Home Blog Page 406

पूंजीपतियों के लिए सरकार खोल रही है दरवाजे, पावर लूम वर्करों को 400 रू भी नहीं मिलती मजदूरी

वाराणसीः बनारस की मेहनतकश आबादी खासकर बुनकरों को संगठित-जागृत और गोलबंद करने के क्रम में फ़ातिमा-सावित्री जनसमिति की ओर से स्वयंवर वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में स्वयं बुनकरों ने उपस्थित होकर अपनी बदहाल जिंदगी की करुण दास्तान पेश की।

पॉवर लूम पर अपने परिवार के साथ काम करने वाले मोहम्मद अहमद अंसारी ने बताया कि बाजार पर पूँजी और दलालों का कब्जा होने के कारण बुनकरी के काम में लगे लोगों की वास्तविक मज़दूरी 400 रुपये भी नहीं है, जितनी कि निर्माण क्षेत्र के मज़दूरों की है। इसी क्रम में मुस्लिम आबादी के सामाजिक पिछ़ड़ेपन, स्त्रियों की तुलनात्मक रूप से अधिक खराब दशा की पृष्ठभूमि में शिक्षा का प्रश्न भी उठा। श्री अहमद ने कहा कि जब मज़दूरी-आमदनी ही इतनी कम है तो पहले भरण-पोषण की चिंता करें या कि पढ़ाई-लिखाई की। बेहद खराब माली हालत के चलते बुनकरों के बच्चे मदरसों में जाकर पढ़ने के लिए मज़बूर हैं।
उत्पादक शक्तियों के पैरों में पड़ी बेड़ियों को तोड़कर इतिहास को अग्रगति देने वाली शक्ति यानि कि मज़दूर वर्ग के ऐतिहासिक मिशन के साथ खड़े तमाम बुद्धिजीवियों ने भी अपने तीक्ष्ण प्रेक्षण से उपस्थित-जन को अवगत कराया। भगत सिंह छात्र मोर्चा के विनय ने कहा कि अत्यल्प मज़दूरी के साथ ही शिक्षा का प्रश्न भी शासक वर्ग के शोषक-उत्पीड़क राजकीय ढाँचे से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आज शासक वर्ग शिक्षा को भी बाजार में खरीदा-बेचा जाने वाला माल बनाए हुए है। अगर हमें इस स्थिति में सार्थक हस्तक्षेप करना है तो हमें राज्य के चरित्र को प्रमुखता से उठाना है।
जनवादी विमर्श मंच के संयोजक हरिहर प्रसाद ने कहा कि नई शिक्षा नीति संयुक्त राष्ट संघ के सतत विकास एजेंडे को अमल में लागू करने के लिए लागू की जा रही है। इसके तहत देसी-विदेशी पूँजीपतियों के लिए सस्ते व कुशल श्रमिक तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके चलते उच्च शिक्षा महंगी हो जाएगी। सभी के लिए समान व निःशुल्क शिक्षा की पुरजोर हिमायत करते हुए उन्होंने कहा कि अगर इसका विरोध नहीं किया गया तो गरीबों-वंचित तबके के बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित हो जाएंगे और केवल अमीरों के बच्चे ही ऊंची शिक्षा हासिल कर पाएंगे।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए कवि-आलोचक डॉ. वंदना चौबे ने कहा कि साम्राज्यवादी महाप्रभुओं ने अकूत पूँजी खर्च करके अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से खोल देने के पक्ष में माहौल बनाया। सांस्थानिक बुद्धिजीवियों को खंडीकरण की वैचारिकी का कायल बनाने और उसे प्रचारित करने के लिए अनेकशः रूपों में लाभान्वित किया। उन्होंने कहा कि मालिक-मज़दूर के मूल प्रश्न पर साजिशन पर्दा डालने हेतु मूल प्रश्न को परिधि के प्रश्नों से विस्थापित करने के लिए अस्मिता-विमर्श खड़ा किया गया। उन्होंने कहा कि स्त्री और शिक्षा का प्रश्न भी अर्थव्यवस्था में ठहराव-मंदी और बेरोजगारी की समस्या से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। शिक्षा के बाजारीकरण की समस्या को अगर हम हल करना चाहते हैं तो उसे हमें बेरोजगारी के सवाल से जोड़ना ही होगा।
