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रूस-यूक्रेन युद्ध से दुनिया के बाज़ार में खलबली, सेंसेक्स 1,700 पॉइंट्स टूटा

रूस के यूक्रेन हमले के बाद दुनिया में मची खलबली के बीच आर्थिक जगत में बड़ी  हलचल मच गयी है। हमले के बाद दुनिया के सभी शेयर बाजार गिरावट में हैं। शेयर बाजार में गुरुवार को पहले मिनट में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 1,700 पॉइंट्स टूटकर 55,563 पर पहुंच गया है। बैंकिंग शेयर्स की खराब हालत होने से निवेशकों को 7 लाख करोड़ रुपए का चूना लग गया है।

यूक्रेन पर हमले के बाद दुनिया के सभी शेयर बाजार गिरावट में हैं। आज सेंसेक्स 1,814 अंक नीचे 55,416 पर खुला था। पहले घंटे में इसने 55,984 का ऊपरी और 55,375 का निचला स्तर बनाया। इसके सभी 30 शेयर गिरावट में हैं। गिरने वाले प्रमुख स्टॉक में टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, एयरटेल, इंडसइंड बैंक, आईसीआईसीआई बैंक के शेयर्स 3-3 फीसदी से ज्यादा टूटे हैं।

उधर टेक महिंद्रा, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल टेक, एचडीएफसी, एसबीआई, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, इंफोसिस, एक्सिस बैंक, बजाज फाइनेंस, मारुति, डॉ. रेड्डी, हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईटीसी के स्टॉक 2 से 3 फीसदी तक टूटे हैं। पावरग्रिड, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एशियन पेंट्स, कोटक बैंक, टाइटन, नेस्ले, सनफार्मा और एनटीपीसी के शेयर एक-एक परसेंट तक गिरे हैं।

सेंसेक्स में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 248.18 लाख करोड़ रुपए है, जो कल 255 लाख करोड़ रुपए था। सेंसेक्स के 76 शेयर अपर सर्किट में और 578 लोअर सर्किट में हैं। सेंसेक्स में लिस्टेड कंपनियों में से 2,378 शेयर्स गिरावट में और 270 शेयर्स बढ़त में हैं जबकि 35 शेयर्स एक साल के ऊपरी स्तर और 171 निचले स्तर पर कारोबार कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में तेज हो रहे आरोप-प्रत्यारोप के हमले 

उत्तर प्रदेश विधानसभा के सात चरण में होने वाले चुनाव में चार चरण में मतदान हो चुका है। जैसे-जैसे चुनाव सिमट रहा है। वैसे-वैसे नेताओं की चुनावी सभाओं में तीरों के बाण तेजी से चल रहे है। आलम ये है कि अब नेता अपनी बात जनता के बीच रखने के लिये सारी मर्यादाओं को तार-तार कर रहे है। जनता तो जनता है जो मचा लेने से नहीं चूक रही है।
नेताओं के भाषणों का अपने तरीके से विश्लेषण कर नेताओं के कथनी-करनी को तौल रहे है। उत्तर प्रदेश की राजनीति का अपना मिजाज है। यहां के मतदाता बोलते कम है। उत्तर प्रदेश की राजनीति के जानकार संतोष बघेल का कहना है कि चुनाव क्या न करायें। क्योंकि चुनाव मेंं कब नेता किस के पक्ष में बोलने लगे तो कब किस के विरोध में बोलने लगे।
चुनाव मेंं किसी दावेदार नेता को टिकट न मिलने पर वह रातो-रात दूसरे दल में चला गया। ऐसे में चुनाव के हाल और परिणाम का जानना आसान नहीं होता है। प्रदेश, भूगोलिक और जनसंख्या के लिहाज से काफी बड़ा है। इसलिये ये कहना पाना आसान है कि सपा और भाजपा के बीच ही टक्कर है। जबकि कुछ विधानसभा सीटों पर  बसपा का ग्राफ बढ़ा है। तो कांग्रेस भी जी तोड़ मेहनत करके चुनाव लड़ रही है। इससे तो ये लगता है कि कांग्रेस भी पिछलें चुनाव की तुलना में बढ़ा कर सकती है।
कुल मिलाकर चुनाव परिणाम जरूर चौंकाने वाले साबित होगे। लोगों का कहना है कि भाजपा को दोबारा सत्ता पाने के लिये अभी बचें तीनों चरण के मतदान के लिये कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। क्योंकि सपा के पक्ष में जो भी माहौल बन रहा है।उससे सपा को जरूर फायदा दिख रहा है।सपा के पक्ष में एक शत-प्रतिशत एम-बाई फैक्टर एक साथ रहा तो सपा को काफी सियासी लाभ मिल सकता है।

