 177 देश शामिल हुए। उन्होंने इस प्रस्ताव को अपनी सहमति दी और संयुक्त राष्ट्र महासभा की तरफ़ से 11 दिसंबर 2014 को इसे मंज़ूरी दे दी गयी। 21 जून, 2015 को सबसे पहली बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। उल्लेखनीय है कि पहली बार 192 देशों में योग का आयोजन किया गया था, जिसमें 47 मुस्लिम देश भी शामिल हुए।

अद्भुत मिताली

मिताली के संन्यास के बाद मैदान में नहीं दिख रहा महिला क्रिकेट का बड़ा किरदार

मिताली राज का पहला प्यार भरतनाट्यम था। लेकिन तक़दीर उसे क्रिकेट के मैदान में ले आयी। महज़ 16 साल की उम्र में जिस अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत हुई, वह 23 साल तक चला। अनगिनत रिकॉर्ड बनाकर और देश की महिला क्रिकेट की पहचान बनकर मिताली दोराई राज आज जिस मुकाम पर खड़ी हैं, वहाँ पहुँचने के लिए कड़ी मेहनत, अनुशासन और एकाग्रता की ज़रूरत होती है। इसलिए उनके रिटायरमेंट पर बीसीसीआई ने कहा कि मैदान पर आपके नेतृत्व ने राष्ट्रीय महिला टीम का गौरव बढ़ाया है।

मिताली, जिनकी बायोपिक भी बन रही है; की करियर गाथा आने वाली कई पीढिय़ों को बल्ला थामने के लिए प्रेरित करती रहेगी। उनके पिता सेना में थे और अनुशासन का माहौल उन्हें घुट्टी में ही मिल गया था। भरतनाट्यम भले नृत्य है, क्रिकेट में भी उसी एकाग्रता की ज़रूरत रहती है, जो भरतनाट्यम में होती है। मिताली ने क्रिकेट को भरतनाट्यम जैसी कला की ही तरह जिया। पहले ही एकदिवसीय मैच में शतक और टेस्ट मैच में एक दोहरा शतक इस बात के गवाह हैं कि मिताली किस दर्जे की खिलाड़ी रहीं।

एक कप्तान के रूप में तो उनका रिकॉर्ड पुरुष क्रिकेट से भी इस मायने में बेहतर है कि वह दो ऐसे महिला विश्व कप में कप्तान रहीं, जिसमें भारत फाइनल में पहुँचा। भारत में मिताली दर्ज़नों युवा खिलाडिय़ों के लिए प्रेरणा रही हैं। उन्हें ऐसे ही महिला क्रिकेट का तेंदुलकर नहीं कहा जाता। जब तक वो मैदान में रहीं, दुनिया भर की गेंदबाज़ उनसे ख़ौफ़ खाती रहीं। ज़्यादातर ने माना कि बेहतरीन फुटवर्क वाली मिताली की विकेट लेना मुश्किल काम होता है। एक दिवसीय क्रिकेट में सात शतक इस बात के गवाह हैं कि मिताली कितनी एकाग्रता के साथ मैदान पर उतरती थीं। महिला क्रिकेट के अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड इस बात के गवाह हैं, क्योंकि मिताली दुनिया में (महिला क्रिकेट) सबसे ज़्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी भी हैं। यह सही है कि मिताली के ज़्यादातर रिकॉर्ड टी-20 और एक दिवसीय में हैं, टेस्ट मैच में दोहरा शतक बनाकर उन्होंने कहा कि अगर वे टेस्ट क्रिकेट पर भी पूरा फोकस करतीं, तो अनगिनत रिकॉर्ड उनके नाम होते।

‘मिताली कॉपीबुक स्ट्रोक प्ले की महान् खिलाड़ी रहीं। उनमें अद्भुत प्रतिभा है।’ यह उनके पहले कोच दिवंगत सम्पत कुमार ने भी कहा था। उनका सटीक फुटवर्क उनके कवर ड्राइव का आधार था और गेंद को उठाकर मारने की उनकी कला परिस्थितियों के मुताबिक, अपनी क्रिकेट को ढालने की उनकी क्षमता को दर्शाती थी। यह तकनीक ही थी, जिसने मिताली को खेल के तीनों प्रारूपों में शीर्ष क्रम पर बल्लेबाज़ी करने हौसला दिया। अपने 23 साल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर में मिताली ने दो पीढिय़ों को अपने खेल से मंत्रमुग्ध किया।