फ़ातिमा शेख के जमाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के समय में भारत का जो औपनिवेशिक ढाँचा था उसे वे अपने दम पर अकेले नहीं चला रहे थे। यहाँ की जो ब्राह्मणवादी ताकतें थीं, संपन्न लोगों की जो ताकतें थीं, जिनके पास संपत्ति थी, प्रभुत्व था, जाति की ताकत थी, उन सारी ताकतों के साथ उन्होंने गँठजोड़ किया। इतना आसान नहीं था उनके लिए भारत की जनता के साथ लोहा लेना। तो उन्होंने बड़े लोगों से गँठजोड़ करके अपना शासन यहाँ पर फैलाया और यहाँ की शिक्षा पर सबसे पहले प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आजादी मिलने के बाद भी शिक्षा व्यवस्था में बहुत हद तक निरंतरता बनी रही। वर्तमान दौर को साम्राज्यवाद का दूसरा दौर बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों को लेकर आजादी के बाद जनता में विश्वास था। सरकारी चीजों पर भरोसा था। लेकिन धीरे-धीरे 90 के दौर में यह भरोसा छीजने लगा। प्राइवेट के पक्ष में पूंजी की मदद से माहौल बनाया गया। हर सरकारी चीज पर अविश्वास प्रकट किया जाने लगा और इस तरह से नैरेटिव बनाया गया कि जनोपयोगी सेवाओं के सभी क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोल दीजिए। प्रचार और विज्ञापन का पूरा दौर आया और बताया गया कि पूँजीपतियों और कंपनियों के लिए सब कुछ खोल देने का नाम ही आजादी है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा-स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार के पास होती है तो उनकी खराब गुणवत्ता के खिलाफ आवाज उठाने का हमारा हक़ होता है क्योंकि हम वोट देकर सरकार बनाते हैं। लेकिन जब उन्हें निजी क्षेत्र के हवाले कर दिया जाता है तो हम बोल ही नहीं पाते हैं क्योंकि निजी क्षेत्र तो अपने मुनाफे के लिए ही सभी गतिविधियों को संचालित करता है। बुनकर-मुस्लिम बस्तियों से जुड़े अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता का सवाल और उस पर बहस खाते-पीते मुस्लिमों के बीच की है। मज़दूर तो बस इस चिंता को व्यक्त-साझा करते हैं कि जिंदगी की गाड़ी को कैसे खींचें, कैसे अपने व अपने परिवार के लिए दो जून की रोटी का जुगाड़ करें।
दरअसल यह लोकतंत्र पूंजीपतियों का लोकतंत्र है। बाज़ार के सारे रास्ते खोलकर सारी टैरिफ और डियूटीज़ हटाकर सरकार पूंजीपतियों के लिए सारे दरवाज़े खोल चुकी है। यह नंगी प्रतियोगिता है। सरकार इसे ही लोकतंत्र कहती है। हमें लोकतंत्र की इस बुनियाद को समझना होगा। ज़ाहिर है कि हम लोकतंत्र के लिए ही लड़ेंगे लेकिन सरकार और पूंजीपतियों द्वारा थोपे गए लोकतंत्र को हम लोकतंत्र नहीं मानेंगे।
दिशा छात्र संगठन के अमित ने कहा कि देशा की शिक्षा व्यवस्था भारी परिवर्तन के दौर से गुज़र रही है लेकिन इस परिवर्तन में भी निरंतरता का पहलू बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अतीत की शोषणकारी व्यवस्था वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में भी अपनी निरंतरता लिए हुए है। मज़दूरों का खून पीने वाली, उनकी रक्त-मज्जा से मुनाफा निचोड़ने वाली इस पूँजीवादी व्यवस्था का बिना नाश किए जनपरक-विज्ञानकरक शिक्षा की व्यवस्था नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि शासन के जनद्रोही होने का सवाल आज भी उतना ही अहम बना हुआ है जितना कि अंग्रेजों के समय में था।