पुतिन का यूक्रेन पर हमले का ऐलान, कहा हथियार डाल दे वहां की सेना

आखिर गुरुवार सुबह रूस ने यूक्रेन पर हमला करने का ऐलान कर दिया। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यह आदेश जारी करते हुए यूक्रेन से कहा है कि उसकी सेना हथियार डाल दे। हालांकि, पुतिन ने कहा कि ‘उनका यूक्रेन पर कब्ज़ा करने का इरादा नहीं है’। रूस ने कुछ देर पहले दावा किया कि उसकी सेना ने यूक्रेन की राजधानी कीव के हवाई अड्डे पर कब्ज़ा कर लिया है।

अभी भी हजारों भारतीय छात्र  और आज कीव जाने वाली एयर इण्डिया की फ्लाइट रद्द कर दी गयी है। यूक्रेन में धामकों की आवाजें भी सुनी गयी हैं। बहुत से जानकार यह कहते रहे हैं कि रूस- यूक्रेन तनाव यदि युद्ध में बदलता है तो इससे विश्व युद्ध का रास्ता भी खुल सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रपति पुतिन ने एक टीवी ब्रॉडकास्ट – ”मैंने मिलिट्री ऑपरेशन  का निर्णय किया है।” उधर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने अपील की है कि रूस हमला रोक ले। अभी तक की रिपोर्ट्स हैं कि रूस की सेना क्रीमिया के जरिये यूक्रेन में घुस रही है। क्रीमिया को रूस ने 2014 के यूक्रेन पर हमले में उससे अलग कर दिया था। एक दिन पहले ही पुतिन ने दुनिया से क्रीमिया को रूस के हिस्से के रूप में मान्यता देने को कहा था।

राष्ट्रपति पुतिन ने हमले का ऐलान करते हुए यूक्रेन सेना से हथियार डालने को कहा है। पुतिन ने कहा कि उनका यूक्रेन पर कब्जा करने का विचार नहीं है। यूक्रेन को रूस सेना ने पहले ही चारों तरफ से घेर लिया है। इसमें बेलारूस भी उसका साथ दे रहा है। याद रहे चार दिन पहले राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के अलगाव ग्रस्त प्रांतों दोनेत्सक और लुहांस्क को स्वतंत्र घोषित करते हुए उन्हें मानयता दे दी थी।

बुधवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्‍की ने आशंका जताई थी कि ‘रूस आने वाले दिनों में यूरोप में एक बड़ा युद्ध शुरू कर सकता है। युद्ध की आंशका के मद्देनजर अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कुछ दिन पहले अपने रूसी समकक्ष के साथ बैठक को रद्द कर दिया था।

अमेरिका कह रहा है कि ‘रूस के अपराधों के लिए उसे सबक सिखाने के लिए सभी को पूरी ताकत से एक हो जाना  चाहिए।’ राष्ट्रपति जो बाइडेन यूक्रेन को लेकर रूस के खिलाफ कई प्रतिबंधों की घोषणा कर चुके हैं। इनमें रूस के दो बड़े वित्तीय संस्थानों पर प्रतिबंध शामिल है।

दाऊद इब्राहिम मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मालिक गिरफ्तार

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी के नेता नवाब मलिक को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया।

ईडी ने आज नवाब मलिक से इस मामले में पूछताछ की। बाद में नवाब मलिक को गिरफ्तार कर लिया गया। जानकारी के अनुसार ईडी अधिकारियों की एक टीम उनके घर पहुंची। बाद में वह उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई।

इस बीच मालिक की गिरफ्तारी के बाद उनके दफ्तर की तरफ से डाले गए एक ट्वीट में कहा गया है – ‘न डरेंगे न झुकेंगे… 2024 के लिए तैयार रहें।’ फिलहाल मालिक को ईडी दफ्तर से मेडिकल कराने ले जाया जा रहा है। याद रहे पिछले हफ्ते ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले के संबंध में कई स्थानों पर तलाशी ली थी। ईडी ने हाल ही में एनआईए के दर्ज एक मामले के आधार पर यह कदम उठाया।

हल में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दाऊद की दिवंगत बहन हसीना पारकर के आवास की भी तलाशी ली थी। एनआईए ने दाऊद के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है जबकि ईडी ने प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट दर्ज की थी। दाऊद के भाई इकबाल कासकर भी ईडी ने हिरासत में लिया है।