दायें हाथ की बैटर और लेग ब्रेक गेंदबाज़ मिताली महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी हैं। उन्हें अब तक की सबसे महान् महिला क्रिकेटरों में एक गिना जाता है।
मितालीका जन्म 3 दिसंबर,1982 को राजस्थान के जोधपुर में एक तमिल परिवार में हुआ। उनके पिता दोराई राज भारतीय वायु सेना में एयरमैन (वारंट ऑफिसर) थे, और माता लीला गृहिणी। 10 साल की उम्र में ही बल्ला थामने वाली मिताली ने हैदराबाद के कीज हाई स्कूल फॉर गल्र्स में पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा (इंटरमीडिएट) सिकंदराबाद के कस्तूरबा गाँधी जूनियर कॉलेज फॉर विमेन से की। बड़े भाई के साथ क्रिकेट कोचिंग लेने वाले मिताली ने घरेलू क्रिकेट की शुरुआत रेलवे के लिए खेलते हुए की, जहाँ उन्हें सीनियर्स पूर्णिमा राव, अंजुम चोपड़ा और अंजू जैन से बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला।

मिताली 14 साल (1997) की छोटी उम्र में ही भारतीय टीम में चुन ली जातीं; लेकिन विश्व कप के लिए चुनी टीम में वे अन्तिम 14 में जगह बनाने से चूक गयीं। उन्हें सन् 1999 में आयरलैंड के ख़िलाफ़ मिल्टन कीन्स में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में भारत के लिए खेलने का अवसर मिला और पहले ही मैच में मिताली ने 114 रन ठोक दिये। उन्होंने 2001-02 के सत्र में दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ लखनऊ में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करते हुए 17 अगस्त, 2002 को, 19 साल की उम्र में, तीसरे टेस्ट में, करेन रोल्टन के 209 के सर्वोच्च व्यक्तिगत टेस्ट स्कोर का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 214 रन बनाये। उनका यह रिकॉर्ड पाकिस्तान की किरण बलूच ने 242 रन बना कर तोड़ा।

मिताली को रिकॉर्ड मशीन कहा जाए, तो $गलत नहीं होगा। वो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाली खिलाड़ी हैं। वो पहली भारतीय और पाँचवीं महिला क्रिकेटर हैं, जिन्होंने विश्व कप मैचों में 1000 रन बनाये हैं। महिला वनडे क्रिकेट इतिहास में सर्वाधिक रन बनाने वाली खिलाड़ी भी वही हैं। उनके नाम 7805 रन दर्ज हैं। उनके नाम महिला वनडे क्रिकेट में दुनिया में सर्वाधिक 71 अर्धशतक बनाने का दुर्लभ रिकॉर्ड भी दर्ज है। यही नहीं, वो एकमात्र ऐसी महिला क्रिकेटर हैं, जिन्होंने तीन देशों के ख़िलाफ़ सर्वाधिक वनडे रन बनाने का रिकॉर्ड बनाया है- इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 2005, श्रीलंका के ख़िलाफ़ 1103 और वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ 701 रन। मिताली के नाम सर्वाधिक महिला वनडे मैच (232) वनडे खेलने के अलावा वनडे कप्तान के रूप में भी सर्वाधिक 155 वनडे मैच खेलने का रिकॉर्ड है। वो एकमात्र ऐसी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने दो विश्व कप फाइनल (2005 और 2017) में भारत की कप्तानी की।