मज़दूर आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता पवन कुमार ने कहा कि इस पूंजीवादी बाजारवाद में शिक्षा जीवन की अन्य जरूरतों जैसे स्वास्थ्य, परिवार के परिवेश से, मकान, भोजन, कपडा आदि से अलग-थलग नहीं है बल्कि सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। शिक्षा केवल स्कूल और कालेजों में मिलने वाली औपचारिक शिक्षा ही नहीं है, बल्कि इस औपचारिक शिक्षा के साथ अनौपचारिक शिक्षा जन्म के साथ ही माँ- बाप से, परिवार के परिवेश से, आस पास के परिवेश से और परिवार के आर्थिक सामाजिक हालातों से मिलने लगती है और आज कल के वॉट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर, इन्स्ताग्राम और अन्य सामाजिक मीडिया के माध्यम से यह अनौपचारिक शिक्षा लगातार दी जा रही है। औपचारिक शिक्षा में जहाँ उच्च शिक्षा केवल धनवानों और श्रम खरीदने वाले पूँजीवानों तक ही सीमित की जा रही है और अपना श्रम बेचकर जीविकोपार्जन करने वालों की पहुँच से दूर होती जा रही है, वहीँ प्राथमिक और माध्यमिक स्तर तक की औपचारिक शिक्षा केवल श्रम के खरीददारों पूँजीवानों धनवानों के कारखानों, घरों और संस्थानों में श्रम बेचने वाले नौकर पैदा करने तक सीमित है और उसी उद्देश्य से दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी व्यवस्था में जन साधारण अर्थात श्रम बेचकर जीवन निर्वाह करने वालों के भी अच्छे दिन आ जायेंगे, इससे बड़ा झूठ और भ्रम दूसरा नहीं है।
उन्होंने आज की पूंजीवादी राजसता, अस्मिता-विमर्श (पिछड़ावाद, जातिवाद, नारीवाद, क्षेत्रवाद आदि) को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि शासक वर्ग चाहता है कि जन सामान्य के अर्थात मेहनतकशों के मुद्दों को गायब कर दिया जाए। तभी तो वह पूँजी बनाम श्रम के मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए अरबों डालर एनजीओ-जगत को देकर फर्जी मुद्दों को केंद्र में लाने का प्रयास करता रह है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए अन्य समस्यायों के साथ समेकित रूप से लड़ने की आवश्यकता है।
सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट शहजादे ने कहा कि सामाजिक चेतना के बगैर ज्ञान की प्रक्रिया चल ही नहीं सकती किसी भी ब्रेन को परिपक्व होने में 18 साल लगते हैं इसी दौरान धार्मिक पूर्वाग्रहों जातिवादी भेदभाव पर आधारित शिक्षा मनुष्य के व्यक्तित्व को बिगाड़ देती है। जबकि सामाजिक चेतना से लैस शिक्षा जो उत्पादन की पद्धति के अनुरूप होती है, वह ऐसे मनुष्य का निर्माण करती है जो सामूहिकता-सहकार की भावना से ओतप्रोत होता है।
उन्होंने कहा कि पूंजीपति अपने उद्देश्य को पूरा करने हेतु सामाजिक चेतना को नियंत्रित करने के लिए लंबे समय से चली आ रही सामाजिक व्यवस्था में निरंतरता बनाए रखने का प्रयास करता है।  ऑल इंडिया सेकुलर फोरम के डॉ. मोहम्मद आरिफ ने उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के बीच पसरी भयंकर बेरोजगारी और अकिंचनता का चित्र उपस्थित करते हुए बताया कि बुनकरों की समस्या पर तो आए दिन अखबारों में बयान छपते रहते हैं, बिजली के फ्लैट रेट से जुड़ी मांग से हम भलीभाँति परिचित हैं लेकिन निजी स्कूलों-कॉलेजों में उच्च शिक्षा प्राप्त नौजवान पाँच हजार महीने की नौकरी करने को अभिशप्त है। हाड़तोड़ शारीरिक श्रम के बरअक्स मानसिक श्रम करने वालों पर पहनावे-ओढ़ावे और व्यक्तित्व की समग्र प्रस्तुति को लेकर अतिरिक्त सामाजिक दबाव के हवाले से उन्होंने कहा कि तथाकथित उच्च-शिक्षा प्राप्त लोग भी संकटग्रस्त-ठहरावग्रस्त अर्थव्यवस्था की मार से उतने ही परेशान हैं जितना कि आम मज़दूर वर्ग।
cv
कार्यक्रम को ऐपवा की कुसुम वर्मा, बिहार निर्माण व असंगठित मज़दूर यूनियन के इंद्रजीत, स्वराज इंडिया के मो. अहमद अंसारी, उत्तर प्रदेश निर्माण व असंगठित मज़दूर यूनियन के इंद्रजीत, सामाजिक कार्यकर्ता प्रतिमा आदि ने भी संबोधित किया।