पुतिन की शर्तें: यूक्रेन हथियार मुक्त हो, क्रीमिया रूस का हिस्सा माना जाए

यूक्रेन के संकट के बीच व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को यूक्रेन से साफ़ तौर पर कह दिया कि उसके पास बचने का एक ही रास्ता है कि वह नाटो का सदस्य बनने की सोच छोड़ दे और खुद को पूरी तरह हथियार मुक्त कर ले। इसके अलावा पुतिन ने वर्तमान तनाव कम करने के लिए दुनिया से कहा है कि वह क्रीमिया को रूस के हिस्से के रूप में मान्यता दे।

राष्ट्रपति पुतिन ने मीडिया के लोगों से बातचीत में कहा कि अपने हथियारों के कारण यूक्रेन रूस के लिए खतरा है। उसका हथियार जमा करना रूस विरोधी है और साथ ही यूक्रेन हमेशा परमाणु शक्ति बनने का सपना देखता रहा है। पुतिन ने कहा – ‘अगर ऐसा होता है तो रूस पर परमाणु हमले का खतरा बना रहेगा।’

इस बातचीत में पुतिन ने क्रीमिया को रूस के हिस्से के रूप में मान्यता देने की भी मांग की। पुतिन ने मिंस्क समझौते पर भी कहा कि ‘अब इस समझौते का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि इसका उल्लंघन यूक्रेन काफी पहले ही कर चुका है।’ पुतिन ने कहा कि यूक्रेन में अब हम कितनी सेना भेजेंगे यह इस बात पर निर्भर होगा कि यूक्रेन के जमीनी हालात क्या हैं, हम वहां नरसंहार नहीं होने दे सकते।

इस बीच रूस की संसद के उच्च सदन ने सेना को देश के बाहर भेजने (ऑपरेशन के लिए) मंजूरी दे दी जिससे रूस के यूक्रेन पर हमले का खतरा अभी भी बना हुआ है। संसद के ऊपरी सदन के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को देश के बाहर सैन्य बल प्रयोग की अनुमति और संसद की मंजूरी के बाद रूस के लिये यूक्रेन पर व्यापक आक्रमण का रास्ता साफ हो गया है। पुतिन ने इस बारे में संसद के ऊपरी सदन को एक पत्र लिखा था।

याद रहे एक दिन पहले ही पुतिन ने यूक्रेन के विद्रोहियों के प्रभाव वाले दो प्रांतों को  मान्यता दे दी थी जिसके बाद उसकी सेना वहां प्रवेश कर चुकी है। पश्चिमी देशों के नेताओं ने, हालांकि, रूस की इस कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है।

लखीमपुर चर्चित सीट पर मतदान आज

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के चौथे चरण में 23 फरवरी को (आज) 9 जिलों की 59 सीटों पर  मतदान हो रहा है। जिसमें सबसे ज्यादा चर्चित सीट लखीमपुर खीरी है। बताते चलें लखीमपुर खीरी केन्द्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने अपनी कार से किसानों को रौंदा था जिससे 8 लोगों की मौत हो गयी थी। फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है।
लखीमपुर खीरी के लोगों ने तहलका संवाददाता को बताया कि पिछले साल 3 अक्टूबर को कथित तौर पर आशीष मिश्रा की कार से  चार किसानों सहित 8लोगों की मौत हो गयी थी जिसको लेकर जमकर सियासत हुई थी। लखीमपुर के निवासी किशोर कुमार का कहना है कि यहां पर इस बार सत्ता बनाम विपक्ष की राजनीतिक लड़ाई कम चल रही है। जबकि किसान बनाम मिश्रा परिवार को लेकर सियासत हो रही है। क्योंकि किसान आंदोलन के दौरान जो भी घटना घटी उससे मानवता शर्मसार हुई है।
एक भय का माहौल बना था। कि आंदोलन तो लोकतंत्र में अधिकारों व हक के लिये किया जाता है। लेकिन यहां पर किसानों को रौंदा जा रहा है जिससे लोगों के अंदर आंदोलन को लेकर डरा बना था।
किसानों को लुभाने के लिये सपा, बसपा और कांग्रेस हर मोर्चे पर भाजपा के नेता अजय मिश्रा और उनके परिजनों पर दमनकारी नीतियों का आरोप लगा रही है। जानकारों का कहना है कि अगर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होती है। तो लखीमपुर का मामला और भी सियासी उग्र रूप अपना सकता है।
इस लिहाज से लखीमपुर का चुनाव और यहां की सियासत पर पूरे प्रदेश के नेताओं की नजर है। यहां के एकॉ-एक वोट पर राजनीतिक दलों की नजर है। किसानों के बीच उपजे क्रोध को लेकर भाजपा किसानों के बीच सेंध लगा रही है। साथ ही किसानों का मानमनोब्बल करती नजर आयी है।
प्रदेश की राजनीति के जानकार संतोष सिंह का कहना है कि पूरे प्रदेश में चुनाव में ये अंदाजा लगाना मुश्किल है कि कौन सी राजनीति पार्टी चुनाव में जीत रही है। क्योंकि इसबार को मतदाता चुप है। क्योंकि अब जनता जान गई है। कि नेता वादे करते है। लेकिन काम अपने हिसाब से करते है। सो जनता को कोई खास उम्मीद नहीं है। इसलिये जनता खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