मिताली के नाम 2004-2013 के बीच बिना किसी नागे के लगातार 109 मैच खेलने का दुर्लभ रिकॉर्ड है। महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक 17 अर्धशतक जडऩे और भारतीय क्रिकेट (पुरुष या महिला) में 2000 रन बनाने वाली वो पहली खिलाड़ी हैं। उनके नाम महिला विश्व टेस्ट क्रिकेट में दूसरा और भारत के लिए इस प्रारूप में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर (214 रन, 2002 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टॉन्टन में) बनाने के अलावा झूलन गोस्वामी के साथ इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट खेलते हुए 7वें विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी (157 रन) का रिकॉर्ड भी है।

मिताली राज इन दिनों अपनी बायोपिक ‘शाबाश मिट्ठू’ को लेकर चर्चा में हैं, जो 15 जुलाई को रिलीज होनी है। इसका ट्रेलर पहले ही रिलीज हो चुका है। फ़िल्म में मिताली का किरदार अभिनेत्री तापसी पन्नू निभा रही हैं। इसके ज़रिये मिताली की ज़िन्दगी को बड़े परदे पर लोग देख सकेंगे। हमारे सामाजिक ढाँचे में अन्य महिला खिलाडिय़ों की तरह मिताली को भी घर से लेकर क्रिकेट मैदान तक विरोध और अड़चनों से दो-चार होना पड़ा। उनके माता-पिता ने हमेशा उनका साथ दिया। फ़िल्म के ट्रेलर में इसकी एक झलक दिखती भी है, जब उनका किरदार निभा रही तापसी पन्नू कहती हैं- ‘आठ साल की थी, जब किसी ने यह सपना दिखाया था कि मैन इन ब्लू की तरह हमारी भी एक टीम होगी- वुमन इन ब्लू।’

शुरुआत में मिताली के दादा-दादी उनके क्रिकेट खेलने से ख़फ़ा थे; क्योंकि एक लड़की के खेल में जाने के वे पक्ष में नहीं थे। मिताली का जब भारतीय टीम के लिए चयन हुआ, उन्हें बुनियादी सहूलियतें तक उपलब्ध नहीं थीं। लिहाज़ा वे पुरुष क्रिकेटरों के साथ नेट अभ्यास करती थीं।
मिताली राज ने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट- टेस्ट, वनडे टी20 में कुल मिलाकर 10,868 रन बनाये, जिनमें आठ शतक शामिल हैं। यह दुनिया में किसी भी महिला खिलाड़ी के बनाये सबसे ज़्यादा रन हैं। उन्होंने जब 8 जून को इंटरनेशनल क्रिकेट के सभी प्रारूपों को अलविदा कहा, तो विश्व महिला क्रिकेट के सबसे बड़े किरदारों में से एक की मैदान से विदाई हो गयी। मिताली, आपको मैदान में हमेशा मिस किया जाएगा।

मिताली राज के रिकॉर्ड
 टेस्ट : 12 मैच, 19 पारी, 699 रन, एक शतक, औसत 43.68, उच्चतम 214, चार अर्धशतक, 12 कैच।
 वनडे : 232 मैच, 211 पारी, 7805 रन, उच्चतम 125, औसत 50.68, शतक 7, अर्धशतक 64, कैच 64 और गेंदबाज़ी में 8 विकेट।
 टी20 : 89 मैच, 84 पारी, 2364 रन, उच्चतम 97, औसत 37.52, अर्धशतक 17 और 19 कैच।

आँख के अन्धे

सच की अनदेखी करके उसे झूठ में उसी तरह नहीं बदला जा सकता, जिस प्रकार से आँखें बन्द करके सूर्य के प्रकाश को समाप्त नहीं किया जा सकता। इसी प्रकार लाख दलीलों और कोशिशों के बाद भी झूठ को सच में उसी तरह नहीं बदला जा सकता, जिस प्रकार रात में करोड़ों दीप जलाने पर भी रात को दिन में नहीं बदला जा सकता। विद्वत्तजन मानते हैं कि न तो सब कुछ झूठ है और न ही सब कुछ सच है। परन्तु सच क्या है? यह सबकी समझ में कभी नहीं आया, और न कभी आयेगा। जो जितना जानता है, उसे उतना ही सच लगता है। धर्म-अधर्म को भी इसी तरह समझा और परखा जा सकता है।