देश भर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आज दिल्ली में जुटेंगे, पीएम भी उपस्थित रहेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज दिल्ली में होने वाली उच्च स्तरीय तीन दिवसीय बैठक में से देश की आंतरिक सुरक्षा पर सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक मंथन करेंगे। गृह मंत्री अमित शाह समेत वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहेंगे।

यह बैठक सेंट्रल दिल्ली स्थित पूसा में होगी और 22 जनवरी तक जारी रहेगी। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी हिस्सा लेंगे। सभी खुफिया एजेंसियों के आला अधिकारी भी इसमें मौजूद रहेंगे। बैठक में गैंगस्टर्स और आतंकवादी गठजोड़ पर नकेल कसने पर भी बड़ी कार्ययोजना बनेगी।

बैठक में सीमा पर ड्रोन के बढ़ते खतरों, जम्मू कश्मीर में आतंकवाद, नक्सल समस्या सहित साइबर सुरक्षा पर नए ब्लू प्रिंट जैसे विषयों पर चर्चा होगी। कांफ्रेंस के एजेंडे में कट्टरता, क्रिप्टो करेंसी के दुरुपयोग, डार्क वेब के जरिए हो रही स्मगलिंग और आतंकी कार्रवाई, नार्थ ईस्ट में उग्रवादी समस्या, बॉर्डर मैनेजमेंट सहित कई अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी और भविष्य की रणनीति पर मंथन किया जाएगा।

इसके अलावा देश में नशीली दवाओं का कारोबार रोकने और नार्को टेरर पर नकेल कसने के लिए भी योजना की रूपरेखा तैयार होगी। समुद्र के तटीय सुरक्षा पर भी गंभीर मंथन होगा। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बैठक में अपने विचार और भविष्य की योजनाएं साझा करेंगे

यौन उत्पीड़न के मामले में पहलवानों का धरना जारी, बृजभूषण आज देंगे सफाई

महिला पहलवानों के शोषण के खिलाफ शीर्ष पहलवानों का दिल्ली में चल रहा धरना देश भर में चर्चा के केंद्र में है। पहलवानों ने सरकार के साथ बैठक के बाद साफ़ कर दिया है कि जब तक भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का इस्तीफा नहीं होता धरना ख़त्म नहीं होगा।

इस बीच धरने पर बैठे पहलवानों को देश भर से समर्थन मिल रहा है। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा ने भी कहा है कि वह देश के चोटी के पहलवानों के महासंघ अध्यक्ष के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों से बेहद चिंतित और परेशान हैं। उधर बृजभूषण आज प्रेस कांफ्रेंस करके आज आरोपों पर सफाई देंगे।

उधर सरकार के साथ आंदोलन कर रहे पहलवानों की बैठक गुरुवार रात करीब 4 घंटे तक चली। बैठक में अनुराग ठाकुर ने पहलवानों को कार्रवाई का आश्वासन दिया लेकिन पहलवान बृजभूषण के इस्तीफे पर अड़े रहे। इस कारण बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल सका और पहलवान मीडिया से बात किए बिना चले गए। आज एक बार फिर खेल मंत्री और पहलवानों के बीच बात हो सकती है।

इस बीच भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा ने कहा पूरे घटनाक्रम और आरोपों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश की सर्वोच्च खेल संस्था महिला खिलाड़ियों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह आज इस मामले में दोपहर 12 बजे गोंडा में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। धरने पर बैठे विनेश फोगट, बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक सहित देश के कुछ शीर्ष पहलवानों ने भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और कोचों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। वर्ल्ड चैंपियनशिप की पदक विजेता और ओलिंपियन विनेश ने दावा किया कि कई कोच ने भी महिला पहलवानों का शोषण किया है।