अस्पतालों में फिर बढ़ने लगी भीड़

केन्द्र और दिल्ली सरकार के तहत आने वाले अस्पतालों में पिछले सप्ताह से शुरू हुई ओपीडी  के चलते फिर अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ने लगी है। बताते चलें जनवरी माह में कोरोना के कहर के चलते सरकारी अस्पतालों की ओपीड़ी बंद कर दी गयी थी। जैसे ही ओपीडी चालू हुई देश के कौने-कौने से मरीज इलाज कराने के लिये एम्स, सफदरजंग, लोकनायक अस्पताल और जीबी पंत सहित अन्य अस्पतालों में आने लगे है।

लेकिन अब उनकाे ओपीडी कार्ड बनवाना मुश्किल हो रहा है। वहीं आॉपरेशन सहित अन्य जांचों के लिये काफी दिनों के बाद की तारीख मिलने लगी है। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के चलते स्वास्थ्य सेवायें काफी प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि गैर कोरोना रोगियों काे इलाज कराना मुश्किल साबित हो रहा है।

लोकनायक अस्पताल के डॉक्टरों ने तहलका संवाददाता को बताया कि अगर कोरोना पूरी तरह से चला जाता है। तो निश्चित तौर पर मरीजों को इलाज आसानी से मिल सकेंगा। उनका कहना है कि सबसे चौंकाने वाली बात तो ये है कि अस्पतालों में कोरोना के नाम पर गैर कोरोना मरीजों का इलाज तक नहीं हो पाया है। जिसके चलते गरीब मरीजों को या तो इलाज नहीं मिल पाया है। या फिर काँर्पोरेट अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर होना पड़ा है।

स्वास्थ्य जागरूकता मिशन से जुड़े अमन दीप कुशवाहा ने बताया कि एक ओर तो सरकार कहती है कि सारी जांचे मरीजों की अस्पतालों में बिल्कुल फ्री में होगी। लेकिन हकीकत में मरीजों को धक्के के अलावा कुछ भी नहीं मिल पाता है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में अप्रोच वालों का ही इलाज हो पाता है। लेकिन बिना अप्रोच वालों का इलाज कराने के लिये इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। 

हिमाचल के ऊना में पटाखा फैक्ट्री में धमाके के बाद आग, 7 की मौत

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में फैक्ट्री में धमाका होने से लगी आग में 7 लोगों की मौत हो गयी। इस हादसे में  काफी लोग झुलस गए हैं। मरने वालों में ज्यादा महिलाएं हैं।

धमाका ऊना पटाखा फैक्टरी में हुआ। धमाके के बाद वहां आग लग गयी जिसमें छह महिलाएं जल गई जिनमें एक तीन साल की बच्ची है। हादसे में 12 घायलों को ऊना सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया है।

ऊना पुलिस ने 7 लोगों की मौत की पुष्टि की है। पूरे मामले की जांच की जा रही है।  पुलिस ने पटाखा बनाने का सामान सीज कर लिया है। ऊना के हरोली के टाहलीवाल में पटाखा फैक्ट्री में यह धमाका हुआ। हादसे के बाद आग लगते ही कामगार महिलाएं जिंदा जल गईं।

जानकारी के मुताबिक आग पर काबू पा लिया गया है। घायलों को ऊना अस्पताल में भर्ती किया गया है। जानकारी के मुताबिक मृतक महिलाएं यूपी की थीं। हालांकि, प्रशासन ने अभी आधिकारिक रूप से मृतकों की शिनाख्त नहीं की है।

उत्तराखंड में सड़क हादसा, 14 की मौत

एक बड़े हादसे में उत्तराखंड के चंपावत जिले में एक सड़क हादसे में मंगलवार को 14 लोगों की मौत हो गयी। यह सभी बाराती बताए गए हैं। यह हादसा आज तड़के करीब 3 बजे हुआ। प्रशासन ने प्रभावितों के निकट परिजनों और घायलों को राहत राशि जारी की है।