प्रश्न यह है कि धर्म क्या है? इसकी परिभाषा क्या है? धर्म सम्मत् व्यवहार ही धर्म है। धर्म सम्मत् व्यवहार क्या है? जो दूसरों का मन, कर्म, वचन से अहित न करे, वही धर्म सम्मत् है। इसीलिए मानवता को सर्वोपरि धर्म कहा गया है। परन्तु अब लोग ढोंग अर्थात् ड्रामेबाज़ी को धर्म समझते हैं, जबकि ढोंग धर्म नहीं है। वेशभूषा भी धार्मिकता नहीं है। न ही ईश्वर की उपासना मात्र धर्म है। ईश्वर की उपासना तो भक्ति मार्ग है, जो व्यक्ति को विनम्र बनाती है और धर्म के मार्ग पर लाने के लिए इंद्रियों की शुद्धि का साधन भर है। फिर लोगों में धर्म को लेकर भ्रम क्यों है? यह भ्रम लोगों के मन तथा बुद्धि पर पड़े अर्थ, काम, मोह, लालच, स्वार्थ जैसे कई परदों के कारण है; जिसका कारण संसार की माया है, जो कि सिवाय क्षणिक मिथ्या के और कुछ नहीं है। इसीलिए धर्मों में संसार को नश्वर और मिथ्या कहा गया है।

विडम्बना यह है कि इस दुनिया के अधिकतर लोग धर्म के मामले में गुमराह हैं। वे अन्धों की तरह भटक रहे हैं। क्योंकि धर्म आंशिक रूप से ही उनकी समझ में आया है। इसीलिए वे अंधविश्वासी हो गये हैं। ऐसे ही लोगों के लिए कहा गया है- ‘आँख के अन्धे, नाम के नैनसुख’। क्योंकि लोग धर्म को जाने बग़ैर ही धर्म का झण्डा उठाये घूम रहे हैं। यही वजह है कि लोग विनम्र होने के बजाय कट्टर और अराजक होते जा रहे हैं। उन्हें उनके कथित धर्म की किताबों या उनकी पसन्द के ईश्वर, जो केवल नाम मात्र है; के बारे में टिप्पणी बुरी लगती है और वे हिंसा पर उतर आते हैं। परन्तु वे उसी ईश्वर को दूसरी भाषा में पुकारे जाने पर स्वयं ख़ूब गालियाँ देते हैं।

कह सकते हैं कि लोगों को वास्तविक ईश्वर और धर्म की समझ नहीं है। क्योंकि वे धर्म और ईश्वर को किताबों में ढूँढते-समझते हैं। समझना यह है कि धर्म किताबों में लिखे हुए नियमों का पालन करना ही नहीं है, बल्कि ईमानदारी, मेहनत, कर्तव्य परायणता, न्यायोचित व्यवहार, परोपकार, परसेवा, परहित और पररक्षा भी धर्म के आवश्यक नियम हैं। परन्तु अगर कोई दुष्ट हो, तो उसे दण्ड देना भी धर्म सम्मत् होता है। इसीलिए कहा गया है कि धर्म समय, परिस्थिति तथा आवश्यकता के आधार पर तय होता है। अर्थात् धर्म काल तथा परिस्थिति के आधार पर बदलता रहता है। आज वेदों के सिवाय जितने भी धर्म ग्रन्थ हैं, वे पूर्वकाल के समय, परिस्थिति तथा आवश्यकताओं के आधार पर तय किये गये थे। क्योंकि वेद भक्ति, आध्यात्म, सत्य, धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, परहित, कर्तव्य, ज्ञान, विज्ञान, सामाजिक व्यवस्था, स्वास्थ्य, न्याय, अधिकार, सम्मान आदि का मिश्रण हैं। परन्तु अन्य धर्म ग्रन्थों में भक्ति मार्ग की अधिकता है, जिसके लिए लिप्सा, भोग, लालच, मोह तथा स्वार्थ का त्याग करना पड़ेगा। कई धर्म ग्रन्थों में तो ईश्वर की चाटुकारिता की पराकाष्ठा को छू लिया गया है। उसकी स्तुति, प्रार्थना या इबादत के नाम पर उसके गुणगान के सिवाय कुछ नहीं है।