इन पहलवानों का आरोप है कि मामले में उन्हें अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। केवल आश्वासन मिले हैं। कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने साफ़ किया है कि वे इस मामले को तब तक नहीं छोड़ेंगे जब तक कि संघ के प्रमुख को हटा नहीं दिया जाता है और वो जेल नहीं जाते हैं। अगर सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो वे  पुलिस के पास जाएंगे। याद रहे खेल मंत्रालय ने तीन दिन पहले बृजभूषण शरण को जवाब देने के लिए 72 घंटे का समय दिया था।

कश्मीर में राहुल गांधी के साथ जुड़े फारूक, बोले शंकराचार्य के बाद आप ही आए ऐसे

राहुल गांधी के नेतृत्व में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुक्रवार को जम्मू कश्मीर के कठुआ से बारिश के बीच शुरू हुई। पूरी यात्रा के दौरान आज पहली बार राहुल टी-शर्ट के ऊपर जैकेट पहने हुए दिखे। राहुल गांधी जिनके नाना जवाहर लाल नेहरू कश्मीरी पंडित थे, ने जम्मू कश्मीर में प्रवेश के बाद कहा कि यह उनके लिए घर वापसी है। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि वे जम्मू-कश्मीर के लोगों की पीड़ा जानते हैं। आज राहुल गांधी जम्मू के कठुआ के हठली मोड से चड़वाल तक का करीब 23 किलोमीटर का सफर तय करेंगे।

यात्रा की शुरुआत आज कठुआ से बारिश के बीच हुई। बारिश से बचने के लिए राहुल गांधी ने काले रंग की जैकेट पहनी हुई थी। यह यात्रा 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर श्रीनगर में यात्रा के भव्य समापन समारोह के साथ संपूर्ण होगी। नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला भी यात्रा में शामिल हुए हैं।

बता दें कांग्रेस ने 21 विपक्षी दलों को 30 जनवरी को होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। जम्मू और कश्मीर यात्रा का अंतिम चरण है, जो 125 दिन पहले सितंबर में कन्याकुमारी से शुरू हुआ था।

इस बीच भारत जोड़ो यात्रा और 8वीं शताब्दी में वैदिक विद्वान शंकराचार्य की गई यात्रा के बीच तुलना करते हुए, नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कहा – ‘यह शंकराचार्य थे, जो कन्याकुमारी से कश्मीर तक जंगलों के रास्ते पैदल चले थे। कोई सड़क नहीं थी। आप कन्याकुमारी से कश्मीर तक ऐसी यात्रा करने वाले दूसरे व्यक्ति हैं।’

राहुल गांधी की अगवानी करने के लिए 85 साल के फारूक अब्दुल्ला गुरुवार को मौके पर उपस्थित थे। अब्दुल्ला ने भावुक होते हुए कहा – ‘आंखें बंद करने से पहले, मैं अपने सेक्युलर हिंदुस्तान को फिर से देखना चाहता हूं, जहां सभी का सम्मान हो।’ इस दौरान फारूक अब्दुल्ला के अलावा, कांग्रेस के जयराम रमेश, अशोक गहलोत, दिग्विजय सिंह भी उपस्थित थे।

जम्मू कश्मीर पहुँचाने के बाद अब कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा 26 जनवरी तक जम्मू के अलग-अलग जिलों में रहेगी। यात्रा को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। आतंकी खतरे की आशंका को देखते हुए राहुल की इस यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था कई चरणों में की गई है।

न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने इस्तीफा दिया, 7 फरवरी से होगा प्रभावी

न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने घोषणा की है कि वह 7 फरवरी से अपने पद पर नहीं रहेंगी और उससे पहले इस्तीफा दे देंगी। लेबर पार्टी के कॉकस रिट्रीट की बैठक में उन्होंने यह ऐलान किया और कहा कि उनके जाने का वक्त आ गया है क्योंकि वे और चार साल तक काम करने की क्षमता की कमी महसूस कर रही हैं।

याद रहे जैसिंडा 2017 में गठबंधन सरकार की नेता बनी थीं। तीन साल बाद चुनाव में बड़ी जीत के लिए उन्होंने सेंटर-लेफ्ट लेबर पार्टी का नेतृत्व किया, हालांकि हाल के चुनाव में उनकी पार्टी ही नहीं बल्कि उनकी अपनी लोकप्रियता का ग्राफ नीचे गिरता दिखाई दिया है।