जानकारी के मुताबिक यह बस बारातियों से भरी थी और 300 मीटर खाई में जा गिरी। इसमें 14 लोगों की जान चली गयी। यह हादसा चंपावत के सुखीढांग-रीठा साहिब मार्ग पर मंगलवार तड़के करीब 3 बजे हुआ।

पता चला है कि यह सभी लोग शादी समारोह से लौट रहे थे। प्रशासन ने मौके पर पहुँच कर राहत कार्य शुरू करवाए शुरू करवाए। कठिन इलाका होने से लोगों को बचाने के काम में दिक्कत आई।

रूस ने यूक्रेन के दो विद्रोही क्षेत्रों को दी स्वतंत्र मान्यता, अमेरिका ने लगाई पाबंदियां

बढ़ते तनाव के बीच एक बड़े घटनाक्रम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के शासन वाले रूस समर्थित दो अलगाववादी क्षेत्रों को स्वतंत्र घोषित करने को मान्यता दे दी है। पुतिन के इस फैसले के बाद यूक्रेन सरकार के खिलाफ  विद्रोहियों को हथियार भेजने का रास्ता साफ़ हो जाएगा। अभी तक के घटनाक्रम से जाहिर हुआ है कि व्लादिमीर पुतिन की रणनीति अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन पर भारी पड़ी है।

पूर्वी यूक्रेन में पिछले लम्बे समय से रूस समर्थित अलगाववादी यूक्रेन सरकार के खिलाफ विद्रोही गतिविधियां चला रहे हैं। अब इन क्षेत्रों की स्वतंत्रता को रूस के मान्यता देने से उस क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुँच गया है। हालांकि, अमेरिका ने रूस के इस फैसले की निंदा करते हुए अलगाववादी राज्यों को मान्यता देने से साफ़ मना कर दिया है।

रूस लगातार यूक्रेन सरकार पर दबाव बनाए हुए है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दिमिर जेलेंस्की की रूस सरकार से बातचीत की कोशिश पर रूस ने कोई ध्यान नहीं दिया है। बीच में यह रिपोर्ट्स भी आई हैं कि जेलेंस्की जबरदस्त दबाव में हैं। यह भी रिपोर्ट्स हैं कि वे देश छोड़ सकते हैं। उधर रूस के क़दमों से बोखलाए और नाराज अमेरिका ने दो अलग-अलग क्षेत्रों में नए निवेश, व्यापार, और अमेरिकी लोगों के निवेश पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है।

हालांकि, वे बार-बार दोहरा रहे हैं कि उनका देश किसी से डरने वाला नहीं है। साथ ही पश्चिमी देशों से मदद मांगने का उनका क्रम जारी है। यूएन प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने मंगलवार को मॉस्को के फैसले को यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन बताया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यूक्रेन के अपने समर्थित दो अलगाववादी क्षेत्रों (राज्यों) को मान्यता देने के बाद राष्ट्रपति पुतिन ने अपने सैनिकों को दो अलग-अलग क्षेत्रों में शांति बनाए रखने का आदेश दिया है। इसके मायने यह हैं कि यदि वहां यूक्रेन सरकार के सैनिक कुछ करने की कोशिश करते हैं तो उसे दबा दिया जाए। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार मान रहे हैं कि दो राज्यों को अलग देश के रूप में मान्यता देने से रूस के लिए यूक्रेन पर हमला और आसान हो गया है।

इस सारे घटनाक्रम पर भारत भी सधी हुई रणनीति पर काम कर रहा है। यूक्रेन संकट पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक से खुद को अलग कर भारत ने  सलाह दी है कि सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए।

भले जापान और ब्रिटेन, यूक्रेन संकट पर अमेरिका के साथ दिख रहे हैं, फ्रांस और जर्मनी निष्पक्ष रास्ते पर चलते दिख रहे हैं। यूरोपियन यूनियन ज़रूर क्रेमलिन के खिलाफ कार्रवाई का पक्षधर है।  वैसे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने हाल के दिनों में रूस के खिलाफ बहुत कम बोला है। इस सारे घटनाक्रम में रूस के राष्ट्रपति पुतिन अमेरिकी के अपने समकक्ष जो बाइडेन पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। पुतिन ने बिना सेना का  इस्तेमाल किये अब तक यूक्रेन को जबरदस्त दबाव में ला दिया है।