प्रश्न यह है कि अगर ईश्वर हमारा परमेश्वर है; हमारा पालनहार है; हमारा पिता है, और उसका हमारा जन्म-जन्मांतर का साथ है; तो हमें उसकी चिरोरी करने की क्या आवश्यकता है? हमें तो स्वयं को उसके प्रति समर्पित होने भर की आवश्यकता है। अपने आपको उसके चरणों में रख देने भर की आवश्यकता है। परन्तु हम उससे गिड़गिड़ाते हैं कि वह हमारे सब काम कर दे। उसके आगे गिड़गिड़ाते हैं कि वह हमें दुनिया का सबसे बड़ा, सबसे सामथ्र्यवान और सबसे धनवान इंसान बना दे। वह भी इसलिए, क्योंकि हमने उसे याद किया। हमने उसकी उपासना की। हमने उसे वो चीज़ें समर्पित कीं, जो उसी ने हमें दी हैं। अगर कुछ मिल जाये, तो तुर्रा यह कि यह मैंने किया है। यह कैसी मूर्खता है? यह मूर्खता आयी कहाँ से? क्योंकि लोग भटक गये हैं। धर्म से भी भटक गये हैं और कर्म से भी भटक गये हैं। दरअसल अब लोग आध्यात्म से हटकर आधुनिकतावादी हो गये हैं और ढोंग करने में लगे हुए हैं। यही वजह है कि आधे-अधूरे ज्ञान वाले अब धर्म की अगुवाई कर रहे हैं। और जो धर्म को समझते हैं, वे या तो चुप हैं, या संसार से विरक्त हैं।

मणिपुर भूस्खलन: मरने वालों की संख्या बढ़कर हुई 24, 38 अभी भी लापता

मणिपुर के नोनी जिले में एक रेलवे निर्माण स्थल पर हुए भूस्खलन के बाद मलबे में मरने वालों की संख्या शनिवार को 24 हो गयी है। जबकि 38 लोग अभी भी लापता है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार राहत और बचाव कार्य के तहत टुपुल घटनास्थल पर बचावकर्मियों और दलों को तैनात किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि मरने वालों में सेना के जवान व आम नागारिक शामिल है। साथ ही 18 लोगों को बचा लिया गया है। लापता लोगों में 12 प्रादेशिक सेना के जवान व 26 आम नागरिकों की तलाश अभी भी जारी है। इसमें सेना, असम राइफल्स, प्रादेशिक सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनआरडीएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) द्वारा खोज अभियान जारी है।

आपको बता दें, राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को पांच-पांच लाख रूपये साथ ही घायलों को 50-50 हजार रूपये की मुआवजा राशि देने की घोषणा की है।

वहीं दूसरी तरफ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिसवा सरमा ने कहा था कि इस भूस्खलन में उनके राज्य के एक व्यक्ति की मौत हुई है साथ ही 16 अन्य लापता है।

महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पलटा पिछली सरकार का एक बड़ा फैसला

महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रिमंडल की पहली बैठक में पिछली सरकार के कई फैसले को पलट दिया है जिनमें से एक पिछली सरकार का आरे में मेट्रो तीन कार शेड के निर्माण पर रोक लगाने और 102 एकड़ के कांजुरमार्ग प्लॉट में स्थानांतरित करने के फैसले को बदल दिया है।

बता दे नई सरकार के इस फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे नाराज दिखे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से यह भी कहा कि, “मुंबर्इ को इस प्रकार धोखा न दे, जैसे कि उसने उन्हें धोखा दिया था। वह महाराष्ट्र की नर्इ सरकार द्वारा मेट्रो कार शेड को मुंबई के कांजुरमार्ग से आरे कॉलोनी में ले जाए जाने संबंधी कदम से दुखी है।“

वहीं महाराष्ट्र की कांग्रेस इकार्इ ने शुक्रवार को कहा कि मुंबई के आरे वनक्षेत्र में मेट्रो कारशेड निर्माण संबंधी एकनाथ शिंदे सरकार का फैसला शहर की जनता की सेहत से खिलवाड़ करने के समान है।