अर्डर्न ने कहा – ‘अगला आम चुनाव 14 अक्टूबर को होगा और तब तक मैं एक निर्वाचक सांसद के रूप में बनी रहूंगी। मैं इसलिए नहीं जा रही हूं, क्योंकि मेरा मानना है कि हम अगला चुनाव नहीं जीत सकते, बल्कि इसलिए कि मुझे विश्वास है कि हम जीत सकते हैं और जीतेंगे। ब्रेक के दौरान मुझे लगा था कि नेता के रूप में खुद को जारी रखने के लिए ऊर्जा मिल जाएगी, लेकिन मैं ऐसा करने में सक्षम नहीं हूं।’

उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा 7 फरवरी से पहले प्रभावी होगा। लेबर कॉकस 22 जनवरी को एक नए नेता को चुनने के लिए वोट करेगा। उप प्रधान मंत्री ग्रांट रॉबर्टसन ने कहा कि वह अपना नाम आगे नहीं रखेंगे। अर्डर्न ने कहा कि उनके इस्तीफे के पीछे कोई रहस्यमयी कारक नहीं है।

जैसिंडा ने बैठक में कहा – ‘मैं इंसान हूं। हम जितना दे सकते हैं उतना देते हैं और फिर मेरे लिए समय आ चुका है। मैं जा रही हूं क्योंकि इस तरह के एक विशेषाधिकार प्राप्त नौकरी के साथ एक बड़ी जिम्मेदारी आती है। यह जानने की जिम्मेदारी कि आप कब नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हैं और यह भी कि आप कब नहीं हैं।’

महिला पहलवानों के ‘यौन उत्पीड़न’ को लेकर जंतर मंतर पर आज भी धरना

देश के जाने माने पहलवानों का दिल्ली के जंतर मंतर पर गुरुवार को लगातार दूसरे दिन धरना जारी है। उनका आरोप है कि महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न किया जाता है। यह पहलवान भारतीय कुश्ती संघ के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं और अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं।

जो नाम पहलवान धरने पर बैठे हैं उनमें बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक, विनेश फोगाट जैसे बड़े नाम शामिल हैं जिन्होंने ओलंपिक सहित दुनिया के कई टूर्नामेंट में देश का प्रतिनितिधिव किया है। उनके अलावा अन्य पहलवान वहां प्रदर्शन कर रहे हैं।

इन पहलवानों का आरोप है कि, भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष और कोच महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न करते हैं। कुछ कोच तो सालों से यौन उत्पीड़न करते आ रहे हैं।

उधर कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने इन आरोपों को ग़लत बताया है। हालांकि, पहलवानों के धरने के बाद भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर सरकार सक्रिय हुई है और खेल मंत्रालय ने कुश्ती संघ से 72 घंटे में जवाब मांगा है। जवाब नहीं मिलने पर भारतीय कुश्ती संघ पर तलवार लटक सकती है।

बता दें ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली एथलीट विनेश फोगाट ने आरोप लगाया है कि सालों से राष्ट्रीय कोचों ने महिला पहलवानों से छेड़छाड़ और उनका यौन शोषण किया है। विनेश के आरोप के मुताबिक उन्हें धमकी दी गई थी कि अगर हम बोलेंगे तो हमारा करियर खत्म हो जाएगा।

उनका आरोप है कि फेडरेशन के सदस्य महिला पहलवानों के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। फोगाट ने कहा – ‘हमने प्रधानमंत्री से भी संपर्क किया है। कुछ कोच राष्ट्रीय महासंघों के करीबी हैं। उन कोच ने युवा लड़कियों का शोषण किया है और न जाने कितनी युवा लड़कियों ने उनकी वजह से दर्द सहा है।’

ऐसे ही आरोप ओलंपिक कांस्य पदक विजेता पहलवान बजरंग पुनिया ने लगाए हैं। उन्होंने कहा – ‘डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष को हटाए जाने तक हम किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग नहीं लेंगे।’

इस बीच भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि क्या कोई ऑन रिकॉर्ड है जो कह सकता है कि फेडरेशन के लोगों ने उनके साथ छेड़छाड़ की है? अगर आपके पास महासंघ के साथ इस तरह के मुद्दे थे, तो उन्हें 10 साल तक किसी ने क्यों नहीं उठाए? जब भी नियम बनते हैं तो मुद्दे सामने आते हैं।

फर्जी ख़बरों के निर्धारण का जिम्मा केवल सरकार नहीं कर सकती : एडिटर्स गिल्ड

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने केंद्र से सोशल मीडिया कंपनियों को पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के फर्जी माने जाने वाले समाचारों को हटाने के लिए निर्देश देने वाले आईटी नियमों में संशोधन के मसौदे को हटाने का आग्रह किया है। एडिटर्स गिल्ड का यह आग्रह केंद्र सरकार के फर्जी पर लगाम लगाने के लिए कुछ आईटी नियमों में संशोधन करने की ख़बरों के बाद आया है।

एक बयान में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा – ‘हम मंत्रालय से इस नए संशोधन को हटाने और डिजिटल मीडिया के लिए नियामक ढांचे पर प्रेस निकायों, मीडिया संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ सार्थक परामर्श शुरू करने का आग्रह करते हैं। हम चाहते हैं कि प्रेस की स्वतंत्रता को कोई नुकसान न हो।’

गिल्ड ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम के मसौदा संशोधन पर वह गहरी चिंता जताता है क्योंकि हम मानते हैं कि फर्जी समाचारों के निर्धारण का जिम्मा केवल सरकार के हाथों में नहीं हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह प्रेस की सेंसरशिप होगी।

अपने बयान में गिल्ड ने आगे कहा – ‘तथ्यात्मक रूप से गलत पाए जाने वाली सामग्री से निपटने के लिए पहले से ही कई कानून मौजूद हैं। यह नयी प्रक्रिया मूल रूप से स्वतंत्र प्रेस को दबाने में इस्तेमाल हो सकती है और पीआईबी या तथ्यों की जांच के लिए केंद्र सरकार के अधिकृत किसी अन्य एजेंसी को उन ऑनलाइन मध्यस्थों को सामग्री को हटाने के लिए मजबूर कर सकती है जिससे सरकार को समस्या हो सकती है।’

मुंबई-गोवा हाईवे पर सड़क हादसे में नौ लोगों की मौत, इनमें तीन महिलाएं भी

मुंबई : गोवा हाईवे पर गुरुवार को एक सड़क हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई। हादसे में कुछ लोग घायल भी हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक यह हादसा आज तड़के पौने पांच बजे हुआ जब मुंबई-गोवा हाईवे पर मानगांव के पास एक ट्रक एयर कार में आमने-सामने टक्कर हो गयी। इस हादसे में 9 लोगों की जान चली गयी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक गोरेगांव थाना पुलिस ने बताया कि रेपोली के पास लोटे एमआईडीसी से मुंबई जा रहा ट्रक और मुंबई से गुहागर जाने वाली एक इको कार की अल सुबह आमने-सामने टक्कर हो गयी। टक्कर इतनी तेज थी कि इको कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें बैठे यात्रियों की मौत हो गई।

रायगढ़ पुलिस के मुताबिक हादसे में 5 पुरुष, 3 महिला और एक बच्ची समेत 9 लोगों की मौत हुई है। कुछ हलके घायल लोगों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
इनमें छोटा बच्चा शामिल है जिसे उप जिला अस्पताल मानगांव भर्ती किया गया है।घटना की जांच की जा रही है।

त्रिपुरा में 16, मेघालय और नागालैंड में पड़ेंगे 27 फरवरी को वोट; 2 मार्च को मतगणना

चुनाव आयोग ने बुधवार को पूर्वोत्तर के तीन राज्यों त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय के लिए चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया। आयोग के मुताबिक त्रिपुरा में 16 फरवरी जबकि मेघालय और नागालैंड में 27 फरवरी को मतदान होगा। तीनों के नतीजे 2 मार्च को निकलेंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने आज एक मीडिया कांफ्रेंस में चुनाव की तारीखों का ऐलान किया। कुमार ने कहा – ‘इन राज्यों में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज़्यादा रही है। महिला वोटरों की संख्या भी ज्यादा है। हम 11 से 14 जनवरी तक तीनों राज्यों के दौरे पर थे। हमने उन लोगों के लिए एडवांस नोटिस का प्रावधान बनाया है, जो 17 के हो गए हैं, लेकिन 18 साल के नहीं हुए हैं, ताकि 18 साल का होते ही उन्हें वोटर कार्ड मिल जाए और उनका नाम जुड़ जाए।’