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि, “हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, हम मुंबई मेट्रो परियोजना के खिलाफ नहीं है। मुंबई वासियों को आवाजाही में सुविधा प्रदान करने के मद्देनजर सबसे पहले कांग्रेस नीत सरकार कने ही मेट्रो परियोजना के निर्माण का फैसला लिया था। कांग्रेस विकास और पर्यावरण के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के पक्ष में है।“

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद दिल्ली पुलिस ने कहा नूपुर शर्मा कर रही है सहयोग- सूत्र

भाजपा से निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया था। साथ ही इस मामले में नूपुर और दिल्ली पुलिस को फटकार भी लगार्इ थी। कोर्ट ने सुनवार्इ के दौरान कहा कि, नूपुर शर्मा की टिप्पणी की वजह से देश में हर जगह आग लगने जैसे हालात है। साथ ही कोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे।

सूत्रों के अनुसार पुलिस इस मामले में नूपुर शर्मा से पूछताछ कर रही है और वह पुलिस को सहयोग भी कर रही है। पुलिस उपायुक्त के पी एस मल्होत्रा ने कहा कि, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 ए के तहत शर्मा को 18 जून को कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने को लेकर नोटिस जारी किया गया था साथ ही कानून के मुताबिक उनका बयान दर्ज किया गया, वह जांच में शामिल हुर्इं और उसी दिन उनका बयान दर्ज किया गया था।

यह मामला टेलीविजन पर प्रसारित एक बहस के दौरान पैगंबर मोहम्मद के बारे में नूपुर शर्मा ने टिप्पणी की थी जिसका विरोध में देशभर में प्रदर्शन हुए थे। हालांकि बाद में भाजपा ने शर्मा को पार्टी से निलंबित भी कर दिया था।

न्यायालय ने टिप्पणी की, “नूपुर शर्मा का अपनी जुबान पर काबू नहीं है और उन्होंने टेलीविजन चैनल पर गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए हैं तथा पूरे देश को आग में झोंक दिया है। फिर भी वह 10 साल से वकील होने का दावा करती हैं। उन्हें अपनी टिप्पणियों के लिए तुरंत पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए थी।“

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पर किया मानहानि का मुकदमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 30 जून को प्रदेश के कामरूप ग्रामीण जिला के सीजेएम कोर्ट में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर मानहानि का मुकदमा दर्ज किया है।

गौरतलब है कि मामले में अदालत ने हिमंत बिस्वा सरमा की प्रारंभिक गवाही के लिए 22 जुलाई की तारीख तय की है। इससे पहले बिसवा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा ने भी मनीष सिसोदिया के खिलाफ दीवानी मानहानि का मुकदमा दर्ज किया था।

आपको बता दें, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 4 जून को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए थे और एक वेबसाइट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां के स्वामित्व वाली जेसीबी कंपनियों पर कोविड के दौरान पीपीई किट की निविदा प्रक्रिया में हेरफेर किया था।

साथ ही आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा था कि क्या भाजपा इन पर कार्रवाई करेंगी। इस बात से नाराज मुख्यमंत्री ने मानहानि का केस मनीष सिसोदिया पर दायर किया है।

देश में आज से सिंगल-यूज प्लास्टिक पर बैन, नियमों के उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने आज से देश में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर बैन लगा दिया है। इसके तहत रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल की जाने वाली प्लास्टिक से बनी कई चीजें बंद हो जांएगी। यदि कोई सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करता है तो उसके खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (ईपीए) के सेक्शन 15 के तहत एक्शन होगा।

सिंगल प्लास्टिक का मतलब है कि ऐसी चीजें जिन्हें हम केवल एक ही इस्तेमाल में ला सकते है। जिन चीजों पर बैन लगा है उनमें प्लास्टिक कैरी बैग, पॉलीथीन, प्लास्टिक स्टिक वाले ईयर बड्स, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक स्टिक, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक, थर्माकोल (पॉलिस्ट्रीन), प्लास्टिक के कप, प्लास्टिक के गिलास।