इन तीनों राज्यों में ऐसे 10 हज़ार लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। तीनों राज्यों में 9000 से ज्यादा पोलिंग स्टेशन होंगे। इनमें 376 ऐसे होंगे जो पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित होंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा – ‘इस बार 2.28 लाख नए वोटर जुड़े हैं और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। कुछ ही राज्य ऐसे हैं, जहां चुनाव के बाद और पहले हिंसा की घटनाएं देखने को मिलती हैं। हाल ही में दो राज्यों में चुनाव हुए हैं, वहां ऐसी कोई हिंसा चुनाव के दौरान नहीं हुई है।

चुनाव के तारीखों की घोषणा के साथ ही तीनों राज्यों में आदर्श चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई. नागालैंड विधानसभा का कार्यकाल 12 मार्च को समाप्त हो रहा है, वहीं मेघालय और त्रिपुरा की विधानसभाओं का कार्यकाल क्रमश: 15 और 22 मार्च को समाप्त हो रहा है। तीनों राज्यों की विधानसभाओं में 60-60 सीटें हैं।

पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में इस साल सबसे पहले विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। त्रिपुरा में भाजपा की सरकार है, वहीं नागालैंड में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी सत्ता में है जबकि मेघालय में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) की सरकार है। एनपीपी पूर्वोत्तर की एकमात्र पार्टी है, जिसे राष्ट्रीय दल के तौर पर मान्यता हासिल है।

पंजाब में कांग्रेस को झटका, पूर्व मंत्री मनप्रीत बादल भाजपा में शामिल हुए

पंजाब में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी की अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में वित्त मंत्री रहे मनप्रीत बादल ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। वे भाजपा में शामिल हो गए हैं। यह प्रतीत होता है कि भाजपा पंजाब में कद्दावर नेताओं को अपने साथ जोड़ रही है ताकि लोकसभा के अगले चुनाव में पंजाब में अधिक सीटें जीती जा सकें।

एक ट्वीट में मनप्रीत बादल, जो पूर्व उपमुख्यमंत्री और अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल के चचेरे भाई हैं, कांग्रेस में शामिल होने से पहले अकाली दल से अलग होकर अपनी पार्टी पीपल्स पार्टी ऑफ पंजाब चला रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें पार्टी में शामिल होते ही अपनी सरकार में वित्त मंत्री बनाया था।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ के पार्टी छोड़ने बाद मनप्रीत बादल ऐसे पहले बड़े नेता हैं जो भाजपा में गए हैं। दिल्ली में भाजपा नेताओं केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हुए। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह पहले ही अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर चुके हैं, हालांकि, उनकी पत्नी परनीत कौर अभी कांग्रेस की ही सांसद हैं।

मनप्रीत बादल ने राहुल गांधी को लिखे सन्देश में पार्टी छोड़ने की बात कही है। इसे उन्हें ट्वीट करके सार्वजनिक किया है। मनप्रीत बादल आज ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं। मनप्रीत पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के भतीजे हैं, हालांकि मतभेदों के चलते 2011 में उन्होंने बादलों की पार्टी शिरोमणि अकाली दल से इस्तीफा दे दिया था।

इसके बाद 2011 में मनप्रीत ने अपनी पार्टी पंजाब पीपुल्स पार्टी बनाई और 2016 में पार्टी का कांग्रेस में विलय करके वे उसमें शामिल हो गए। मनप्रीत लंदन से कानून के ग्रैजुएट हैं। वे 1995, 1997, 2002 और 2007 में गिद्दड़बाहा से विधायक और 2010 तक बादल सरकार में वित्त मंत्री रहे। मनप्रीत 2012 के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार गए, हालांकि, कांग्रेस की टिकट पर वे 2017 में जीत गए थे। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में भी बठिंडा शहरी सीट से उन्हें हार झेलनी पड़ी।