साथ ही कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे, मिठाई के डिब्बों को रैप या पैक करने वाली फिल्म, इन्विटेशन कार्ड, सिगरेट के पैकेट, 100 माइक्रोन से कम के प्लास्टिक बैनर, स्टिरर यानी चीनी इत्यादि मिलाने वाली चीज।

आपको बता दें, मंत्रालय ने कहा है कि, यदि कोई सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करता पाया गया तो उसको दंड मिलेगा और इसमें जेल व जुर्माना दोनों ही शामिल है।

गौरतलब है कि भारत में हर दिन 26 हजार टन और प्रत्येक वर्ष 2.4 लाख टन सिंगल यूज प्लास्टिक कचरा निकलता है। यह जानकारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक सर्वे की रिपोर्ट की है।

शिंदे सोमवार को करेंगे बहुमत साबित, याचिकाओं पर 11 को होगी सुनवाई

उद्धव ठाकरे की सरकार गिराकर भाजपा की मदद से मुख्यमंत्री बने एकनाथ शिंदे को तीन दिन बाद बहुमत साबित करना होगा। राज्यपाल ने नए सीएम को बहुमत साबित करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिव सेना की तरफ से विधानसभा में इस कार्यवाही में शामिल होने से बागी 39 विधायकों होने पर रोक लगाने के लिए शुक्रवार जो याचिका दायर की थी उसपर सर्वोच्च अदालत ने 11 जुलाई को ही सुनवाई करने की बात कही है जब विधायकों को नोटिस वाली शिव सेना की याचिका पर सुनवाई होनी है।

इस तरह अब रविवार और सोमवार को महाराष्ट्र विधानसभा का अधिवेशन होगा जिसमें नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अपना बहुमत साबित करेंगे। इससे पहले शनिवार को नए स्पीकर के लिए नामांकन होगा और अगले ही दिन अध्यक्ष पद का चुनाव होगा। इसके बाद फ्लोर टेस्ट सोमवार को होगा।

बता दें कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली नई सरकार की गठन के बाद महाविकास आधाड़ी ने शिवसेना के 39 बागी विधायकों पर रोक वाली सुप्रीम कोर्ट में जो नई याचिका दायर की है उसपर सर्वोच्च अदालत 11 जुलाई की तारीख तय की है। इस याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट सभी बागी विधायकों को विधानसभा आने से रोके। याचिका के मुताबिक विधायक जिनके खिलाफ अभी सुनवाई चल रही है या बाकी है, उनके विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने पर प्रतिबंध लगाया जाए।

उधर उद्धव खेमे का तर्क है कि एकनाथ की बगावत के बावजूद शिवसेना उद्धव ठाकरे की ही है। उन्हें 23 जून के संगठनात्मक चुनाव में शिवसेना का अध्यक्ष चुना गया था और 27 जून को चुनाव आयोग को इस बाबत बाकायदा सूचना दी गयी थी। उद्धव खेमे के लिए वकील कपिल सिबब्ल ने कहा कि अभी तक बागी गुट ने किसी तरह का कोई विलय नहीं किया है। ऐसे में मूल गुट का फैसला चुनाव आयोग ही कर सकता है। इस पर अदालत ने कहा कि मुख्य मामले में वह इस मुद्दे को विचार में रखेगी।

“नूपुर शर्मा की वजह से उदयपुर घटना हुई” – सुप्रीम कोर्ट

निलंबित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता नूपुर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट से फटकार लगी है। साथ ही उनकी सुरक्षा की अर्जी भी खारिज कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, आज देश में जो भी कुछ हो रहा है साथ ही उदयपुर घटना भी नूपुर शर्मा के बयान की वजह से हो रहा है। नूपुर को सुरक्षा की ज़रूरत नहीं वे खुद पूरे देश के लिए खतरा है। और उन्हें टीवी पर आकर पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को भी फटकार लगाते हुए कहा कि, जब एक से ज्यादा एफआईआर हो गई थी तो इसपर अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?